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47 लाख लोगों ने क्यों मिलाया 14416 पर फोन? सामने आई ऐसी हेल्थ समस्या, जिसे नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी!



नई दिल्ली: मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भारत में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। तनाव, चिंता, नींद से जुड़ी परेशानियां, रिश्तों की समस्या और भावनात्मक दबाव जैसी स्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए अब मदद तक पहुंच पहले की तुलना में आसान हो रही है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा सुलभ, किफायती और लोगों की जरूरत के अनुरूप बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत की Tele-MANAS सेवा पर अब तक 47.75 लाख से ज्यादा कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। यह सेवा देशभर में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी। फिलहाल 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 Tele-MANAS Cells संचालित हो रहे हैं।

10 अक्टूबर को मनाया जा रहा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 की थीम है—“Lived experiences heard: real voices, real change”, यानी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का अनुभव कर चुके लोगों की आवाज सुनी जाए और उनके अनुभवों के आधार पर वास्तविक बदलाव लाया जाए।

इस साल का संदेश खास तौर पर इस बात पर केंद्रित है कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी के रूप में देखने के बजाय उन लोगों के अनुभवों को समझा जाए जो तनाव, चिंता, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से गुजर चुके हैं।

विशेषज्ञों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां हमेशा बाहर से दिखाई नहीं देतीं। कई बार व्यक्ति सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अंदर से गंभीर तनाव या भावनात्मक दबाव का सामना कर रहा होता है।

47 लाख से ज्यादा कॉल क्यों महत्वपूर्ण हैं?

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, Tele-MANAS को लॉन्च किए जाने के बाद से 47,75,644 कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। यह आंकड़ा बताता है कि बड़ी संख्या में लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों पर सहायता लेने के लिए फोन आधारित सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Tele-MANAS की शुरुआत 10 अक्टूबर 2022 को की गई थी। इसका उद्देश्य देश के उन लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता पहुंचाना है, जहां विशेषज्ञ सेवाओं तक सीधी पहुंच सीमित हो सकती है।

इस सेवा के जरिए व्यक्ति अपनी समस्या के बारे में प्रशिक्षित काउंसलर से बात कर सकता है। जरूरत पड़ने पर आगे विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की व्यवस्था भी की जाती है।

14416 पर मिलती है मानसिक स्वास्थ्य सहायता

Tele-MANAS की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी हेल्पलाइन है। मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए 14416 पर संपर्क किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार यह सेवा नि:शुल्क, गोपनीय और चौबीसों घंटे उपलब्ध है।

इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को हो सकता है जिन्हें अपने आसपास मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आसानी से उपलब्ध नहीं होते। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए फोन आधारित सहायता शुरुआती स्तर पर मदद का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

किसी व्यक्ति को लगातार चिंता, भावनात्मक परेशानी, तनाव, नींद की समस्या या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो रही हो तो वह सहायता लेने के लिए इस तरह की सेवाओं का उपयोग कर सकता है।

युवाओं और कामकाजी लोगों की बड़ी हिस्सेदारी

स्वास्थ्य मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक Tele-MANAS से जुड़े रिकॉर्ड किए गए कॉलर प्रोफाइल में 18 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 73.2 प्रतिशत है। इससे संकेत मिलता है कि युवा और कामकाजी उम्र के लोग भी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की जरूरत महसूस कर रहे हैं।

इस आयु वर्ग में पढ़ाई, नौकरी, करियर, आर्थिक दबाव, रिश्तों और भविष्य को लेकर तनाव जैसी अलग-अलग परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।

कई बार व्यक्ति अपने परिवार या दोस्तों के सामने अपनी परेशानी साझा नहीं कर पाता। ऐसे में गोपनीय काउंसलिंग सेवा उसके लिए शुरुआती सहायता का माध्यम बन सकती है।

महिलाएं भी बड़ी संख्या में ले रही हैं मदद

Tele-MANAS के रिकॉर्ड किए गए कॉलर प्रोफाइल में महिलाओं की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय है। मंत्रालय के अनुसार दर्ज प्रोफाइल में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत रही है।

यह आंकड़ा इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर बातचीत करने में कई लोग अब पहले की तुलना में ज्यादा सहज हो रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सामाजिक झिझक और गलत धारणाएं रही हैं। किसी व्यक्ति को मानसिक परेशानी होने का मतलब यह नहीं है कि वह कमजोर है। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही महत्वपूर्ण है और जरूरत पड़ने पर पेशेवर सहायता लेना सामान्य स्वास्थ्य देखभाल का हिस्सा है।

MANN Jaagriti से बढ़ाई जाएगी जागरूकता

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के मौके पर स्वास्थ्य मंत्रालय MANN Jaagriti पहल के जरिए समुदाय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।

इस पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के बारे में लोगों की समझ बढ़ाना, गलत धारणाओं और कलंक को कम करना तथा जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता लेने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए स्कूल, कॉलेज, कार्यस्थल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सामुदायिक मंचों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसका मकसद केवल एक दिन जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बनाना है।

767 जिलों तक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम

भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को केवल टेलीफोन हेल्पलाइन तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकार के District Mental Health Programme (DMHP) को 767 जिलों के लिए मंजूरी दी जा चुकी है। इसके तहत काउंसलिंग, उपचार, दवाएं, फॉलो-अप, जागरूकता और जरूरत पड़ने पर रेफरल जैसी सेवाओं पर काम किया जाता है।

इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को 1.83 लाख से ज्यादा Ayushman Arogya Mandirs में भी एकीकृत किया गया है। इससे प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और शुरुआती सहायता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करना सही नहीं

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या कई रूपों में सामने आ सकती है। लगातार तनाव, अत्यधिक चिंता, नींद में बदलाव, किसी काम में मन न लगना, लंबे समय तक उदासी या भावनात्मक परेशानी जैसे संकेतों को लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हर तनाव या उदासी मानसिक बीमारी नहीं होती, लेकिन यदि कोई परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगती है, तो योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है।

परिवार और दोस्तों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति की परेशानी का मजाक उड़ाने या उसे कमजोर कहने के बजाय उसकी बात सुनना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

क्या है सबसे बड़ा संदेश?

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 पर भारत में सामने आए Tele-MANAS के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत धीरे-धीरे बढ़ रही है। 47 लाख से ज्यादा कॉल और देशभर में 53 Tele-MANAS Cells का नेटवर्क बताता है कि डिजिटल माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंच बनाने की कोशिश बड़े स्तर पर की जा रही है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेने की जरूरत है। अगर किसी व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस होती है, तो वह Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 से सहायता प्राप्त कर सकता है। आपात स्थिति में स्थानीय आपातकालीन सेवाओं या नजदीकी स्वास्थ्य सुविधा से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अब संदेश साफ है—परेशानी बताना कमजोरी नहीं, बल्कि मदद लेने की दिशा में पहला कदम हो सकता है।

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