किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये 7 संकेत! ज्यादातर लोग समझते हैं सामान्य कमजोरी, डॉक्टरों ने दी समय रहते जांच कराने की सलाह
नई दिल्ली। किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने, पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने तथा ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने जैसे कई जरूरी काम करती है। लेकिन चिंता की बात यह है कि किडनी से जुड़ी बीमारियां अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती रहती हैं। जब तक मरीज को बीमारी का पता चलता है, तब तक कई मामलों में किडनी काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए और डॉक्टर से सलाह ली जाए, तो बीमारी को बढ़ने से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए शरीर में होने वाले कुछ बदलावों को सामान्य कमजोरी या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किडनी का काम क्या होता है?
मानव शरीर में दो किडनियां होती हैं। इनका मुख्य कार्य है—
खून से अपशिष्ट पदार्थों को छानना।
अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकालना।
शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना।
लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करने वाले हार्मोन का उत्पादन।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में योगदान।
हड्डियों को स्वस्थ रखने में सहायता।
जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
किडनी खराब होने के शुरुआती 7 संकेत
1. लगातार थकान और कमजोरी
यदि पर्याप्त आराम और नींद के बाद भी लगातार थकान महसूस होती है, तो यह किडनी की कार्यक्षमता कम होने का एक संकेत हो सकता है। किडनी की बीमारी में शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं और कुछ मरीजों में एनीमिया भी विकसित हो सकता है, जिससे कमजोरी महसूस होती है।
2. पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम बाहर निकालने का काम करती है। जब यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है, जिससे पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे सकती है।
3. बार-बार पेशाब आने या पेशाब में बदलाव
यदि पेशाब की मात्रा, रंग, गंध या बार-बार पेशाब आने की आदत में अचानक बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन बदलावों में शामिल हो सकते हैं—
रात में बार-बार पेशाब आना।
झागदार पेशाब।
पेशाब कम या ज्यादा होना।
पेशाब में खून दिखाई देना।
ऐसे लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है।
4. भूख कम लगना और मतली
किडनी सही तरीके से काम नहीं करने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिससे भूख कम लग सकती है, मुंह का स्वाद खराब हो सकता है या मतली महसूस हो सकती है।
5. त्वचा में खुजली
लगातार खुजली भी किडनी की समस्या का संकेत हो सकती है। जब शरीर में अपशिष्ट पदार्थ अधिक मात्रा में जमा हो जाते हैं, तो त्वचा प्रभावित हो सकती है।
हालांकि खुजली के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए जांच आवश्यक है।
6. सांस फूलना
यदि बिना अधिक मेहनत किए सांस फूलने लगे, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में किडनी की बीमारी के कारण शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने या एनीमिया विकसित होने से भी सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
7. ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में विषैले पदार्थ बढ़ सकते हैं, जिससे कुछ लोगों को ध्यान लगाने में कठिनाई, भूलने की समस्या या मानसिक थकान महसूस हो सकती है।
किन लोगों में खतरा ज्यादा होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लोगों में किडनी रोग होने का जोखिम अधिक हो सकता है—
डायबिटीज के मरीज।
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग।
मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति।
धूम्रपान करने वाले लोग।
परिवार में किडनी रोग का इतिहास।
60 वर्ष से अधिक आयु के लोग।
लंबे समय तक कुछ दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग करने वाले व्यक्ति।
किडनी की बीमारी कैसे पता चलती है?
यदि डॉक्टर को किडनी संबंधी समस्या का संदेह होता है, तो वे कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं—
ब्लड टेस्ट (सीरम क्रिएटिनिन)
यूरिन टेस्ट
eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate)
यूरिन में प्रोटीन की जांच
अल्ट्रासाउंड
आवश्यकता अनुसार अन्य विशेष जांच
इन जांचों के आधार पर डॉक्टर किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करते हैं।
क्या किडनी की बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है?
यह बीमारी के कारण और चरण पर निर्भर करता है।
यदि शुरुआती चरण में समस्या का पता चल जाए और डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य कारणों को नियंत्रित कर लिया जाए, तो बीमारी की प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।
गंभीर मामलों में डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण (Transplant) की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
किडनी को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
डॉक्टर कुछ सरल आदतें अपनाने की सलाह देते हैं—
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं (यदि डॉक्टर ने किसी विशेष कारण से पानी सीमित करने को न कहा हो)।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें।
डायबिटीज होने पर शुगर नियंत्रित रखें।
संतुलित भोजन करें।
नमक का सेवन सीमित रखें।
नियमित व्यायाम करें।
धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक सेवन न करें।
समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि आपको—
पेशाब में खून दिखाई दे।
लगातार सूजन बनी रहे।
पेशाब बहुत कम होने लगे।
तेज सांस फूलने लगे।
लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी हो।
तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। स्वयं इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
किडनी की बीमारी को अक्सर "साइलेंट डिजीज" कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत हल्के या बिल्कुल नहीं होते। लेकिन शरीर कुछ संकेत जरूर देता है, जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी है। लगातार थकान, सूजन, पेशाब में बदलाव, भूख कम लगना या सांस फूलना जैसी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
विशेष रूप से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान, संतुलित जीवनशैली और उचित उपचार से किडनी की कार्यक्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।

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