Breaking News

सिरदर्द और चक्कर को सिर्फ दिमाग की बीमारी न समझें, कान और साइनस भी हो सकते हैं जिम्मेदार; जानिए किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से मिलना जरूरी



सिरदर्द और चक्कर आना ऐसी समस्याएं हैं, जिन्हें अक्सर लोग सीधे तौर पर दिमाग या न्यूरो से जुड़ी बीमारी मान लेते हैं। हालांकि हर बार इसका कारण न्यूरोलॉजिकल समस्या ही हो, यह जरूरी नहीं है। कई मामलों में कान के अंदर मौजूद संतुलन तंत्र, कान के क्रिस्टल, साइनस, आंखों की समस्या, ब्लड प्रेशर और यहां तक कि शरीर की मांसपेशियों या जोड़ों से जुड़ी परेशानियां भी चक्कर और सिरदर्द का कारण बन सकती हैं।

ईएनटी एवं वर्टिगो विशेषज्ञ डॉ. रिचा अग्रवाल के अनुसार, शरीर का संतुलन बनाए रखने में कान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कान केवल सुनने का काम नहीं करता, बल्कि शरीर को बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करता है। इसलिए किसी व्यक्ति को सुनने में कोई परेशानी न होने के बावजूद कान से संबंधित समस्या के कारण चक्कर आ सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिरदर्द या चक्कर की समस्या लगातार बनी रहे तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर चक्कर के साथ चलने में परेशानी, बार-बार गिरना, उल्टी, तेज सिरदर्द, सुनाई देने में बदलाव या शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

कान के क्रिस्टल हिलने से क्यों आते हैं चक्कर?

कान के अंदर शरीर के संतुलन को नियंत्रित करने वाला एक महत्वपूर्ण तंत्र मौजूद होता है। इसमें बेहद छोटे कैल्शियम क्रिस्टल भी होते हैं। कुछ परिस्थितियों में ये क्रिस्टल अपनी सामान्य जगह से खिसक जाते हैं। इसके बाद व्यक्ति को खासकर लेटे हुए उठने, करवट बदलने या अचानक सिर की स्थिति बदलने पर चक्कर महसूस हो सकते हैं।

ऐसी स्थिति को आमतौर पर पोजिशनल वर्टिगो से जोड़ा जाता है। इसमें व्यक्ति को ऐसा लग सकता है जैसे आसपास की चीजें घूम रही हैं या शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है। कई मामलों में उचित जांच के बाद विशेष थेरेपी और चिकित्सकीय प्रक्रिया से राहत मिल सकती है।

हर चक्कर का कारण एक जैसा नहीं होता

चक्कर आने की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कान की अंदरूनी समस्या के अलावा माइग्रेन, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, आंखों की कमजोरी, साइनस की परेशानी, दिमाग से जुड़ी कुछ स्थितियां और शरीर में संतुलन से संबंधित अन्य समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं।

यही वजह है कि केवल लक्षण देखकर खुद से बीमारी तय करना सही नहीं है। डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षणों की अवधि, चक्कर कब और किस स्थिति में आता है, ब्लड प्रेशर, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।

गाड़ी चलाते समय चक्कर आए तो बिल्कुल न करें नजरअंदाज

गाड़ी चलाते समय चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना विशेष रूप से गंभीर स्थिति हो सकती है। ऐसे में दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। यदि किसी व्यक्ति को वाहन चलाते समय बार-बार चक्कर आते हैं या वह गिर चुका है, तो उसे बिना चिकित्सकीय सलाह के वाहन चलाना जारी नहीं रखना चाहिए।

आंखों के ऊपर दर्द या खिंचाव के साथ चक्कर आने की स्थिति को भी केवल दिमाग की समस्या मानना उचित नहीं है। कान, आंख, साइनस या अन्य कारणों की जांच की आवश्यकता हो सकती है।

दो महीने से चक्कर आ रहे हैं तो जांच जरूरी

यदि किसी व्यक्ति को कई सप्ताह से लगातार चक्कर आ रहे हैं और साथ में चलने का संतुलन भी बिगड़ रहा है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। खासकर जब ब्लड प्रेशर भी बढ़ता रहता हो, तब पहले रक्तचाप को नियंत्रित करना जरूरी है।

अगर ब्लड प्रेशर नियंत्रित होने के बाद भी चक्कर की समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं। मरीज को यह भी बताना चाहिए कि चक्कर कब आता है—सुबह उठते समय, लेटने के बाद, चलते समय, सिर घुमाने पर या लगातार।

76 साल की उम्र में उठते समय चक्कर क्यों?

बुजुर्गों में लेटे हुए उठने पर चक्कर आने की समस्या कई कारणों से हो सकती है। इनमें कान के संतुलन तंत्र से जुड़ी समस्या एक कारण हो सकती है। इसके अलावा अचानक रक्तचाप में बदलाव, दवाओं का प्रभाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

इसलिए बुजुर्ग व्यक्ति में बार-बार चक्कर आने को केवल उम्र का असर समझकर छोड़ना उचित नहीं है। डॉक्टर से जांच कराने के बाद ही वास्तविक कारण का पता लगाया जा सकता है।

हर साल कान की सफाई कराना जरूरी नहीं

कान में बनने वाला मैल हर व्यक्ति में अलग-अलग मात्रा में बनता है। कुछ लोगों में यह जल्दी जमा हो सकता है, जबकि कुछ लोगों में बहुत कम बनता है। इसलिए बिना किसी समस्या के हर साल कान की सफाई कराना जरूरी नहीं माना जाता।

हालांकि समय-समय पर ईएनटी विशेषज्ञ से कान की जांच कराना उपयोगी हो सकता है। यदि कान में दर्द, सुनाई कम देना, कान बंद महसूस होना, पानी या अन्य स्राव आना अथवा लगातार कोई परेशानी हो तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

कान में खुद से किसी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल करके मैल निकालने की कोशिश भी नुकसान पहुंचा सकती है।

सामान्य सीटी स्कैन रिपोर्ट के बाद भी लक्षण रहें तो?

कई बार मरीज को सिरदर्द और चक्कर की समस्या होती है और उसकी सीटी स्कैन रिपोर्ट सामान्य आती है। इसका मतलब यह नहीं है कि चक्कर का कोई कारण ही नहीं है। चक्कर के अनेक कारण ऐसे हो सकते हैं जिनके लिए चिकित्सक लक्षणों के आधार पर अलग प्रकार की जांच या विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं।

इसलिए सामान्य स्कैन रिपोर्ट मिलने के बाद भी अगर समस्या लगातार बनी हुई है, तो मरीज को अपने डॉक्टर से दोबारा संपर्क करना चाहिए। बिना सलाह के दवाएं बंद करना, बदलना या लंबे समय तक जारी रखना उचित नहीं है।

नाक और सिर के आसपास दर्द साइनस की वजह से भी हो सकता है

नाक और आंखों के आसपास या माथे में दर्द होने पर कई लोग इसे केवल सिरदर्द समझ लेते हैं। लेकिन कुछ मामलों में साइनस से जुड़ी परेशानी भी इसके पीछे हो सकती है।

बार-बार सर्दी-जुकाम, नाक बंद रहना, चेहरे के आसपास दबाव या दर्द और सिर में भारीपन जैसे लक्षण होने पर ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। हालांकि हर सिरदर्द साइनस की वजह से हो, यह भी जरूरी नहीं है।

इसीलिए लगातार या बार-बार होने वाले सिरदर्द के मामले में सही कारण की पहचान जरूरी है।

वजन और जोड़ों की समस्या से भी बिगड़ सकता है बैलेंस

चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ने का कारण केवल कान या दिमाग नहीं होता। अधिक वजन, घुटनों और जोड़ों की समस्या, मांसपेशियों की कमजोरी तथा शरीर की नसों से जुड़ी कुछ परेशानियां भी चलने के तरीके और संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।

ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति देखकर तय करते हैं कि किस विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

सिरदर्द और चक्कर के पीछे माइग्रेन भी हो सकता है कारण

माइग्रेन को लोग अक्सर केवल तेज सिरदर्द से जोड़ते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में इसके साथ चक्कर और संतुलन बिगड़ने जैसी समस्या भी हो सकती है। इसके अलावा आंखों का नंबर बढ़ना, साइनस की समस्या, कान की परेशानी और अन्य कारण भी सिरदर्द तथा चक्कर से जुड़े हो सकते हैं।

इसलिए बार-बार होने वाले लक्षणों के मामले में खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

वर्टिगो में दीवार का सहारा लेना चेतावनी का संकेत

यदि किसी व्यक्ति को वर्टिगो इतना ज्यादा होता है कि उसे चलने के लिए दीवार का सहारा लेना पड़ता है, तो इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वर्टिगो के पीछे कान की अंदरूनी समस्या, माइग्रेन, रक्तचाप में बदलाव या अन्य कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञ जरूरत के अनुसार मरीज की जांच कर कारण निर्धारित कर सकते हैं और उसी आधार पर उपचार की सलाह दी जाती है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

चक्कर और सिरदर्द सामान्य कारणों से भी हो सकते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है। यदि चक्कर के साथ अचानक बोलने में दिक्कत, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, बेहोशी, अचानक बहुत तेज सिरदर्द, देखने में परेशानी, लगातार उल्टी, चलने में गंभीर परेशानी या बार-बार गिरने जैसी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

खासकर बुजुर्गों और पहले से ब्लड प्रेशर जैसी समस्या वाले लोगों में ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है।

सिरदर्द और चक्कर दो ऐसे लक्षण हैं जिनके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। हर चक्कर को ब्रेन की बीमारी मानना सही नहीं है और हर सिरदर्द को केवल साइनस की समस्या समझना भी उचित नहीं। कान के संतुलन तंत्र, कान के क्रिस्टल, साइनस, माइग्रेन, आंखों की समस्या, ब्लड प्रेशर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों की भूमिका हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगातार या बार-बार होने वाले चक्कर, संतुलन बिगड़ने और सिरदर्द को नजरअंदाज न किया जाए। विशेष रूप से वाहन चलाते समय चक्कर आने या गिरने की स्थिति में डॉक्टर से जल्द सलाह लेना जरूरी है। सही कारण की पहचान होने के बाद ही उचित उपचार का रास्ता तय किया जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं