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11 महीने तक पति को 'लापता' बताती रही पत्नी! फिर खुला ऐसा राज कि पुलिस भी रह गई सन्न, शव के किए 3 टुकड़े

 


महाराष्ट्र के नवी मुंबई से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है। रबाले एमआईडीसी पुलिस ने करीब 11 महीने पुराने एक हत्याकांड का खुलासा करते हुए मृतक बलीराम सूर्यनाथ कुशवाह की पत्नी सुनीता कुशवाह और उसके कथित प्रेमी राहुल दशरथ प्रजापति को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने अवैध संबंधों में बाधा बनने पर बलीराम की हत्या कर दी और पहचान छिपाने के लिए शव के कई टुकड़े कर जंगल में अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिए।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के मुताबिक, 50 वर्षीय बलीराम सूर्यनाथ कुशवाह अपने परिवार के साथ नवी मुंबई के ऐरोली स्थित यादव नगर इलाके में रहते थे। परिवार में उनकी पत्नी सुनीता और दो बच्चे भी शामिल थे।

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि सुनीता की पहचान घणसोली निवासी राहुल दशरथ प्रजापति से हुई थी, जो ऑटो रिक्शा चालक बताया जा रहा है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कथित प्रेम संबंध बन गए।

पुलिस का दावा है कि जब बलीराम को इस संबंध की जानकारी मिली तो उन्होंने इसका विरोध किया। इसके बाद कथित रूप से दोनों ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची।

बच्चों को पहले भेजा रिश्तेदार के घर

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने योजना के तहत पहले दोनों बच्चों को दो दिनों के लिए रिश्तेदार के घर भेज दिया ताकि घर में कोई गवाह मौजूद न रहे।

इसके बाद कथित तौर पर 9 अगस्त 2025 की रात जब बलीराम घर में सो रहे थे, तब उनकी गला दबाकर हत्या कर दी गई।

पुलिस का कहना है कि हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की।

शव के टुकड़े करने का आरोप

जांच अधिकारियों के अनुसार, हत्या के बाद शव की पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसे कई हिस्सों में काटा गया।

पुलिस का आरोप है कि शव के टुकड़ों को अलग-अलग बोरियों और चादरों में पैक किया गया। इसके बाद उन्हें कथित रूप से ऑटो रिक्शा में रखकर गवली देव पहाड़ी के जंगल क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया गया।

हालांकि पुलिस अभी तक सभी अवशेष बरामद नहीं कर सकी है।

हत्या के बाद बदल लिया ठिकाना

पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के बाद सुनीता ने यादव नगर स्थित मकान किराए पर दे दिया।

इसके बाद वह अपने दोनों बच्चों के साथ कथित रूप से राहुल के घर घणसोली में रहने लगी।

इस दौरान परिवार और रिश्तेदारों को बताया जाता रहा कि बलीराम घर छोड़कर कहीं चले गए हैं।

महीनों तक सभी को करती रही गुमराह

पुलिस के अनुसार, करीब आठ महीने तक परिवार को यही बताया जाता रहा कि बलीराम स्वयं घर छोड़कर चले गए हैं।

इस बीच किसी को भी हत्या की भनक नहीं लगी।

लेकिन मामला तब बदल गया जब बलीराम का भाई उनसे मिलने पहुंचा।

भाई को हुआ शक

पुलिस के अनुसार, जब बलीराम के भाई ने उनके बारे में जानकारी मांगी तो सुनीता कथित रूप से स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी।

बार-बार अलग-अलग बातें कहने और टालमटोल करने से परिवार को शक हुआ।

इसके बाद बलीराम की गुमशुदगी की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई।

यहीं से जांच की दिशा बदल गई।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड से मिला बड़ा सुराग

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण किया।

पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि दोनों लगातार संपर्क में थे।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए कई बार मोबाइल नंबर और सिम कार्ड बदलते रहे, लेकिन तकनीकी जांच के जरिए उनके बीच लगातार बातचीत के प्रमाण मिले।

पूछताछ में सामने आई साजिश

पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की गई।

पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कई विरोधाभास सामने आए।

इसके बाद जब तकनीकी साक्ष्यों का सामना कराया गया तो पुलिस के अनुसार दोनों ने अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली।

हालांकि अदालत में दोष सिद्ध होना अभी बाकी है और अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

अवशेषों की तलाश जारी

पुलिस आरोपियों की निशानदेही पर गवली देव पहाड़ी क्षेत्र में मृतक के अवशेषों की तलाश कर रही है।

हालांकि घटना को लगभग 11 महीने बीत जाने के कारण यह काम काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

जांच एजेंसियां फॉरेंसिक विशेषज्ञों की सहायता भी ले रही हैं।

रिश्तों में बढ़ते अपराध चिंता का विषय

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में व्यक्तिगत संबंधों और प्रेम प्रसंगों से जुड़े कई हत्या के मामले सामने आए हैं।

हालांकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और हर घटना का कानूनी मूल्यांकन उसके साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

ऐसे मामलों में पुलिस के लिए डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

जांच के दौरान—

  • फॉरेंसिक रिपोर्ट,

  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य,

  • गवाहों के बयान,

  • बरामदगी,

  • और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों

का विश्लेषण किया जा रहा है।

यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं।

अंतिम रूप से किसी भी आरोपी को दोषी या निर्दोष घोषित करने का अधिकार केवल न्यायालय के पास होता है।

इसलिए मामले में अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय होगा।

नवी मुंबई का यह मामला एक बार फिर रिश्तों में विश्वास, प्रेम संबंधों और अपराध के जटिल पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस का आरोप है कि पत्नी और उसके कथित प्रेमी ने मिलकर पति की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने की साजिश रची। फिलहाल दोनों आरोपी गिरफ्तार हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस मृतक के अवशेषों की तलाश के साथ-साथ अन्य साक्ष्य भी जुटा रही है। मामले में अंतिम सत्य और कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

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