11 साल बाद अमेरिका पहुंचे जिनपिंग, ट्रंप ने खुद किया स्वागत… आखिर इस मुलाकात के पीछे क्या है बड़ा एजेंडा?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को अमेरिका पहुंचे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनका स्वागत ऐसे अंदाज में किया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। आम तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत व्हाइट हाउस में करते हैं, लेकिन इस बार ट्रंप खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज के रनवे पर पहुंच गए। ट्रंप अपनी पत्नी और अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप के साथ एयरबेस पहुंचे और उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया।
रनवे पर हुआ यह स्वागत इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह महज औपचारिक मुलाकात नहीं है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों से व्यापार, टैरिफ, तकनीक, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे समय में ट्रंप का खुद एयरबेस पर पहुंचकर जिनपिंग का स्वागत करना अमेरिका-चीन संबंधों में इस यात्रा की अहमियत को दर्शाता है। हालांकि, इस स्वागत से यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि दोनों देशों के बीच सभी विवाद खत्म हो गए हैं।
रनवे पर ट्रंप ने किया जिनपिंग का स्वागत
शी जिनपिंग के विमान के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचने के बाद ट्रंप और मेलानिया ट्रंप ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और कुछ देर तक बातचीत भी की। स्वागत के लिए रनवे पर लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया था। सैन्य बैंड की मौजूदगी में औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया।
इस दौरान अमेरिकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन भी देखने को मिला। स्वागत समारोह के दौरान B-1 बॉम्बर विमानों ने ऊपर से फ्लाईपास्ट किया। विमानों की तेज आवाज और उनके गुजरने का दृश्य समारोह का खास हिस्सा रहा। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में ट्रंप और जिनपिंग को एक साथ खड़े होकर इस फ्लाईपास्ट को देखते हुए देखा गया। एक वीडियो में B-1 बॉम्बर की तेज आवाज के दौरान ट्रंप की प्रतिक्रिया भी कैमरे में कैद हुई, जबकि जिनपिंग अपेक्षाकृत शांत नजर आए।
अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए यह स्वागत क्यों खास है?
अमेरिका में आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए औपचारिक स्वागत व्हाइट हाउस में किया जाता है। यही वजह है कि ट्रंप का ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पहुंचना सामान्य प्रक्रिया से अलग कदम माना जा रहा है। अमेरिकी मीडिया ने भी इसे एक दुर्लभ और असामान्य स्वागत बताया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी जमीन पर किसी विदेशी नेता के लिए एयरबेस पर राष्ट्रपति की ओर से ऐसा व्यक्तिगत स्वागत बहुत दुर्लभ है। इससे पहले 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पोप फ्रांसिस का ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर स्वागत किया था। अब करीब 11 साल बाद जिनपिंग के लिए ट्रंप का खुद एयरबेस पहुंचना चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि इसे केवल व्यक्तिगत गर्मजोशी के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनके बीच होने वाली बातचीत का असर वैश्विक व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन और बाजारों पर पड़ता है।
11 साल बाद अमेरिका पहुंचे जिनपिंग
शी जिनपिंग का यह दौरा खास इसलिए भी है क्योंकि यह एक दशक से ज्यादा समय बाद उनका अमेरिकी राजकीय दौरा है। उनकी पिछली अमेरिका यात्रा 2015 में हुई थी। इस बार वह तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर वॉशिंगटन पहुंचे हैं। इस यात्रा के दौरान ट्रंप और जिनपिंग के बीच उच्चस्तरीय बैठक होनी है।
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच संबंधों में एक तरफ तनाव है तो दूसरी तरफ आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत की जरूरत भी बढ़ी है। इसी वजह से दुनिया की नजर इस शिखर वार्ता पर है।
ट्रेड वॉर पर फिलहाल लगी रोक आगे बढ़ी
जिनपिंग के अमेरिका पहुंचने से पहले ही दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा हुई। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि अमेरिका और चीन ने मौजूदा व्यापारिक समझौते यानी ट्रेड ट्रूस को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई है।
बेसेंट के मुताबिक, जिसे “Busan Agreement” के तौर पर संदर्भित किया जा रहा है, उसकी अवधि 10 नवंबर को खत्म होनी थी। अब इसे दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक कर दिया गया है। इसका मकसद दोनों देशों को आर्थिक मुद्दों पर आगे बातचीत के लिए अतिरिक्त समय देना है।
यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर तीखी तनातनी देखने को मिली थी। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामान पर शुल्क बढ़ाए थे और इससे वैश्विक व्यापार तथा सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा था।
अब व्यापार युद्ध में अस्थायी विराम को जनवरी तक बढ़ाने से दोनों देशों को व्यापक आर्थिक समझौते पर बातचीत करने के लिए कुछ और समय मिल गया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जनवरी तक कोई बड़ा स्थायी समझौता हो पाएगा या मौजूदा व्यवस्था को ही आगे बढ़ाया जाएगा। बेसेंट ने भी संकेत दिया है कि कई मुद्दों पर अभी बातचीत बाकी है।
ट्रंप-जिनपिंग की बातचीत में कौन-कौन से मुद्दे?
दोनों नेताओं की बातचीत में सबसे प्रमुख मुद्दों में व्यापार और टैरिफ शामिल रहने की संभावना है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी से जुड़े संसाधन भी चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं।
AI को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ी है। दोनों देश अत्याधुनिक तकनीक, कंप्यूटिंग क्षमता और चिप निर्माण में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं। अमेरिका की ओर से चीन को कुछ संवेदनशील तकनीकों और उन्नत सेमीकंडक्टर तक पहुंच को लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं। ऐसे में तकनीकी क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बातचीत बेहद महत्वपूर्ण होगी।
दुर्लभ पृथ्वी के खनिज और मैग्नेट भी अहम मुद्दा हो सकते हैं। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और कई औद्योगिक उत्पादों के लिए इन संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए इनके व्यापार और आपूर्ति को लेकर होने वाली बातचीत का वैश्विक उद्योग पर असर पड़ सकता है।
ईरान और तेल संकट भी बातचीत में रह सकता है मुद्दा
ट्रंप-जिनपिंग वार्ता का एक और महत्वपूर्ण पहलू ईरान और वैश्विक ऊर्जा बाजार हो सकता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन की ऊर्जा जरूरतें और ईरानी तेल से जुड़े उसके संबंध अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेता ईरान, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं। हालांकि इन विषयों पर दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर बना हुआ है।
ताइवान और रणनीतिक स्थिरता भी अहम
अमेरिका-चीन संबंधों में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। इसके अलावा दोनों देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों को लेकर भी एक-दूसरे पर नजर रखते हैं।
आगामी वार्ता में रणनीतिक स्थिरता पर बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि इस स्तर की बैठक से पहले दोनों पक्ष अक्सर कई मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करते हैं, लेकिन वास्तविक बातचीत में किन बिंदुओं पर सहमति बनती है, यह बैठक के बाद ही साफ होगा।
दुनिया की नजर ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात पर
शी जिनपिंग के अमेरिका पहुंचने और ट्रंप के खुद रनवे पर जाकर उनका स्वागत करने के बाद इस शिखर बैठक को लेकर वैश्विक दिलचस्पी और बढ़ गई है। रेड कार्पेट, सैन्य बैंड और B-1 बॉम्बर के फ्लाईपास्ट ने स्वागत समारोह को बेहद औपचारिक और भव्य बना दिया।
लेकिन असली सवाल अब यह है कि इस भव्य स्वागत के बाद बंद कमरे में होने वाली बातचीत कितनी आगे बढ़ती है। व्यापार युद्ध पर अस्थायी रोक जनवरी तक बढ़ चुकी है, लेकिन टैरिफ, AI, सेमीकंडक्टर, दुर्लभ खनिज, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
इसलिए ट्रंप और जिनपिंग की यह मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की बैठक नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन के बीच भविष्य के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि रनवे पर दिखी गर्मजोशी बातचीत की मेज तक कितनी दूर पहुंचती है।

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