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धूम्रपान छोड़ना चाह रहे करोड़ों लोग फिर भी फंस रहे इसी जाल में, नई रिपोर्ट ने खोल दी स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी सच्चाई



नई दिल्ली। धूम्रपान को स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है, इसके बावजूद दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। समस्या केवल यह नहीं है कि लोग धूम्रपान शुरू कर देते हैं, बल्कि इसे छोड़ने की कोशिश करने वाले लोगों को भी कई बार पर्याप्त मदद नहीं मिल पाती। हालिया शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रिपोर्टों से यह चिंता सामने आई है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में धूम्रपान छोड़ने के लिए जरूरी परामर्श, दवाओं और अन्य सहायता की उपलब्धता अभी भी असमान है। दुनिया में करीब 1.3 अरब लोग तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ना केवल इच्छाशक्ति का मामला नहीं है। निकोटीन की लत मस्तिष्क और व्यवहार दोनों को प्रभावित करती है, इसलिए कई लोगों को आदत छोड़ने के दौरान बार-बार कोशिश करनी पड़ती है। ऐसे लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह, व्यवहारिक परामर्श, निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और कुछ मामलों में दवाएं मददगार हो सकती हैं। लेकिन इन सेवाओं की पहुंच हर देश और हर व्यक्ति तक समान नहीं है।

दुनिया में करीब 1.3 अरब तंबाकू उपयोगकर्ता

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में लगभग 1.3 अरब लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से करीब 80 प्रतिशत लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। यही वे देश हैं जहां तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का बोझ भी काफी अधिक है।

तंबाकू का सेवन केवल फेफड़ों को प्रभावित नहीं करता। लंबे समय तक धूम्रपान करने से कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोगों को भी सेकेंड हैंड स्मोक के कारण नुकसान हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, तंबाकू से हर साल 80 लाख से अधिक मौतों का संबंध है, जिसमें सेकेंड हैंड स्मोक के कारण होने वाली मौतें भी शामिल हैं।

ऐसे में धूम्रपान रोकने की कोशिशों का महत्व केवल एक व्यक्ति की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज के स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है।

धूम्रपान छोड़ना इतना मुश्किल क्यों है?

कई लोग यह मानते हैं कि धूम्रपान छोड़ने के लिए केवल मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों में मौजूद निकोटीन शरीर में निर्भरता पैदा कर सकता है।

जब कोई व्यक्ति अचानक धूम्रपान बंद करता है तो उसे बेचैनी, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी, नींद में बदलाव और बार-बार तंबाकू लेने की इच्छा जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यही कारण है कि कई लोग धूम्रपान छोड़ने के बाद कुछ समय में फिर से इसे शुरू कर देते हैं।

इस स्थिति में विशेषज्ञों की मदद काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉक्टर मरीज की आदत, स्वास्थ्य स्थिति और पहले किए गए प्रयासों को देखकर उचित रणनीति सुझा सकते हैं।

13 देशों के अध्ययन में सामने आई चिंता

2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में 13 निम्न और मध्यम आय वाले देशों के Global Adult Tobacco Surveys के दो दौर के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन देशों में धूम्रपान छोड़ने की कोशिश और छोड़ने के लिए उपलब्ध सहायता का उपयोग कई जगह पर्याप्त नहीं था। अध्ययन में यह भी सामने आया कि लोग अक्सर बिना किसी सहायता के खुद ही धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करते थे।

यह अध्ययन पूरी दुनिया के केवल 13 देशों की स्थिति का विश्लेषण करता है, इसलिए इसे सभी निम्न और मध्यम आय वाले देशों की स्थिति का सीधा प्रतिनिधि नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन इससे यह जरूर पता चलता है कि धूम्रपान छोड़ने की सेवाओं तक पहुंच कई जगह चुनौती बनी हुई है।

अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों ने धूम्रपान छोड़ने की कोशिश की, उनमें प्रमाण-आधारित सहायता का इस्तेमाल कई देशों में सीमित रहा। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी कुछ देशों में उपलब्ध थी, लेकिन हेल्पलाइन और अन्य सहायता सेवाएं कई जगह पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं थीं।

लोग खुद से छोड़ने की कोशिश क्यों करते हैं?

धूम्रपान छोड़ने वाले लोगों के बीच बिना किसी पेशेवर सहायता के कोशिश करना आम है। इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि डॉक्टर या स्वास्थ्य केंद्र से मदद ली जा सकती है। कुछ लोग दवाओं या काउंसलिंग की लागत को लेकर चिंतित होते हैं, जबकि कई लोगों को लगता है कि वे अपनी इच्छाशक्ति के दम पर ही आदत छोड़ सकते हैं।

इसके अलावा कई जगहों पर तंबाकू छोड़ने की सेवाएं स्वास्थ्य व्यवस्था का नियमित हिस्सा नहीं बन पाई हैं। अगर किसी व्यक्ति को डॉक्टर से मिलने पर धूम्रपान छोड़ने की सलाह, काउंसलिंग या उपचार का विकल्प आसानी से उपलब्ध हो तो उसके लिए मदद लेना आसान हो सकता है।

इसीलिए विशेषज्ञ केवल तंबाकू की बिक्री और विज्ञापन पर नियंत्रण की बात नहीं करते, बल्कि quit support यानी तंबाकू छोड़ने में मदद को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा मानते हैं।

निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी क्या है?

धूम्रपान छोड़ने में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख प्रमाण-आधारित सहायता में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी NRT शामिल है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों के बजाय नियंत्रित मात्रा में निकोटीन उपलब्ध कराना होता है, जिससे निकोटीन की लत से जुड़े withdrawal symptoms को संभालने में मदद मिल सके।

NRT के अलग-अलग रूप हो सकते हैं और इनका इस्तेमाल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किया जाता है। इसके अलावा कुछ लोगों के लिए डॉक्टर अन्य दवाओं या व्यवहारिक उपचार की सलाह दे सकते हैं।

हालांकि किसी भी दवा को खुद से शुरू करना उचित नहीं है। खासकर गर्भावस्था, हृदय रोग या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेकर ही उपचार का विकल्प चुनना चाहिए।

भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा

भारत में तंबाकू का इस्तेमाल सिगरेट तक सीमित नहीं है। देश में सिगरेट और बीड़ी के अलावा खैनी, गुटखा और दूसरे धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का भी इस्तेमाल होता है। एक हालिया भारतीय अध्ययन में बताया गया है कि भारत में 20 करोड़ से अधिक वयस्क धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं और लगभग 10 करोड़ लोग combustible tobacco यानी जलाकर इस्तेमाल किए जाने वाले तंबाकू का सेवन करते हैं।

भारत में तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी स्तर पर कई व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं। अध्ययन में तंबाकू cessation centres, quitline और mCessation जैसी सेवाओं का उल्लेख किया गया है।

फिर भी बड़ी आबादी तक इन सेवाओं की जानकारी और पहुंच सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों और कम संसाधन वाले समुदायों में जागरूकता तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

युवा वर्ग के लिए बढ़ता खतरा

तंबाकू का मुद्दा केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। WHO के अनुसार, दुनिया में लगभग 4 करोड़ किशोर, जिनकी उम्र 13 से 15 वर्ष के बीच है, तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा करीब 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट का इस्तेमाल करते हैं।

यह स्थिति इसलिए चिंताजनक है क्योंकि कम उम्र में निकोटीन का इस्तेमाल आगे चलकर निर्भरता का खतरा बढ़ा सकता है। आज तंबाकू के पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ ई-सिगरेट और दूसरे निकोटीन उत्पाद भी युवाओं तक पहुंच रहे हैं।

इसलिए विशेषज्ञों के लिए चुनौती केवल मौजूदा धूम्रपान करने वालों को आदत छोड़ने में मदद करना नहीं, बल्कि युवाओं को तंबाकू और निकोटीन की शुरुआत से रोकना भी है।

सिर्फ चेतावनी से नहीं होगा समाधान

सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी, सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध और तंबाकू नियंत्रण की नीतियां महत्वपूर्ण हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, उन लोगों को भी मदद उपलब्ध कराना जरूरी है जो पहले से तंबाकू के आदी हैं और इसे छोड़ना चाहते हैं।

अगर कोई व्यक्ति कई बार कोशिश करने के बाद भी धूम्रपान नहीं छोड़ पा रहा है तो उसे असफल मानने के बजाय उचित सहायता देना ज्यादा प्रभावी रणनीति हो सकती है। डॉक्टर, काउंसलर और प्रमाण-आधारित दवाएं ऐसे लोगों की मदद कर सकती हैं।

WHO का कहना है कि तंबाकू छोड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए सहायता उपलब्ध कराना तंबाकू नियंत्रण की महत्वपूर्ण रणनीति है।

धूम्रपान छोड़ने वालों के लिए क्या जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने की योजना बनाते समय व्यक्ति को अपनी आदत के ट्रिगर पहचानने चाहिए। किन परिस्थितियों में सिगरेट पीने की इच्छा ज्यादा होती है, यह समझना आगे की रणनीति बनाने में मदद कर सकता है।

परिवार और दोस्तों का सहयोग भी महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर व्यक्ति बार-बार कोशिश के बावजूद धूम्रपान शुरू कर देता है तो उसे निराश होने के बजाय दोबारा प्रयास करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता लेनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तंबाकू छोड़ने के लिए मदद मांगना कमजोरी नहीं है। निकोटीन की निर्भरता को एक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समझना और उसके लिए उचित उपचार लेना कई लोगों के लिए ज्यादा प्रभावी रास्ता हो सकता है।

दुनिया में करीब 1.3 अरब लोग तंबाकू का इस्तेमाल कर रहे हैं और इनमें बड़ी संख्या निम्न तथा मध्यम आय वाले देशों में रहती है। धूम्रपान छोड़ना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है, लेकिन कई लोगों के लिए इसे अकेले छोड़ना मुश्किल होता है।

13 देशों के उपलब्ध आंकड़ों ने भी दिखाया है कि धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करने वाले लोगों तक प्रमाण-आधारित सहायता की पहुंच अभी बेहतर की जा सकती है।

इसलिए आने वाले समय में तंबाकू नियंत्रण की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह होना चाहिए कि जो लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, उन्हें सस्ती, आसानी से उपलब्ध और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सहायता मिल सके। तंबाकू से होने वाली बीमारियों का बोझ कम करने के लिए रोकथाम के साथ-साथ छोड़ने में मदद करना भी उतना ही जरूरी है।

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