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थायरॉइड ने महिलाओं की बढ़ाई चिंता! जानिए क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं इसके मामले और कैसे करें बचाव



नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खान-पान और हार्मोनल बदलावों के बीच भारत में थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जिन्हें वर्षों तक यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें थायरॉइड की समस्या है। इसकी वजह यह है कि शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान, बढ़ती उम्र या व्यस्त दिनचर्या का असर समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड संबंधी बीमारियां अधिक देखने को मिलती हैं। समय पर जांच और इलाज न होने पर यह बीमारी हृदय, हड्डियों, मानसिक स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है।

क्या है थायरॉइड?

थायरॉइड गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि (Gland) होती है। यह शरीर में ऐसे हार्मोन बनाती है जो मेटाबॉलिज्म यानी शरीर की ऊर्जा उपयोग करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।

इसके अलावा थायरॉइड हार्मोन—

  • हृदय की धड़कन,

  • शरीर का तापमान,

  • वजन,

  • पाचन,

  • मांसपेशियों की कार्यक्षमता,

  • मानसिक स्वास्थ्य,

  • और ऊर्जा स्तर

पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।

थायरॉइड की मुख्य समस्याएं

डॉक्टरों के अनुसार थायरॉइड की दो प्रमुख समस्याएं होती हैं।

1. हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism)

इस स्थिति में थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती।

2. हाइपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism)

इसमें थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है।

दोनों स्थितियों के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और इनके लिए अलग उपचार की आवश्यकता होती है।

महिलाओं में क्यों ज्यादा होती है थायरॉइड की समस्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हार्मोनल बदलाव अधिक होते हैं।

निम्न परिस्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है—

  • गर्भावस्था

  • प्रसव के बाद का समय

  • रजोनिवृत्ति (Menopause)

  • ऑटोइम्यून बीमारियां

  • परिवार में थायरॉइड का इतिहास

इसी कारण महिलाओं में नियमित स्वास्थ्य जांच की सलाह दी जाती है।

हाइपोथायरॉइड के शुरुआती लक्षण

यदि थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगे तो निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • लगातार थकान

  • वजन बढ़ना

  • ठंड अधिक लगना

  • कब्ज

  • त्वचा का रूखापन

  • बाल झड़ना

  • चेहरा सूजना

  • याददाश्त कमजोर होना

  • उदासी या अवसाद जैसा महसूस होना

  • आवाज भारी होना

ये सभी लक्षण हर मरीज में एक साथ दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है।

हाइपरथायरॉइड के लक्षण

यदि थायरॉइड हार्मोन अधिक बनने लगे तो मरीज में—

  • तेजी से वजन घटना

  • घबराहट

  • हाथ कांपना

  • पसीना अधिक आना

  • दिल की धड़कन तेज होना

  • नींद कम आना

  • चिड़चिड़ापन

  • बार-बार भूख लगना

  • मांसपेशियों में कमजोरी

जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों के अनुसार यदि लंबे समय तक—

  • बिना कारण वजन बदल रहा हो,

  • अत्यधिक थकान बनी रहती हो,

  • बाल तेजी से झड़ रहे हों,

  • गर्दन में सूजन दिखाई दे,

  • मासिक धर्म अनियमित हो,

  • दिल की धड़कन असामान्य महसूस हो,

तो डॉक्टर से जांच कराना उचित रहेगा।

क्या तनाव भी बढ़ा सकता है जोखिम?

तनाव सीधे थायरॉइड का कारण नहीं माना जाता, लेकिन लगातार तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है और पहले से मौजूद समस्या के लक्षणों को बढ़ा सकता है।

इसलिए तनाव प्रबंधन भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

थायरॉइड की जांच कैसे होती है?

यदि डॉक्टर को थायरॉइड की आशंका होती है तो वे कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं—

  • TSH (Thyroid Stimulating Hormone)

  • Free T3

  • Free T4

  • आवश्यकता होने पर थायरॉइड एंटीबॉडी टेस्ट

  • कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड

इन जांचों के आधार पर बीमारी की पहचान और उपचार तय किया जाता है।

क्या थायरॉइड पूरी तरह ठीक हो सकता है?

यह बीमारी के प्रकार पर निर्भर करता है।

कई मरीजों में दवाओं और नियमित जांच के माध्यम से हार्मोन को नियंत्रित रखा जा सकता है। कुछ मामलों में लंबे समय तक दवा लेनी पड़ सकती है।

डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करना या उसकी मात्रा बदलना नुकसानदायक हो सकता है।

क्या खान-पान का असर पड़ता है?

संतुलित भोजन थायरॉइड के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि—

  • पर्याप्त प्रोटीन लें।

  • हरी सब्जियां और फल खाएं।

  • साबुत अनाज शामिल करें।

  • अधिक जंक फूड से बचें।

  • अत्यधिक चीनी और प्रोसेस्ड फूड कम करें।

यदि किसी मरीज को आयोडीन, आयरन या विटामिन की कमी है, तो डॉक्टर आवश्यक सलाह दे सकते हैं।

क्या हर थायरॉइड मरीज को आयोडीन लेना चाहिए?

नहीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के अतिरिक्त आयोडीन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। भारत में सामान्य आयोडीन युक्त नमक का उपयोग अधिकांश लोगों की आवश्यकता पूरी कर देता है।

किन लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए?

  • 35–40 वर्ष से अधिक आयु के लोग।

  • परिवार में थायरॉइड का इतिहास।

  • गर्भवती महिलाएं।

  • डायबिटीज या अन्य ऑटोइम्यून बीमारी वाले मरीज।

  • बार-बार वजन बदलने वाले लोग।

  • लंबे समय से हार्मोनल समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति।

थायरॉइड से बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें

  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।

  • संतुलित भोजन करें।

  • पर्याप्त नींद लें।

  • नियमित व्यायाम करें।

  • तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान अपनाएं।

  • डॉक्टर की सलाह के बिना हार्मोनल दवाओं का सेवन न करें।

  • किसी भी असामान्य लक्षण को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

यदि आपको—

  • अचानक दिल की धड़कन बहुत तेज महसूस हो,

  • गर्दन में तेजी से सूजन बढ़े,

  • सांस लेने या निगलने में कठिनाई हो,

  • अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो,

तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

थायरॉइड की बीमारी आज भारत में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, सही दवाओं और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लगातार थकान, वजन में असामान्य बदलाव, बाल झड़ना, दिल की धड़कन तेज होना या अन्य हार्मोनल लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। शुरुआती पहचान और विशेषज्ञ की सलाह ही बेहतर स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है।

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