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किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये 7 खतरनाक संकेत! पेशाब में दिखे ये बदलाव तो तुरंत हो जाएं सावधान



किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है। इसका काम सिर्फ पेशाब बनाना नहीं है, बल्कि यह खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने, शरीर में पानी और जरूरी खनिजों का संतुलन बनाए रखने तथा ब्लड प्रेशर और लाल रक्त कोशिकाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभाती है। समस्या यह है कि किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत अक्सर बहुत हल्के होते हैं। कई लोगों को शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण महसूस ही नहीं होता। यही वजह है कि किडनी की बीमारी लंबे समय तक बिना पता चले आगे बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार शुरुआती क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD में ज्यादातर लोगों में स्पष्ट लक्षण नहीं होते। कई बार बीमारी का पता तब चलता है जब डॉक्टर ब्लड और यूरिन टेस्ट करवाते हैं। इसलिए शरीर में होने वाले लगातार या असामान्य बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत क्यों समझना जरूरी है?

स्वस्थ किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने के साथ-साथ कई दूसरे जरूरी काम करती है। जब किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है तो शरीर में अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट जमा हो सकते हैं। इसका असर पेशाब, शरीर में सूजन, ऊर्जा, नींद, भूख और त्वचा जैसे अलग-अलग हिस्सों पर दिखाई दे सकता है।

हालांकि ध्यान रखना जरूरी है कि इनमें से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से किडनी की बीमारी है। ऐसे लक्षण कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी है।

1. पेशाब में झाग या असामान्य बदलाव

पेशाब में लगातार या असामान्य रूप से ज्यादा झाग दिखाई देना किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। इसका एक कारण पेशाब में प्रोटीन का ज्यादा आना हो सकता है। मेडिकल भाषा में इसे प्रोटीन्यूरिया या एल्बुमिन्यूरिया से जोड़ा जाता है।

कभी-कभी पेशाब में खून भी दिखाई दे सकता है। पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या कोला जैसा दिखना भी जांच की वजह होनी चाहिए। हालांकि पेशाब के रंग में बदलाव के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

2. रात में बार-बार पेशाब आना

अगर पहले ऐसा नहीं होता था लेकिन अचानक रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार पेशाब आना या पेशाब की आदत में बदलाव किडनी की बीमारी में देखा जा सकता है।

हालांकि इसके पीछे डायबिटीज, यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी समस्या या अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार बदलाव होने पर जांच कराना जरूरी है।

3. पैरों और टखनों में सूजन

किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब किडनी यह काम ठीक से नहीं कर पाती तो शरीर में तरल जमा हो सकता है और पैरों, टखनों या पैरों के आसपास सूजन दिखाई दे सकती है। कुछ लोगों में हाथों या चेहरे के आसपास भी सूजन देखी जा सकती है।

सुबह आंखों के आसपास फूला हुआ चेहरा भी कुछ मामलों में किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। लेकिन सूजन केवल किडनी की बीमारी में ही नहीं होती। हृदय या लिवर से जुड़ी समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं। इसलिए जांच जरूरी है।

4. बिना ज्यादा काम के लगातार थकान

हर समय थकान महसूस होना भी किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत में शामिल हो सकता है, खासकर जब पर्याप्त नींद और आराम के बाद भी ऊर्जा वापस न आए। किडनी की बीमारी बढ़ने पर शरीर में अपशिष्ट जमा हो सकते हैं और एनीमिया की समस्या भी विकसित हो सकती है। इससे कमजोरी, थकान और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।

किडनी एरिथ्रोपोइटिन यानी EPO नामक हार्मोन बनाने में भूमिका निभाती है, जो शरीर को लाल रक्त कोशिकाएं बनाने के लिए संकेत देता है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर EPO का उत्पादन घट सकता है और एनीमिया की समस्या हो सकती है।

5. त्वचा में लगातार खुजली

बिना किसी स्पष्ट कारण के त्वचा में लंबे समय तक खुजली होना भी किडनी की बीमारी के बढ़ने पर दिखाई देने वाला लक्षण हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में कुछ अपशिष्ट और खनिजों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे खुजली या त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है।

अगर खुजली लगातार बनी हुई है और सामान्य उपायों से ठीक नहीं हो रही है, तो इसके पीछे की वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच कराना उचित है।

6. भूख कम होना और स्वाद बदलना

किडनी की गंभीर समस्या बढ़ने पर कुछ लोगों में भूख कम हो सकती है, मतली या उल्टी हो सकती है और खाने का स्वाद बदल सकता है। कुछ मरीजों को मुंह में खराब या धातु जैसा स्वाद महसूस होने की शिकायत भी हो सकती है।

अगर लंबे समय तक भूख कम रहे या बिना कोशिश के वजन घटने लगे, तो इसे सिर्फ तनाव या सामान्य कमजोरी मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।

7. नींद में परेशानी और ध्यान लगाने में दिक्कत

किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर कुछ लोगों को नींद से जुड़ी समस्या हो सकती है। दिन में अत्यधिक थकान, रात में नींद का टूटना और काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी भी बीमारी बढ़ने के साथ देखी जा सकती है।

हालांकि नींद की समस्या के पीछे तनाव, चिंता, खराब लाइफस्टाइल और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ इस एक लक्षण के आधार पर किडनी की बीमारी मान लेना सही नहीं है।

किन लोगों को किडनी की जांच पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए?

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास होने पर भी व्यक्ति को अपनी किडनी की सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ भी नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व बढ़ जाता है।

ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और किडनी फंक्शन से जुड़ी जांच करवाते रहना चाहिए।

किडनी की सेहत के लिए क्या करें?

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खान-पान और नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हैं। खाने में अत्यधिक नमक और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना उपयोगी हो सकता है। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को नियंत्रण में रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है।

पानी शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए पानी की एक जैसी मात्रा उचित नहीं होती। खासकर जिन लोगों को पहले से किडनी, हृदय या लिवर की बीमारी है, उन्हें पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

इसके अलावा धूम्रपान से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए। खासकर अगर कोई व्यक्ति पहले से किडनी की समस्या या अन्य बीमारी से जूझ रहा है, तो किसी भी दवा के नियमित इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

किडनी की जांच कैसे होती है?

किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच की सलाह दे सकते हैं। इनमें ब्लड टेस्ट से eGFR यानी किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अनुमान लगाया जाता है। यूरिन टेस्ट में uACR यानी urine albumin-to-creatinine ratio जैसे परीक्षणों से पेशाब में एल्बुमिन की मात्रा का पता लगाया जा सकता है।

जरूरत के अनुसार डॉक्टर अन्य ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट या इमेजिंग जांच भी करवा सकते हैं।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पेशाब में खून दिखाई दे, पेशाब की मात्रा में अचानक बड़ा बदलाव हो, शरीर में लगातार सूजन हो, सांस लेने में परेशानी हो, लगातार उल्टी हो, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो या भ्रम जैसी गंभीर समस्या दिखाई दे तो जल्द चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। किडनी फेलियर में लक्षण धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं और गंभीर अवस्था में शरीर में अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट जमा होने लगते हैं।

किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत हमेशा तेज दर्द या किसी बड़े बदलाव के रूप में सामने नहीं आते। कई बार थकान, पेशाब में बदलाव, पैरों में सूजन, खुजली, भूख कम होना, नींद की समस्या या ध्यान लगाने में परेशानी जैसे संकेत धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती CKD में लक्षण बिल्कुल न भी हों, इसलिए जोखिम वाले लोगों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच बेहद अहम है।

अगर शरीर में कोई असामान्य बदलाव लगातार बना हुआ है, तो उसे उम्र, थकान या सामान्य कमजोरी मानकर टालने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। समय पर बीमारी की पहचान होने से उपचार और प्रबंधन के विकल्पों पर जल्दी काम किया जा सकता है।

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