30 की उम्र में ही क्यों आ रहा हार्ट अटैक? डॉक्टरों ने बताए वो 7 कारण जिन्हें लोग रोज़ कर रहे हैं नजरअंदाज
एक समय था जब हार्ट अटैक को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। पिछले कुछ वर्षों में 30 से 40 वर्ष की आयु के लोगों में हार्ट अटैक के मामले बढ़ने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कई बार ऐसे लोग भी अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो जाते हैं, जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं होती या जो देखने में पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खानपान, नींद की कमी और कई अन्य जोखिम कारक इस बदलाव के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि हर मामले का कारण अलग हो सकता है और किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
क्या सचमुच कम उम्र में बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि अस्पतालों में अब पहले की तुलना में कम उम्र के मरीज भी हृदय संबंधी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है और जांच पहले की तुलना में अधिक हो रही है। फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों में वृद्धि ने कम उम्र के लोगों में हृदय रोग की संभावना बढ़ाई है।
1. लगातार तनाव सबसे बड़ा दुश्मन
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में नौकरी का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, पारिवारिक तनाव और भविष्य की चिंता कई लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ा सकता है जो रक्तचाप और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे और उसका सही प्रबंधन न किया जाए तो यह हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
2. खराब खानपान और जंक फूड
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल बड़ी संख्या में लोग अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड, मीठे पेय और अधिक नमक तथा ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं।
ऐसा भोजन मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक बन सकते हैं।
3. घंटों बैठकर काम करना
ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और नियमित व्यायाम न करना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि या नियमित व्यायाम करने की आदत विकसित करनी चाहिए।
4. धूम्रपान और तंबाकू का सेवन
सिगरेट, बीड़ी, वेपिंग या अन्य तंबाकू उत्पाद रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में हार्ट अटैक के कई मामलों में धूम्रपान एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक पाया जाता है।
5. पर्याप्त नींद न लेना
आज की व्यस्त जीवनशैली में कई लोग प्रतिदिन केवल 4 से 5 घंटे की नींद लेते हैं।
लगातार कम नींद लेने से शरीर का हार्मोनल संतुलन प्रभावित हो सकता है, जिससे उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ये सभी हृदय रोग से जुड़े जोखिम कारक हैं।
6. हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज
कई बार कम उम्र के लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर या मधुमेह है।
यदि इन बीमारियों का समय पर पता न चले और उपचार न हो तो ये धीरे-धीरे हृदय की धमनियों को प्रभावित कर सकती हैं।
इसी कारण डॉक्टर नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह देते हैं।
7. आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार
यदि परिवार में कम उम्र में किसी सदस्य को हार्ट अटैक या गंभीर हृदय रोग हुआ हो तो अन्य सदस्यों में भी जोखिम बढ़ सकता है।
ऐसे लोगों को विशेष सतर्क रहने और समय-समय पर हृदय संबंधी जांच कराने की सलाह दी जाती है।
हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?
डॉक्टरों के अनुसार हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते, लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हो सकते हैं—
सीने में दबाव, दर्द या भारीपन
दर्द का बाएं हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना
अचानक सांस फूलना
ठंडा पसीना आना
मतली या उल्टी
अत्यधिक कमजोरी
चक्कर आना
कुछ मामलों में, विशेषकर महिलाओं और मधुमेह के मरीजों में, लक्षण अलग या कम स्पष्ट भी हो सकते हैं।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
यदि किसी व्यक्ति को अचानक तेज सीने में दर्द हो, सांस लेने में कठिनाई हो या ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक में समय पर इलाज मिलने से जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कैसे करें बचाव?
हृदय रोग विशेषज्ञ निम्नलिखित आदतें अपनाने की सलाह देते हैं—
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।
संतुलित आहार लें।
धूम्रपान और तंबाकू से दूरी रखें।
शराब का सेवन सीमित रखें।
पर्याप्त नींद लें।
तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य उपाय अपनाएं।
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
स्वस्थ वजन बनाए रखें।
युवा क्यों रहें सतर्क?
विशेषज्ञों का कहना है कि युवा होने का मतलब यह नहीं कि हृदय रोग का खतरा बिल्कुल नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति जोखिम कारकों को लंबे समय तक नजरअंदाज करता है, तो कम उम्र में भी हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए शुरुआती जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
30-40 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि हर मामले के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं, लेकिन तनाव, अस्वस्थ खानपान, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और आनुवंशिक जोखिम जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज न करना हृदय स्वास्थ्य की रक्षा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

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