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दांतों की इस छोटी-सी गलती से दिल पर पड़ रहा था बड़ा असर? वैज्ञानिकों के खुलासे ने बढ़ाई चिंता!

 


नई दिल्ली: जब भी हार्ट डिजीज की बात होती है, तो आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और धूम्रपान जैसे कारणों का जिक्र किया जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिकों का ध्यान एक ऐसी समस्या की ओर भी बढ़ रहा है, जिसे लोग अक्सर मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं—मुंह और दांतों की खराब सेहत

मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों में सूजन, दांतों के आसपास बैक्टीरिया का जमा होना और लंबे समय तक रहने वाली gum disease को केवल दांतों की समस्या मानना हमेशा सही नहीं हो सकता। शोधकर्ताओं ने लंबे समय से periodontal disease यानी मसूड़ों की गंभीर बीमारी और cardiovascular health के बीच संभावित संबंधों का अध्ययन किया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मसूड़ों की बीमारी सीधे तौर पर हार्ट अटैक का कारण बनती है। संबंध जटिल है और इस पर अभी भी शोध जारी है।

दांतों से दिल तक कैसे पहुंच सकती है चिंता?

मुंह में मौजूद बैक्टीरिया सामान्य स्थिति में समस्या नहीं बनाते। लेकिन जब oral hygiene खराब होती है और मसूड़ों में लंबे समय तक सूजन रहती है, तो periodontal disease विकसित हो सकती है।

गंभीर gum disease में मसूड़ों के ऊतक क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और वहां मौजूद बैक्टीरिया तथा inflammatory substances शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया और cardiovascular system के बीच संभावित संबंधों पर कई अध्ययन किए हैं।

एक संभावित mechanism यह है कि लंबे समय तक शरीर में बनी inflammation रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से researchers oral inflammation और cardiovascular disease के बीच संबंध को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या मसूड़ों की बीमारी से Heart Attack हो सकता है?

इस सवाल का सीधा जवाब देना जल्दबाजी होगी।

कुछ observational studies में periodontal disease और cardiovascular disease के बीच association देखा गया है, लेकिन association का अर्थ यह नहीं है कि एक बीमारी दूसरी बीमारी का सीधा कारण है।

दोनों समस्याओं के कई common risk factors भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए smoking, diabetes, obesity और खराब lifestyle मसूड़ों और दिल दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए यदि किसी व्यक्ति को gum disease है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे निश्चित रूप से heart disease होगी। लेकिन लंबे समय तक चलने वाली gum inflammation को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।

मसूड़ों से खून आना क्यों हो सकता है बड़ा संकेत?

ब्रश करते समय कभी-कभार हल्का खून आना कई कारणों से हो सकता है। लेकिन यदि मसूड़ों से बार-बार खून आता है, उनमें सूजन या लालिमा रहती है, दांतों से बदबू आती है या दांत हिलने लगे हैं, तो यह periodontal disease का संकेत हो सकता है।

कई लोग इन लक्षणों को सामान्य मानकर महीनों या वर्षों तक dentist के पास नहीं जाते। यही समस्या आगे बढ़कर दांतों और मसूड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

इसलिए लगातार bleeding gums को केवल “ब्रश ज्यादा जोर से करने” का परिणाम मानकर छोड़ देना उचित नहीं है।

मुंह में मौजूद बैक्टीरिया की भूमिका पर भी शोध

वैज्ञानिकों ने cardiovascular disease और oral bacteria के बीच संभावित संबंधों का भी अध्ययन किया है। कुछ research में ऐसे oral bacteria की पहचान की गई है जो शरीर में inflammatory response से जुड़े हो सकते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों ने यह भी जांचा है कि क्या oral bacteria रक्त प्रवाह में पहुंचकर रक्त वाहिकाओं या atherosclerotic plaques से संबंधित प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, इस क्षेत्र में evidence अभी इतना निर्णायक नहीं है कि यह कहा जा सके कि किसी एक खास oral bacteria की मौजूदगी सीधे heart disease पैदा करती है।

इसलिए सोशल मीडिया पर चलने वाले ऐसे दावों से सावधान रहना जरूरी है जिनमें कहा जाता है कि “दांतों का एक बैक्टीरिया सीधे हार्ट अटैक कर देता है।”

Diabetes वालों के लिए क्यों ज्यादा जरूरी है ध्यान देना?

डायबिटीज और gum disease के बीच संबंध पहले से ही चिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण माना जाता है।

लंबे समय तक बढ़ी हुई blood sugar शरीर की infection से लड़ने की क्षमता और healing process को प्रभावित कर सकती है। इससे कुछ लोगों में periodontal disease का जोखिम बढ़ सकता है।

दूसरी तरफ, गंभीर periodontal inflammation blood sugar control को भी मुश्किल बना सकती है। यानी दोनों स्थितियां एक-दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं।

इसी वजह से diabetes वाले लोगों के लिए सिर्फ blood sugar की निगरानी ही नहीं, बल्कि oral health पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है।

Heart के मरीजों को Dental Care क्यों नहीं छोड़नी चाहिए?

कई लोग heart disease का इलाज चलने के दौरान dental treatment को टाल देते हैं। लेकिन oral infection को लंबे समय तक नजरअंदाज करना सही नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति को पहले से heart disease, artificial heart valve या कोई अन्य cardiovascular condition है, तो dental procedure से पहले अपने cardiologist और dentist को अपनी medical history बताना जरूरी है।

कुछ विशेष परिस्थितियों में dental procedures से पहले antibiotic prophylaxis की जरूरत हो सकती है, लेकिन यह हर heart patient के लिए आवश्यक नहीं होती। इसका निर्णय डॉक्टर करते हैं।

इसलिए खुद से antibiotics लेना या dental treatment रोक देना दोनों ही सही तरीका नहीं है।

क्या सिर्फ ब्रश करना पर्याप्त है?

दिन में दो बार fluoride toothpaste से brushing करना oral hygiene का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन इसके साथ दांतों के बीच की सफाई भी जरूरी हो सकती है।

दांतों के बीच जमा plaque कई बार सामान्य brushing से पूरी तरह साफ नहीं होता। इसलिए dentist की सलाह के अनुसार floss या interdental cleaning का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा नियमित dental check-up से gum disease शुरुआती अवस्था में पकड़ी जा सकती है।

धूम्रपान और tobacco products से दूरी भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि tobacco oral health को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ाता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

कुछ लोगों में oral और cardiovascular health दोनों को लेकर ज्यादा सावधानी जरूरी हो सकती है। इनमें शामिल हैं:

  • डायबिटीज वाले लोग

  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करने वाले लोग

  • हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग

  • हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग

  • मोटापे से जूझ रहे लोग

  • जिनके मसूड़ों से लगातार खून आता है

  • जिनके मसूड़ों में लंबे समय से सूजन रहती है

  • जिनके दांत ढीले हो रहे हैं

  • जिनके परिवार में heart disease का इतिहास रहा है

इनमें से किसी एक factor की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को heart disease जरूर होगी। लेकिन overall health monitoring पर ध्यान देना समझदारी है।

हार्ट की बीमारी से बचने के लिए सिर्फ दांतों की सफाई काफी नहीं

यह समझना बेहद जरूरी है कि अच्छी oral hygiene heart disease की रोकथाम का अकेला उपाय नहीं है।

हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए blood pressure, cholesterol, blood sugar, weight, physical activity, diet, smoking और alcohol जैसे कई factors पर ध्यान देना होता है।

अगर किसी व्यक्ति को chest pain, सांस फूलना, अचानक पसीना आना, बेहोशी, जबड़े या हाथ में असामान्य दर्द जैसे गंभीर लक्षण हों तो इसे केवल dental problem समझना खतरनाक हो सकता है। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

विशेषज्ञों की सलाह का असली संदेश क्या है?

वैज्ञानिक शोधों का संदेश यह नहीं है कि हर gum disease वाला व्यक्ति heart disease का मरीज है। असली संदेश यह है कि मुंह की सेहत और पूरे शरीर की सेहत को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए।

Periodontal disease लंबे समय तक रहने वाली inflammatory condition हो सकती है। इसलिए इसका सही समय पर diagnosis और treatment जरूरी है।

दांतों की समस्या को केवल cosmetic issue मानने के बजाय overall health का हिस्सा समझना चाहिए।

Heart disease के जोखिम की बात करते समय cholesterol, diabetes और blood pressure जैसे factors बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन oral health को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

मसूड़ों से लगातार खून आना, सूजन, बदबू या दांतों का ढीला होना जैसी समस्याएं periodontal disease का संकेत हो सकती हैं। शोधों में periodontal disease और cardiovascular disease के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन वैज्ञानिक अभी भी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि यह संबंध किस हद तक causal है।

इसलिए सबसे सही तरीका यही है कि दांतों और मसूड़ों की समस्या को समय पर dentist को दिखाएं और साथ ही heart health के स्थापित risk factors—ब्लड प्रेशर, cholesterol, diabetes, smoking, वजन और physical activity—पर भी ध्यान दें।

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