Breaking News

बीपी बढ़ते ही करें ये काम! कुछ मिनट बाद दिख सकता है असर, लेकिन इस गलती से बिगड़ सकती है हालत



आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार बढ़ता तनाव, खराब खानपान, पर्याप्त नींद की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हाई बीपी कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के लंबे समय तक शरीर के अंदर नुकसान करता रहता है। इसी वजह से इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है।

ब्लड प्रेशर लंबे समय तक सामान्य से अधिक रहने पर हृदय, मस्तिष्क, किडनी और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना बेहद जरूरी है। हालांकि, दवा और चिकित्सकीय उपचार के साथ जीवनशैली में बदलाव भी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी संदर्भ में योग और धीमी सांस से जुड़ी कुछ तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाता है। शीतली प्राणायाम ऐसी ही एक योगिक श्वसन तकनीक है, जिसे तनाव कम करने और शरीर को शांत करने के लिए किया जाता है। कुछ छोटे अध्ययनों में धीमी और नियंत्रित श्वास तकनीकों के दौरान ब्लड प्रेशर और हृदय गति में अस्थायी कमी देखी गई है। हालांकि, इसे हाई बीपी का इलाज या दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

आखिर क्या है शीतली प्राणायाम?

शीतली प्राणायाम एक पारंपरिक योगिक श्वसन तकनीक है। इसमें आमतौर पर जीभ को मोड़कर नली जैसा आकार बनाया जाता है और उसी रास्ते से धीरे-धीरे सांस अंदर लेने का अभ्यास किया जाता है। इसके बाद मुंह बंद करके नाक के रास्ते सांस बाहर छोड़ी जाती है।

इस प्रक्रिया में सांस लेने और छोड़ने की गति नियंत्रित रहती है। इसका उद्देश्य शरीर और मन को शांत करना तथा सांस की गति को धीमा करना है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव या बेचैनी के समय नियंत्रित और धीमी सांस लेने की तकनीक व्यक्ति को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकती है। कुछ शोधों में धीमी श्वसन तकनीकों को ब्लड प्रेशर में अल्पकालिक बदलाव से भी जोड़ा गया है।

हालांकि हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

कैसे किया जाता है शीतली प्राणायाम?

शीतली प्राणायाम करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। इसे आराम से और सहज तरीके से करना बेहतर माना जाता है।

पहला कदम- आराम से बैठें

सबसे पहले किसी शांत और आरामदायक जगह पर बैठ जाएं। रीढ़ को सीधा रखें, लेकिन शरीर में अनावश्यक तनाव न रखें। कंधों को ढीला छोड़ दें और कुछ सामान्य सांसें लें।

दूसरा कदम- जीभ को नली जैसा बनाएं

अब जीभ को बाहर निकालें और उसके किनारों को मोड़कर नली जैसा आकार बनाने का प्रयास करें। हर व्यक्ति जीभ को इस तरह मोड़ नहीं पाता। अगर ऐसा न हो सके तो जबरदस्ती करने की जरूरत नहीं है।

तीसरा कदम- धीरे सांस अंदर लें

जीभ से बनी नली के माध्यम से धीरे-धीरे सांस अंदर लेने का प्रयास करें। सांस को बहुत तेजी से या जरूरत से ज्यादा गहराई तक खींचने की कोशिश न करें। पूरी प्रक्रिया आरामदायक रहनी चाहिए।

चौथा कदम- नाक से सांस छोड़ें

सांस अंदर लेने के बाद मुंह बंद करें और नाक के रास्ते धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। सांस को लंबे समय तक रोकने की जरूरत नहीं है।

पांचवां कदम- प्रक्रिया दोहराएं

इसी प्रक्रिया को कुछ बार आराम से दोहराया जा सकता है। शुरुआत में कम बार करें और अगर शरीर सहज महसूस करे तो धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाया जा सकता है।

अगर अभ्यास करते समय चक्कर, घबराहट, सांस लेने में परेशानी या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाना चाहिए।

हाई बीपी में कैसे मदद कर सकता है यह अभ्यास?

धीमी और नियंत्रित सांस लेने से शरीर के स्वायत्त तंत्रिका तंत्र पर असर पड़ सकता है। जब व्यक्ति तनाव में होता है तो शरीर का 'फाइट या फ्लाइट' सिस्टम सक्रिय हो सकता है। इससे हृदय की धड़कन और रक्तचाप बढ़ सकता है।

इसके विपरीत, धीमी सांस लेने से शरीर को रिलैक्सेशन की स्थिति में जाने में मदद मिल सकती है। कुछ अध्ययनों में धीमी श्वसन तकनीकों के दौरान हृदय गति और ब्लड प्रेशर में अस्थायी कमी देखी गई है।

यही कारण है कि योग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज को तनाव प्रबंधन के एक सहायक तरीके के रूप में देखा जाता है।

लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ मिनट प्राणायाम करने से हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी खत्म नहीं होती। अगर किसी व्यक्ति को लगातार हाई बीपी रहता है तो उसका उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार जरूरी है।

सिर्फ प्राणायाम के भरोसे न रहें

हाई बीपी के मरीजों के लिए सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि वे डॉक्टर की दवा बंद करके केवल योग या प्राणायाम पर निर्भर होने लगें। ऐसा नहीं करना चाहिए।

अगर डॉक्टर ने ब्लड प्रेशर की दवा लिखी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद या कम नहीं करना चाहिए। दवा में किसी तरह का बदलाव केवल डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए।

प्राणायाम को जीवनशैली में एक सहायक गतिविधि के रूप में शामिल किया जा सकता है, बशर्ते व्यक्ति के लिए यह सुरक्षित हो।

हाई बीपी में खानपान का भी रखें ध्यान

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए सिर्फ सांस की एक्सरसाइज पर्याप्त नहीं है। खानपान पर ध्यान देना भी जरूरी है।

बहुत ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना, फल और सब्जियों को आहार में शामिल करना, पर्याप्त पानी पीना और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन से बचना मददगार हो सकता है।

इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश भी जरूरी है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर की जरूरत पड़ सकती है?

अगर ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है और इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, भ्रम, तेज सिरदर्द, देखने में परेशानी या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो इसे केवल तनाव या सामान्य हाई बीपी मानकर घर पर प्राणायाम करते रहना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

इसी तरह बार-बार ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, भले ही कोई लक्षण दिखाई न दे।

क्या हर व्यक्ति शीतली प्राणायाम कर सकता है?

शीतली प्राणायाम एक सामान्य योगिक श्वसन अभ्यास है, लेकिन हर व्यक्ति के लिए हर तकनीक समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। सांस से जुड़ी बीमारी, चक्कर आने की समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति वाले लोगों को नया श्वसन अभ्यास शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

योग का अभ्यास भी सही तकनीक सीखकर करना चाहिए। गलत तरीके से सांस लेने या जरूरत से ज्यादा जोर लगाने पर व्यक्ति असहज महसूस कर सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर ऐसी समस्या है जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए नियमित बीपी जांच, डॉक्टर की सलाह, संतुलित भोजन, शारीरिक गतिविधि और तनाव प्रबंधन को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।

शीतली प्राणायाम जैसी धीमी और नियंत्रित सांस की तकनीक कुछ लोगों को रिलैक्स करने और तनाव कम करने में मदद कर सकती है। कुछ शोधों में ऐसी श्वसन तकनीकों के साथ ब्लड प्रेशर में अल्पकालिक कमी भी देखी गई है। लेकिन इसे हाई बीपी की दवा या डॉक्टर के उपचार का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि अगर ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ रहता है या बहुत ज्यादा बढ़ गया है, तो प्राणायाम के भरोसे न रहें और चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।

कोई टिप्पणी नहीं