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किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये खौफनाक संकेत! पैरों की सूजन से पेशाब में बदलाव तक, कहीं देर न हो जाए

 


नई दिल्ली: शरीर में किडनी का काम केवल पेशाब बनाना नहीं है। दोनों किडनी लगातार खून को फिल्टर करती हैं, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालने में मदद करती हैं और शरीर में कई जरूरी खनिजों तथा तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर इसका असर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे सकता है।

सबसे चिंता की बात यह है कि क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD शुरुआती चरणों में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के आगे बढ़ती है। WHO के अप्रैल 2026 के अनुसार, दुनियाभर में अनुमानित 674 मिलियन लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी का पता देर से चलता है।

ऐसे में कुछ शारीरिक बदलावों को समझना और जोखिम होने पर समय पर जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। पैरों या टखनों में सूजन, पेशाब में झाग, पेशाब की मात्रा या बारंबारता में बदलाव, अत्यधिक थकान और सांस फूलना जैसे लक्षण कई स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं। इनका मतलब अपने आप किडनी की बीमारी नहीं होता, लेकिन लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।

पैरों और टखनों में सूजन को न करें नजरअंदाज

किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर अतिरिक्त नमक और पानी को पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकाल पाता। इसके कारण शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है और पैरों, टखनों या पैरों के आसपास सूजन दिखाई दे सकती है।

NIDDK के अनुसार, किडनी की बीमारी बढ़ने पर एडिमा यानी सूजन पैरों, पैरों के पंजों और टखनों में दिखाई दे सकती है। कुछ मामलों में हाथों या चेहरे पर भी सूजन हो सकती है।

हालांकि पैरों में सूजन केवल किडनी की बीमारी के कारण नहीं होती। हृदय, लिवर, नसों और कुछ दवाओं से जुड़ी समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं। इसलिए केवल सूजन देखकर किडनी खराब होने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

पेशाब में झाग दिखना भी हो सकता है संकेत

अगर पेशाब में लगातार असामान्य मात्रा में झाग या बुलबुले दिखाई देते हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ किडनी संबंधी बीमारियों में किडनी के फिल्टर से प्रोटीन पेशाब में जाने लगता है। इसे प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है।

NIDDK के अनुसार, पेशाब में अधिक प्रोटीन होने पर झाग दिखाई दे सकता है। कुछ ग्लोमेरुलर बीमारियों में पेशाब में खून भी आ सकता है, जिससे पेशाब गुलाबी या कोला रंग का दिखाई दे सकता है।

लेकिन कभी-कभी पेशाब में झाग सामान्य कारणों से भी दिखाई दे सकता है। इसलिए बार-बार या लगातार ऐसा होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर यूरिन टेस्ट कराना बेहतर है।

पेशाब की मात्रा या बारंबारता में बदलाव

किडनी की बीमारी बढ़ने पर कुछ लोगों में पेशाब करने की आदत में बदलाव हो सकता है। पेशाब सामान्य से कम या कुछ मामलों में ज्यादा हो सकता है।

NIDDK के अनुसार, उन्नत किडनी रोग में पेशाब की मात्रा में बदलाव एक संभावित लक्षण हो सकता है। गंभीर स्थिति में पेशाब बहुत कम हो सकता है या लगभग बंद भी हो सकता है।

हालांकि पेशाब में बदलाव के पीछे पानी की मात्रा, संक्रमण, डायबिटीज, दवाएं या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए केवल इस एक लक्षण के आधार पर बीमारी तय नहीं की जा सकती।

बार-बार थकान और कमजोरी

अगर पर्याप्त आराम और नींद के बावजूद लगातार थकान महसूस होती है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। उन्नत किडनी बीमारी में थकान और कमजोरी भी दिखाई दे सकती है।

जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं और अन्य शारीरिक प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। NIDDK के अनुसार, किडनी फेलियर में थकान, कमजोरी और नींद से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।

हालांकि थकान एक बहुत सामान्य लक्षण है और इसका कारण एनीमिया, तनाव, नींद की कमी, संक्रमण या अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं।

आंखों या चेहरे के आसपास सूजन

कुछ किडनी संबंधी बीमारियों में केवल पैरों में ही नहीं बल्कि चेहरे या आंखों के आसपास भी सूजन दिखाई दे सकती है।

ऐसा खासकर उन स्थितियों में हो सकता है जहां किडनी के फिल्टर से बड़ी मात्रा में प्रोटीन शरीर से बाहर निकलने लगता है। NIDDK के अनुसार, ग्लोमेरुलर बीमारियों में चेहरे, हाथ, पैर और पैरों में एडिमा हो सकती है।

अगर सुबह उठने पर आंखों के आसपास लगातार सूजन दिखाई दे और इसके साथ पेशाब में झाग या अन्य बदलाव भी हों, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित है।

भूख कम होना और मतली

किडनी की बीमारी काफी बढ़ने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने से पाचन और भूख पर असर पड़ सकता है। कुछ लोगों को भूख कम लगना, मतली या उल्टी जैसी समस्या हो सकती है।

NIDDK के अनुसार, उन्नत किडनी बीमारी में भूख कम होना, मतली और उल्टी संभावित लक्षणों में शामिल हैं।

यदि ये लक्षण लगातार बने हुए हैं या इनके साथ सूजन, पेशाब में बदलाव और अत्यधिक कमजोरी भी है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।

त्वचा में खुजली और सूखापन

किडनी की कार्यक्षमता काफी कम होने पर कुछ मरीजों में त्वचा में खुजली, सूखापन या त्वचा के रंग में बदलाव जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

NIDDK के अनुसार, उन्नत CKD में खुजली और त्वचा से जुड़े बदलाव हो सकते हैं।

लेकिन त्वचा में खुजली के कई अन्य कारण भी होते हैं। एलर्जी, त्वचा रोग, मौसम, दवाएं और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। इसलिए इसे अकेले किडनी की बीमारी का संकेत नहीं माना जा सकता।

मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी

किडनी शरीर में पानी और कई इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर कुछ मरीजों में मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है।

NIDDK के अनुसार, किडनी फेलियर में मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी या सुन्नपन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

अगर ऐसी समस्या लगातार बनी रहती है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि इसके पीछे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या अन्य कारण भी हो सकते हैं।

सांस फूलना भी हो सकता है गंभीर संकेत

किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में इसका असर सांस लेने में परेशानी के रूप में भी दिखाई दे सकता है।

WHO और NIDDK दोनों ही उन्नत किडनी बीमारी के संभावित लक्षणों में सांस फूलने का उल्लेख करते हैं।

अगर अचानक या गंभीर रूप से सांस फूल रही हो, सीने में दर्द हो या सांस लेने में बहुत परेशानी हो रही हो तो इसे केवल किडनी की समस्या मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

सबसे खतरनाक बात: शुरुआत में लक्षण नहीं भी होते

किडनी की बीमारी को खतरनाक बनाने वाली सबसे बड़ी वजहों में से एक यह है कि शुरुआती क्रॉनिक किडनी डिजीज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता।

NIDDK के अनुसार, शुरुआती CKD में अधिकांश लोगों को लक्षण नहीं होते और किडनी की स्थिति जानने का एकमात्र तरीका रक्त और पेशाब की जांच हो सकता है।

इसी वजह से केवल लक्षणों का इंतजार करना सही तरीका नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। WHO के अनुसार, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हृदय रोग वाले लोगों में नियमित रूप से किडनी की जांच के जरिए बीमारी की जल्दी पहचान करने पर जोर दिया जाता है।

इसके अलावा परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास होने पर भी डॉक्टर से जांच की आवश्यकता के बारे में सलाह लेनी चाहिए।

किडनी की जांच कैसे होती है?

किडनी की कार्यक्षमता जांचने के लिए केवल अल्ट्रासाउंड ही पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार रक्त और पेशाब की जांच कराते हैं।

WHO के अनुसार, सीरम क्रिएटिनिन से eGFR और पेशाब में एल्ब्यूमिन की जांच CKD की पहचान में महत्वपूर्ण हैं।

NIDDK के अनुसार भी किडनी की जांच में रक्त और पेशाब के परीक्षणों का इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास रखने वाले लोगों में जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

किडनी की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम उन बीमारियों और आदतों को नियंत्रित करना है जो किडनी पर असर डाल सकती हैं। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और तंबाकू से दूर रहना मददगार हो सकता है।

WHO के अनुसार, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन और तंबाकू से परहेज CKD के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग वाले लोगों में ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और ब्लड लिपिड को नियंत्रित रखना भी महत्वपूर्ण है।

साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवाओं या अन्य दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दवा लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

किडनी की बीमारी कई बार चुपचाप आगे बढ़ती है, इसलिए केवल लक्षणों का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। पैरों और टखनों में लगातार सूजन, पेशाब में असामान्य झाग या खून, पेशाब की मात्रा में बदलाव, अत्यधिक थकान, भूख कम होना, मतली, खुजली या सांस फूलना जैसे लक्षण किडनी की बीमारी सहित कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं।

इनमें से कोई लक्षण लगातार बना रहे या कई लक्षण एक साथ दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को नियमित किडनी जांच के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

सबसे अहम बात यह है कि किडनी की शुरुआती बीमारी का पता अक्सर लक्षणों से नहीं, बल्कि समय पर की गई रक्त और पेशाब की जांच से चलता है। इसलिए समय पर जांच और उचित उपचार किडनी की कार्यक्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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