20 की उम्र में शरीर के अंदर शुरू हो गया था खतरनाक खेल! बाहर से बिल्कुल फिट दिखने वाले युवाओं में मिली ये गंभीर बीमारी
नई दिल्ली: कभी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी बीमारियों को उम्र बढ़ने के साथ जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। भारत में युवाओं के बीच भी इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और मेटाबॉलिक समस्याएं दिखाई दे रही हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से कई समस्याएं शुरुआती दौर में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के मौजूद रह सकती हैं।
हाल ही में प्रकाशित कई अध्ययनों और स्वास्थ्य रिपोर्टों ने इस बदलती तस्वीर की ओर ध्यान खींचा है। खासकर 20 से 30 साल की उम्र के लोगों में metabolic health को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, नींद की गड़बड़ी, तनाव और बढ़ता पेट का मोटापा इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण हो सकते हैं।
20 साल की उम्र में शरीर के अंदर क्या बदल रहा है?
मुंबई में 16 से 25 साल के 1,313 किशोरों और युवाओं पर किए गए एक community-based अध्ययन में metabolic health को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिले। अध्ययन में करीब 39.7 फीसदी प्रतिभागियों में hyperinsulinemia और 17.3 फीसदी में insulin resistance पाई गई। वहीं 4.5 फीसदी प्रतिभागियों में prediabetes दर्ज किया गया।
Hyperinsulinemia का मतलब है कि शरीर में insulin का स्तर सामान्य से ज्यादा हो सकता है। यह स्थिति insulin resistance से जुड़ी हो सकती है और भविष्य में type-2 diabetes के जोखिम का संकेत बन सकती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ ऐसे युवा भी metabolic समस्याओं के संकेत लेकर सामने आए जिनका वजन सामान्य था। अध्ययन में सामान्य या कम वजन वाले प्रतिभागियों के एक हिस्से में भी hyperinsulinemia पाई गई। इसका मतलब यह है कि केवल शरीर का वजन देखकर किसी व्यक्ति को पूरी तरह स्वस्थ मान लेना सही नहीं हो सकता।
फैटी लिवर अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं
युवाओं में बढ़ती चिंता का दूसरा बड़ा कारण फैटी लिवर है। एक population-based भारतीय अध्ययन में औसत उम्र करीब 24 साल वाले 2,373 युवा वयस्कों को शामिल किया गया था। अध्ययन में करीब 27.4 फीसदी प्रतिभागियों में MASLD, यानी metabolic dysfunction-associated steatotic liver disease, के संकेत मिले।
MASLD को आम भाषा में metabolic कारणों से जुड़ा fatty liver कहा जा सकता है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा हो सकता है। कई मामलों में शुरुआत में व्यक्ति को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती।
इसी वजह से फैटी लिवर को कई बार संयोग से होने वाली जांच के दौरान पता चलता है। समस्या तब गंभीर हो सकती है जब लिवर में लंबे समय तक सूजन या नुकसान बना रहे और धीरे-धीरे fibrosis यानी scar tissue बनने लगे।
सिर्फ मोटापा जिम्मेदार नहीं
फैटी लिवर और metabolic diseases को लेकर एक आम धारणा है कि ये केवल मोटे लोगों को होती हैं। लेकिन हालिया भारतीय शोध इस धारणा को चुनौती देते हैं।
युवाओं पर किए गए अध्ययन में BMI और waist-hip ratio के अलावा शरीर में मौजूद fat distribution और metabolic indicators भी महत्वपूर्ण पाए गए। वहीं मुंबई के युवाओं पर हुए अध्ययन में सामान्य वजन वाले प्रतिभागियों में भी insulin-related abnormalities दिखाई दीं।
इसका अर्थ यह है कि कोई व्यक्ति बाहर से दुबला या सामान्य वजन का दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके शरीर में abdominal fat, insulin resistance या अन्य metabolic risk factors मौजूद हो सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर भी कम उम्र में दे रहा दस्तक
युवाओं में केवल diabetes और fatty liver ही चिंता का विषय नहीं हैं। High Blood Pressure यानी hypertension भी कम उम्र में दिखाई देने वाली metabolic समस्याओं के समूह का हिस्सा बनता जा रहा है।
दिल्ली-NCR में 2026 में किए गए एक metabolic wellness study में 4,000 लोगों की screening के दौरान researchers ने पाया कि metabolic risks 20s से ही दिखाई देने लगते हैं। अध्ययन में कुछ ऐसे लोग भी मिले जिनका BMI सामान्य था, लेकिन उनके शरीर में visceral fat अधिक था।
Visceral fat वह वसा है जो पेट के अंदरूनी हिस्से में महत्वपूर्ण अंगों के आसपास जमा हो सकती है। इसे metabolic और cardiovascular risk से जोड़ा जाता है।
यानी केवल यह देखना कि किसी व्यक्ति का वजन कितना है, उसकी पूरी health picture बताने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
खराब lifestyle बन रहा है बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक युवाओं की lifestyle में तेजी से हुए बदलाव का असर metabolic health पर पड़ रहा है।
आज बड़ी संख्या में युवा लंबे समय तक बैठकर काम या पढ़ाई करते हैं। स्क्रीन टाइम बढ़ा है और रोजाना physical activity कम हो सकती है। इसके साथ ही ultra-processed food, sugary drinks, fast food और अनियमित भोजन की आदतें भी समस्या को बढ़ा सकती हैं।
इसके अलावा देर रात तक जागना और पर्याप्त नींद न लेना भी metabolic health को प्रभावित कर सकता है। लगातार तनाव भी lifestyle-related health problems के जोखिम को बढ़ाने वाले factors में शामिल है।
क्या Diabetes और Fatty Liver आपस में जुड़े हैं?
डायबिटीज और fatty liver को अलग-अलग बीमारियों के रूप में देखना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। दोनों metabolic health से जुड़े हो सकते हैं।
भारत सरकार के स्वास्थ्य-संबंधी एक आधिकारिक वक्तव्य में भी type-2 diabetes, fatty liver, hypertension, dyslipidaemia और insulin resistance को आपस में जुड़े metabolic disorders के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें यह भी कहा गया कि ये समस्याएं अब कम उम्र के भारतीयों में भी दिखाई दे रही हैं।
एक अलग multicentre भारतीय अध्ययन में MASLD वाले मरीजों के बीच type-2 diabetes और advanced liver fibrosis के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया। शोध में शामिल 400 biopsy-proven MASLD मरीजों में 23.3 फीसदी को type-2 diabetes थी।
इससे यह समझ आता है कि diabetes और liver health को एक-दूसरे से अलग करके देखना कई मामलों में सही तस्वीर नहीं देता।
सबसे बड़ा खतरा है बीमारी का चुपचाप बढ़ना
इन बीमारियों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर सकता है।
किसी युवा को न तो कोई खास दर्द हो सकता है और न ही रोजमर्रा के काम में कोई बड़ी परेशानी। लेकिन अंदर ही अंदर insulin resistance, बढ़ता blood pressure, abnormal cholesterol या liver में fat जमा होने जैसी स्थितियां विकसित हो सकती हैं।
यही कारण है कि विशेषज्ञ केवल लक्षण आने का इंतजार करने के बजाय जोखिम वाले लोगों में समय पर health screening की जरूरत पर जोर देते हैं।
खासकर जिन लोगों के परिवार में diabetes, heart disease या hypertension का इतिहास रहा है, जिन्हें पेट के आसपास ज्यादा चर्बी है, जो लंबे समय तक inactive रहते हैं या जिनका खान-पान असंतुलित है, उन्हें अपनी metabolic health को लेकर अधिक जागरूक रहना चाहिए।
युवाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के मुताबिक युवाओं को नियमित physical activity, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और स्वस्थ वजन बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
मीठे पेय और अत्यधिक processed food को सीमित करना, सब्जियों और फाइबर युक्त भोजन को आहार में शामिल करना तथा लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में शारीरिक गतिविधि करना मददगार हो सकता है।
लेकिन यदि किसी व्यक्ति को पहले से diabetes, high BP, fatty liver या cholesterol की समस्या है तो केवल lifestyle changes के भरोसे दवा बंद करना या उपचार बदलना सही नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
क्या हर युवा को बीमारी है?
नहीं। इन अध्ययनों के आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि हर युवा diabetes, hypertension या fatty liver से पीड़ित है। अलग-अलग studies में अलग population, जांच के तरीके और definitions इस्तेमाल की गई हैं।
इन शोधों का मुख्य संदेश यह है कि metabolic health से जुड़े जोखिम कम उम्र में भी शुरू हो सकते हैं और कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं।
इसलिए युवाओं में prevention और early detection पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
भारत में diabetes, high BP और fatty liver जैसी बीमारियों की तस्वीर बदल रही है। अब ये समस्याएं केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही हैं। 16 से 25 वर्ष के युवाओं पर हुए अध्ययन में insulin resistance और hyperinsulinemia के महत्वपूर्ण स्तर सामने आए, जबकि एक अन्य भारतीय अध्ययन में करीब 27 फीसदी युवा वयस्कों में MASLD के संकेत मिले।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई metabolic समस्याएं शुरुआत में चुपचाप विकसित हो सकती हैं। इसलिए कम उम्र में ही स्वस्थ lifestyle अपनाना और जोखिम होने पर डॉक्टर की सलाह से समय पर जांच कराना आगे चलकर diabetes, heart disease और liver-related complications के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं