सुगना देवी ने आखिर क्यों खोला बाघ का पिंजरा? खुद बनीं शिकार, 4 महिलाओं ने पेड़ पर चढ़कर बचाई जान… अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल
जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बुधवार सुबह हुआ बाघ हमला अब सिर्फ एक दर्दनाक हादसा नहीं रह गया है, बल्कि इसने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग के प्रोटोकॉल पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 42 वर्षीय महिला सफाईकर्मी सुगना देवी की बाघ ‘शिवाजी’ के हमले में मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब महिला कर्मचारी बाघ के बाड़े में घास काटने का काम कर रही थीं, तब बाघ को उसके सुरक्षित स्थान से बाहर निकालने की स्थिति आखिर कैसे बनी?
घटना के बाद वन विभाग ने बाघ के बाड़े के प्रभारी वनकर्मी हंसा को प्रथम दृष्टया ड्यूटी में लापरवाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने के आरोप में निलंबित कर दिया है। पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। जांच में CCTV फुटेज, मौके पर मौजूद कर्मचारियों के बयान और उस समय लागू सुरक्षा प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।
सात महिलाएं कर रही थीं घास काटने का काम
जानकारी के अनुसार, घटना के समय करीब छह से सात महिला कर्मचारी नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के बाड़ा नंबर 16 में घास काटने और उसे हटाने का काम कर रही थीं। इसी दौरान बाघ ‘शिवाजी’ अचानक उनके सामने आ गया।
बाघ को देखते ही महिलाओं में अफरा-तफरी मच गई। सभी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ महिलाओं ने बाड़े की फेंसिंग पर चढ़कर अपनी जान बचाई, जबकि एक महिला पेड़ पर चढ़ गई।
लेकिन सुगना देवी बाघ की चपेट में आ गईं। बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उनकी मौत हो गई। घटना इतनी अचानक हुई कि दूसरी महिलाएं चाहकर भी सुगना देवी को बचाने के लिए उनके पास नहीं जा सकीं।
आखिर बाघ बाड़े में आया कैसे?
हादसे के बाद जांच का सबसे अहम बिंदु यही बन गया है कि बाघ को उसके सुरक्षित होल्डिंग शेल्टर से बाहर किस परिस्थिति में लाया गया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सामान्य प्रक्रिया यह होती है कि बाघ के बाड़े में सफाई या रखरखाव का काम शुरू होने से पहले बाघ को सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। इसके बाद ही कर्मचारी बाड़े के अंदर जाकर काम करते हैं।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, घटना के समय महिला कर्मचारी बाड़े के अंदर मौजूद थीं और इसी दौरान बाघ के होल्डिंग शेल्टर का गेट खोला गया। डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट आशीष व्यास के अनुसार, प्रारंभिक पुलिस जांच में संकेत मिले हैं कि ड्यूटी पर मौजूद वनकर्मी ने सफाईकर्मियों के बाड़े में होने की जानकारी के बिना गेट खोला।
यही बिंदु अब पूरी जांच का केंद्र बन गया है।
क्या गेट खोलने से पहले बाड़े की पूरी तरह जांच की गई थी? क्या कर्मचारियों को बाहर निकलने का समय दिया गया था? क्या गेट खोलने से पहले यह सुनिश्चित किया गया कि बाड़े में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है? इन सभी सवालों के जवाब CCTV फुटेज और कर्मचारियों के बयानों से सामने आने की उम्मीद है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल में हुई चूक?
वन विभाग ने घटना को गंभीरता से लेते हुए बाड़े के प्रभारी वनकर्मी को निलंबित किया है। विभाग ने साफ किया है कि प्रथम दृष्टया ड्यूटी में लापरवाही और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने की आशंका है।
हालांकि, अंतिम जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी। अधिकारियों ने बताया है कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि उस समय बाघ को उसके सुरक्षित स्थान से बाहर निकालने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या उस प्रक्रिया के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे।
परिवार और ग्रामीणों का विरोध
सुगना देवी की मौत की खबर फैलते ही उनके परिवार और गांव के लोग पार्क के बाहर जमा हो गए। परिजनों और ग्रामीणों ने घटना को लापरवाही का नतीजा बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
परिजनों की मांग थी कि परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और परिवार के सदस्यों को रोजगार दिया जाए। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान परिवार ने एक करोड़ रुपये मुआवजे और बच्चों के लिए सरकारी नौकरी की मांग भी रखी।
बाद में वन विभाग की ओर से परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और परिवार के दो सदस्यों को संविदा पर रोजगार देने की बात कही गई। एक परिवार के सदस्य के लिए डेयरी बूथ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी भी अधिकारियों ने दी।
परिवार के लिए बड़ा आर्थिक संकट
ग्रामीणों के अनुसार, सुगना देवी परिवार के लिए महत्वपूर्ण कमाई का जरिया थीं। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की बात कही गई है।
परिजनों का कहना है कि हादसे में केवल एक महिला की जान नहीं गई, बल्कि एक परिवार का सहारा भी छिन गया। यही वजह है कि ग्रामीण जिम्मेदारी तय करने और परिवार को स्थायी सहायता देने की मांग कर रहे थे।
अब CCTV फुटेज से खुल सकता है राज
इस पूरे मामले में CCTV फुटेज बेहद अहम माना जा रहा है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि बाघ के शेल्टर का गेट किस समय खोला गया, उस वक्त बाड़े के अंदर कितने कर्मचारी मौजूद थे और गेट खोलने से पहले क्या सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इसके अलावा कर्मचारियों के बयान भी जांच में महत्वपूर्ण होंगे। यदि CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं, तो घटना की पूरी टाइमलाइन स्पष्ट हो सकती है।
क्या पर्यटकों की सुरक्षा भी खतरे में थी?
नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क जयपुर का प्रमुख वन्यजीव आकर्षण है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक वन्यजीवों को देखने पहुंचते हैं। ऐसे में कर्मचारी की मौत के बाद पार्क की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खतरनाक वन्यजीव के बाड़े में काम कर रहे कर्मचारियों और बाघ के बीच अचानक ऐसी स्थिति बन सकती है, तो पार्क के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा प्रोटोकॉल कितने मजबूत हैं?
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि पर्यटक सीधे खतरे में थे। लेकिन घटना के बाद वन विभाग ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की बात कही है।
सिर्फ एक कर्मचारी का निलंबन काफी होगा?
इस घटना ने एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है—क्या केवल एक कर्मचारी को निलंबित करना पर्याप्त होगा या पूरे सिस्टम की समीक्षा की जरूरत है?
वन्यजीव पार्क में बाघ जैसे खतरनाक जानवरों के साथ काम करते समय छोटी सी चूक भी जानलेवा हो सकती है। इसलिए गेट खोलने, कर्मचारियों की मौजूदगी की पुष्टि करने, बाघ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने और सफाई कार्य शुरू कराने से पहले सुरक्षा जांच जैसे हर चरण का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।
अब जांच से यह सामने आएगा कि सुगना देवी की मौत केवल एक कर्मचारी की गलती का परिणाम थी या इसके पीछे सुरक्षा व्यवस्था की कोई बड़ी खामी भी थी।
फिलहाल सुगना देवी की मौत के बाद नाहरगढ़ पार्क में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू हो चुकी है। बाघ ‘शिवाजी’ के हमले ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और पूरे मामले की जांच यह तय करेगी कि उस सुबह आखिर क्या हुआ था, किस स्तर पर चूक हुई और भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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