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83 साल पुराने RBL Bank में अचानक आया बड़ा बदलाव, UAE के बैंक के हाथ में कमान और अब ₹32 हजार करोड़ का खेल!



भारत के बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। करीब 83 साल पुराने RBL Bank की कमान अब विदेशी बैंकिंग समूह Emirates NBD के हाथों में है। जून 2026 में Emirates NBD ने RBL Bank में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने की प्रक्रिया पूरी की और उसके पास बैंक की विस्तारित शेयर पूंजी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आ गया। इसके बाद RBL Bank विदेशी बैंक की सहायक इकाई के रूप में काम कर रहा है।

अब इसी RBL Bank ने विदेशी मुद्रा जमा के मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की विशेष FCNR(B) स्वैप सुविधा का इस्तेमाल करते हुए 31 अगस्त 2026 तक करीब 3.40 अरब डॉलर यानी लगभग ₹32,472 करोड़ की विदेशी मुद्रा जमा जुटाई है। बैंक ने यह जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को दी गई अपनी फाइलिंग में साझा की है।

RBI की स्वैप सुविधा से जुटाए हजारों करोड़

RBL Bank की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक बैंक ने RBI की विशेष स्वैप सुविधा के तहत लगभग 3.40 अरब डॉलर की रकम जुटाई। भारतीय मुद्रा में इसकी वैल्यू करीब ₹32,472 करोड़ बैठती है।

यह रकम मुख्य रूप से FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) deposits के जरिए जुटाई गई। यह ऐसी जमा योजना है जिसमें पात्र गैर-निवासी ग्राहक विदेशी मुद्रा में पैसा बैंक में जमा कर सकते हैं।

RBI ने विदेशी मुद्रा जुटाने को बढ़ावा देने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू की थी। इस सुविधा के जरिए बैंकों को विदेशों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने और उसे RBI के साथ स्वैप करने का अवसर मिला। अगस्त के अंतिम दिनों में इस सुविधा के तहत बैंकों की ओर से भारी मात्रा में डॉलर जुटाए गए।

पूरे बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो 31 अगस्त तक भारतीय बैंकों ने FCNR(B) जमा के जरिए करीब 127.22 अरब डॉलर जुटाए थे। यानी RBL Bank की 3.40 अरब डॉलर की हिस्सेदारी भी इस बड़े अभियान में महत्वपूर्ण रही।

जमा के बदले बैंक ने दिए ₹10 हजार करोड़ से ज्यादा के लोन

RBL Bank ने केवल विदेशी मुद्रा जमा जुटाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। बैंक की इंटरनेशनल बैंकिंग यूनिट ने इन जमा राशियों के आधार पर करीब 1.08 अरब डॉलर यानी लगभग ₹10,309 करोड़ के लोन भी उपलब्ध कराए।

इसका मतलब है कि बैंक ने विदेशी मुद्रा जमा को अपने बैंकिंग कारोबार में इस्तेमाल करते हुए लोन गतिविधियों को भी बढ़ाया। हालांकि, बैंक की ओर से जारी आंकड़े अभी प्रोविजनल और अनऑडिटेड हैं। बैंक ने रुपये में दिए गए आंकड़ों की गणना 31 अगस्त 2026 की विनिमय दर के आधार पर की है।

Emirates NBD की भी रही अहम भूमिका

RBL Bank के इस बड़े डिपॉजिट जुटाने के अभियान में उसके नए प्रमोटर Emirates NBD की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है।

बैंक के मुताबिक, Emirates NBD और उसकी सहायक कंपनियों तथा सहयोगी संस्थाओं ने UAE-India corridor का फायदा उठाते हुए विदेशी मुद्रा जमा जुटाने में सहयोग किया। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच व्यापार, निवेश और वित्तीय गतिविधियों के बढ़ते संबंधों को इस प्रक्रिया में अहम माना जा रहा है।

यही वजह है कि RBL Bank के लिए Emirates NBD का साथ केवल हिस्सेदारी खरीदने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके जरिए बैंक को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और खासकर UAE से जुड़े वित्तीय प्रवाह का फायदा मिलने की उम्मीद भी बढ़ी है।

कैसे बदला RBL Bank का मालिकाना ढांचा?

RBL Bank में Emirates NBD का प्रवेश 2025 में घोषित उस बड़े निवेश समझौते से शुरू हुआ था, जिसके तहत UAE के इस बैंकिंग समूह ने RBL Bank में करीब 3 अरब डॉलर के निवेश के जरिए नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने की योजना बनाई थी।

इसके बाद भारतीय नियामकीय मंजूरियां मिलीं। RBI ने Emirates NBD को RBL Bank में कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की अनुमति दी थी और बैंक को विदेशी बैंक की subsidiary mode वाली संरचना के तहत वर्गीकृत किया गया।

आखिरकार जून 2026 में सौदा पूरा हुआ। Emirates NBD ने करीब 2.75 अरब डॉलर के प्राथमिक निवेश के जरिए RBL Bank में बहुमत हिस्सेदारी हासिल की और उसकी हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत हो गई। इसे भारतीय बैंकिंग सेक्टर में किसी विदेशी बैंक द्वारा किसी लाभदायक भारतीय बैंक में बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने वाला पहला बड़ा सौदा बताया गया।

अब RBL Bank के लिए क्या बदल सकता है?

RBL Bank में विदेशी बैंकिंग समूह की बहुमत हिस्सेदारी आने के बाद बैंक के सामने विस्तार के नए रास्ते खुल सकते हैं। Emirates NBD का पश्चिम एशिया में मजबूत नेटवर्क है, जबकि RBL Bank की भारत में अपनी शाखाओं, ग्राहकों और बैंकिंग कारोबार की मौजूदगी है।

दोनों नेटवर्क के मिलने से UAE और भारत के बीच कारोबार करने वाले लोगों, कंपनियों और निवेशकों के लिए बैंकिंग सेवाओं का विस्तार हो सकता है। खासतौर पर विदेशी मुद्रा, रेमिटेंस, कॉरपोरेट बैंकिंग और सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

हालांकि, किसी भी बैंक की वास्तविक वित्तीय मजबूती का आकलन केवल एक डिपॉजिट आंकड़े से नहीं किया जा सकता। इसके लिए बैंक की परिसंपत्तियों, जमा, लोन बुक, मुनाफे, एनपीए, पूंजी पर्याप्तता और भविष्य की रणनीति को भी देखना जरूरी होगा।

RBI की योजना को भी मिली बड़ी सफलता

RBL Bank का 3.40 अरब डॉलर का आंकड़ा ऐसे समय आया है जब RBI की विशेष FCNR(B) पहल ने उम्मीद से कहीं ज्यादा विदेशी मुद्रा आकर्षित की है।

31 अगस्त 2026 तक भारतीय बैंकों ने FCNR(B) के जरिए 127.22 अरब डॉलर की जमा जुटाई। अन्य विदेशी मुद्रा जुटाने वाली योजनाओं को मिलाकर कुल विदेशी मुद्रा मोबिलाइजेशन करीब 136.37 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा शुरुआती उम्मीदों से काफी अधिक रहा।

इससे भारतीय वित्तीय प्रणाली में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ी है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिली है। हालांकि इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने के बाद बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त रुपये की तरलता को मैनेज करना RBI के लिए एक नई चुनौती भी बन सकता है।

83 साल पुराने बैंक की नई पहचान

1943 में स्थापित RBL Bank ने आठ दशक से अधिक समय में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। अब 2026 में इसके इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ चुका है।

एक तरफ बैंक ने विदेशी बैंकिंग समूह Emirates NBD के साथ नया मालिकाना ढांचा हासिल किया है, तो दूसरी तरफ इसी समय उसने RBI की विशेष सुविधा के जरिए ₹32,472 करोड़ की विदेशी मुद्रा जमा जुटाकर अपनी अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षमता का भी प्रदर्शन किया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि Emirates NBD के नेटवर्क और पूंजी के सहारे RBL Bank आने वाले वर्षों में कितनी तेजी से अपना कारोबार बढ़ाता है और UAE-India financial corridor का फायदा उठाकर भारतीय बैंकिंग बाजार में अपनी स्थिति को कितना मजबूत कर पाता है।

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