8 अक्टूबर को GST का बड़ा फैसला! कर्मचारियों से लेकर मरीजों तक बदल सकती है तस्वीर, जानिए किन चीजों पर मिल सकती है भारी राहत
नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर यानी GST को लेकर 8 अक्टूबर की प्रस्तावित जीएसटी काउंसिल बैठक पर कारोबारियों, कंपनियों और आम लोगों की नजरें टिक गई हैं। इस बैठक में कई ऐसे प्रस्तावों पर चर्चा और फैसला होने की संभावना है, जिनका सीधा या अप्रत्यक्ष असर कर्मचारियों, बीमा लेने वाली कंपनियों, दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और भारतीय फार्मा सेक्टर पर पड़ सकता है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, सरकार कर्मचारियों के लिए कंपनियों की ओर से खरीदे जाने वाले ग्रुप हेल्थ और ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके अलावा दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ महंगी आयातित दवाओं और विशेष खाद्य पदार्थों को GST से छूट देने पर भी चर्चा हो सकती है।
इतना ही नहीं, विदेशी कंपनियों के लिए काम करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों को भी GST के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। अगर ये प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो बीमा, फार्मा और एक्सपोर्ट सेक्टर में कारोबार की लागत कम हो सकती है।
सबसे बड़ा बदलाव ग्रुप इंश्योरेंस को लेकर संभव
कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस की सुविधा देती हैं। खासकर बड़ी और संगठित कंपनियों में कर्मचारियों के लिए ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस एक सामान्य कर्मचारी लाभ बन चुका है।
मौजूदा व्यवस्था में ग्रुप हेल्थ या ग्रुप लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर सामान्य तौर पर 18 प्रतिशत GST लग सकता है। इस GST का ITC लेने की सुविधा नहीं होने के कारण कंपनी के लिए यह राशि अतिरिक्त लागत बन जाती है।
अब सरकार इसी व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रही है।
इसे एक उदाहरण से समझें। मान लीजिए किसी कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए 1 लाख रुपये का ग्रुप इंश्योरेंस खरीदा। इस प्रीमियम पर 18 प्रतिशत GST के हिसाब से कंपनी को 18,000 रुपये अतिरिक्त टैक्स देना होगा। मौजूदा व्यवस्था में यह रकम कंपनी की लागत का हिस्सा बन जाती है।
अगर प्रस्तावित ITC व्यवस्था को मंजूरी मिल जाती है तो कंपनी को इस GST का क्रेडिट मिल सकता है। इससे कंपनी के लिए कर्मचारियों का बीमा कराना पहले की तुलना में कम महंगा हो सकता है।
कर्मचारियों को सीधे पैसे नहीं, लेकिन बड़ा फायदा संभव
यहां कर्मचारियों के लिए एक बात समझना बेहद जरूरी है। अगर ग्रुप इंश्योरेंस पर ITC की सुविधा मिलती है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि सरकार या कंपनी कर्मचारी के बैंक खाते में सीधे कोई रकम ट्रांसफर करेगी।
इसका फायदा अप्रत्यक्ष रूप से मिल सकता है।
मान लीजिए किसी कंपनी ने कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा के लिए एक निश्चित बजट रखा है। यदि GST की लागत कम होती है तो कंपनी उसी बजट में पहले से ज्यादा बीमा कवर खरीद सकती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कंपनी के पास कर्मचारियों के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए 10 लाख रुपये का बजट है, तो GST लागत में राहत मिलने के बाद वह अतिरिक्त रकम का इस्तेमाल कवर बढ़ाने, ज्यादा कर्मचारियों को शामिल करने या इंश्योरेंस की सुविधाओं को बेहतर करने में कर सकती है।
इसका मतलब यह हुआ कि कर्मचारियों को बिना अतिरिक्त प्रीमियम दिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा मिल सकती है।
बीमा की पहुंच बढ़ाने पर सरकार का जोर
ग्रुप इंश्योरेंस पर ITC की सुविधा देने के पीछे सरकार का एक बड़ा उद्देश्य बीमा की पहुंच बढ़ाना भी हो सकता है।
देश में संगठित क्षेत्र की बड़ी संख्या में कंपनियां अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य या जीवन बीमा उपलब्ध कराती हैं। अगर कंपनियों की लागत कम होती है तो ज्यादा कंपनियों को कर्मचारियों के लिए बेहतर बीमा कवर देने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
खासकर ऐसे समय में जब इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, कर्मचारी और उनके परिवारों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
दुर्लभ बीमारियों की महंगी दवाओं पर भी राहत की तैयारी
GST काउंसिल के सामने दुर्लभ बीमारियों के मरीजों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी आ सकता है।
सरकार सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ आयातित दवाओं, मेडिसिन और विशेष खाद्य पदार्थों को GST से छूट देने पर विचार कर रही है।
दुर्लभ बीमारियों का इलाज कई परिवारों के लिए बेहद महंगा होता है। कुछ बीमारियों में मरीजों को लंबे समय तक विशेष दवाओं और मेडिकल न्यूट्रिशन की जरूरत पड़ती है। कई मामलों में इनकी कीमत इतनी अधिक होती है कि परिवार की पूरी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो जाती है।
ऐसे में यदि इन जरूरी दवाओं और विशेष खाद्य पदार्थों पर GST हटाया जाता है तो इसका सीधा असर मरीज के परिवार के खर्च पर पड़ेगा।
हालांकि अभी प्रस्ताव में शामिल सात दुर्लभ बीमारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए अंतिम सूची और छूट का दायरा जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव?
दुर्लभ बीमारी से पीड़ित परिवारों के लिए दवा का खर्च सामान्य मेडिकल खर्च से काफी अलग होता है। कई मरीजों को नियमित रूप से ऐसी दवाएं लेनी पड़ती हैं जिनका विकल्प आसानी से उपलब्ध नहीं होता।
अगर आयातित दवाओं पर लगने वाला GST पूरी तरह या आंशिक रूप से हटता है तो दवा की अंतिम कीमत कम हो सकती है।
इसका अर्थ है कि प्रस्ताव मंजूर होने पर इसका फायदा सीधे मरीजों और उनके परिवारों तक पहुंच सकता है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी दवा की अंतिम कीमत केवल GST से तय नहीं होती। आयात लागत, निर्माता की कीमत, वितरण खर्च और अन्य शुल्क भी कुल कीमत को प्रभावित करते हैं।
विदेशी कंपनियों के लिए काम करने वाली फार्मा कंपनियों को राहत?
GST काउंसिल में भारतीय फार्मा सेक्टर से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव चर्चा में आ सकता है।
भारत में कई फार्मा कंपनियां विदेशी कंपनियों के लिए अलग-अलग तरह की सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इनमें क्लिनिकल ट्रायल, टेस्टिंग, रिसर्च, एनालिसिस और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं।
प्रस्तावित बदलाव के तहत कुछ ऐसी सेवाओं को एक्सपोर्ट ऑफ सर्विसेज की श्रेणी में रखने की व्यवस्था स्पष्ट की जा सकती है।
अगर ऐसा होता है तो इन सेवाओं पर GST का बोझ कम या समाप्त हो सकता है, बशर्ते लेन-देन निर्यात की निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो।
अभी 18% GST का बोझ पड़ सकता है
कई मामलों में विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं को लेकर GST की व्याख्या और पात्रता का सवाल सामने आता रहा है।
अगर किसी सेवा को एक्सपोर्ट ऑफ सर्विसेज माना जाता है तो उसे जीरो-रेटेड सप्लाई का लाभ मिल सकता है। लेकिन जहां यह पात्रता पूरी नहीं होती, वहां GST का बोझ कारोबार की लागत बढ़ा सकता है।
प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य ऐसी सेवाओं को लेकर स्पष्टता बढ़ाना और भारतीय फार्मा कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कारोबार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना हो सकता है।
18% GST वाले इनपुट का रिफंड भी हो सकता है आसान
फार्मा सेक्टर के लिए प्रस्तावित बदलाव केवल आउटपुट टैक्स से जुड़ा नहीं है। इनपुट टैक्स के रिफंड को लेकर भी राहत की तैयारी बताई जा रही है।
किसी कंपनी ने कारोबार में इस्तेमाल होने वाले इनपुट पर GST का भुगतान किया है और बाद में उसका कारोबार निर्यात से जुड़ा है, तो कुछ परिस्थितियों में उसे इनपुट टैक्स का रिफंड मिल सकता है।
प्रस्ताव के मुताबिक जोखिम की जांच पूरी होने के बाद करीब 90 प्रतिशत रिफंड दावों को ऑटोमेटिक तरीके से जारी करने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो कंपनियों के लिए सबसे बड़ा फायदा समय की बचत हो सकता है।
कारोबारियों का पैसा लंबे समय तक नहीं फंसेगा
रिफंड में देरी किसी भी कंपनी के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। खासकर फार्मा जैसी इंडस्ट्री में जहां रिसर्च, उत्पादन, कच्चे माल और निर्यात पर बड़ी रकम खर्च होती है, वहां वर्किंग कैपिटल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अगर टैक्स रिफंड लंबे समय तक अटका रहता है तो कंपनी का पैसा टैक्स सिस्टम में फंसा रहता है।
ऑटोमेटिक रिफंड व्यवस्था से कंपनियों को जल्द पैसा वापस मिल सकता है और उनकी वर्किंग कैपिटल की समस्या कम हो सकती है।
हालांकि यह सुविधा जोखिम आधारित जांच और निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले मामलों पर ही लागू होने की संभावना है।
विदेश में अपनी ब्रांच से कारोबार करने वाली कंपनियों को भी राहत
GST काउंसिल एक्सपोर्ट की परिभाषा से जुड़े एक और महत्वपूर्ण बदलाव पर विचार कर सकती है।
भारत की कई कंपनियां विदेशों में अपनी शाखाएं यानी ब्रांच खोलकर कारोबार करती हैं। कुछ परिस्थितियों में भारतीय कंपनी और उसकी विदेशी ब्रांच के बीच होने वाले लेन-देन को लेकर GST की जटिलताएं सामने आती हैं।
प्रस्तावित बदलाव के तहत कुछ शर्तों में विदेशी ब्रांच के माध्यम से विदेशी ग्राहक को दी गई सेवाओं को भी एक्सपोर्ट का लाभ देने का रास्ता साफ किया जा सकता है।
अगर यह बदलाव लागू होता है तो ऐसी सेवाओं को जीरो-रेटेड एक्सपोर्ट का लाभ मिल सकता है।
भारतीय कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को हो सकता है जिनका कारोबार अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है।
यदि भारतीय कंपनियों को विदेशी ग्राहकों के लिए सेवाएं देने पर GST लागत कम होती है तो उनकी कुल लागत घट सकती है। इससे भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाओं की कीमत और गुणवत्ता के मामले में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।
फार्मा रिसर्च, क्लिनिकल ट्रायल और कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत पहले से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। GST से जुड़ी स्पष्टता इस क्षेत्र के विस्तार में मदद कर सकती है।
अब सबकी नजर 8 अक्टूबर की बैठक पर
इन सभी प्रस्तावों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8 अक्टूबर की जीएसटी काउंसिल बैठक में आखिर कितने प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है।
ग्रुप इंश्योरेंस पर ITC, दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर GST छूट, फार्मा कंपनियों की विदेशी सेवाओं को एक्सपोर्ट का दर्जा और तेज रिफंड जैसे प्रस्ताव अगर लागू होते हैं तो इनका असर अलग-अलग वर्गों पर दिखाई दे सकता है।
कर्मचारियों के लिए बेहतर बीमा कवर की संभावना बढ़ सकती है, दुर्लभ बीमारियों के मरीजों को महंगी दवाओं में राहत मिल सकती है और फार्मा कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय कारोबार में लागत संबंधी फायदा मिल सकता है।
हालांकि फिलहाल ये प्रस्ताव और सूत्रों के हवाले से सामने आई संभावनाएं हैं। अंतिम नियम, दरें, पात्रता और लागू होने की तारीख जीएसटी काउंसिल के आधिकारिक फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसलिए फिलहाल कंपनियों, कर्मचारियों और मरीजों के लिए सबसे अहम तारीख 8 अक्टूबर बनी हुई है। बैठक में होने वाले फैसले यह तय करेंगे कि प्रस्तावित राहत वास्तव में कितनी बड़ी होगी और उसका फायदा किसे, कब और किस शर्त के साथ मिलेगा।

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