जनगणना में इस बार पूछे जाएंगे 40 सवाल! 16 नवंबर से शुरू होगी ऐसी प्रक्रिया, बैंक खाते से लेकर आधार तक देनी होगी जानकारी
जनगणना 2026 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना के साथ परिवार और प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जाएंगी। इस दौरान नागरिकों से करीब 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें नाम, शिक्षा, रोजगार, जन्म स्थान, वर्तमान निवास, निवास परिवर्तन, कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित जानकारी के साथ बैंक खाते, मोबाइल नंबर और आधार नंबर जैसी जानकारियां भी शामिल होंगी। खास बात यह है कि इस बार लोगों को घर बैठे ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प भी मिलेगा।
जनगणना की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। अधिकारियों की ओर से प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित और त्रुटिरहित तरीके से पूरा किया जा सके। प्रशासन का विशेष जोर लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना के लिए प्रोत्साहित करने पर है।
16 नवंबर से शुरू होगी स्व-गणना
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार जनपद में 16 नवंबर से स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू होगी। यह प्रक्रिया 30 नवंबर तक चलेगी। इस दौरान नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से जनगणना का फार्म भरने का अवसर मिलेगा।
स्व-गणना का उद्देश्य लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने की सुविधा देना है। इससे नागरिकों को प्रगणक के घर पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और वे अपनी सुविधा के अनुसार निर्धारित अवधि में ऑनलाइन फार्म भर सकेंगे।
प्रशासन चाहता है कि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करें। इससे एक ओर लोगों का समय बचेगा, वहीं दूसरी ओर जनगणना की प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा।
40 सवालों के देने होंगे जवाब
जनगणना के दूसरे चरण में नागरिकों से परिवार और व्यक्तिगत विवरण से जुड़े लगभग 40 सवालों के जवाब लिए जाएंगे। इसमें परिवार के सदस्यों से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
इन सवालों में व्यक्ति का नाम, शिक्षा, रोजगार और जन्म स्थान जैसी सामान्य जानकारियों के अलावा वर्तमान निवास तथा पहले के निवास स्थान से संबंधित जानकारी भी शामिल होगी। इससे लोगों के निवास परिवर्तन और जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों को समझने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। यानी जनगणना के दौरान नागरिकों से केवल परिवार में रहने वाले सदस्यों की संख्या ही नहीं पूछी जाएगी, बल्कि उनसे जुड़े सामाजिक, शैक्षिक और अन्य व्यक्तिगत विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।
बैंक खाते, मोबाइल और आधार से जुड़ी जानकारी भी
जनगणना के दूसरे चरण में नागरिकों से बैंक खातों की संख्या, मोबाइल नंबर और आधार नंबर जैसी जानकारियां भी मांगे जाने की बात कही गई है। इस वजह से लोगों के बीच जनगणना फार्म में पूछी जाने वाली जानकारियों को लेकर स्वाभाविक रूप से जिज्ञासा बढ़ गई है।
ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि लोगों को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि कौन-सी जानकारी किस उद्देश्य से ली जा रही है और ऑनलाइन फार्म भरते समय किन बातों का ध्यान रखना है। अधिकारियों के स्तर से जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
नागरिकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे किसी अनधिकृत व्यक्ति या संदिग्ध लिंक के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान आधिकारिक माध्यम का ही इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण होगा।
एक दिसंबर से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक
स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद एक दिसंबर से प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों का ब्योरा जुटाएंगे। यह प्रक्रिया चार जनवरी तक चलेगी।
इस चरण में प्रगणक प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर जनगणना से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। जिन परिवारों ने ऑनलाइन स्व-गणना नहीं की होगी, उनके लिए घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था रहेगी।
प्रगणकों की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में काफी महत्वपूर्ण होगी। उन्हें परिवार के सदस्यों की संख्या और निर्धारित सवालों के जवाब व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने होंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ऑनलाइन फार्म भरने में परेशानी हुई तो मिलेगी मदद
कई ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्हें ऑनलाइन फार्म भरने में परेशानी हो। खासकर बुजुर्गों या ऐसे परिवारों को तकनीकी दिक्कत आ सकती है, जो डिजिटल माध्यमों का नियमित इस्तेमाल नहीं करते हैं।
प्रशासन ने ऐसे लोगों की मदद के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को भी तैयार किया है। जरूरत पड़ने पर वे नागरिकों को फार्म भरने का तरीका समझाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि तकनीकी जानकारी के अभाव में कोई परिवार जनगणना प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।
अधिकारियों की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। इसके तहत विभिन्न स्थानों पर गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी और नागरिकों को स्व-गणना के फायदे तथा प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जाएगी।
पांच से नौ जनवरी तक होगा पुनरीक्षण
घर-घर जाकर जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी काम समाप्त नहीं होगा। पांच जनवरी से नौ जनवरी तक पुनरीक्षण का कार्य किया जाएगा।
इस दौरान दर्ज की गई जानकारी की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्तर पर कोई कमी या त्रुटि सामने आती है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधारा जा सकेगा। पुनरीक्षण का चरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता काफी हद तक सही और पूर्ण जानकारी पर निर्भर करती है।
प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
एडीएम गरिमा सिंह के अनुसार जनसंख्या गणना के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया, फार्म भरने, जानकारी दर्ज करने और नागरिकों के साथ संवाद करने से संबंधित आवश्यक जानकारी दी जा रही है।
प्रशासन की कोशिश है कि फील्ड में जाने वाले कर्मचारियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए उन्हें पहले से पूरी प्रक्रिया समझाई जा रही है।
लोगों को जागरूक करने पर विशेष जोर
जनगणना को सफल बनाने में नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसलिए प्रशासन ने स्व-गणना के प्रति जागरूकता बढ़ाने की योजना बनाई है।
गोष्ठियों और प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि स्व-गणना कैसे करनी है, किस अवधि में करनी है और फार्म भरते समय किन बातों का ध्यान रखना है। प्रशासन का प्रयास है कि बड़ी संख्या में नागरिक खुद ऑनलाइन माध्यम से अपना फार्म भरें।
इसके साथ ही जिन लोगों को ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाई होगी, उनके लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक सहायता उपलब्ध कराएंगे।
जनगणना से सामने आएगा जनसंख्या का व्यापक आंकड़ा
जनगणना केवल लोगों की संख्या पता करने की प्रक्रिया नहीं है। इससे किसी क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आते हैं। शिक्षा, रोजगार, निवास और परिवार से जुड़ी जानकारी भविष्य में सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में उपयोगी हो सकती है।
जनसंख्या के बदलते स्वरूप को समझने के लिए भी जनगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण होते हैं। किस क्षेत्र में कितनी आबादी है, परिवारों की स्थिति क्या है, कितने लोग रोजगार से जुड़े हैं और लोगों की शैक्षिक स्थिति कैसी है—ऐसी जानकारी योजनाओं की प्राथमिकताएं तय करने में मदद करती है।
इस बार ऑनलाइन स्व-गणना को भी प्रक्रिया में शामिल किए जाने से नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, जिन लोगों के लिए ऑनलाइन माध्यम आसान नहीं है, उनके लिए घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने की व्यवस्था भी जारी रहेगी।
कुल मिलाकर जनगणना के दूसरे चरण को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 16 नवंबर से 30 नवंबर तक स्व-गणना, एक दिसंबर से चार जनवरी तक घर-घर जाकर गणना और पांच से नौ जनवरी तक पुनरीक्षण की प्रक्रिया प्रस्तावित है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अधिक से अधिक परिवार इस प्रक्रिया में शामिल हों और दर्ज की जाने वाली जानकारी सही एवं पूर्ण हो। इसके लिए प्रशिक्षण के साथ-साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।

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