स्मार्टफोन खरीदने वालों के लिए आई बड़ी मुसीबत! अचानक 20% गिरा मोबाइल बाजार, अब फोन होंगे इतने महंगे कि बढ़ जाएगा बजट?
दुनियाभर में स्मार्टफोन बाजार के लिए साल 2026 बेहद चुनौतीपूर्ण साबित होता नजर आ रहा है। स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के सामने जहां महंगे कंपोनेंट्स की समस्या बढ़ती जा रही है, वहीं मेमोरी चिप की कमी ने पूरी सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर अब स्मार्टफोन की बिक्री और शिपमेंट पर दिखाई देने लगा है।
Counterpoint Research की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह किसी तीसरी तिमाही में 2012 के बाद सबसे निचला स्तर है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ती DRAM और NAND मेमोरी कीमतों ने कंपनियों की लागत बढ़ा दी है और सप्लाई की समस्या को और गंभीर कर दिया है।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर उन स्मार्टफोन पर पड़ रहा है, जिनकी कीमत कम है और जिनमें कंपनियों के लिए मुनाफे का मार्जिन पहले से ही सीमित होता है। दूसरी तरफ महंगे यानी प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि स्मार्टफोन बाजार में अब प्रीमियम और बजट सेगमेंट के बीच अंतर और बढ़ता दिखाई दे रहा है।
आखिर स्मार्टफोन इतने महंगे क्यों हो रहे हैं?
स्मार्टफोन की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इस समय मेमोरी चिप की बढ़ती कीमत बताई जा रही है। फोन में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND मेमोरी का संबंध रैम, स्टोरेज और डिवाइस के कई जरूरी कार्यों से होता है।
जब इन कंपोनेंट्स की कीमत बढ़ती है तो उसका असर सीधे स्मार्टफोन की Bill of Materials यानी BOM लागत पर पड़ता है। Counterpoint Research के अनुसार, 2026 में मेमोरी की कीमतों में तेज वृद्धि ने स्मार्टफोन कंपनियों की लागत संरचना को काफी बदल दिया है। जुलाई में जारी Counterpoint के विश्लेषण के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में समान कॉन्फिगरेशन वाले लो-एंड स्मार्टफोन की कंपोनेंट लागत सालाना आधार पर करीब 70 फीसदी तक बढ़ी, जबकि मिड-रेंज सेगमेंट में BOM लागत में करीब 52 फीसदी की वृद्धि हुई।
यानी कंपनियों के लिए पहले जिस कीमत में फोन बनाना संभव था, अब उसी कीमत पर उत्पादन करना मुश्किल होता जा रहा है।
AI की बढ़ती मांग भी बनी बड़ी वजह
मेमोरी चिप की मौजूदा समस्या को केवल स्मार्टफोन की मांग से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बड़े डेटा सेंटर और सर्वर बड़ी मात्रा में हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसका असर मोबाइल इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। Counterpoint के अनुसार, AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग ने मेमोरी सप्लाई पर दबाव बढ़ाया है। मार्च 2026 की रिपोर्ट में Counterpoint ने बताया था कि Q1 2026 में DRAM कीमतें पिछली तिमाही की तुलना में 50 फीसदी से ज्यादा और NAND Flash कीमतें 90 फीसदी से ज्यादा बढ़ी थीं।
यही कारण है कि स्मार्टफोन कंपनियों को मेमोरी के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
2026 में स्मार्टफोन की कीमतों में कितना इजाफा हुआ?
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अलग-अलग Counterpoint रिपोर्ट में कीमतों के आंकड़े अलग-अलग अवधि और बाजारों के आधार पर दिए गए हैं।
सितंबर 2026 में जारी Counterpoint Research की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में मौजूदा स्मार्टफोन की औसत खुदरा कीमतों में 2026 के दौरान करीब 15 फीसदी की वृद्धि हुई थी। वहीं, 40 फीसदी से अधिक स्मार्टफोन मॉडल की कीमतों में वृद्धि देखी गई। नए लॉन्च होने वाले फोन पिछले साल के समान मॉडल की तुलना में औसतन करीब 25 फीसदी महंगे थे।
वहीं, अक्टूबर में जारी Q3 रिपोर्ट में Counterpoint ने बताया कि कंपनियों द्वारा बढ़ती कंपोनेंट लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाने के कारण 2026 में अब तक वैश्विक स्मार्टफोन रिटेल कीमतों में करीब 20 फीसदी की वृद्धि देखी गई है।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि 15 फीसदी और 20 फीसदी के आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि और कीमतों के आकलन को दर्शाते हैं, न कि जरूरी तौर पर एक-दूसरे के विरोधी आंकड़े।
भारत में स्मार्टफोन कितने महंगे हुए?
भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में इसका असर और ज्यादा दिखाई दे रहा है। Counterpoint Research की सितंबर रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत में स्मार्टफोन की मौजूदा खुदरा कीमतों में करीब 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो प्रमुख बाजारों में सबसे ज्यादा थी। एशिया प्रशांत क्षेत्र में यह वृद्धि करीब 19 फीसदी और मिडिल ईस्ट एवं अफ्रीका क्षेत्र में करीब 18 फीसदी रही।
भारत में बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन की मांग काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए अगर कंपनियां लगातार बढ़ती लागत को कीमतों में शामिल करती हैं, तो इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो 10 हजार, 15 हजार या 20 हजार रुपये के आसपास स्मार्टफोन खरीदने की योजना बनाते हैं।
Samsung और Apple क्यों टिके हुए हैं?
ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट के बावजूद कुछ बड़ी कंपनियां अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। Counterpoint Research के अनुसार, 2026 की तीसरी तिमाही में Samsung 23 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा। वहीं Apple की हिस्सेदारी बढ़कर 22 फीसदी पहुंच गई। Apple की तीसरी तिमाही की हिस्सेदारी पहली बार 20 फीसदी से ऊपर गई है।
Samsung के शिपमेंट में सालाना आधार पर करीब 3 फीसदी की गिरावट आई, लेकिन कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी। Counterpoint के मुताबिक, बेहतर सप्लाई स्थिति, प्रीमियम मॉडल और फोल्डेबल फोन की मांग ने कंपनी को मदद पहुंचाई।
Apple के मामले में भी प्रीमियम सेगमेंट की मजबूती महत्वपूर्ण रही। इसका मतलब यह है कि बाजार में कुल फोन की बिक्री घट रही है, लेकिन महंगे फोन खरीदने वाले ग्राहकों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।
Xiaomi, Oppo और Vivo पर दबाव
दूसरी तरफ कई चीनी स्मार्टफोन कंपनियों को शिपमेंट में ज्यादा गिरावट का सामना करना पड़ा है।
Counterpoint के अनुसार, Xiaomi के शिपमेंट में तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 30 फीसदी से अधिक गिरावट आई। कंपनी ने लो-प्राइस सेगमेंट में अपना एक्सपोजर घटाया और अधिक मुनाफे वाले मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया।
वहीं Oppo और Vivo के शिपमेंट में भी 20 फीसदी से अधिक की सालाना गिरावट दर्ज की गई। दोनों कंपनियों ने मेमोरी लागत बढ़ने के कारण एंट्री और मिड-रेंज मॉडल में कीमतों में बदलाव किए हैं।
इससे साफ है कि मौजूदा संकट में कंपनियां केवल ज्यादा फोन बेचने के बजाय कम फोन बेचकर भी बेहतर मुनाफा कमाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही हैं।
बजट फोन के फीचर्स भी हो सकते हैं प्रभावित
स्मार्टफोन की कीमत बढ़ने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि कंपनी केवल कीमत बढ़ाएगी। कई कंपनियां लागत कम करने के लिए फोन के स्पेसिफिकेशन में भी बदलाव कर सकती हैं।
Counterpoint के अनुसार, कंपनियां कम स्टोरेज क्षमता, कैमरा कॉन्फिगरेशन में बदलाव और कुछ सेगमेंट में 4G मॉडल का दोबारा इस्तेमाल जैसे उपाय अपना रही हैं।
यानी आने वाले समय में ग्राहक को समान कीमत पर पहले की तुलना में कम स्टोरेज या अलग हार्डवेयर कॉन्फिगरेशन वाला फोन मिल सकता है।
क्या नया फोन खरीदना महंगा पड़ेगा?
अगर मेमोरी चिप की कीमत और सप्लाई का दबाव आगे भी जारी रहता है, तो नए स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।
Counterpoint ने भी 2026 के बाकी हिस्से के लिए स्मार्टफोन बाजार को चुनौतीपूर्ण बताया है। कंपनियां शिपमेंट की संख्या बढ़ाने के बजाय लाभप्रदता पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इससे बजट सेगमेंट में विकल्प कम हो सकते हैं और प्रीमियम मॉडल की तरफ कंपनियों का झुकाव बढ़ सकता है।
ऐसे में अगर किसी ग्राहक का मौजूदा स्मार्टफोन ठीक से काम कर रहा है, तो सिर्फ नया मॉडल आने के कारण तुरंत अपग्रेड करना जरूरी नहीं है। वहीं, जिन लोगों को फोन की जरूरत है, वे खरीदारी से पहले कीमत, स्टोरेज, रैम और ऑफलाइन-ऑनलाइन कीमतों की तुलना कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
फिलहाल स्मार्टफोन बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि मेमोरी चिप की कीमतें कब स्थिर होती हैं और सप्लाई में कितना सुधार आता है।
एक तरफ AI डेटा सेंटर और सर्वर की मांग मेमोरी की जरूरत बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ स्मार्टफोन कंपनियां अपनी लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में बाजार में एक तरह का दबाव बन गया है—कंपनियों के लिए उत्पादन महंगा है और ग्राहकों के लिए महंगे फोन खरीदना आसान नहीं।
सबसे ज्यादा दबाव बजट और मिड-रेंज सेगमेंट पर दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग अपेक्षाकृत मजबूत रहने से कंपनियां महंगे मॉडल पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।
कुल मिलाकर, स्मार्टफोन बाजार में आई 20 फीसदी की वैश्विक शिपमेंट गिरावट सिर्फ बिक्री में कमी की कहानी नहीं है। इसके पीछे मेमोरी चिप की कमी, बढ़ती उत्पादन लागत, AI डेटा सेंटर की मांग और ग्राहकों की बदलती खरीदारी रणनीति का बड़ा योगदान है। आने वाले महीनों में अगर मेमोरी संकट कम नहीं हुआ, तो स्मार्टफोन की कीमतों के साथ-साथ बाजार में उपलब्ध मॉडल और उनके फीचर्स पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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