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स्विट्जरलैंड से अचानक मुंह मोड़ रहा भारत! सोना खरीदने का बदला पूरा खेल, अब UAE के रास्ते आ रही करोड़ों की खेप



भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में हर साल बड़ी मात्रा में सोने की खपत होती है और इसकी मांग का सबसे बड़ा हिस्सा आभूषण उद्योग तथा निवेश से आता है। लंबे समय तक भारत के लिए सोने की आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत स्विट्जरलैंड रहा है। स्विस रिफाइनरियों से शुद्ध और मुहर लगा सोना भारत के बाजार तक पहुंचता रहा है। लेकिन अब भारत की सोने की सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।

टैक्स में अंतर, भारत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के बीच व्यापार समझौता, घरेलू रिफाइनिंग क्षमता में विस्तार और अफ्रीकी तथा लैटिन अमेरिकी देशों से कच्चे सोने की बढ़ती आपूर्ति ने भारत के सोना आयात करने के तरीके को बदल दिया है। अब भारत केवल तैयार और शुद्ध सोने पर निर्भर रहने के बजाय कच्चे सोने यानी ‘डोरे’ को भी बड़ी मात्रा में आयात कर रहा है और देश के भीतर उसे रिफाइन करके इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट

भारत के सोना आयात के स्रोतों में पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। कभी स्विट्जरलैंड भारत के लिए सोने का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत था, लेकिन अब उसकी हिस्सेदारी काफी कम हो गई है।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल सोना आयात में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी पांच साल पहले लगभग 42.4 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2026 में यह घटकर करीब 21.9 प्रतिशत रह गई। यानी कुछ ही वर्षों में भारत के सोना आयात में स्विट्जरलैंड की हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई है।

इस बदलाव की एक बड़ी वजह भारत में रिफाइनिंग क्षमता का लगातार बढ़ना है। घरेलू रिफाइनर अब विदेशों से आंशिक रूप से शुद्ध किए गए सोने को मंगाकर भारत में उसे उच्च शुद्धता वाले सोने में बदल सकते हैं। इससे तैयार सोने के आयात पर निर्भरता कम होती है।

‘डोरे’ सोने ने बदली पूरी तस्वीर

भारत के सोना बाजार में ‘डोरे’ शब्द इन दिनों काफी महत्वपूर्ण हो गया है। डोरे ऐसा कच्चा या आंशिक रूप से शुद्ध सोना होता है, जिसमें सोने के साथ चांदी और अन्य धातुएं भी मौजूद हो सकती हैं।

इसे रिफाइनरी में भेजकर आगे शुद्ध किया जाता है और फिर सोने की छड़, बार या अन्य रूपों में तैयार किया जाता है। घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने के कारण भारत के लिए डोरे आयात करना अधिक आकर्षक विकल्प बनता जा रहा है।

LSEG के लीड मेटल्स एनालिस्ट देबाजीत साहा के अनुसार, भारतीय रिफाइनरों ने पिछले कुछ वर्षों में डोरे की सप्लाई के लिए मजबूत चेन विकसित की है। इसका सीधा असर स्विट्जरलैंड से आने वाले तैयार सोने पर पड़ा है।

एक महत्वपूर्ण कारण टैक्स में अंतर भी है। तैयार सोने की तुलना में डोरे पर 0.65 प्रतिशत कम आयात शुल्क होने से भारतीय रिफाइनरों को आर्थिक लाभ मिलता है। यही वजह है कि कई रिफाइनर विदेशों से तैयार सोना खरीदने की बजाय डोरे आयात करके भारत में ही उसे शुद्ध करना ज्यादा फायदेमंद मानते हैं।

UAE से बढ़ा भारत का सोना आयात

भारत के सोना आयात में संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका भी तेजी से बढ़ी है। भारत और UAE के बीच मई 2022 में Comprehensive Economic Partnership Agreement यानी CEPA लागू हुआ था।

इस समझौते के तहत UAE से सोने के आयात के लिए Tariff Rate Quota यानी TRQ व्यवस्था लागू की गई। इसके तहत तय मात्रा के सोने पर सामान्य आयात शुल्क की तुलना में 1 प्रतिशत कम शुल्क का लाभ मिलता है।

शुरुआत में इस कोटे को सालाना 120 टन रखा गया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 2027 से यह बढ़कर 200 टन होने वाला है। यह मात्रा भारत के कुल सोना आयात के लगभग एक चौथाई हिस्से के बराबर हो सकती है।

भारत ने 13 मई 2026 से सोने पर स्टैंडर्ड आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया था। वहीं UAE कोटे के तहत आने वाले सोने पर 14 प्रतिशत शुल्क लागू होता है। यानी UAE के लिए प्रभावी शुल्क सामान्य दर से 1 प्रतिशत कम है।

डोरे के मामले में भी शुल्क में अंतर महत्वपूर्ण है। कच्चे सोने यानी raw gold doré पर लगभग 14.35 प्रतिशत आयात शुल्क बताया गया है, जबकि तैयार सोने के लिए स्टैंडर्ड दर 15 प्रतिशत है।

जून में UAE से सोने का आयात तेजी से बढ़ा

भारत और UAE के बीच सोने के व्यापार में तेजी का अंदाजा आयात के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। जून 2026 में भारत ने UAE से लगभग 649.4 मिलियन डॉलर मूल्य का सोना आयात किया।

एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा लगभग 235.9 मिलियन डॉलर था। यानी सालाना आधार पर इसमें करीब 175.2 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई।

यह बढ़ोतरी बताती है कि UAE भारत के लिए सोना सप्लाई चेन में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर रहा है।

हालांकि, UAE से बढ़ते सोना आयात को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।

‘दुबई फैक्टर’ पर क्यों उठ रहे सवाल?

UAE खुद सोने का कोई बड़ा खनन केंद्र नहीं है। न ही वहां सोने के खनन की क्षमता भारत की मांग के अनुरूप है। ऐसे में विशेषज्ञ यह सवाल उठा रहे हैं कि UAE से भारत पहुंचने वाला सोना वास्तव में कहां से आ रहा है।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने चिंता जताई है कि UAE के रास्ते आने वाले सोने का एक हिस्सा तीसरे देशों से दुबई के जरिए भारत पहुंच सकता है। यदि ऐसा होता है तो UAE के साथ व्यापार समझौते के तहत मिलने वाले कम टैरिफ का इस्तेमाल केवल शुल्क बचाने के लिए किया जा सकता है।

इसी वजह से विशेषज्ञों ने Origin Rules यानी सोने की वास्तविक उत्पत्ति से जुड़े नियमों को सख्त करने की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि किसी उत्पाद को व्यापार समझौते का लाभ तभी मिलना चाहिए, जब संबंधित देश में वास्तव में पर्याप्त मूल्यवर्धन हुआ हो।

अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी बढ़ी सप्लाई

भारत की बदलती सोना सप्लाई चेन में अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

घाना, चिली और पेरू जैसे देशों से डोरे के आयात में तेजी आई है। घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने के कारण भारत अब ऐसे देशों से कच्चा सोना मंगाकर उसे देश में ही शुद्ध कर सकता है।

इससे भारत की सप्लाई चेन पहले की तुलना में अधिक diversified यानी विविध हो रही है। इसका फायदा यह है कि भारत किसी एक देश या एक खास रूट पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहेगा।

हालांकि, इसके साथ यह चुनौती भी है कि सोने की उत्पत्ति, गुणवत्ता और व्यापारिक दस्तावेजों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

सोना भारत में अलग-अलग रास्तों से पहुंचता है

भारत में आने वाला हर सोना एक ही रूप में नहीं होता। कुछ सोना डोरे के रूप में आता है, जिसे देश की रिफाइनरियां शुद्ध करती हैं। वहीं कुछ सोना पहले से ही रिफाइंड बुलियन के रूप में आता है, जिसे ज्वैलरी निर्माण या निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

सोने के इस्तेमाल के आधार पर उसके आयात का रास्ता भी बदल सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि हरियाणा की कोई रिफाइनरी डोरे का आयात करती है तो संबंधित खेप दिल्ली के रास्ते पहुंच सकती है। वहीं यदि सोने का इस्तेमाल आभूषण निर्यात के लिए होना है, तो मुंबई जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों के जरिए इसकी आपूर्ति हो सकती है।

केंद्रीय बैंक द्वारा खरीदा जाने वाला सोना इससे अलग होता है। RBI की खरीद का उद्देश्य आम उपभोक्ता या ज्वैलरी बाजार की मांग पूरी करना नहीं, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन और रिजर्व मैनेजमेंट से जुड़ा होता है।

RBI का सोना खरीदने का उद्देश्य अलग

भारत के आधिकारिक स्वर्ण भंडार को लेकर भी अलग व्यवस्था है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में भारत का स्वर्ण भंडार करीब 880.52 टन था, जो पिछली तिमाही के स्तर के बराबर रहा।

केंद्रीय बैंक द्वारा सोने की खरीद को घरेलू ज्वैलरी मांग के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह मुख्य रूप से देश के रिजर्व मैनेजमेंट का हिस्सा है।

यही कारण है कि भारत के कुल सोना आयात को समझते समय निजी आयातकों, रिफाइनरों, ज्वैलरी उद्योग और केंद्रीय बैंक की जरूरतों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

भारत के लिए आगे की चुनौती क्या है?

भारत के लिए बदलती सोना सप्लाई चेन एक अवसर भी है और चुनौती भी। घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने से देश में मूल्यवर्धन बढ़ सकता है। इससे रोजगार, रिफाइनिंग उद्योग और ज्वैलरी सेक्टर को फायदा मिल सकता है।

लेकिन दूसरी तरफ UAE जैसे देशों से बढ़ते आयात को लेकर Origin Rules की पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। अगर किसी तीसरे देश का सोना केवल दुबई जैसे ट्रेडिंग हब के जरिए भारत पहुंचता है और उसे कम शुल्क का लाभ मिलता है, तो इससे व्यापार नीति पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि मुक्त व्यापार समझौतों में सोना, चांदी, प्लैटिनम और हीरे जैसी कीमती धातुओं के लिए विशेष नियम बनाए जाने चाहिए।

सोने की सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव

भारत हर साल लगभग 700 से 900 टन सोने का आयात करता है और चीन के बाद दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। ऐसे में सोने के आयात का स्रोत बदलना केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर विदेशी मुद्रा, रिफाइनिंग उद्योग, ज्वैलरी सेक्टर और देश की व्यापार नीति पर भी पड़ता है।

स्विट्जरलैंड से तैयार सोने पर निर्भरता कम होना और डोरे के साथ-साथ UAE, अफ्रीकी तथा लैटिन अमेरिकी देशों से सप्लाई बढ़ना इस बदलाव का संकेत है।

आने वाले समय में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी गोल्ड सप्लाई चेन तैयार करने की होगी जो पारदर्शी, सस्ती, भरोसेमंद और नियमों के अनुरूप हो। अगर घरेलू रिफाइनिंग क्षमता का सही इस्तेमाल हुआ और व्यापार समझौतों में वास्तविक मूल्यवर्धन सुनिश्चित किया गया, तो भारत केवल सोने का बड़ा उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि वैश्विक गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वैलरी सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है।

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