महिलाओं की इस बीमारी से बचा सकती है एक वैक्सीन! डॉक्टर बोले- सही उम्र में लग गया टीका तो कैंसर का खतरा होगा काफी कम
नई दिल्ली: महिलाओं में होने वाले कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हर साल हजारों महिलाओं की जान इस बीमारी के कारण चली जाती है। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, जागरूकता और एचपीवी (HPV) वैक्सीन के जरिए इस कैंसर के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।
हाल के वर्षों में भारत समेत कई देशों में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीन को लेकर जागरूकता बढ़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सही उम्र में यह टीका लगवा लिया जाए तो भविष्य में इस कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग पर जोर दे रहे हैं।
क्या है सर्वाइकल कैंसर?
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय (यूटरस) के निचले हिस्से यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में विकसित होने वाला कैंसर है। यह महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक माना जाता है।
विश्व स्तर पर हर वर्ष लाखों नए मामले सामने आते हैं। भारत में भी यह महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शुरुआती अवस्था में इस बीमारी का पता चल जाए तो इसका सफल इलाज संभव है। लेकिन अधिकांश मामलों में लक्षण देर से दिखाई देते हैं, जिससे उपचार कठिन हो सकता है।
HPV वायरस क्या है?
डॉक्टरों के अनुसार सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (Human Papillomavirus-HPV) है।
HPV वायरस के 100 से अधिक प्रकार पाए जाते हैं, लेकिन इनमें से कुछ प्रकार, विशेष रूप से HPV-16 और HPV-18, सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
हर HPV संक्रमण कैंसर में नहीं बदलता। कई मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को अपने आप खत्म कर देती है। लेकिन यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे, तो समय के साथ कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है।
कैसे बचाती है HPV वैक्सीन?
एचपीवी वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।
टीका लगने के बाद शरीर एंटीबॉडी बनाता है, जिससे भविष्य में HPV संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं।
हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग आवश्यक रहती है।
किस उम्र में लगवानी चाहिए वैक्सीन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी वैक्सीन का सबसे अधिक लाभ तब मिलता है जब इसे वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाए।
सामान्य तौर पर—
9 से 14 वर्ष की आयु में टीकाकरण सबसे प्रभावी माना जाता है।
15 से 26 वर्ष तक भी डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लगवाई जा सकती है।
कुछ परिस्थितियों में 27 से 45 वर्ष की आयु तक भी डॉक्टर व्यक्तिगत जोखिम का आकलन कर टीकाकरण की सलाह दे सकते हैं।
भारत में उपलब्ध दिशानिर्देशों के अनुसार किसे और कब वैक्सीन दी जाए, इसका अंतिम निर्णय चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लिया जाना चाहिए।
क्या केवल लड़कियों को ही लगती है यह वैक्सीन?
हाल के वर्षों में कई देशों ने लड़कों के लिए भी HPV वैक्सीन की सिफारिश की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वायरस के प्रसार को कम करने में मदद मिलती है और HPV से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा भी घट सकता है।
हालांकि भारत में वैक्सीन संबंधी कार्यक्रम और सिफारिशें समय-समय पर स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा तय की जाती हैं।
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण
शुरुआती अवस्था में यह बीमारी अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहती है।
जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
असामान्य योनि रक्तस्राव
मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव
रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव
संभोग के बाद रक्तस्राव
दुर्गंधयुक्त योनि स्राव
लगातार पेल्विक दर्द
कमर के निचले हिस्से में दर्द
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
किन महिलाओं में अधिक रहता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार कुछ परिस्थितियों में सर्वाइकल कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है—
लंबे समय तक HPV संक्रमण
धूम्रपान
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली
नियमित स्क्रीनिंग न कराना
असुरक्षित यौन संबंध
कई यौन साथी होना
लंबे समय तक चिकित्सकीय निगरानी का अभाव
हालांकि केवल इन कारणों की मौजूदगी का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से कैंसर हो जाएगा।
नियमित स्क्रीनिंग क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि पैप स्मीयर (Pap Smear Test) और HPV टेस्ट के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।
यदि कोशिकाओं में शुरुआती बदलाव मिल जाते हैं, तो समय रहते इलाज कर बीमारी को कैंसर बनने से पहले ही रोका जा सकता है।
इसी कारण डॉक्टर 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित अंतराल पर स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं, विशेषकर उन महिलाओं को जिनमें जोखिम अधिक हो।
क्या वैक्सीन के बाद भी कैंसर हो सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि HPV वैक्सीन कैंसर के जोखिम को काफी कम करती है, लेकिन यह 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।
इसका कारण यह है कि सर्वाइकल कैंसर के लिए HPV के अलावा भी कुछ अन्य कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए वैक्सीन के साथ नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली दोनों आवश्यक हैं।
डॉक्टरों की सलाह
स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को केवल बीमारी होने पर ही अस्पताल नहीं जाना चाहिए, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी, सुरक्षित जीवनशैली, समय-समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार HPV वैक्सीन लगवाना सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर आज भी महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह उन कैंसरों में शामिल है जिनकी रोकथाम काफी हद तक संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि HPV वैक्सीन, नियमित पैप स्मीयर और समय पर चिकित्सकीय जांच के माध्यम से इस बीमारी के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।
यदि किसी महिला को असामान्य रक्तस्राव, लगातार पेल्विक दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर पहचान और उचित उपचार न केवल बीमारी को शुरुआती चरण में नियंत्रित कर सकता है, बल्कि जीवन भी बचा सकता है।

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