Viral Video: कोर्ट से बाहर निकलते ही आरोपी को पड़ा थप्पड़! जमुई कांड में अब आया नया मोड़, जानिए पूरी कहानी
बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा और उसके साथ मौजूद एक किशोर के साथ कथित बदसलूकी का मामला लगातार सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद पुलिस कार्रवाई तेज हुई और अब इस मामले में एक और घटना सामने आई है। बुधवार को मामले के आरोपी हरेराम यादव को कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के बाद जब पुलिस उसे कोर्ट परिसर से बाहर लेकर जा रही थी, तभी अधिवक्ता आकाश पांडे ने कथित तौर पर उसे थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद कोर्ट परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पुलिस ने आरोपी को सुरक्षित वहां से बाहर निकाला।
यह मामला 19 सितंबर को सामने आए उस कथित घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसमें कोचिंग से लौट रहे दो नाबालिगों को एक समूह ने रास्ते में रोककर उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और मारपीट की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक वीडियो और अन्य जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई और गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
कोर्ट से निकलते समय आरोपी को मारा थप्पड़
बुधवार को हरेराम यादव को मामले में कोर्ट के सामने पेश किया गया। पेशी के बाद पुलिस उसे वापस ले जा रही थी। इसी दौरान अधिवक्ता आकाश पांडे उसके पास पहुंचे और उसे थप्पड़ मार दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।
अधिवक्ता आकाश पांडे ने बाद में मीडिया से बातचीत में कहा कि घटना को लेकर उनके भीतर काफी आक्रोश था। उन्होंने अपने कदम को लेकर यह भी कहा कि अगर कानून के तहत उनके खिलाफ कोई कार्रवाई होती है तो वह उसका सामना करने के लिए तैयार हैं। उनके बयान के मुताबिक, उनका गुस्सा उस कथित घटना को लेकर था, जिसने व्यापक स्तर पर लोगों में नाराजगी पैदा की है।
हालांकि, कानून की दृष्टि से किसी आरोपी के खिलाफ अंतिम दोष सिद्धि अदालत के फैसले से ही होती है। इसलिए मामले में लगाए गए आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर रखना जरूरी है।
आखिर क्या है पूरा जमुई मामला?
यह पूरा मामला 19 सितंबर की घटना से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दो नाबालिग छात्र कोचिंग से लौट रहे थे। इसी दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों के एक समूह ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और आरोपियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की।
Jamui, Bihar: Main accused in the Jamui molestation incident, Hareram Yadav, was forcefully slapped by a lawyer on the court premises. pic.twitter.com/jyelDHsS0e
— IANS (@ians_india) September 23, 2026
वायरल फुटेज में कथित तौर पर कुछ लोग दोनों किशोरों को घेरते और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते नजर आए। रिपोर्टों के मुताबिक, लड़की को परेशान किया गया और लड़के के साथ भी मारपीट तथा बदसलूकी की गई। घटना के दौरान दोनों ने कथित तौर पर वहां मौजूद लोगों से उन्हें जाने देने की अपील की थी।
वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामले ने तेजी से तूल पकड़ा। इसके बाद जमुई पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपियों की पहचान से जुड़े पहलुओं की जांच की। मामले में नाबालिग से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की बात सामने आई है।
मुख्य आरोपी नंदन यादव पुलिस कार्रवाई में घायल
इस मामले में नंदन यादव को मुख्य आरोपियों में शामिल बताया गया। पुलिस के अनुसार, उसे गिरफ्तार करने के लिए अभियान चलाया गया था। इसी दौरान पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई और नंदन यादव के पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, हरेराम यादव को भी इसी पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किया गया था और उसके पैर में चोट आई थी। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस द्वारा इस्तेमाल किया गया बल और मुठभेड़ की परिस्थितियां भी जांच का विषय हो सकती हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस का पक्ष यह है कि गिरफ्तारी अभियान के दौरान कार्रवाई हुई और नंदन घायल हुआ।
मुख्य आरोपी के पिता पर भी हुई कार्रवाई
जमुई मामले के बीच मुख्य आरोपी नंदन यादव के पिता गनौरी यादव को लेकर भी एक अलग मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गनौरी यादव को वर्ष 2003 के एक कथित डबल मर्डर केस में गिरफ्तार किया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि 2003 में दो भाइयों की हत्या के मामले में गनौरी यादव आरोपी बनाया गया था और वह लंबे समय से फरार था। पुलिस नंदन यादव की तलाश में कार्रवाई कर रही थी, इसी दौरान गनौरी यादव को भी हिरासत में लिया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, यह पुराना मामला जमीन विवाद से जुड़ा बताया गया है। पुलिस का दावा है कि उस केस में नामजद कई आरोपियों में गनौरी यादव लंबे समय तक जेल से बाहर रहा था। अब उसे उस पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया है।
कोर्ट परिसर की घटना के बाद फिर चर्चा में आया मामला
जमुई मामले में बुधवार को कोर्ट परिसर में हुई थप्पड़ की घटना ने एक बार फिर इस केस को चर्चा में ला दिया। एक तरफ सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों में नाराजगी है, वहीं दूसरी तरफ कोर्ट परिसर में आरोपी के साथ हुई मारपीट ने कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
किसी भी मामले में आरोपी को अदालत के सामने पेश करना और कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई करना न्याय व्यवस्था का हिस्सा है। कोर्ट परिसर में किसी आरोपी के साथ मारपीट होना अलग विषय है और इसकी भी परिस्थितियों की जांच की जा सकती है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जमुई जिला विधिज्ञ संघ ने इस मामले के आरोपियों की पैरवी से इनकार करने की बात भी सामने आई है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा आक्रोश
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो सामने आने के बाद बिहार के बाहर भी लोगों ने प्रतिक्रिया दी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की मांग की थी।
वीडियो के प्रसार ने नाबालिगों की सुरक्षा और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक घटनाओं के प्रसार को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे मामलों में वीडियो को बार-बार शेयर करने से पीड़ितों की निजता और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी संवेदनशील वीडियो को आगे प्रसारित करने के बजाय जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराना अधिक उचित माना जाता है।
दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी ने भी जताया आक्रोश
जमुई की घटना पर अभिनेत्री दिशा पाटनी की बहन और पूर्व भारतीय सेना अधिकारी खुशबू पाटनी ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।
रिपोर्टों के अनुसार, खुशबू पाटनी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो साझा कर कहा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी जिम्मेदारी पर भी सवाल करने की अपील की। उनका कहना था कि महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा किसी भी समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर और अधिक चर्चा में आ गया।
अब आगे क्या होगा?
जमुई मामले में पुलिस की जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी, वायरल वीडियो से पहचान, अन्य संदिग्धों की तलाश और मामले से जुड़े साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश करना आगे की प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
हरेराम यादव की कोर्ट में पेशी और उसके बाद हुई थप्पड़ की घटना ने मामले को एक नया मोड़ दिया है, लेकिन अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। इसी तरह नंदन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पुलिस मुठभेड़ की परिस्थितियों का मूल्यांकन भी उपलब्ध साक्ष्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर होना है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि सार्वजनिक आक्रोश और कानून के शासन के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए। किसी भी संवेदनशील मामले में पीड़ितों की निजता की रक्षा, आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया का पालन—तीनों पहलू महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनके खिलाफ अदालत में क्या आरोप साबित होते हैं।

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