उम्र बढ़ने का असर रोकने का राज! डॉक्टर ने बताईं 6 ऐसी आदतें, जो शरीर को अंदर से रख सकती हैं जवान
आज के समय में हर कोई खुद को लंबे समय तक फिट, एक्टिव और जवां बनाए रखना चाहता है। बढ़ती उम्र के असर को कम करने के लिए लोग तरह-तरह की एंटी एजिंग क्रीम, सीरम और महंगे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सिर्फ बाहर से त्वचा की देखभाल करना ही काफी नहीं है। अगर शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रखना है तो अंदरूनी सेहत पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। हमारी डाइट, नींद, एक्सरसाइज और तनाव का सीधा असर हमारी ओवरऑल हेल्थ पर पड़ता है।
इसी विषय को लेकर गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताया है, जिन्हें स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक, शरीर को अंदर से स्वस्थ रखने वाली ये आदतें लंबे समय तक फिटनेस बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। इनमें हेल्दी फैट खाना, मांसपेशियों को मजबूत रखना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना, आंतों की सेहत का ध्यान रखना और ज्यादा चीनी से बचना शामिल है।
हालांकि, किसी भी आदत को अपनाने से पहले यह समझना जरूरी है कि एंटी एजिंग का मतलब उम्र को वास्तव में कम करना नहीं है। स्वस्थ जीवनशैली का उद्देश्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकना नहीं, बल्कि उम्र के साथ शरीर को स्वस्थ, मजबूत और सक्रिय बनाए रखना है।
1. डाइट में हेल्दी फैट को करें शामिल
अक्सर वजन बढ़ने के डर से लोग हर तरह के फैट से दूरी बनाने लगते हैं। लेकिन शरीर के लिए सभी फैट नुकसानदायक नहीं होते। कुछ हेल्दी फैट शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं।
डॉ. सौरभ सेठी के मुताबिक, ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर की कोशिकाओं की संरचना और उनके सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये शरीर में सूजन से जुड़े कई प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
ओमेगा-3 पाने के लिए डाइट में फैटी फिश को शामिल किया जा सकता है। वहीं, शाकाहारी लोग अखरोट, चिया सीड्स और अलसी जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। हालांकि, किसी भी पोषक तत्व का सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर होता है।
2. मांसपेशियों को मजबूत रखना बेहद जरूरी
फिटनेस का मतलब केवल शरीर का वजन कम होना नहीं है। कई बार व्यक्ति देखने में पतला होता है, लेकिन उसकी मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत और मात्रा बनाए रखना खास तौर पर महत्वपूर्ण हो जाता है।
मजबूत मांसपेशियां रोजमर्रा के काम करने, चलने-फिरने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा, पर्याप्त मांसपेशी मास शरीर के मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर नियंत्रण जैसे पहलुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इसीलिए हफ्ते में कम से कम दो बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने की सलाह दी जाती है। इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। स्क्वैट्स, पुश-अप्स और रेजिस्टेंस बैंड जैसी एक्सरसाइज भी शुरुआती स्तर पर की जा सकती हैं। उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार एक्सरसाइज का चुनाव करना चाहिए।
3. अच्छी नींद को न करें नजरअंदाज
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे ज्यादा नजरअंदाज की जाने वाली चीजों में से एक बन गई है। देर रात तक मोबाइल चलाना, काम का तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण कई लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती।
लेकिन पर्याप्त नींद शरीर की रिकवरी के लिए बेहद जरूरी है। नींद के दौरान शरीर को आराम और रिपेयर का समय मिलता है। इसका संबंध इम्यून सिस्टम, मेटाबॉलिक हेल्थ और दिमाग की कार्यक्षमता से भी है।
डॉ. सौरभ सेठी ने रोजाना करीब 7 से 9 घंटे की नींद लेने और सोने-जागने का समय लगभग नियमित रखने की सलाह दी है। रात में सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और शांत वातावरण बनाना भी नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकता है।
4. लंबे समय तक तनाव में रहना हो सकता है नुकसानदायक
तनाव हर व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन लगातार और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर और दिमाग दोनों पर असर डाल सकता है। काम, परिवार, आर्थिक स्थिति या अन्य कारणों से लगातार तनाव में रहने वाले लोगों के लिए तनाव को नियंत्रित करना जरूरी है।
डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाले तनाव और टेलोमेयर की लंबाई के बीच संबंध पर वैज्ञानिक शोध हुए हैं। टेलोमेयर क्रोमोसोम के सिरों पर मौजूद सुरक्षात्मक हिस्से होते हैं और सेलुलर एजिंग से जुड़े हुए हैं।
तनाव को कम करने के लिए रोजाना कुछ समय रिलैक्सेशन के लिए निकालना उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर ने सोने से पहले करीब तीन मिनट तक धीरे-धीरे सांस लेने की एक्सरसाइज करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा मेडिटेशन, योग, वॉक और पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालना भी तनाव प्रबंधन में मदद कर सकता है।
5. आंतों की सेहत पर दें खास ध्यान
हमारी पाचन क्रिया और शरीर की ओवरऑल हेल्थ के बीच गहरा संबंध है। आंतों में मौजूद माइक्रोबायोम शरीर की कई प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। यह इम्यून सिस्टम और शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है।
आंतों की सेहत को बेहतर रखने के लिए डाइट में फर्मेंटेड फूड शामिल किए जा सकते हैं। दही, केफिर, किमची और सॉकरक्राट जैसे खाद्य पदार्थ इसमें शामिल हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए सभी फर्मेंटेड फूड समान रूप से उपयुक्त हों, यह जरूरी नहीं है। जिन लोगों को किसी विशेष खाद्य पदार्थ से एलर्जी या पाचन संबंधी परेशानी होती है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
आंतों को स्वस्थ रखने के लिए केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय पूरी डाइट को संतुलित रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। पर्याप्त फाइबर, फल, सब्जियां और पानी भी स्वस्थ डाइजेशन के लिए जरूरी हैं।
6. ज्यादा चीनी से बनाएं दूरी
एंटी एजिंग और हेल्दी डाइट की चर्चा में चीनी का मुद्दा भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। बहुत ज्यादा शुगर का सेवन लंबे समय में शरीर के लिए कई तरह की समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
डॉ. सौरभ सेठी ने बताया कि ज्यादा चीनी का सेवन शरीर में एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स यानी AGEs के निर्माण से जुड़ा हो सकता है। ये प्रक्रियाएं शरीर के प्रोटीन, जिसमें कोलेजन भी शामिल है, को प्रभावित कर सकती हैं। कोलेजन त्वचा की संरचना और मजबूती से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोटीन है।
इसलिए रोजाना मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करना एक आसान बदलाव हो सकता है। शुगरी ड्रिंक की जगह पानी, बिना चीनी की चाय या कॉफी जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। हालांकि, कॉफी या चाय का सेवन भी व्यक्ति की सहनशीलता और स्वास्थ्य जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।
सिर्फ क्रीम नहीं, पूरी लाइफस्टाइल पर दें ध्यान
उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर व्यक्ति लंबे समय तक अपनी फिटनेस, मांसपेशियों की ताकत और रोजमर्रा की सक्रियता को बेहतर बनाए रखने की कोशिश कर सकता है।
इसके लिए किसी एक एंटी एजिंग प्रोडक्ट पर निर्भर रहने के बजाय डाइट, एक्सरसाइज, नींद, तनाव और पाचन स्वास्थ्य जैसे सभी पहलुओं पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है। हेल्दी फैट को डाइट में शामिल करना, नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना, पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना, आंतों को स्वस्थ रखना और ज्यादा चीनी से बचना ऐसी आदतें हैं जिन्हें धीरे-धीरे रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की उम्र, बीमारी, दवाओं, खान-पान और फिटनेस के अनुसार जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी खास डाइट या एक्सरसाइज रूटीन में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर यदि पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी नए सप्लीमेंट या डाइट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं