Breaking News

सावधान! सामान्य बुखार में भी तेजी से घट रहीं प्लेटलेट्स, इसके लक्षण पहचानकर डॉक्टर को दिखाना जरूरी


 

पिछले दिनों हुई लगातार और तेज बारिश के बाद कई इलाकों में जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बारिश का पानी जमा होने के साथ ही अब मच्छरों की संख्या बढ़ने लगी है और इसका असर अस्पतालों की ओपीडी में भी दिखाई देने लगा है। बुखार, गले में दर्द, खांसी और कमजोरी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों के लिए सबसे बड़ी चिंता डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छरजनित रोगों को लेकर है।

कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। मेडिसिन विभाग में पहुंचने वाले कई मरीजों में तेज बुखार के साथ गले में दर्द, खांसी और निगलने में परेशानी जैसे लक्षण भी सामने आए। कुछ मरीजों ने इतनी ज्यादा तकलीफ बताई कि पानी या भोजन निगलने में भी परेशानी हो रही थी।

चिकित्सकों के अनुसार इस मौसम में हर बुखार को डेंगू या मलेरिया मान लेना सही नहीं है। वायरल संक्रमण समेत कई अन्य कारणों से भी बुखार हो सकता है। हालांकि, बारिश और जलभराव के बाद मच्छरों का प्रजनन बढ़ने के कारण डेंगू और मलेरिया की जांच को लेकर सतर्कता जरूरी हो जाती है।

ओपीडी में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी

कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. धीर सिंह के अनुसार सोमवार और मंगलवार दोनों दिनों में अस्पताल में बुखार से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में पहुंचे। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों में बुखार के साथ गले में दर्द और खांसी की शिकायत भी देखने को मिल रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में बदलाव और बारिश के बाद वायरल संक्रमण के मामले भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में मरीजों को बिना जांच के खुद से दवाएं लेने से बचना चाहिए। खासकर लगातार बने रहने वाले बुखार में चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा के अनुसार डेंगू और मलेरिया से संक्रमित कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से कम होने की स्थिति सामने आ रही है। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या बेहद कम स्तर तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।

हालांकि, केवल प्लेटलेट्स की संख्या कम होना डेंगू की पुष्टि नहीं करता। डॉक्टरों के अनुसार बीमारी का कारण जानने के लिए मरीज की स्थिति, लक्षण और आवश्यक जांच को एक साथ देखा जाता है।

वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स गिरने की शिकायत

इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा प्लेटलेट्स को लेकर हो रही है। कई मरीजों और उनके परिजनों में प्लेटलेट्स कम होने को लेकर चिंता देखी जा रही है। अस्पताल में ऐसे मरीज भी पहुंच रहे हैं जिनमें बुखार के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या कम पाई गई है।

चिकित्सकों के मुताबिक कुछ वायरल संक्रमणों में भी प्लेटलेट्स अस्थायी रूप से कम हो सकती हैं। इसलिए सिर्फ प्लेटलेट्स के आंकड़े को देखकर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि मरीज को डेंगू ही है।

डेंगू की स्थिति में डॉक्टर मरीज के लक्षणों, रक्त जांच और बीमारी की अवधि के आधार पर आगे की निगरानी और उपचार तय करते हैं। तेज बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, खून आने के संकेत या बेहोशी जैसी स्थिति होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

प्लेटलेट्स आखिर क्यों होती हैं महत्वपूर्ण?

प्लेटलेट्स खून में मौजूद छोटी रक्त कोशिकीय संरचनाएं हैं, जिनका मुख्य काम रक्तस्राव को रोकने में मदद करना है। चोट लगने पर खून का थक्का बनने की प्रक्रिया में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

स्वस्थ व्यक्ति में प्लेटलेट्स की संख्या आमतौर पर लगभग 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलिटर के बीच मानी जाती है। हालांकि, सामान्य सीमा प्रयोगशाला और व्यक्ति की परिस्थितियों के अनुसार कुछ अलग हो सकती है।

डेंगू जैसी कुछ बीमारियों में प्लेटलेट्स की संख्या घट सकती है। लेकिन मरीज की गंभीरता केवल प्लेटलेट्स के एक आंकड़े से तय नहीं की जाती। डॉक्टर रक्तचाप, रक्तस्राव के संकेत, शरीर में पानी की स्थिति, अन्य रक्त जांच और मरीज की समग्र हालत को देखते हैं।

यही वजह है कि बुखार के दौरान बार-बार खुद से प्लेटलेट्स की रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और निगरानी कराना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

प्लेटलेट्स कम होने पर कौन से संकेत दिख सकते हैं?

चिकित्सकों के अनुसार शरीर में प्लेटलेट्स बहुत कम होने या रक्तस्राव की समस्या होने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें त्वचा पर छोटे लाल या बैंगनी चकत्ते, आसानी से नील पड़ना, नाक या मसूड़ों से खून आना और असामान्य रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं।

कुछ गंभीर मामलों में पेशाब या मल में खून दिखाई दे सकता है। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना या अचानक हालत बिगड़ना भी चिंता का कारण हो सकता है।

ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर यदि व्यक्ति को कई दिनों से बुखार है और साथ में कमजोरी या रक्तस्राव के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए।

बारिश के बाद मच्छरों का बढ़ता खतरा

डेंगू और मलेरिया दोनों ही मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां हैं। बारिश के बाद घरों के आसपास, खाली प्लॉट, निर्माण स्थलों, गड्ढों, पुराने टायरों, कूलर, पानी की टंकियों और अन्य स्थानों पर पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है।

इसी कारण बारिश के बाद जलभराव वाले इलाकों में मच्छर नियंत्रण को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। घरों और आसपास जमा पानी को जल्द से जल्द हटाना चाहिए।

कूलर में जमा पानी नियमित रूप से साफ करना, पानी की टंकियों को ढककर रखना और ऐसे बर्तनों या वस्तुओं को हटाना जरूरी है जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है।

हर बुखार डेंगू नहीं, लेकिन जांच जरूरी

मौसम में बदलाव के दौरान वायरल बुखार भी आम हो सकता है। इसके अलावा गले के संक्रमण और सांस से जुड़ी दूसरी बीमारियों में भी बुखार आ सकता है। इसलिए बुखार होते ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है।

दूसरी तरफ, डेंगू या मलेरिया का समय पर पता लगाना भी महत्वपूर्ण है। यदि मरीज को तेज बुखार है, आसपास डेंगू-मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं या मच्छरों का प्रकोप ज्यादा है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार बुखार के दौरान पर्याप्त आराम और पानी पीना महत्वपूर्ण है। लेकिन कौन सी दवा लेनी है, यह डॉक्टर से पूछकर ही तय करना चाहिए। खासकर ऐसी दवाओं से बचना चाहिए जो डेंगू की आशंका में रक्तस्राव का जोखिम बढ़ा सकती हैं।

डॉक्टरों ने दी लापरवाही न करने की सलाह

सीएमओ डॉ. सुनील कुमार दोहरे ने लोगों से अपील की है कि बुखार होने पर उसे सामान्य समझकर लंबे समय तक घर पर न छोड़ें। नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय जांच कराएं।

स्वास्थ्य विभाग की सलाह का उद्देश्य केवल डेंगू और मलेरिया से बचाव करना ही नहीं, बल्कि अन्य संक्रमणों की समय पर पहचान करना भी है। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहता है, तेजी से बढ़ता है या मरीज की हालत बिगड़ती दिखाई देती है तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

घर और आसपास सफाई रखना सबसे जरूरी

मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए केवल दवा या अस्पताल पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। घर और आसपास की सफाई भी उतनी ही जरूरी है। जहां पानी जमा है, वहां उसे हटाना चाहिए। पानी रखने वाले बर्तनों को ढककर रखना चाहिए और कूलर व अन्य जल पात्रों की नियमित सफाई करनी चाहिए।

शाम और सुबह के समय मच्छरों से बचाव के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना और जरूरत के अनुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना भी मददगार हो सकता है।

बारिश के बाद बढ़ते बुखार के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क कर दिया है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, वहीं डेंगू-मलेरिया को लेकर लोगों में चिंता भी बढ़ी है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि लोग घबराने के बजाय सावधानी बरतें, मच्छरों के प्रजनन को रोकें और लगातार या गंभीर बुखार होने पर समय पर चिकित्सकीय जांच कराएं।

किसी भी मरीज में प्लेटलेट्स कम पाए जाने पर खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर की निगरानी में आगे की जांच और उपचार कराना चाहिए। समय पर पहचान, सही निगरानी और उचित चिकित्सा देखभाल से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं