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दिन में BP नॉर्मल तो भी खतरा! रात में चुपके से बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर, डॉक्टर ने किया बड़ा खुलासा

 


नई दिल्ली: ब्लड प्रेशर यानी BP की जांच आजकल लोगों की रोजमर्रा की हेल्थ मॉनिटरिंग का हिस्सा बनती जा रही है। खासकर जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है, वे नियमित रूप से अपनी रीडिंग चेक करते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग BP चेक करते समय दिन के समय मिलने वाली रीडिंग पर ही ध्यान देते हैं। अगर दिन में ब्लड प्रेशर सामान्य आता है तो अक्सर यह मान लिया जाता है कि शरीर में सब कुछ ठीक चल रहा है। हालांकि, ब्लड प्रेशर की पूरी तस्वीर समझने के लिए सिर्फ दिन की एक रीडिंग पर्याप्त नहीं हो सकती।

जब व्यक्ति सो रहा होता है, तब शरीर आराम की स्थिति में चला जाता है। इस दौरान सामान्य तौर पर ब्लड प्रेशर दिन के मुकाबले कुछ कम होना चाहिए। रात में BP का यह कम होना शरीर के प्राकृतिक सर्केडियन रिदम का हिस्सा माना जाता है। लेकिन अगर सोते समय ब्लड प्रेशर अपेक्षित स्तर तक कम नहीं होता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा ने भी रात के ब्लड प्रेशर की निगरानी के महत्व की ओर ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक, रात के समय BP में होने वाला बदलाव दिल की सेहत को समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। खासकर उन लोगों में जिनका दिन के समय BP सामान्य नजर आता है, लेकिन रात में उसमें अपेक्षित गिरावट नहीं होती।

रात में BP का कम होना क्यों है जरूरी?

हमारा शरीर दिन और रात के अलग-अलग समय पर अलग तरीके से काम करता है। दिन में जब हम चलते-फिरते हैं, काम करते हैं, तनाव का सामना करते हैं या शारीरिक गतिविधियां करते हैं, तब शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। इसके विपरीत रात में नींद के दौरान शरीर आराम और रिकवरी की अवस्था में होता है।

इसी प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत आम तौर पर रात में ब्लड प्रेशर दिन के मुकाबले कम हो जाता है। डॉक्टर के मुताबिक रात के समय BP में करीब 10 प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट सामान्य पैटर्न का हिस्सा हो सकती है। इसी वजह से चिकित्सा क्षेत्र में रात के BP पैटर्न को काफी महत्व दिया जाता है।

हालांकि, हर व्यक्ति में BP का पैटर्न बिल्कुल एक जैसा नहीं होता। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दवाएं, नींद की गुणवत्ता और जीवनशैली जैसे कई कारक ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकते हैं।

दिन में BP सामान्य, फिर भी रात में हो सकता है हाई

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। अगर दिन में ब्लड प्रेशर सामान्य है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि रात में भी BP सामान्य ही रहेगा।

कुछ लोगों में रात के दौरान ब्लड प्रेशर अपेक्षित रूप से कम नहीं होता। ऐसे पैटर्न को सामान्य भाषा में रात का हाई BP या नॉन-डिपिंग पैटर्न कहा जाता है। यानी दिन और रात के BP के बीच वह सामान्य अंतर नहीं बन पाता, जो आम तौर पर देखा जाता है।

ऐसी स्थिति में केवल दिन की रीडिंग देखकर यह मान लेना कि ब्लड प्रेशर पूरी तरह नियंत्रण में है, सही नहीं हो सकता। यही कारण है कि कुछ मरीजों में डॉक्टर 24 घंटे के BP पैटर्न को समझने के लिए विशेष निगरानी की सलाह दे सकते हैं।

रात में BP कम न होना क्यों है चिंता का विषय?

रात के समय BP का अपेक्षित रूप से कम न होना केवल एक आंकड़े का बदलाव नहीं माना जाता। शोध में रात के समय बढ़े हुए ब्लड प्रेशर और सामान्य नाइटटाइम डिपिंग न होने को हृदय तथा रक्त वाहिकाओं से जुड़े खराब स्वास्थ्य परिणामों के अधिक जोखिम से जोड़ा गया है।

इसमें कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं और कुछ लोगों में हार्ट फेलियर जैसे जोखिम भी शामिल हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि रात में BP का कम न होना अपने आप किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि करता है। लेकिन अगर ऐसा पैटर्न लगातार बना रहता है, तो डॉक्टर से इसकी वजह समझना जरूरी हो सकता है।

कई बार इसके पीछे पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्या, खराब नींद या जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं। इसलिए केवल BP की एक रीडिंग के आधार पर घबराने के बजाय पूरे पैटर्न को समझना अधिक जरूरी है।

नींद और रात के BP का क्या संबंध है?

रात का ब्लड प्रेशर समझने में नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अगर किसी व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती है, वह पर्याप्त समय तक नहीं सो पाता या उसकी नींद लगातार खराब रहती है, तो इसका असर शरीर की सामान्य रिदम पर पड़ सकता है।

कुछ लोगों में नींद से जुड़ी समस्याएं रात के समय ब्लड प्रेशर के सामान्य पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा तनाव, वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी, खान-पान और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी BP के पैटर्न पर असर डाल सकती हैं।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से नींद की परेशानी के साथ BP की समस्या भी है, तो दोनों चीजों को अलग-अलग देखने के बजाय डॉक्टर से पूरी स्थिति पर चर्चा करना बेहतर होता है।

BP की निगरानी सिर्फ दिन तक सीमित न रखें

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है। लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि BP पूरे दिन एक जैसा नहीं रहता। शारीरिक गतिविधि, तनाव, भोजन, नींद और दवाओं के कारण इसमें बदलाव हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति की दिन की रीडिंग सामान्य है, लेकिन डॉक्टर को रात के BP को लेकर संदेह है, तो वह जरूरत के अनुसार 24 घंटे की ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग की सलाह दे सकते हैं। इस तरह की निगरानी से दिन और रात के दौरान BP में होने वाले बदलावों की ज्यादा व्यापक तस्वीर मिल सकती है।

इससे डॉक्टर यह समझने में भी मदद ले सकते हैं कि BP किस समय बढ़ रहा है और दवाओं या उपचार की रणनीति में किसी बदलाव की जरूरत है या नहीं।

किन लोगों को खास ध्यान देना चाहिए?

जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें अपनी BP रीडिंग को नियमित रूप से ट्रैक करना चाहिए। अगर लंबे समय तक रीडिंग सामान्य से ऊपर रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इसी तरह अगर किसी व्यक्ति को रात में बार-बार नींद टूटने, बेचैनी या नींद से जुड़ी दूसरी समस्या का सामना करना पड़ता है और साथ ही BP भी बढ़ा हुआ रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जिन लोगों में पहले से हृदय या रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं का जोखिम है, उनके लिए BP की नियमित निगरानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

दवा का समय खुद से न बदलें

BP को लेकर एक बड़ी गलती यह हो सकती है कि लोग अपनी रीडिंग देखकर खुद ही दवा की मात्रा या समय बदलने लगें। अगर दिन में BP सामान्य आ रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवा बंद कर दी जाए या उसकी खुराक बदल दी जाए।

इसी तरह रात में BP अधिक आने पर भी बिना चिकित्सकीय सलाह के अतिरिक्त दवा लेना उचित नहीं है। BP की दवा कब और कितनी मात्रा में लेनी है, यह मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, अन्य दवाओं और पूरे BP पैटर्न को देखकर तय किया जाता है।

अगर डॉक्टर को लगता है कि रात के समय BP नियंत्रित नहीं हो रहा है, तो वह आवश्यक जांच या मॉनिटरिंग के बाद उपचार में बदलाव कर सकते हैं।

सिर्फ एक रीडिंग से न निकालें निष्कर्ष

ब्लड प्रेशर को समझने के लिए एक दिन या एक समय की रीडिंग से निष्कर्ष निकालना कई बार पर्याप्त नहीं होता। BP में स्वाभाविक रूप से उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीज की कई रीडिंग, समय, लक्षण और स्वास्थ्य इतिहास को ध्यान में रखकर स्थिति का आकलन करते हैं।

रात के BP का पैटर्न इसी बड़ी तस्वीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। अगर लगातार यह पता चलता है कि रात में BP अपेक्षित रूप से कम नहीं हो रहा है, तो इसके कारणों की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

रात का BP भी है दिल की सेहत का संकेत

ब्लड प्रेशर को लेकर अब केवल दिन की रीडिंग पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत आम तौर पर रात में BP कुछ कम होता है। अगर लंबे समय तक यह गिरावट नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से इस बारे में चर्चा करना समझदारी है।

हालांकि, रात में BP का कम न होना अपने आप किसी बीमारी का प्रमाण नहीं है। सही निष्कर्ष के लिए उचित तरीके से BP की निगरानी और चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।

इसलिए अगर आप नियमित रूप से अपना BP चेक करते हैं, तो केवल एक सामान्य रीडिंग देखकर पूरी तरह निश्चिंत होने के बजाय अपने BP के पूरे पैटर्न को समझने की कोशिश करें। खासकर हाई BP की समस्या वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और दवा जारी रखनी चाहिए।

यह जानकारी स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। BP से जुड़ी दवा, उसकी खुराक या समय में बदलाव बिना डॉक्टर की सलाह के न करें। लगातार असामान्य BP रीडिंग या किसी गंभीर लक्षण की स्थिति में चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

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