पैरों में जलन और सुन्नपन को समझ रहे हैं मामूली? शरीर में छिपी इस बीमारी का हो सकता है बड़ा संकेत!
नई दिल्ली। कई लोगों को पैरों में कभी-कभी जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या सुई चुभने जैसा एहसास होता है। अक्सर इसे लंबे समय तक खड़े रहने, ज्यादा चलने या थकान का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन अगर पैरों में यह परेशानी बार-बार हो रही है, लगातार बनी हुई है या समय के साथ बढ़ रही है, तो इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
पैरों में जलन और सुन्नपन अपने आप में किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। यह नसों पर दबाव, पोषण की कमी, कुछ दवाओं के प्रभाव, शराब के अधिक सेवन, नसों से जुड़ी समस्या या डायबिटीज जैसी स्थितियों से संबंधित हो सकता है। कुछ मामलों में पैरों की समस्या कमर या रीढ़ की नसों से जुड़ी परेशानी के कारण भी महसूस हो सकती है।
यही वजह है कि केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करने के बजाय इसके कारण का पता लगाना जरूरी होता है।
डायबिटीज में क्यों हो सकती है पैरों में जलन?
पैरों में जलन और सुन्नपन का एक महत्वपूर्ण कारण डायबिटीज से जुड़ी नसों की क्षति हो सकती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने पर शरीर की नसों और उन्हें रक्त पहुंचाने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान हो सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।
इस स्थिति में शुरुआत में पैरों या पंजों में झनझनाहट, जलन, सुन्नपन या चुभन जैसा एहसास हो सकता है। कई लोगों को रात में लक्षण ज्यादा महसूस होते हैं।
डायबिटीज से जुड़ी नसों की समस्या में एक और चुनौती यह है कि पैरों में संवेदना कम होने के कारण छोटी चोट या छाला भी आसानी से महसूस नहीं हो सकता। इसलिए डायबिटीज वाले लोगों के लिए पैरों की नियमित जांच और देखभाल महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि, पैरों में जलन होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को डायबिटीज ही है। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
विटामिन B12 की कमी भी हो सकती है वजह
शरीर में विटामिन B12 की कमी भी नसों से जुड़े लक्षण पैदा कर सकती है। इसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है।
कुछ लोगों में B12 की कमी के साथ थकान, कमजोरी, जीभ में दर्द या संतुलन से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है। लंबे समय तक कमी रहने पर नसों पर असर पड़ सकता है।
इसलिए यदि पैरों में लगातार झनझनाहट या सुन्नपन हो रहा है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। बिना जांच के खुद से लंबे समय तक विटामिन सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
नसों पर दबाव से भी हो सकती है परेशानी
हर बार पैरों की जलन या सुन्नपन का संबंध शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी या डायबिटीज से नहीं होता। कई बार किसी नस पर दबाव पड़ने के कारण भी ऐसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।
कमर की नसों पर दबाव या रीढ़ से जुड़ी कुछ समस्याओं में दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन कमर से पैर तक महसूस हो सकता है। इसे आम भाषा में नस दबना भी कहा जाता है।
यदि पैरों में सुन्नपन के साथ कमर से पैर तक दर्द जाता है या किसी विशेष स्थिति में लक्षण बढ़ते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।
पैरों में जलन के पीछे हो सकते हैं कई कारण
पैरों में जलन और सुन्नपन के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें डायबिटीज और विटामिन B12 की कमी के अलावा नसों से जुड़ी अन्य समस्याएं भी शामिल हो सकती हैं।
कुछ मामलों में अत्यधिक शराब का सेवन नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा कुछ दवाओं या अन्य चिकित्सकीय स्थितियों के कारण भी नसों से जुड़े लक्षण सामने आ सकते हैं।
कभी-कभी लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने या पैर पर दबाव पड़ने से थोड़ी देर के लिए सुन्नपन हो सकता है। अगर दबाव हटने के बाद यह समस्या जल्दी ठीक हो जाती है और बार-बार नहीं होती, तो स्थिति अलग हो सकती है।
लेकिन लगातार या बार-बार होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?
अगर पैरों में जलन या सुन्नपन कभी-कभार थोड़े समय के लिए होता है, तो उसका कारण सामान्य दबाव या अस्थायी समस्या भी हो सकता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
खासकर अगर:
सुन्नपन या जलन लगातार बनी रहती है।
लक्षण धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं।
पैरों में कमजोरी महसूस होने लगी है।
चलने या संतुलन बनाने में परेशानी हो रही है।
पैरों में बार-बार चोट या घाव हो रहे हैं।
किसी घाव का एहसास कम हो रहा है।
डायबिटीज पहले से है और पैरों में संवेदना बदल रही है।
कमर के दर्द के साथ पैर में सुन्नपन या झनझनाहट हो रही है।
ऐसे मामलों में डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर आवश्यक जांच तय कर सकते हैं।
डायबिटीज वाले लोगों को पैरों का खास ध्यान रखना चाहिए
जिन लोगों को डायबिटीज है, उनके लिए पैरों की देखभाल और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पैरों को रोजाना देखना चाहिए कि कहीं कट, छाला, लालिमा, सूजन या त्वचा में कोई बदलाव तो नहीं है।
नाखून काटते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे जूते पहनने चाहिए जिनसे पैर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। अगर पैरों में संवेदना कम हो गई है, तो बहुत गर्म पानी या गर्म वस्तु से पैर सेंकने से बचना चाहिए, क्योंकि चोट या जलने का पता देर से चल सकता है।
किसी घाव या संक्रमण को खुद से लंबे समय तक इलाज करने के बजाय चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
घरेलू उपायों के भरोसे न रहें
पैरों में जलन होने पर कई लोग ठंडे पानी में पैर डालने, तेल लगाने या बाजार में मिलने वाली क्रीम का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। इससे कुछ समय के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन अगर समस्या का मूल कारण नसों से जुड़ा है तो केवल बाहरी उपाय पर्याप्त नहीं हो सकते।
सबसे जरूरी बात यह पता लगाना है कि लक्षण क्यों हो रहे हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर, विटामिन स्तर या अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं।
अचानक सुन्नपन को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर शरीर के एक हिस्से में अचानक सुन्नपन या कमजोरी शुरू हो जाए, खासकर उसके साथ बोलने में दिक्कत, चेहरे के एक हिस्से का झुकना, तेज चक्कर या अचानक देखने में परेशानी जैसी समस्या हो, तो इसे सामान्य पैरों की जलन समझकर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
इसी तरह अचानक बहुत तेज दर्द, पैर का असामान्य रूप से ठंडा या पीला पड़ना अथवा गंभीर चोट के बाद संवेदना खत्म होना भी तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन की वजह हो सकता है।
पैरों में जलन, झनझनाहट और सुन्नपन कई कारणों से हो सकते हैं। डायबिटीज से जुड़ी नसों की समस्या इसका एक संभावित कारण है, लेकिन हर व्यक्ति में इसका कारण डायबिटीज हो, यह जरूरी नहीं है। विटामिन B12 की कमी, नसों पर दबाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए बार-बार होने वाली समस्या को केवल थकान मानकर छोड़ने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। खासकर डायबिटीज से पीड़ित लोगों को पैरों में होने वाले किसी भी नए बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
ध्यान रखें: केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी का निदान नहीं किया जा सकता। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

कोई टिप्पणी नहीं