वायरल बुखार के बाद भी खतरा खत्म नहीं! डॉक्टरों ने दी चेतावनी- किडनी पर पड़ सकता है गंभीर असर, इन संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
नई दिल्ली: मानसून के मौसम में वायरल बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि बुखार उतरने के बाद बीमारी पूरी तरह खत्म हो गई है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में वायरल संक्रमण के बाद शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर किडनी (गुर्दे) पर भी असर पड़ सकता है। यदि समय रहते इसकी पहचान न हो तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) बताते हैं कि कुछ वायरल संक्रमण शरीर में ऐसी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं, जिससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। यही वजह है कि बुखार ठीक होने के बाद भी यदि कुछ असामान्य लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्यों प्रभावित होती है किडनी?
किडनी शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, रक्तचाप नियंत्रित रखने तथा शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने का काम करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार वायरल संक्रमण के दौरान कई बार शरीर में सूजन (Inflammation), डिहाइड्रेशन या प्रतिरक्षा प्रणाली की अत्यधिक प्रतिक्रिया किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
कुछ वायरस सीधे किडनी की कोशिकाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं, जबकि कई मामलों में संक्रमण के बाद होने वाली जटिलताएं गुर्दों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
किन वायरल बीमारियों के बाद बढ़ सकता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार कुछ वायरल संक्रमणों के बाद किडनी संबंधी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। इनमें शामिल हैं—
डेंगू
कोविड-19
इन्फ्लूएंजा
वायरल फीवर
चिकनगुनिया
कुछ अन्य वायरल संक्रमण
हालांकि हर मरीज में ऐसा नहीं होता। अधिकांश लोग पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन जिन लोगों में पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनमें जोखिम अधिक हो सकता है।
कौन से लक्षण दे सकते हैं खतरे का संकेत?
यदि वायरल बुखार ठीक होने के बाद निम्न लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए—
पेशाब कम आना
पेशाब में झाग आना
पेशाब में खून दिखाई देना
पैरों या चेहरे पर सूजन
लगातार कमजोरी
अत्यधिक थकान
सांस फूलना
भूख कम लगना
मतली या उल्टी
हाई ब्लड प्रेशर का अचानक बढ़ जाना
विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार शुरुआती किडनी डैमेज बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकता है। इसलिए जोखिम वाले मरीजों को जांच जरूर करानी चाहिए।
डिहाइड्रेशन भी बन सकता है बड़ा कारण
वायरल बुखार के दौरान तेज बुखार, उल्टी, दस्त और पसीना आने के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
यदि समय पर पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लिए जाएं तो किडनी तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह कम हो सकता है, जिससे एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury-AKI) का खतरा बढ़ जाता है।
यही कारण है कि डॉक्टर वायरल बुखार के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लोगों में वायरल संक्रमण के बाद किडनी संबंधी जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है—
60 वर्ष से अधिक आयु के लोग
डायबिटीज के मरीज
हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज
पहले से किडनी रोग से पीड़ित लोग
हृदय रोगी
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीज
लंबे समय से दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन करने वाले लोग
इन लोगों को वायरल बुखार के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच करानी चाहिए।
कौन-कौन सी जांच जरूरी हो सकती हैं?
यदि डॉक्टर को किडनी पर असर होने का संदेह हो, तो निम्न जांच कराई जा सकती हैं—
सीरम क्रिएटिनिन
ब्लड यूरिया
यूरिन रूटीन टेस्ट
यूरिन प्रोटीन जांच
इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट
किडनी अल्ट्रासाउंड (जरूरत पड़ने पर)
इन जांचों से किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जा सकता है।
क्या हर वायरल बुखार के बाद किडनी खराब हो जाती है?
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
अधिकांश वायरल संक्रमण बिना किसी स्थायी नुकसान के ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि मरीज को पहले से कोई गंभीर बीमारी हो या संक्रमण बहुत गंभीर हो जाए, तो किडनी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।
इलाज कैसे किया जाता है?
यदि समय रहते समस्या का पता चल जाए तो अधिकांश मामलों में इलाज संभव होता है।
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार—
पर्याप्त तरल पदार्थ
संक्रमण का उपचार
रक्तचाप नियंत्रण
ब्लड शुगर नियंत्रण
आवश्यक दवाएं
किडनी की नियमित निगरानी
जैसे उपाय अपनाते हैं।
गंभीर मामलों में अस्थायी डायलिसिस की आवश्यकता भी पड़ सकती है, लेकिन सभी मरीजों में इसकी जरूरत नहीं होती।
बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह देते हैं—
1. पर्याप्त पानी पिएं
बुखार के दौरान और उसके बाद शरीर को हाइड्रेट रखें।
2. डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें
दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
3. समय पर इलाज कराएं
बुखार को नजरअंदाज न करें। लगातार तेज बुखार होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
4. संतुलित आहार लें
फल, सब्जियां, प्रोटीन और पर्याप्त पोषण शरीर की रिकवरी में मदद करते हैं।
5. नियमित जांच कराएं
यदि पहले से किडनी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो वायरल संक्रमण के बाद डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
डॉक्टरों की सलाह
किडनी विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल बुखार ठीक होने के बाद यदि कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे या पेशाब में बदलाव दिखाई दे, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
शुरुआती जांच से समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
वायरल बुखार के बाद अधिकांश लोग पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण किडनी पर भी असर डाल सकता है। खासकर बुजुर्गों, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पहले से किडनी रोग से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
यदि बुखार के बाद पेशाब कम आना, सूजन, अत्यधिक कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और उचित उपचार से किडनी को होने वाले गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है और मरीज का स्वास्थ्य सामान्य बनाए रखा जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं