हिप फ्रैक्चर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी! नई स्टडी में बड़ा खुलासा, हर 5 में से 1 मरीज की एक साल के भीतर हो सकती है मौत
नई दिल्ली: बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का कमजोर होना एक सामान्य समस्या मानी जाती है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक नई मेडिकल स्टडी ने बुजुर्गों में होने वाले हिप फ्रैक्चर (कूल्हे की हड्डी टूटना) को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। अध्ययन के अनुसार, हिप फ्रैक्चर केवल एक सामान्य हड्डी की चोट नहीं है, बल्कि यह कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिप फ्रैक्चर के बाद पहले एक साल के भीतर मृत्यु का खतरा काफी बढ़ जाता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हों।
रिपोर्ट के मुताबिक, हर 5 में से लगभग 1 मरीज की हिप फ्रैक्चर के बाद एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो सकती है। यह आंकड़ा डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
क्यों बढ़ रही है हिप फ्रैक्चर की समस्या?
भारत सहित दुनिया के कई देशों में बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम होने लगता है। विशेष रूप से महिलाओं में रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ती है।
कमजोर हड्डियां छोटी सी फिसलन या हल्की गिरावट में भी टूट सकती हैं। सबसे अधिक प्रभावित होने वाली हड्डियों में कूल्हे (Hip), रीढ़ और कलाई शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिप फ्रैक्चर के बाद मरीज का लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ता है, जिससे कई अन्य जटिलताएं भी पैदा हो जाती हैं।
नई स्टडी में क्या सामने आया?
हाल ही में प्रकाशित मेडिकल अध्ययन में हजारों बुजुर्ग मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि हिप फ्रैक्चर के बाद मरीजों में निम्न समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं—
फेफड़ों में संक्रमण (निमोनिया)
खून के थक्के (Blood Clots)
हृदय संबंधी जटिलताएं
मांसपेशियों की कमजोरी
चलने-फिरने की क्षमता में कमी
मानसिक तनाव और अवसाद
इन्हीं कारणों से हिप फ्रैक्चर के बाद मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों का समय पर ऑपरेशन नहीं हुआ या जिन्हें पर्याप्त फिजियोथेरेपी नहीं मिली, उनमें जटिलताओं का खतरा और अधिक था।
बुजुर्गों के लिए क्यों है ज्यादा खतरनाक?
युवा लोगों में हड्डियां जल्दी जुड़ जाती हैं, लेकिन बुजुर्गों में शरीर की रिकवरी क्षमता कम हो जाती है।
यदि किसी बुजुर्ग को पहले से—
डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
हृदय रोग
किडनी की बीमारी
सांस संबंधी समस्या
जैसी बीमारियां हैं, तो हिप फ्रैक्चर के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार मरीज की मौत सीधे हड्डी टूटने से नहीं बल्कि उसके बाद होने वाली जटिलताओं के कारण होती है।
कौन लोग सबसे ज्यादा जोखिम में?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लोगों में हिप फ्रैक्चर का खतरा अधिक रहता है—
60 वर्ष से अधिक आयु के लोग
ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित मरीज
विटामिन D और कैल्शियम की कमी वाले लोग
बार-बार गिरने वाले बुजुर्ग
लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले मरीज
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले लोग
कम शारीरिक गतिविधि करने वाले व्यक्ति
हिप फ्रैक्चर के शुरुआती लक्षण
यदि गिरने के बाद व्यक्ति में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए—
कूल्हे में तेज दर्द
खड़े होने या चलने में असमर्थता
पैर का छोटा दिखाई देना
पैर का बाहर की ओर मुड़ जाना
कूल्हे के आसपास सूजन या नीला पड़ना
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि दर्द सहकर घर पर बैठना खतरनाक साबित हो सकता है।
समय पर इलाज क्यों जरूरी है?
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि हिप फ्रैक्चर के अधिकांश मामलों में सर्जरी सबसे प्रभावी उपचार होती है।
यदि मरीज की स्थिति अनुमति देती है तो 24 से 48 घंटे के भीतर ऑपरेशन करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
इसके बाद फिजियोथेरेपी शुरू करना भी बेहद जरूरी माना जाता है ताकि मरीज जल्द से जल्द फिर से चल-फिर सके।
इलाज के बाद भी रहती हैं चुनौतियां
हिप फ्रैक्चर के बाद कई मरीज पहले जैसी शारीरिक क्षमता वापस नहीं पा पाते।
कुछ मरीजों को—
वॉकर का सहारा लेना पड़ता है।
लंबे समय तक फिजियोथेरेपी करनी पड़ती है।
दैनिक कार्यों में परिवार की मदद की जरूरत पड़ती है।
मानसिक अवसाद और आत्मविश्वास की कमी का सामना करना पड़ता है।
इसी कारण डॉक्टर इलाज के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक सहयोग को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञों के अनुसार हिप फ्रैक्चर से बचाव काफी हद तक संभव है।
1. कैल्शियम और विटामिन D का पर्याप्त सेवन
दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे और धूप हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
2. नियमित व्यायाम
रोजाना पैदल चलना, हल्का व्यायाम और संतुलन बढ़ाने वाली एक्सरसाइज गिरने का खतरा कम करती हैं।
3. घर को सुरक्षित बनाएं
फर्श पर फिसलन न रहने दें।
बाथरूम में ग्रैब बार लगाएं।
पर्याप्त रोशनी रखें।
ढीले कालीन हटाएं।
4. नियमित बोन डेंसिटी जांच
50 वर्ष की आयु के बाद विशेषकर महिलाओं को समय-समय पर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।
5. संतुलित आहार अपनाएं
प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर भोजन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
डॉक्टरों की सलाह
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई बुजुर्ग गिर जाए, तो इसे सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कई बार मामूली गिरावट भी गंभीर फ्रैक्चर का कारण बन सकती है। शुरुआती जांच और समय पर उपचार मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नई मेडिकल स्टडी ने यह स्पष्ट किया है कि हिप फ्रैक्चर केवल हड्डी टूटने की समस्या नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है। अध्ययन में सामने आया कि हिप फ्रैक्चर के बाद पहले एक वर्ष में मृत्यु का जोखिम उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाता है, विशेषकर उन लोगों में जो पहले से अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बढ़ती उम्र में हड्डियों की नियमित जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D, नियमित व्यायाम तथा गिरने से बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है। यदि किसी बुजुर्ग को गिरने के बाद कूल्हे में दर्द या चलने में परेशानी हो, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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