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दिल्ली में रातों-रात बढ़ा तनाव! 11 अक्टूबर को फिर क्या होने वाला है? हिरासत में नेताओं के बाद बड़ा ऐलान



नई दिल्ली: दिल्ली में शनिवार, 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज बनी हुई है। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क पर दिखाई देने लगा है। प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई, बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इसी बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने रविवार, 11 अक्टूबर को एक बार फिर जंतर-मंतर की ओर मार्च करने का आह्वान किया है।

शनिवार की कार्रवाई के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों नेता मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और उनके विमान के राजधानी में उतरने के बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। दीपके ने पहले से रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो संदेश में आंदोलन की जिम्मेदारी अजिंक्य शिंदे को सौंपने की बात कही थी।

11 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर मार्च का ऐलान

CJP ने रविवार सुबह करीब 10 बजे जंतर-मंतर की ओर मार्च का आह्वान किया है। अजिंक्य शिंदे ने समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर पुलिस प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकती है तो जिस जगह उन्हें रोका जाएगा, वहीं प्रदर्शन किया जाएगा। यह अपील शनिवार की कार्रवाई के बाद सामने आई है और इससे रविवार को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

शिंदे के मुताबिक, आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक CJP की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती। पार्टी की मुख्य मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े विवाद को समाप्त करने की मांग शामिल है। CJP का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा होते हैं। हालांकि, इन आरोपों को चुनाव आयोग और सरकार की ओर से स्वीकार नहीं किया गया है।

हिरासत में लिए गए नेताओं को लेकर बढ़ा सवाल

शनिवार के प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर को दिल्ली में 2,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में इससे अधिक संख्या के दावे भी किए गए हैं, लेकिन हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। इसलिए अंतिम संख्या की स्वतंत्र पुष्टि अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

CJP के शीर्ष नेताओं की हिरासत ने आंदोलन को और अधिक राजनीतिक रूप दे दिया है। दीपके, दास और रांका की हिरासत के बाद अजिंक्य शिंदे को आंदोलन की कमान संभालने के लिए आगे किया गया। CJP की ओर से कहा गया है कि जब तक वरिष्ठ नेता रिहा नहीं होते, तब तक शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के संवेदनशील इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस और केंद्रीय बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई तथा कई रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए। कुछ स्थानों पर वाहनों की जांच और आवाजाही को नियंत्रित किया गया। दिल्ली के कुछ हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन पर भी इसका असर देखने को मिला।

Reuters ने रिपोर्ट किया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली के कुछ हिस्सों को सील करने, मेट्रो स्टेशनों और बाजारों को बंद रखने तथा मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध जैसे कदमों की जानकारी सामने आई। हालांकि, अलग-अलग इलाकों में प्रतिबंधों और उनके समय को लेकर स्थिति अलग रही।

जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई। प्रशासन की ओर से भीड़ जुटाने और जुलूस जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू किए गए थे। ऐसे में रविवार को दोबारा मार्च की घोषणा के बाद दिल्ली पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

सोनम वांगचुक की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

इस पूरे विवाद के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और नेताओं की रिहाई को लेकर सरकार को समयसीमा जैसी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया तो वह फिर से अनशन का रास्ता अपना सकते हैं।

वांगचुक ने दिल्ली के प्रदर्शन में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाने की बात कही, लेकिन आंदोलन के समर्थन का संदेश दिया। उन्होंने हिरासत की कार्रवाई पर चिंता जताते हुए शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत बताई है।

आखिर CJP क्यों कर रही है प्रदर्शन?

इस पूरे आंदोलन की जड़ Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चल रहा विवाद है। CJP का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि देशभर में करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए। CJP इस दावे को चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़ रही है।

हालांकि, यह आंकड़ा और इससे जुड़े राजनीतिक आरोप CJP के दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग और सरकार की ओर से SIR प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया गया है। इसलिए इस विवाद में एक तरफ प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसका आधिकारिक पक्ष है।

CJP इससे पहले 2 अक्टूबर को मुंबई में भी इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है। इसके बाद बेंगलुरु में भी SIR के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। अब दिल्ली का प्रदर्शन आंदोलन के अगले बड़े चरण के रूप में सामने आया है।

चुनाव आयोग पर सवाल और राजनीतिक टकराव

CJP की मांग सिर्फ SIR को लेकर नहीं है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग कर रही है। अजिंक्य शिंदे ने इसके साथ 2025 की मतदाता सूचियों को फ्रीज करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को समाप्त करने जैसी मांगें भी रखी हैं।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर आधिकारिक पक्ष यह रहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किया जा रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में यह विवाद सड़क से लेकर राजनीतिक और संस्थागत स्तर तक और आगे बढ़ सकता है।

रविवार को क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर CJP के प्रस्तावित मार्च का क्या असर होगा? शनिवार की कार्रवाई के बाद पुलिस पहले से सतर्क है और CJP ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।

अजिंक्य शिंदे के आह्वान के बाद समर्थकों के जंतर-मंतर की ओर पहुंचने की संभावना है। यदि पुलिस ने रास्ते में रोकने की कोशिश की तो शिंदे पहले ही कह चुके हैं कि प्रदर्शनकारी वहीं अपना विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। ऐसे में रविवार को राजधानी में कई स्थानों पर छोटे-बड़े प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।

फिलहाल पूरा मामला तीन बड़े सवालों के बीच खड़ा है—हिरासत में लिए गए नेताओं की स्थिति क्या है, रविवार को पुलिस प्रदर्शनकारियों को कितनी दूर तक जाने देगी और SIR को लेकर उठाए जा रहे आरोपों पर चुनाव आयोग का अगला कदम क्या होगा?

इन सवालों के जवाब रविवार के घटनाक्रम के साथ सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी हुई है और राजनीतिक तापमान भी लगातार ऊंचा बना हुआ है।

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