बारिश थमते ही मंडराया बड़ा खतरा! अस्पतालों में बुखार के मरीजों की भीड़, प्लेटलेट्स 10 हजार तक गिरने से डॉक्टरों की बढ़ी चिंता
अलीगढ़: पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव की स्थिति ने अब स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बारिश का पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका पहले ही जताई जा रही थी और अब अस्पतालों में बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डेंगू और मलेरिया के साथ वायरल बुखार से पीड़ित मरीज भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं।
सबसे ज्यादा चिंता उन मरीजों को लेकर है जिनमें बुखार के दौरान प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रही हैं। चिकित्सकों के मुताबिक कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या बेहद कम होकर करीब 10 हजार तक पहुंचने के मामले सामने आए हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है और लक्षणों के आधार पर तत्काल उपचार जरूरी हो सकता है।
कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल की ओपीडी में पिछले दिनों बुखार के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली। मेडिसिन विभाग में पहुंचने वाले कई मरीजों में बुखार के साथ गले में दर्द और खांसी की शिकायत भी सामने आ रही है।
ओपीडी में सबसे ज्यादा बुखार के मरीज
जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार और मंगलवार को बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या काफी अधिक रही। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के अनुसार मेडिसिन विभाग में आने वाले मरीजों में बुखार के साथ गले में दर्द और खांसी जैसे लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं।
कुछ मरीजों ने गले में इतनी ज्यादा तकलीफ की शिकायत की कि उन्हें पानी या भोजन निगलने में परेशानी हो रही थी। कुछ लोगों को बोलने में भी दिक्कत महसूस हो रही है।
मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. धीर सिंह के अनुसार लगातार दो दिनों तक सबसे अधिक मरीज बुखार से संबंधित शिकायतों को लेकर अस्पताल पहुंचे। ऐसे में चिकित्सकों ने लोगों से लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने और आवश्यकता पड़ने पर समय पर जांच कराने की सलाह दी है।
डेंगू-मलेरिया के मरीजों में तेजी से घट रही प्लेटलेट्स
मेडिसिन विभाग के चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा के मुताबिक डेंगू और मलेरिया संक्रमण से पीड़ित कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने के मामले सामने आ रहे हैं।
कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स का स्तर करीब 10 हजार तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। प्लेटलेट्स का इतना कम स्तर गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, खासकर यदि मरीज में रक्तस्राव या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हों।
हालांकि केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर डेंगू की गंभीरता तय नहीं की जाती। मरीज की पूरी चिकित्सकीय स्थिति, रक्तस्राव के संकेत, ब्लड प्रेशर, अन्य रक्त जांच और डॉक्टर के मूल्यांकन को भी ध्यान में रखा जाता है।
प्लेटलेट्स क्या होती हैं और क्यों जरूरी हैं?
प्लेटलेट्स खून में मौजूद छोटी रक्त कोशिकीय संरचनाएं हैं जो रक्तस्राव को रोकने और खून के थक्के बनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
स्वस्थ वयस्कों में प्लेटलेट्स की सामान्य सीमा आम तौर पर लगभग 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलिटर के आसपास मानी जाती है, हालांकि अलग-अलग प्रयोगशालाओं में संदर्भ सीमा कुछ अलग हो सकती है।
जब किसी व्यक्ति में प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य से काफी नीचे चली जाती है तो डॉक्टर इसकी वजह तलाशते हैं। डेंगू जैसे कुछ संक्रमणों में प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं। लेकिन हर बुखार या हर प्लेटलेट्स कमी का कारण डेंगू नहीं होता।
इसीलिए बिना जांच के खुद से डेंगू मान लेना या केवल प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कोई दवा लेना उचित नहीं है।
10 हजार प्लेटलेट्स पहुंचना क्यों चिंता की बात?
यदि किसी मरीज की प्लेटलेट्स संख्या 10 हजार के आसपास पहुंच जाती है तो यह बेहद कम स्तर माना जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज की चिकित्सकीय निगरानी जरूरी हो सकती है।
खासकर यदि प्लेटलेट्स कम होने के साथ नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी में खून, मल में खून, पेशाब में खून, शरीर पर असामान्य लाल निशान या अन्य रक्तस्राव के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
डेंगू में बीमारी के दौरान प्लेटलेट्स का स्तर ऊपर-नीचे हो सकता है। इसलिए केवल एक रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार दोबारा जांच और मरीज की स्थिति की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।
प्लेटलेट्स कम होने के कौन से लक्षण दिख सकते हैं?
प्लेटलेट्स कम होने पर कुछ लोगों में शरीर पर छोटे-छोटे लाल या बैंगनी रंग के चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। आसानी से नील पड़ना भी एक संकेत हो सकता है।
इसके अलावा कुछ गंभीर मामलों में—
नाक से खून आना
मसूड़ों से खून आना
त्वचा पर असामान्य लाल या बैंगनी चकत्ते
शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना
मल में खून आना
पेशाब में खून दिखाई देना
अत्यधिक कमजोरी
चक्कर आना
असामान्य सुस्ती
सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसी गंभीर स्थिति
जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
ऐसे लक्षणों को सामान्य वायरल बुखार समझकर घर पर इलाज करते रहना जोखिम भरा हो सकता है। तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
बारिश के बाद क्यों बढ़ता है मच्छरों का खतरा?
बारिश के बाद जब पानी कई दिनों तक अलग-अलग जगहों पर जमा रहता है तो मच्छरों को प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है। घरों के आसपास रखे पुराने टायर, टूटे बर्तन, गमले, कूलर, पानी की टंकियां और अन्य कंटेनर में जमा साफ या ठहरा पानी भी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है।
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर ऐसे ही छोटे-छोटे पानी के स्रोतों में पनप सकता है। वहीं मलेरिया फैलाने वाले मच्छर भी बारिश के बाद बढ़ी नमी और जलभराव की स्थिति का फायदा उठा सकते हैं।
इसलिए बारिश रुकने के बाद भी मच्छरों से बचाव की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। बल्कि इस समय घर और आसपास पानी जमा न होने देना और भी जरूरी हो जाता है।
सिर्फ डेंगू को मानकर न चलें
बुखार होने पर कई लोग सीधे इसे डेंगू समझ लेते हैं। लेकिन बुखार कई कारणों से हो सकता है। वायरल संक्रमण, मलेरिया, डेंगू और अन्य संक्रमणों में शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे दिखाई दे सकते हैं।
बुखार के साथ खांसी और गले में दर्द होने पर श्वसन संक्रमण की संभावना भी हो सकती है। इसलिए बीमारी की पहचान के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।
विशेषज्ञों की सलाह के बिना एंटीबायोटिक, दर्द निवारक या दूसरी दवाएं लेना उचित नहीं है। खासकर डेंगू की आशंका होने पर दवाओं का चुनाव डॉक्टर की सलाह से किया जाना चाहिए।
घर पर क्या सावधानी बरतें?
मच्छरों से बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और पानी रखने वाले बर्तनों को ढककर रखें।
सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। घर में मच्छर भगाने वाले सुरक्षित उपाय अपनाएं और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
यदि घर के आसपास कहीं पानी जमा है तो उसे तुरंत हटाएं। ऐसी जगहों की नियमित जांच करें जहां बारिश के बाद पानी जमा होने की संभावना रहती है।
बुखार होते ही जांच क्यों जरूरी?
डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण होती है। बुखार के साथ तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
सीएमओ डॉ. सुनील कुमार दोहरे ने भी लोगों को बुखार होने पर नजदीकी सरकारी अस्पताल में दिखाने की सलाह दी है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकीय जांच के बाद जरूरत के अनुसार संबंधित टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि उसे घर पर निगरानी की जरूरत है या अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक है।
प्लेटलेट्स के नाम पर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी
डेंगू के मौसम में प्लेटलेट्स को लेकर लोगों में काफी डर रहता है। लेकिन हर डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति और रक्तस्राव जैसे संकेतों को देखकर उपचार तय करते हैं।
इसलिए केवल प्लेटलेट्स की एक रिपोर्ट देखकर घबराना या अपने स्तर पर इलाज शुरू करना सही नहीं है। वहीं यदि प्लेटलेट्स बेहद कम हैं या रक्तस्राव के संकेत दिखाई दे रहे हैं तो देरी भी नहीं करनी चाहिए।
जलभराव खत्म करना सबसे बड़ा बचाव
बारिश के बाद डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए केवल मच्छर भगाने वाले उपाय पर्याप्त नहीं हैं। मच्छरों के प्रजनन स्थल को खत्म करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
घर के अंदर और बाहर जमा पानी को हटाना, पानी की टंकियों को ढकना, कूलर साफ रखना और आसपास सफाई बनाए रखना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर भी जलभराव वाले क्षेत्रों में सफाई और मच्छर नियंत्रण की गतिविधियां तेज करना जरूरी है।
फिलहाल अस्पतालों में बढ़ते बुखार के मरीजों को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। बुखार को सामान्य समझकर कई दिनों तक घर पर न टालें। खासकर यदि तेज बुखार के साथ अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, खून आना, सांस लेने में परेशानी या प्लेटलेट्स में तेज गिरावट जैसी स्थिति हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
बारिश के बाद मच्छरों का प्रकोप रोकने के लिए प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। समय पर जांच, उचित इलाज और आसपास स्वच्छता बनाए रखना ही डेंगू-मलेरिया के बढ़ते खतरे को नियंत्रित करने की दिशा में सबसे अहम कदम है।

कोई टिप्पणी नहीं