कोलेस्ट्रॉल की दवा को लेकर आया चौंकाने वाला सच! अस्पताल पहुंचने का खतरा घटा, लेकिन स्टैटिन लेने वालों में बढ़ा ये मामला
नई दिल्ली। कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्टैटिन दवाओं को लेकर सामने आई एक नई रिसर्च ने इनके प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं के अध्ययन के मुताबिक, स्टैटिन का इस्तेमाल करने वाले लोगों में अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं में कमी देखी गई, लेकिन दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं के कुल इस्तेमाल में बढ़ोतरी भी सामने आई।
यह अध्ययन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्टैटिन दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में शामिल हैं। इन्हें मुख्य रूप से रक्त में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने और हृदय रोग तथा स्ट्रोक के जोखिम को घटाने के लिए दिया जाता है। हालांकि नई स्टडी का मतलब यह नहीं है कि स्टैटिन हर व्यक्ति के लिए जरूरी हैं या सभी मरीजों को इन्हें लेना चाहिए। दवा का इस्तेमाल व्यक्ति के स्वास्थ्य जोखिम और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
स्टैटिन क्या होती हैं और क्यों दी जाती हैं?
स्टैटिन ऐसी दवाएं हैं जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। इनका सबसे प्रमुख उद्देश्य LDL कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करना होता है। LDL को आम तौर पर 'खराब कोलेस्ट्रॉल' कहा जाता है, क्योंकि इसका अधिक स्तर रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा होने और हृदय संबंधी बीमारी के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
डॉक्टर अक्सर उन लोगों को स्टैटिन लेने की सलाह देते हैं जिनमें हृदय रोग, हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम अधिक होता है। कुछ मरीजों में पहले से हृदय रोग मौजूद होने पर भी स्टैटिन उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है।
स्टैटिन का लक्ष्य केवल आज का कोलेस्ट्रॉल कम करना नहीं होता, बल्कि लंबे समय में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी गंभीर घटनाओं के जोखिम को कम करना भी होता है।
नई स्टडी में क्या सामने आया?
ऑक्सफोर्ड पॉपुलेशन हेल्थ के शोधकर्ताओं ने स्टैटिन उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल के बीच संबंध का अध्ययन किया। शोध में अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक उपयोग को देखा गया। निष्कर्ष में स्टैटिन के इस्तेमाल के साथ अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं में कमी का संबंध पाया गया, लेकिन दूसरी ओर कुल हेल्थकेयर उपयोग में वृद्धि भी देखी गई।
इसका अर्थ यह नहीं है कि स्टैटिन लेने से मरीज अधिक बीमार हो जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल में बढ़ोतरी के कई कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, स्टैटिन लेने वाले मरीजों में नियमित डॉक्टर विजिट, कोलेस्ट्रॉल की निगरानी और अन्य स्वास्थ्य जांच की जरूरत हो सकती है।
यानी एक तरफ गंभीर स्वास्थ्य घटना के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम हो सकती है, जबकि दूसरी तरफ बीमारी की रोकथाम और निगरानी के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम क्यों घट सकता है?
स्टैटिन का मुख्य लाभ हृदय संबंधी जोखिम को कम करना माना जाता है। जब LDL कोलेस्ट्रॉल कम होता है और हृदय रोग का जोखिम नियंत्रित रहता है, तो लंबे समय में हार्ट अटैक या अन्य हृदय संबंधी घटनाओं की संभावना कम हो सकती है।
यही वजह है कि कुछ मरीजों में डॉक्टर स्टैटिन को लंबे समय तक जारी रखने की सलाह देते हैं। लेकिन इसका लाभ हर व्यक्ति में समान नहीं होता। किसी व्यक्ति का कुल हृदय जोखिम, उम्र, रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान और पहले से मौजूद हृदय रोग जैसे कई कारक उपचार के निर्णय को प्रभावित करते हैं।
नई स्टडी के निष्कर्षों को भी इसी व्यापक संदर्भ में समझना जरूरी है।
हेल्थकेयर इस्तेमाल बढ़ने का मतलब क्या है?
स्टैटिन लेने वाले लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल में वृद्धि का मतलब यह नहीं है कि दवा नुकसान कर रही है। कई बार किसी बीमारी को रोकने के लिए नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग की जरूरत बढ़ जाती है।
उदाहरण के तौर पर डॉक्टर मरीज का कोलेस्ट्रॉल स्तर जांच सकते हैं, दवा की खुराक की समीक्षा कर सकते हैं और दूसरे जोखिम कारकों पर नजर रख सकते हैं। अगर किसी मरीज को अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं तो वह नियमित रूप से चिकित्सा सेवाओं का इस्तेमाल कर सकता है।
इसलिए अस्पताल में भर्ती होने और कुल स्वास्थ्य सेवा उपयोग को अलग-अलग समझना जरूरी है। अस्पताल में भर्ती होना अक्सर गंभीर स्वास्थ्य घटना का संकेत हो सकता है, जबकि डॉक्टर से मिलना या जांच कराना रोकथाम और निगरानी का हिस्सा भी हो सकता है।
क्या हर व्यक्ति को स्टैटिन लेनी चाहिए?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक है। इसका जवाब है—हर व्यक्ति के लिए नहीं।
स्टैटिन की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति में हृदय रोग या स्ट्रोक का जोखिम कितना है। किसी व्यक्ति का LDL स्तर अधिक होने के साथ-साथ अन्य जोखिम कारक भी मौजूद हो सकते हैं। वहीं कुछ लोगों में डॉक्टर जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिकता दे सकते हैं।
इसलिए केवल किसी समाचार या स्टडी को पढ़कर खुद से स्टैटिन शुरू करना सही नहीं है। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति पहले से डॉक्टर की सलाह पर स्टैटिन ले रहा है तो नई स्टडी पढ़कर दवा अचानक बंद करना भी उचित नहीं है।
दवा बंद करने या बदलने से पहले डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
स्टैटिन के साथ जीवनशैली भी जरूरी
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में केवल दवा ही एकमात्र उपाय नहीं है। स्वस्थ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को स्वस्थ सीमा में रखना, धूम्रपान से बचना और जरूरत के अनुसार शराब का सेवन सीमित करना भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
कई मरीजों में डॉक्टर दवा के साथ जीवनशैली में बदलाव की सलाह देते हैं। इसका उद्देश्य केवल LDL कम करना नहीं, बल्कि पूरे हृदय संबंधी जोखिम को कम करना होता है।
अगर कोई व्यक्ति स्टैटिन ले रहा है और साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाता है तो उपचार की समग्र रणनीति अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि हर मरीज की स्थिति अलग होती है।
दवा के साइड इफेक्ट को लेकर क्या सावधानी बरतें?
स्टैटिन आम तौर पर व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती हैं, लेकिन कुछ लोगों में साइड इफेक्ट हो सकते हैं। मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी जैसी शिकायत कुछ मरीजों में सामने आ सकती है। दुर्लभ मामलों में गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।
अगर किसी व्यक्ति को स्टैटिन शुरू करने के बाद कोई नया या परेशान करने वाला लक्षण महसूस होता है तो उसे डॉक्टर को बताना चाहिए। डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि दवा जारी रखनी है, खुराक बदलनी है या कोई दूसरा विकल्प देखना है।
खुद से दवा बंद करना उचित नहीं है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हृदय रोग या स्ट्रोक का उच्च जोखिम है।
नई स्टडी मरीजों के लिए क्या संदेश देती है?
इस अध्ययन का बड़ा संदेश यह है कि किसी दवा के प्रभाव को केवल एक परिणाम से नहीं देखा जाना चाहिए। स्टैटिन से अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं में कमी आ सकती है, लेकिन मरीजों की नियमित निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बनी रह सकती है।
यह स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर बड़ी संख्या में लोगों को लंबे समय तक स्टैटिन दी जाती है तो डॉक्टर विजिट, जांच और दवा की निगरानी के लिए संसाधनों की जरूरत होगी।
दूसरी ओर, यदि दवा गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं को कम करने में मदद करती है तो इससे अस्पतालों पर गंभीर बीमारी से जुड़ा दबाव कम हो सकता है।
कोलेस्ट्रॉल को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं
कई लोग बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। लेकिन लंबे समय तक उच्च LDL शरीर की रक्त वाहिकाओं पर असर डाल सकता है और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।
इसीलिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना उपयोगी हो सकता है। अगर रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल अधिक आता है तो डॉक्टर व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य इतिहास और जोखिम को देखते हुए उपचार की सलाह दे सकते हैं।
केवल एक रिपोर्ट में LDL अधिक आने का मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को तुरंत दवा शुरू करनी होगी। उपचार का फैसला व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर किया जाता है।
ऑक्सफोर्ड से जुड़ी नई रिसर्च ने स्टैटिन के इस्तेमाल और स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध पर प्रकाश डाला है। अध्ययन में स्टैटिन लेने के साथ अस्पताल में भर्ती होने की घटनाओं में कमी देखी गई, जबकि कुल स्वास्थ्य सेवाओं के इस्तेमाल में बढ़ोतरी भी सामने आई।
इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि स्टैटिन सभी के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल व्यक्ति के हृदय रोग के जोखिम, कोलेस्ट्रॉल स्तर और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
अगर आप पहले से स्टैटिन ले रहे हैं तो किसी नई रिसर्च के आधार पर अपनी दवा खुद से बंद न करें। दवा की जरूरत, खुराक या विकल्प को लेकर अपने डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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