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दिवाली से पहले सोने-चांदी में आएगा ऐसा उछाल? ₹1.59 लाख और ₹3.25 लाख का टारगेट जानकर चौंक जाएंगे!



नई दिल्ली। भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही सोने और चांदी की कीमतों पर हर किसी की नजर टिक जाती है। खासकर धनतेरस और दिवाली के आसपास सोना खरीदना भारतीय परिवारों में शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार बाजार की तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं और इसके बावजूद बाजार में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि दिवाली तक सोना और चांदी आखिर कितने रुपये तक पहुंच सकते हैं?

17 अक्टूबर 2026 को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि 22 कैरेट सोना करीब ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है। दूसरी ओर चांदी का भाव करीब ₹2.11 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास दिखाई दे रहा है। हालांकि अलग-अलग शहरों, ज्वेलर्स और बाजारों में कीमतों में अंतर हो सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8 नवंबर 2026 को पड़ने वाली दिवाली तक इन दोनों कीमती धातुओं का भाव कहां तक जा सकता है?

सोने के भाव में फिर तेजी की आहट?

पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में दबाव जरूर देखने को मिला है, लेकिन बाजार के जानकार इसे लंबी अवधि की तेजी के खत्म होने का संकेत नहीं मान रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीद का असर लगातार बना हुआ है।

हालिया अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,165 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर था और सप्ताह के दौरान इसमें करीब 0.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी सोने पर दबाव बनाया है।

लेकिन दूसरी तरफ दुनिया में आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहने से सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन मिल रहा है। यही कारण है कि बाजार में गिरावट आने पर भी खरीदार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।

दिवाली तक ₹1.59 लाख तक पहुंच सकता है सोना?

बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा जिस अनुमान की हो रही है, उसमें सोने के ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। एक हालिया विशेषज्ञ अनुमान में दिवाली और आगे के त्योहारी दौर में सोने की कीमत इस स्तर तक जाने की संभावना जताई गई है।

अगर मौजूदा स्तर से तुलना करें तो यह तेजी काफी महत्वपूर्ण होगी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सोना निश्चित रूप से ₹1.59 लाख तक पहुंचेगा। कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की विनिमय दर, अमेरिकी नीतियों और घरेलू मांग के आधार पर इससे नीचे या ऊपर भी जा सकती हैं।

यानी दिवाली से पहले सोने में एक और तेज उछाल आता है तो ₹1.55 लाख से ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम का क्षेत्र बाजार के लिए महत्वपूर्ण स्तर बन सकता है।

चांदी में ज्यादा बड़ा खेल?

अगर सोने के मुकाबले चांदी की बात करें तो इसमें उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिल सकता है। चांदी केवल निवेश और आभूषणों में ही इस्तेमाल नहीं होती, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल होता है।

इसी वजह से चांदी की कीमत पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है।

हालिया बाजार विश्लेषण में चांदी के लिए ₹3.25 लाख प्रति किलोग्राम तक का संभावित लक्ष्य सामने आया है। हालांकि यह लक्ष्य कुछ विशेष वैश्विक परिस्थितियों के बनने पर निर्भर करेगा।

मौजूदा करीब ₹2.11 लाख प्रति किलो के स्तर से ₹3.25 लाख तक पहुंचना बहुत बड़ी तेजी होगी। इसलिए इस तरह के लक्ष्य को सामान्य अनुमान की बजाय तेजी वाले परिदृश्य के रूप में देखना ज्यादा उचित है।

आखिर किन वजहों से बढ़ सकते हैं सोने-चांदी के भाव?

1. अमेरिकी ब्याज दरों का असर

सोने की कीमत पर अमेरिकी ब्याज दरों का सीधा असर पड़ता है। अगर ब्याज दरों को लेकर बाजार में नरमी की उम्मीद बढ़ती है तो सोने को समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना सोने पर दबाव डाल सकती है।

अभी बाजार में फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर काफी अनिश्चितता है। यही अनिश्चितता आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है।

2. रुपये की कमजोरी

भारत में सोने और चांदी की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय भाव से तय नहीं होतीं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अगर रुपया कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत स्थिर रहने के बावजूद भारत में सोना महंगा हो सकता है।

3. भू-राजनीतिक तनाव

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव बढ़ने पर निवेशक अक्सर सुरक्षित माने जाने वाले परिसंपत्ति वर्गों की तरफ जाते हैं। सोना इस स्थिति में फायदा उठा सकता है।

यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव और आर्थिक अनिश्चितता सोने के लिए लंबे समय में समर्थन का काम कर सकती है।

4. दिवाली और धनतेरस की मांग

भारत में दिवाली के समय सोने की मांग परंपरागत रूप से बढ़ती है। धनतेरस पर सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुएं खरीदने की परंपरा है।

इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को है। इससे पहले धनतेरस और त्योहारी खरीदारी के कारण बाजार में मांग बढ़ सकती है।

हालांकि ऊंची कीमतों के कारण इस बार ग्राहक कितनी मात्रा में खरीदारी करेंगे, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।

महंगा सोना मांग को कर सकता है प्रभावित

सोने की कीमत जितनी तेजी से बढ़ती है, आम खरीदार के लिए आभूषण खरीदना उतना ही मुश्किल हो जाता है। यही स्थिति इस समय देखने को मिल रही है।

कीमतों में भारी वृद्धि के कारण कई ग्राहक बड़ी ज्वेलरी खरीदने की बजाय छोटी मात्रा में सोना खरीदने या खरीदारी टालने का विकल्प चुन सकते हैं।

हालिया रिपोर्टों में भी संकेत मिला है कि ऊंची कीमतों के कारण सोने की मांग पर दबाव आया है। वहीं त्योहारी सीजन में संभावित मांग को देखते हुए सोने के आयात और बाजार गतिविधियों पर भी नजर बनी हुई है।

क्या अभी सोना खरीदना सही है?

यह सवाल सबसे ज्यादा उन लोगों के मन में है जो धनतेरस या दिवाली पर सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं।

अगर खरीदारी आभूषण या पारंपरिक उपयोग के लिए है, तो केवल यह अनुमान लगाकर खरीदारी रोकना कि कीमत आगे जरूर गिर जाएगी, जोखिम भरा हो सकता है। इसी तरह केवल तेजी की उम्मीद में एक साथ बड़ी रकम लगाना भी उचित नहीं माना जाता।

अगर निवेश के उद्देश्य से खरीदारी की जा रही है तो बाजार में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना जरूरी है। कई निवेशक एकमुश्त खरीदारी की बजाय अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी करने की रणनीति अपनाते हैं।

चांदी खरीदने वालों के लिए क्या संकेत?

चांदी में संभावित तेजी सोने की तुलना में अधिक आकर्षक दिखाई दे सकती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी ज्यादा हो सकता है।

₹3.25 लाख प्रति किलो जैसा लक्ष्य तभी संभव माना जा सकता है जब अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमत, औद्योगिक मांग, निवेश मांग और मुद्रा बाजार जैसी कई परिस्थितियां एक साथ अनुकूल रहें। इसलिए इसे निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

चांदी खरीदने वालों को यह भी समझना चाहिए कि इसमें कीमतें तेजी से ऊपर जाने के साथ तेजी से नीचे भी आ सकती हैं।

दिवाली तक क्या हो सकता है पूरा खेल?

अगर वैश्विक बाजार में सोने को समर्थन मिलता है, रुपये पर दबाव बना रहता है और त्योहारी मांग बढ़ती है, तो दिवाली तक सोना मौजूदा स्तर से ऊपर जा सकता है। ऐसे परिदृश्य में ₹1.55 लाख से ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम का स्तर चर्चा में रह सकता है।

वहीं चांदी में तेजी का माहौल मजबूत होने पर ₹2.25 लाख से ₹2.50 लाख प्रति किलो जैसे स्तर भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जबकि बेहद मजबूत तेजी वाले परिदृश्य में इससे ऊपर के लक्ष्य भी बाजार में चर्चा का विषय बन सकते हैं। ₹3.25 लाख का स्तर फिलहाल आक्रामक तेजी वाले अनुमान के तौर पर देखा जाना चाहिए।

इसके उलट अगर अमेरिकी ब्याज दरों में सख्ती बढ़ती है, डॉलर मजबूत होता है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो सोने-चांदी दोनों में गिरावट भी आ सकती है।

खरीदारों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

त्योहार पर सोना खरीदते समय केवल प्रति 10 ग्राम भाव देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज, जीएसटी, शुद्धता, हॉलमार्क और खरीद-बिक्री के अंतर को भी देखना जरूरी है।

इसी तरह 24 कैरेट और 22 कैरेट के भाव में अंतर होता है। निवेश और आभूषण के उद्देश्य के अनुसार शुद्धता की जरूरत अलग हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिवाली का अनुमान बाजार की संभावना है, पक्की कीमत नहीं। सोने और चांदी में वैश्विक घटनाओं के कारण कुछ ही घंटों या दिनों में बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है।

दिवाली 2026 तक सोने और चांदी के बाजार में एक बार फिर जबरदस्त हलचल देखने को मिल सकती है। मौजूदा ऊंचे भाव के बावजूद बाजार में तेजी की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। सोने के लिए ₹1.55 लाख से ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम का क्षेत्र तेजी की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि चांदी में ₹2.25 लाख से ₹2.50 लाख प्रति किलो के स्तर चर्चा में रह सकते हैं। वहीं ₹3.25 लाख का चांदी लक्ष्य अधिक आक्रामक तेजी वाले परिदृश्य से जुड़ा है।

लेकिन बाजार का असली रुख अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, रुपये, वैश्विक तनाव और दिवाली की वास्तविक मांग से तय होगा। इसलिए केवल किसी एक लक्ष्य को देखकर निवेश का फैसला करने के बजाय अपनी जरूरत, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

सोने-चांदी के भविष्य के भाव से जुड़े आंकड़े बाजार अनुमानों पर आधारित हैं और इनमें बदलाव संभव है। यह लेख निवेश सलाह नहीं है। खरीदारी या निवेश से पहले ताजा बाजार भाव और योग्य वित्तीय सलाहकार/सराफा विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

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