हर बार दर्द में यही गोली खाते हैं? किडनी को अंदर से नुकसान पहुंचा रही हो सकती है ये आदत, अब सामने आई चौंकाने वाली चेतावनी!
नई दिल्ली। सिरदर्द, कमर दर्द, बदन दर्द या बुखार होने पर बहुत से लोग डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय सीधे दर्द की दवा ले लेते हैं। अगर दर्द दोबारा हुआ तो वही दवा फिर से ले ली जाती है। यही आदत लंबे समय तक जारी रहे तो स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। खासकर कुछ NSAIDs यानी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं के बार-बार या लंबे समय तक इस्तेमाल से किडनी पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
इसी को लेकर भारत की दवा नियामक संस्था CDSCO ने महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। इसमें दर्द की दवाओं और एंटीबायोटिक्स के बिना जरूरत, बार-बार और लंबे समय तक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है। किडनी की बीमारी या किडनी खराब होने के जोखिम वाले लोगों को NSAIDs लेने से पहले डॉक्टर को अपनी स्थिति बताने की सलाह दी गई है।
क्यों जारी की गई चेतावनी?
NSAIDs और एंटीबायोटिक्स ऐसी दवाएं हैं जिनका इस्तेमाल चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार, सही खुराक और सही अवधि के लिए किया जाना चाहिए। इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार या लंबे समय तक लेने से बचना जरूरी है।
दवा नियामक ने डॉक्टरों, फार्मासिस्टों, अस्पतालों और आम लोगों सभी के लिए दवाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दिया है। इन दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय रूप से जरूरी होने पर ही उचित खुराक और निर्धारित अवधि के लिए किया जाना चाहिए।
किडनी पर कैसे असर डाल सकती हैं दर्द की दवाएं?
किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कुछ NSAIDs किडनी में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। इससे कुछ परिस्थितियों में Acute Kidney Injury यानी अचानक किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
यह खतरा उन लोगों में ज्यादा हो सकता है जिन्हें पहले से किडनी की बीमारी है, शरीर में पानी की कमी है, उम्र अधिक है या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं। लंबे समय तक अनुचित इस्तेमाल से किडनी की कार्यक्षमता पर लगातार असर पड़ने की आशंका भी रहती है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर द्वारा जरूरत के अनुसार दी गई हर दर्द की दवा किडनी को नुकसान पहुंचाती है। मुख्य चिंता बिना चिकित्सकीय निगरानी के बार-बार, ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर है।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है या किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम है, उन्हें दर्द की दवाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
इसके अलावा शरीर में पानी की कमी, कुछ हृदय संबंधी समस्याएं और कुछ अन्य दवाओं के साथ NSAIDs का इस्तेमाल भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार होना चाहिए।
ऐसे लोगों को दर्द होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
एंटीबायोटिक को लेकर भी बड़ी चेतावनी
चेतावनी केवल दर्द की दवाओं तक सीमित नहीं है। एंटीबायोटिक्स के सेल्फ-मेडिकेशन को लेकर भी चिंता जताई गई है।
कई लोग सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार या सामान्य संक्रमण में अपनी पुरानी एंटीबायोटिक दवा शुरू कर देते हैं। लेकिन हर बुखार या संक्रमण में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती। वायरल संक्रमण में सामान्य तौर पर एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं किया जाता, जब तक डॉक्टर किसी विशेष कारण से इसकी सलाह न दें।
बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोध यानी Antimicrobial Resistance की समस्या बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि भविष्य में कुछ संक्रमणों पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं कम प्रभावी हो सकती हैं।
बची हुई एंटीबायोटिक दोबारा न लें
कई घरों में डॉक्टर द्वारा लिखी गई एंटीबायोटिक की कुछ गोलियां बच जाती हैं। बाद में इसी तरह के लक्षण दिखाई देने पर लोग उन्हीं दवाओं को दोबारा लेना शुरू कर देते हैं।
यह तरीका सही नहीं है। हर संक्रमण का कारण और उपचार अलग हो सकता है। इसलिए बची हुई एंटीबायोटिक को अपनी मर्जी से दोबारा शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
किसी दूसरे व्यक्ति को भी अपनी प्रिस्क्रिप्शन वाली एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए।
दर्द बार-बार हो रहा है तो कारण खोजें
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार सिरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, पेट दर्द या शरीर में दर्द हो रहा है, तो हर बार केवल दर्द की गोली लेना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
बार-बार होने वाले दर्द के पीछे कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या हो सकती है। ऐसे में लगातार दर्द की दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना जरूरी है।
खास तौर पर अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है या सामान्य दवा लेने के बावजूद राहत नहीं मिल रही है, तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
डॉक्टरों को भी दी गई सलाह
स्वास्थ्य पेशेवरों से कहा गया है कि NSAIDs और एंटीबायोटिक्स केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार ही लिखी जाएं। मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, दूसरी बीमारियां, पहले से चल रही दवाएं और किडनी से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखना जरूरी है।
किडनी संबंधी जोखिम वाले मरीजों में NSAIDs के लिए सबसे कम प्रभावी खुराक और सबसे कम उपयुक्त अवधि रखने पर जोर दिया गया है।
दवा की दुकान से मनमाने तरीके से दवा लेना पड़ सकता है भारी
कई लोग पहले इस्तेमाल की गई दवा को बिना डॉक्टर की सलाह के दोबारा खरीद लेते हैं। लेकिन किसी दवा से पहले आराम मिल चुका हो, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बार वही दवा लेना सुरक्षित होगा।
कुछ दर्द की दवाएं और एंटीबायोटिक्स प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की श्रेणी में आती हैं। इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।
आम लोगों के लिए क्या सावधानी जरूरी है?
दर्द की दवा बार-बार खुद से न लें।
लंबे समय तक NSAIDs का इस्तेमाल डॉक्टर की निगरानी में करें।
किडनी की बीमारी होने पर डॉक्टर को जरूर बताएं।
शरीर में पानी की कमी होने पर दवाओं के इस्तेमाल को लेकर चिकित्सकीय सलाह लें।
बची हुई एंटीबायोटिक बाद में खुद से शुरू न करें।
किसी दूसरे व्यक्ति की एंटीबायोटिक न लें।
सामान्य वायरल संक्रमण में खुद से एंटीबायोटिक न लें।
दर्द या बुखार बार-बार होने पर मूल कारण की जांच कराएं।
डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि का पालन करें।
सबसे जरूरी बात
इस चेतावनी का उद्देश्य लोगों को जरूरी दवाओं से डराना नहीं, बल्कि बिना जरूरत और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं के इस्तेमाल को रोकना है। दर्द की दवा कुछ परिस्थितियों में जरूरी और प्रभावी उपचार हो सकती है, लेकिन इसका लगातार या अनुचित इस्तेमाल जोखिम पैदा कर सकता है।
खासकर पहले से किडनी की बीमारी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। अगर दर्द बार-बार हो रहा है, तो हर बार गोली लेने के बजाय डॉक्टर से कारण पता कराना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
किसी भी दवा को शुरू करने, बंद करने या लंबे समय तक लेने का फैसला डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

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