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रोज पीते हैं कोल्ड ड्रिंक और पैक्ड जूस? नई ग्लोबल रिसर्च ने बढ़ाई चिंता, कैंसर के खतरे को लेकर सामने आए अहम संकेत

 


आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में कोल्ड ड्रिंक, पैक्ड फ्रूट जूस, एनर्जी ड्रिंक और अन्य मीठे पेय पदार्थ लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। गर्मी हो या किसी पार्टी का मौका, शुगर-युक्त पेय पदार्थों की खपत लगातार बढ़ रही है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समीक्षा ने इन पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि नियमित रूप से अधिक मात्रा में शुगर-स्वीटेड बेवरेज (Sugar-Sweetened Beverages) पीने से कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि यह अध्ययन जोखिम (Risk) में वृद्धि का संकेत देता है, न कि यह साबित करता है कि केवल कोल्ड ड्रिंक या जूस पीने से सीधे कैंसर हो जाता है। कैंसर एक जटिल बीमारी है, जिसमें आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कई कारक भूमिका निभाते हैं।

51 कोहोर्ट स्टडी और 158 रिपोर्टों की समीक्षा

वैज्ञानिकों ने ग्लोबल कैंसर अपडेट प्रोग्राम के तहत दुनिया भर में प्रकाशित 51 कोहोर्ट स्टडी और 158 वैज्ञानिक रिपोर्टों का विश्लेषण किया। इन अध्ययनों में लाखों लोगों के खान-पान, जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का मूल्यांकन किया गया।

इस समीक्षा में यह देखा गया कि जो लोग लंबे समय तक नियमित रूप से शुगर-युक्त पेय पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं, उनमें कुछ प्रकार के कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक पाया गया।

विशेष रूप से पैंक्रियाज (अग्न्याशय) कैंसर और कोलोरेक्टल (बड़ी आंत) कैंसर के साथ इन पेय पदार्थों के संभावित संबंध पर वैज्ञानिकों ने ध्यान दिया है।

रोजाना 355 मिलीलीटर से ज्यादा मीठे ड्रिंक पीना क्यों चिंता का विषय?

रिसर्च के अनुसार जिन लोगों ने प्रतिदिन लगभग 355 मिलीलीटर या उससे अधिक शुगर-युक्त पेय पदार्थ का सेवन किया, उनमें कुछ कैंसरों का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक देखा गया।

शोध में सामने आए प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार—

  • पैंक्रियाज कैंसर का जोखिम लगभग 9 प्रतिशत तक अधिक पाया गया।

  • कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम करीब 7 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ देखा गया।

हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि यह एक सांख्यिकीय संबंध (Association) है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि केवल कोल्ड ड्रिंक पीने से कैंसर निश्चित रूप से होगा।

ऑरेंज जूस को लेकर क्यों हुई नई चर्चा?

इस अध्ययन का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला पहलू ऑरेंज जूस को लेकर सामने आया है।

रिसर्च में संकेत मिले हैं कि अत्यधिक मात्रा में संतरे का जूस पीने और कुछ प्रकार के स्किन कैंसर के बीच संभावित संबंध देखा गया है। विशेष रूप से मेलानोमा और बेसल सेल कार्सिनोमा जैसे त्वचा कैंसर के जोखिम को लेकर वैज्ञानिकों ने आगे और शोध की आवश्यकता बताई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य मात्रा में संतरे का जूस पीना खतरनाक है, बल्कि अत्यधिक सेवन और अन्य जोखिम कारकों के संयुक्त प्रभाव का अध्ययन किया गया है।

स्किन कैंसर का जोखिम कैसे बढ़ सकता है?

डॉक्टरों के अनुसार संतरे और कुछ अन्य खट्टे फलों में फ्यूरोकोउमरिन (Furocoumarins) और सोरालेन (Psoralen) जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं।

ये तत्व त्वचा को सूर्य की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक मात्रा में ऐसे पदार्थों का सेवन करता है और लंबे समय तक तेज धूप में रहता है, तो कुछ परिस्थितियों में त्वचा पर फोटोकेमिकल प्रभाव बढ़ सकता है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इस विषय पर अभी और व्यापक शोध की आवश्यकता है और सामान्य मात्रा में फल या जूस का सेवन करने वाले लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

मोटापा भी बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि शुगर-युक्त पेय पदार्थों का सबसे बड़ा नुकसान केवल अतिरिक्त चीनी नहीं, बल्कि उससे बढ़ने वाला मोटापा है।

लगातार अधिक मात्रा में मीठे पेय पदार्थ पीने से—

  • वजन तेजी से बढ़ सकता है।

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकती है।

  • शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है।

  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है।

यही सभी स्थितियां कई प्रकार के कैंसर के जोखिम कारकों में शामिल मानी जाती हैं।

कुछ अध्ययनों में ब्रेस्ट कैंसर, ओवरी कैंसर और मोटापे से जुड़े अन्य कैंसरों के साथ भी संभावित संबंध देखने को मिले हैं, हालांकि इनके लिए अभी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

क्या डाइट ड्रिंक्स सुरक्षित हैं?

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि आर्टिफिशियल स्वीटनर वाले कुछ डाइट ड्रिंक्स में फिलहाल कैंसर के स्पष्ट प्रमाण सामान्य शुगर वाले ड्रिंक्स की तुलना में कम मिले हैं।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि इनका असीमित मात्रा में सेवन पूरी तरह सुरक्षित है।

कुछ अध्ययनों में डाइट ड्रिंक्स और ल्यूकीमिया जैसे कैंसर के बीच संभावित संबंध के संकेत मिले हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इन निष्कर्षों की अभी पुष्टि नहीं हुई है और आगे शोध जारी है।

भारतीय डॉक्टरों की क्या सलाह है?

भारत के कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी शुगर-युक्त पेय पदार्थों के अत्यधिक सेवन को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कोल्ड ड्रिंक, पैक्ड जूस या मीठे पेय पदार्थ पीने की आदत से केवल कैंसर ही नहीं बल्कि—

  • डायबिटीज

  • हाई ब्लड प्रेशर

  • फैटी लिवर

  • हृदय रोग

  • मोटापा

जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि पैक्ड जूस की जगह पूरे फल खाना अधिक लाभदायक होता है क्योंकि फलों में प्राकृतिक फाइबर मौजूद होता है, जो शरीर के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है।

क्या पूरी तरह बंद कर देना चाहिए कोल्ड ड्रिंक?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ का सीमित मात्रा में सेवन और संतुलित जीवनशैली सबसे महत्वपूर्ण है।

यदि कोई व्यक्ति कभी-कभार कोल्ड ड्रिंक या पैक्ड जूस पीता है तो केवल इसी आधार पर घबराने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन यदि यह रोजमर्रा की आदत बन चुकी है और बड़ी मात्रा में सेवन किया जा रहा है, तो इसे कम करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।

स्वस्थ विकल्प क्या हो सकते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ शुगर-युक्त ड्रिंक्स की जगह निम्न विकल्प अपनाने की सलाह देते हैं—

  • सादा पानी

  • नींबू पानी (बिना अतिरिक्त चीनी)

  • नारियल पानी

  • छाछ

  • बिना चीनी वाली ग्रीन टी

  • ताजे फल

  • घर में तैयार बिना चीनी वाले पेय

नई वैज्ञानिक समीक्षा यह संकेत देती है कि शुगर-युक्त पेय पदार्थों का अत्यधिक और नियमित सेवन कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम में वृद्धि से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि केवल कोल्ड ड्रिंक या ऑरेंज जूस पीने से कैंसर हो जाता है। कैंसर एक बहु-कारकीय बीमारी है, जिसमें खान-पान के साथ-साथ आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली संबंधी कई कारण शामिल होते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें, संतुलित आहार अपनाएं, नियमित व्यायाम करें और फलों के जूस की जगह पूरे फल खाने को प्राथमिकता दें। यही आदतें लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने और कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।

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