30 की उम्र पार करते ही शरीर में होने लगता है ये बदलाव! इन हेल्थ टेस्ट को नजरअंदाज किया तो बाद में पड़ सकता है भारी
उम्र 30 साल के पार पहुंचते ही जीवन में कई तरह की जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं। नौकरी, परिवार, आर्थिक जिम्मेदारियां और बदलती जीवनशैली के बीच अक्सर लोग अपनी सेहत को प्राथमिकता देना भूल जाते हैं। यही वह उम्र भी है जब शरीर में होने वाले कई बदलाव धीरे-धीरे सामने आ सकते हैं। कुछ स्वास्थ्य समस्याएं ऐसी होती हैं जिनके शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ उनका असर गंभीर हो सकता है।
ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व बढ़ जाता है। हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि 30 साल की उम्र पूरी होते ही हर व्यक्ति को दर्जनों मेडिकल टेस्ट कराने चाहिए। किसी व्यक्ति को कौन-सी जांच कितनी बार करानी चाहिए, यह उसकी उम्र, वजन, जीवनशैली, परिवार में बीमारी का इतिहास, पहले की मेडिकल रिपोर्ट और मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार बिना किसी लक्षण के जरूरत से ज्यादा जांच कराने के बजाय जोखिम के अनुसार सही जांच कराना अधिक उपयोगी हो सकता है। आइए जानते हैं 30 की उम्र के बाद किन स्वास्थ्य जांचों पर ध्यान देना चाहिए और किन परिस्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
ब्लड प्रेशर की जांच को न करें नजरअंदाज
हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को अक्सर 'साइलेंट' समस्या कहा जाता है। इसका कारण यह है कि कई लोगों में रक्तचाप बढ़ने के बावजूद लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता। व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है, लेकिन अंदर ही अंदर लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर असर डाल सकता है।
यही वजह है कि केवल सिरदर्द, चक्कर या बेचैनी होने पर ही ब्लड प्रेशर की जांच कराने का इंतजार नहीं करना चाहिए। 18 साल और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में ब्लड प्रेशर की स्क्रीनिंग की जाती है।
अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर जांच के दौरान अधिक आता है तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार दोबारा जांच, कुछ समय तक निगरानी या घर पर ब्लड प्रेशर मापने की सलाह दे सकते हैं। लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर पाए जाने पर आगे की जांच और उपचार की जरूरत हो सकती है।
कोलेस्ट्रॉल की जांच भी है महत्वपूर्ण
कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए पूरी तरह खराब चीज नहीं है। शरीर को कुछ प्रकार के कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता होती है, लेकिन रक्त में कुछ प्रकार के कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा होने पर हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।
समस्या यह है कि बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का पता केवल शरीर के लक्षणों से लगाना आसान नहीं होता। इसके लिए आमतौर पर रक्त की जांच की जाती है, जिसे लिपिड प्रोफाइल कहा जाता है।
स्वस्थ वयस्कों में कोलेस्ट्रॉल की जांच कुछ वर्षों के अंतराल पर की जा सकती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, हृदय रोग, अधिक वजन या परिवार में कम उम्र में हृदय रोग अथवा हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है, तो डॉक्टर अधिक नियमित जांच की सलाह दे सकते हैं।
इसलिए 30 के बाद अपनी पिछली रिपोर्ट को संभालकर रखना और डॉक्टर से यह पूछना उपयोगी हो सकता है कि अगली लिपिड प्रोफाइल जांच कब आवश्यक है।
ब्लड शुगर और HbA1c हर किसी के लिए एक जैसे नहीं
डायबिटीज आज एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। ब्लड शुगर टेस्ट से जांच के समय शरीर में ग्लूकोज का स्तर पता लगाया जा सकता है, जबकि HbA1c टेस्ट पिछले लगभग कुछ महीनों के औसत ब्लड शुगर की जानकारी देता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 30 साल की उम्र में हर स्वस्थ व्यक्ति को अनिवार्य रूप से बार-बार डायबिटीज की जांच करानी चाहिए। स्क्रीनिंग का समय व्यक्ति के जोखिम कारकों पर निर्भर करता है।
कुछ दिशानिर्देशों के अनुसार बिना लक्षण वाले 35 से 70 वर्ष के ऐसे वयस्कों में प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज की स्क्रीनिंग की जाती है जिनका वजन अधिक या मोटापा है। हालांकि परिवार में डायबिटीज का इतिहास, PCOS, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज या अन्य जोखिम कारकों की मौजूदगी में डॉक्टर इससे कम उम्र में भी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
इसलिए अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या वजन लगातार बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से ब्लड शुगर और HbA1c जांच की जरूरत के बारे में चर्चा करनी चाहिए।
सिर्फ वजन नहीं, कमर के घेरे पर भी रखें नजर
30 की उम्र के बाद वजन में बदलाव को नजरअंदाज करना सही नहीं है। हालांकि केवल वजन से किसी व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य स्थिति का पता नहीं चलता। लंबाई और वजन की मदद से BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स निकाला जा सकता है, जो वजन की स्थिति का एक सामान्य संकेत देता है।
इसके साथ कमर का घेरा भी महत्वपूर्ण हो सकता है। पेट के आसपास ज्यादा चर्बी कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है। इसलिए समय-समय पर अपने वजन और कमर के घेरे में होने वाले बदलाव पर ध्यान देना उपयोगी है।
अगर बिना किसी खास कारण के वजन तेजी से बढ़ रहा है, अचानक कम हो रहा है या शरीर में लगातार कोई असामान्य बदलाव महसूस हो रहा है, तो इसे केवल उम्र का असर मानकर छोड़ने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
हर व्यक्ति को फुल बॉडी चेकअप की जरूरत नहीं
आजकल 'फुल बॉडी चेकअप' के नाम पर कई तरह के पैकेज उपलब्ध हैं। 30 की उम्र पार करते ही कुछ लोग बिना किसी लक्षण या जोखिम के बड़ी संख्या में टेस्ट करा लेते हैं। लेकिन ज्यादा जांच हमेशा बेहतर स्वास्थ्य का मतलब नहीं होती।
ECG, पूरे शरीर का स्कैन या अन्य महंगे टेस्ट हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए नियमित रूप से जरूरी नहीं होते। इनकी जरूरत व्यक्ति के लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करती है।
बिना जरूरत जांच कराने से कभी-कभी ऐसी रिपोर्ट सामने आ सकती हैं जिनका कोई गंभीर चिकित्सकीय महत्व न हो, लेकिन उनकी वजह से आगे अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए टेस्ट की लंबी सूची खुद से तय करने के बजाय डॉक्टर से अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जांच के बारे में पूछना अधिक उचित है।
परिवार की मेडिकल हिस्ट्री को जरूर समझें
30 की उम्र के बाद हेल्थ चेकअप की योजना बनाते समय परिवार में चली आ रही बीमारियों की जानकारी काफी उपयोगी हो सकती है। अगर माता-पिता या भाई-बहनों में कम उम्र में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी बीमारी रही है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें।
परिवार का इतिहास किसी व्यक्ति में बीमारी होने की गारंटी नहीं देता, लेकिन इससे डॉक्टर को संभावित जोखिमों को समझने और जांच की जरूरत तय करने में मदद मिल सकती है।
इसी तरह अपनी पुरानी मेडिकल रिपोर्ट, दवाओं और पहले किए गए टेस्ट की जानकारी भी डॉक्टर के साथ साझा करनी चाहिए।
जीवनशैली की जांच भी उतनी ही जरूरी
हेल्थ चेकअप का मतलब केवल ब्लड टेस्ट या मशीन से जांच कराना नहीं है। 30 के बाद अपनी जीवनशैली पर भी ध्यान देना जरूरी है।
अगर दिनभर बैठकर काम करते हैं, शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, नींद पूरी नहीं होती, खान-पान असंतुलित है या लगातार तनाव रहता है, तो इन आदतों में सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तंबाकू से दूरी और शराब का सेवन न करना या सीमित रखना लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
महिलाओं और पुरुषों की जांच की जरूरत अलग हो सकती है
हर व्यक्ति का हेल्थ चेकअप एक जैसा नहीं होता। महिलाओं और पुरुषों में उम्र, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार अलग-अलग स्क्रीनिंग की जरूरत हो सकती है।
महिलाओं को अपने डॉक्टर से उम्र और जोखिम के अनुसार स्त्री रोग संबंधी जांच तथा उपलब्ध कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में चर्चा करनी चाहिए। इसी तरह पुरुषों को भी अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर डॉक्टर से उचित जांच के बारे में सलाह लेनी चाहिए।
किसी भी स्क्रीनिंग की शुरुआत या अंतराल खुद से तय करने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना अधिक सुरक्षित तरीका है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
नियमित चेकअप के अलावा शरीर में लगातार या अचानक कोई गंभीर बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जैसे अचानक वजन में बड़ा बदलाव, लगातार अत्यधिक थकान, सांस फूलना, सीने में दर्द, बेहोशी, लगातार असामान्य दर्द, लंबे समय तक रहने वाले लक्षण या शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में अचानक बदलाव।
ऐसे लक्षणों को केवल उम्र या थकान से जोड़कर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
30 की उम्र के बाद अपनाएं स्मार्ट हेल्थ चेकअप की आदत
30 साल की उम्र कोई ऐसी निश्चित सीमा नहीं है जिस दिन से हर व्यक्ति को एक जैसी मेडिकल जांच शुरू कर देनी चाहिए। असल में इस उम्र के बाद स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
ब्लड प्रेशर, वजन और जीवनशैली जैसे सामान्य स्वास्थ्य संकेतकों पर नजर रखना अच्छी आदत हो सकती है। वहीं कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, HbA1c या अन्य जांच व्यक्ति के जोखिम और डॉक्टर की सलाह के आधार पर कराई जा सकती हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि हेल्थ चेकअप का उद्देश्य केवल बीमारी खोज निकालना नहीं है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य जोखिमों को समय रहते समझना, जीवनशैली में जरूरी बदलाव करना और जरूरत पड़ने पर सही समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। मेडिकल टेस्ट की जरूरत और उनकी आवृत्ति व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। किसी भी जांच या उपचार का निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

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