बच्चों के शरीर में दिख रहे ये बदलाव कहीं खतरे की घंटी तो नहीं? WHO की नई गाइडलाइन ने माता-पिता को किया अलर्ट!
नई दिल्ली: बच्चों में बढ़ता मोटापा अब सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनियाभर में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। बच्चों और किशोरों में मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार बच्चों और किशोरों में मोटापे के समग्र प्रबंधन को लेकर नई वैश्विक गाइडलाइन जारी की है। WHO ने 7 अक्टूबर 2026 को जारी इन दिशानिर्देशों में साफ किया है कि मोटापे से जूझ रहे बच्चों को केवल वजन कम करने की सलाह देने के बजाय उनके खान-पान, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार, नींद और पारिवारिक वातावरण को ध्यान में रखकर समग्र सहायता दी जानी चाहिए।
WHO के मुताबिक वर्ष 2024 में दुनिया भर में 5 से 19 वर्ष की उम्र के करीब 40 करोड़ बच्चे और किशोर ओवरवेट थे। इनमें लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से जूझ रहे थे। 1990 से 2024 के बीच इस आयु वर्ग में मोटापे की व्यापकता चार गुना बढ़ी है। WHO के अनुसार मोटापा इस उम्र में टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों सहित कई गैर-संचारी रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है।
क्यों जारी करनी पड़ी नई गाइडलाइन?
बच्चों का शरीर लगातार विकास की प्रक्रिया से गुजरता है। ऐसे में किसी बच्चे का वजन बढ़ना हमेशा मोटापे का संकेत नहीं होता। उम्र, लंबाई, लिंग और विकास की स्थिति को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चे की स्थिति का आकलन करते हैं।
WHO की नई गाइडलाइन का उद्देश्य यही है कि मोटापे से प्रभावित बच्चों को सही समय पर वैज्ञानिक और व्यक्ति-केंद्रित स्वास्थ्य सहायता मिल सके। संगठन ने बच्चों और किशोरों के लिए अलग-अलग दिशानिर्देश जारी किए हैं।
29 दिन से लेकर 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए जारी गाइडलाइन में प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से मोटापे के समग्र प्रबंधन पर जोर दिया गया है। वहीं 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए अलग गाइडलाइन जारी की गई है।
माता-पिता इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे के शरीर में होने वाले बदलावों को केवल “बच्चा बढ़ रहा है” कहकर नजरअंदाज न किया जाए।
अगर बच्चे का वजन उम्र और लंबाई की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, बच्चा शारीरिक गतिविधियों से बचने लगा है, लंबे समय तक बैठकर स्क्रीन देखता है या खान-पान की आदतों में लगातार असंतुलन दिखाई देता है, तो परिवार को स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने पर विचार करना चाहिए।
हालांकि केवल देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चा मोटापे से प्रभावित है या नहीं। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी बच्चे की उम्र, लंबाई, वजन और विकास के अनुरूप उचित मूल्यांकन कर सकते हैं।
इसलिए माता-पिता को बच्चों को देखकर खुद से “मोटा” घोषित करने या उन्हें वजन कम करने के लिए कठोर डाइट पर डालने से बचना चाहिए।
WHO ने डाइट और एक्सरसाइज पर दिया जोर
WHO की नई गाइडलाइन में मोटापे से जूझ रहे बच्चों और किशोरों के लिए संरचित खान-पान संबंधी हस्तक्षेप, शारीरिक गतिविधि और व्यवहार में बदलाव से जुड़ी सहायता की सिफारिश की गई है। इन उपायों को जरूरत के अनुसार एक साथ भी अपनाया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को अचानक खाना कम कर दिया जाए। स्वस्थ खान-पान का मतलब बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार संतुलित आहार उपलब्ध कराना है।
परिवार को भोजन की गुणवत्ता, नियमितता और विविधता पर ध्यान देना चाहिए। फल, सब्जियां, उचित मात्रा में प्रोटीन और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ बच्चे के संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं।
वहीं अत्यधिक मीठे और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का बार-बार सेवन कम करने की दिशा में परिवार काम कर सकता है।
सिर्फ डाइट नहीं, व्यवहार में बदलाव भी जरूरी
WHO ने मोटापे के प्रबंधन में व्यवहार बदलने वाली सहायता को भी महत्वपूर्ण माना है। इसका कारण यह है कि बच्चे की खाने, खेलने, सोने और स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदतें अक्सर परिवार के वातावरण से प्रभावित होती हैं।
अगर माता-पिता खुद लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं, शारीरिक गतिविधि नहीं करते या नियमित भोजन की आदत नहीं रखते, तो बच्चे के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार परिवार आधारित बदलाव अधिक उपयोगी हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए परिवार रोज कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए तय कर सकता है। बच्चे को खेल, पैदल चलने या उसकी उम्र के अनुकूल दूसरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
नींद और स्क्रीन टाइम भी महत्वपूर्ण
WHO की नई गाइडलाइन में शारीरिक गतिविधि के साथ-साथ sedentary behaviour यानी लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और नींद को भी मोटापे के प्रबंधन के व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा बनाया गया है।
आज बच्चों का काफी समय मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन पर बीत सकता है। लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि का कम होना स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
माता-पिता को बच्चे की उम्र के अनुसार नियमित नींद और सक्रिय दिनचर्या बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
यहां भी संतुलन जरूरी है। बच्चों के लिए स्क्रीन को पूरी तरह “दुश्मन” मानने के बजाय उसके उपयोग को व्यवस्थित करना और शारीरिक गतिविधि तथा नींद के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
बच्चों को वजन को लेकर शर्मिंदा न करें
WHO की गाइडलाइन का एक महत्वपूर्ण पहलू people-centred care है। यानी बच्चे और उसके परिवार की जरूरतों, परिस्थितियों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सहायता दी जाए।
मोटापे से प्रभावित बच्चों को उनके वजन के कारण चिढ़ाना, शर्मिंदा करना या दूसरे बच्चों से तुलना करना समस्या को और गंभीर बना सकता है।
WHO ने यह भी बताया है कि मोटापे से जूझ रहे बच्चों और किशोरों को कलंक, भेदभाव और बुलिंग का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य प्रबंधन के साथ बच्चे के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
माता-पिता को बच्चे के वजन पर ताने देने के बजाय स्वस्थ आदतों को परिवार की सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
छोटे बच्चों को वजन घटाने की दवा नहीं
WHO की नई गाइडलाइन का एक महत्वपूर्ण बिंदु छोटे बच्चों के उपचार से जुड़ा है। संगठन 0 से 9 वर्ष की उम्र के बच्चों में मोटापे के इलाज के लिए दवाओं, बैरियाट्रिक सर्जरी या वजन घटाने वाले उपकरणों की सिफारिश नहीं करता।
इसका अर्थ यह है कि माता-पिता को बच्चे का वजन कम करने के लिए खुद से किसी प्रकार की वजन घटाने वाली दवा या उत्पाद नहीं देना चाहिए।
बच्चे के लिए किसी भी उपचार का निर्णय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा उसकी व्यक्तिगत स्थिति का आकलन करने के बाद ही किया जाना चाहिए।
10 से 19 साल के किशोरों के लिए क्या कहा गया?
किशोरों के लिए WHO ने कुछ अतिरिक्त विकल्पों की बात कही है। 10 से 19 वर्ष के किशोरों में कुछ परिस्थितियों में दवाओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह तभी जब निगरानी में चलाया गया समग्र जीवनशैली कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम न दे और संबंधित चिकित्सकीय परिस्थितियां मौजूद हों।
गंभीर मोटापे वाले कुछ किशोरों में सर्जरी पर भी विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है। लेकिन WHO ने स्पष्ट किया है कि ऐसे विकल्प व्यापक देखभाल का विकल्प नहीं हैं।
यानी शुरुआत का आधार अभी भी स्वस्थ खान-पान, शारीरिक गतिविधि और टिकाऊ व्यवहार परिवर्तन ही है।
बच्चों में मोटापा आगे चलकर बढ़ा सकता है बीमारी का खतरा
WHO के अनुसार बचपन और किशोरावस्था में मोटापा आगे चलकर कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इनमें टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियां शामिल हैं। मोटापा शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है।
यही वजह है कि समस्या सामने आने के बाद ही कदम उठाने के बजाय बचपन से स्वस्थ वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
WHO का कहना है कि बच्चों में मोटापे की रोकथाम और उपचार दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है। स्वस्थ भोजन और शारीरिक गतिविधि को बच्चों के लिए सुलभ और किफायती बनाने में परिवार के साथ-साथ स्कूल, स्वास्थ्य व्यवस्था और समाज की भी भूमिका है।
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी संदेश
WHO की नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा संदेश यह है कि बच्चों के मोटापे को केवल “वजन” की समस्या मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। यह कई सामाजिक, व्यवहारिक, जैविक और पर्यावरणीय कारकों से जुड़ी जटिल स्वास्थ्य स्थिति हो सकती है।
अगर बच्चे के वजन या विकास को लेकर चिंता है तो इंटरनेट पर देखकर खुद उपचार करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना बेहतर है।
बच्चे को डांटने, भूखा रखने या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देने के बजाय परिवार को स्वस्थ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और सकारात्मक व्यवहार की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।
WHO की नई गाइडलाइन ने साफ कर दिया है कि बच्चों में मोटापे से निपटने का रास्ता सिर्फ वजन घटाना नहीं, बल्कि बच्चे के पूरे स्वास्थ्य और भविष्य को बेहतर बनाना है।

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