तीन महीने में तीन बच्चों की मौत! हर बार पेट दर्द से बिगड़ी हालत, आखिर क्या है पूरा रहस्य?
फतेहपुर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। हथगाम क्षेत्र के सिठौरा गांव में एक ही परिवार के तीन बच्चों की करीब ढाई से तीन महीने के भीतर मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि तीनों बच्चों की तबीयत पेट दर्द और उल्टी जैसे लक्षणों के बाद बिगड़ी और इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। तीसरे बच्चे की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया है, वहीं एक जैसे लक्षणों के कारण अब स्वास्थ्य विभाग भी पूरे मामले की जांच की तैयारी में है। फिलहाल मौतों की वास्तविक वजह सामने नहीं आई है।
सिठौरा गांव निवासी रामनरेश और उनकी पत्नी मालती के लिए पिछले कुछ महीने किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे। परिवार के तीनों बच्चों की एक के बाद एक मौत ने माता-पिता को पूरी तरह तोड़ दिया है। सबसे पहले बेटी मोहिनी की तबीयत बिगड़ी, इसके बाद बेटे आशीष की मौत हुई और अब बड़ी बेटी प्रिया भी दुनिया छोड़ गई। परिवार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि तीनों बच्चों की हालत लगभग एक जैसे लक्षणों के साथ बिगड़ती चली गई।
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने गांव में विशेषज्ञों की टीम भेजकर जांच कराने और बच्चों के खान-पान सहित अन्य संभावित कारणों की पड़ताल की बात कही है।
पहले बेटी मोहिनी की बिगड़ी थी तबीयत
परिवार पर दुखों का सिलसिला जून में शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ढाई माह पहले मोहिनी की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। उसे पेट में दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। परिवार के लोग घबराकर उसे हथगाम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
माता-पिता को उम्मीद थी कि इलाज मिलने के बाद बच्ची की हालत ठीक हो जाएगी और वह घर वापस लौट आएगी। लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की और अंततः उसे मृत घोषित कर दिया।
मासूम बेटी की अचानक मौत ने परिवार को हिलाकर रख दिया। एक बच्चे को खोने के बाद भी माता-पिता को उम्मीद थी कि उनके बाकी बच्चे उनके साथ हैं और समय के साथ परिवार इस सदमे से उबर जाएगा।
लेकिन कुछ ही समय बाद परिवार के सामने एक और त्रासदी खड़ी हो गई।
इकलौते बेटे आशीष की मौत ने तोड़ा परिवार
मोहिनी की मौत के सदमे से परिवार अभी पूरी तरह बाहर भी नहीं निकल पाया था कि सितंबर में बेटे आशीष की तबीयत बिगड़ गई। रिपोर्टों के अनुसार, आशीष को भी पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई और उसकी हालत तेजी से गंभीर होती चली गई।
परिजन उसे तत्काल हथगाम सीएचसी लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति गंभीर देखते हुए उसे जिला अस्पताल रेफर किया। परिवार बेटे को बचाने की उम्मीद में उसे लेकर अस्पताल के लिए निकला, लेकिन रास्ते में ही उसकी हालत और बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
आशीष परिवार का इकलौता बेटा था। माता-पिता के लिए वह सिर्फ बेटा ही नहीं बल्कि भविष्य का सहारा भी था। उसकी मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
एक तरफ पहले ही छोटी बेटी की मौत हो चुकी थी और अब इकलौते बेटे को भी खोने के बाद माता-पिता के सामने सिर्फ बड़ी बेटी प्रिया बची थी। परिवार को उम्मीद थी कि कम से कम बेटी उनके साथ रहेगी।
लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
बड़ी बेटी प्रिया के पेट में भी उठा तेज दर्द
मंगलवार को परिवार में एक बार फिर वही स्थिति पैदा हो गई। बड़ी बेटी प्रिया की तबीयत अचानक खराब हुई। उसे उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई। पिता रामनरेश उसे लेकर हथगाम सीएचसी पहुंचे।
डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया। परिजन बेटी को बचाने की उम्मीद में उसे लेकर आगे बढ़े, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम की मांग की।
प्रिया की मौत के बाद परिवार में ऐसा मातम छाया कि गांव के लोग भी स्तब्ध रह गए। एक ही परिवार के तीन बच्चों की लगातार मौत ने ग्रामीणों के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीनों मौतों में एक बात ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि तीनों बच्चों की तबीयत पेट से जुड़ी समस्या के बाद बिगड़ी। रिपोर्टों में मोहिनी, आशीष और प्रिया की मौत से पहले पेट दर्द जैसे लक्षणों का उल्लेख है। प्रिया के मामले में उल्टी की शिकायत भी सामने आई है।
यही समानता अब स्वास्थ्य विभाग के लिए जांच का अहम बिंदु बन गई है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि तीनों मौतें किसी एक बीमारी, संक्रमण, खाद्य पदार्थ या जहरीले पदार्थ के कारण हुईं। आधिकारिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे मामलों में कई संभावित कारण हो सकते हैं, इसलिए बिना चिकित्सकीय जांच के किसी एक वजह को जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंचकर करेगी जांच
एक ही परिवार में लगातार तीन बच्चों की मौत की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यूबी सिंह के अनुसार, विशेषज्ञों की टीम को सिठौरा गांव भेजकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
जांच के दौरान बच्चों के खान-पान, पानी और आसपास की परिस्थितियों समेत अन्य संभावित कारणों की जानकारी जुटाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं तीनों बच्चों की बीमारी के पीछे कोई साझा कारण तो नहीं था।
इस जांच में परिवार के सदस्यों से भी जानकारी ली जा सकती है। बच्चों को कब और क्या खिलाया गया था, उन्होंने किस तरह का पानी पिया था, बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या थे और अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी स्थिति कितनी गंभीर थी—ऐसे कई सवाल जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिल सकती है अहम जानकारी
प्रिया की मौत के बाद परिवार ने पुलिस को सूचना देकर पोस्टमार्टम की मांग की। पुलिस ने भी मौत के कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे डॉक्टरों को मौत के संभावित चिकित्सकीय कारणों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
यदि जांच में किसी बीमारी, संक्रमण, विषाक्तता या अन्य कारण का संकेत मिलता है तो स्वास्थ्य विभाग उसके आधार पर आगे की जांच कर सकता है।
अगर किसी पर शक है तो जांच में सामने आएगा सच
परिवार के लिए लगातार तीन बच्चों की मौत के बाद कई तरह की आशंकाएं पैदा होना स्वाभाविक है। पुलिस प्रशासन की ओर से भी कहा गया है कि यदि परिवार को किसी व्यक्ति पर बच्चों को कुछ खिलाने-पिलाने या किसी अन्य तरह की भूमिका को लेकर संदेह है, तो शिकायत दी जा सकती है।
पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल किसी व्यक्ति या किसी खास खाद्य पदार्थ को इन मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।
गांव में भी बना हुआ है डर और सवाल
एक ही परिवार में कुछ ही महीनों के भीतर तीन बच्चों की मौत की खबर के बाद सिठौरा गांव में भी चिंता का माहौल है। ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि आखिर बच्चों की तबीयत एक जैसे लक्षणों के साथ क्यों बिगड़ी।
परिवार के लिए यह सिर्फ बीमारी का सवाल नहीं बल्कि जीवन भर का ऐसा दुख है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। एक के बाद एक तीन बच्चों को खोने के बाद माता-पिता के पास अब सिर्फ उनकी यादें बची हैं।
रामनरेश और मालती के लिए जिस घर में कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है।
अब जांच से खुलेगा मौतों का असली कारण
फतेहपुर के सिठौरा गांव का यह मामला फिलहाल रहस्य बना हुआ है। तीनों बच्चों की मौत के बीच समानता ने सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन अभी किसी बीमारी या अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की पड़ताल से ही यह पता चल सकेगा कि बच्चों की मौत के पीछे आखिर क्या वजह थी।
फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता मौतों के कारण का पता लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई साझा स्वास्थ्य जोखिम मौजूद है तो उसे समय रहते पहचाना जा सके।
एक परिवार ने कुछ ही महीनों में अपने तीनों बच्चों को खो दिया है। अब पूरे गांव और परिवार की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। सवाल सिर्फ इन तीन मौतों का नहीं है, बल्कि यह भी है कि अगर कोई साझा कारण सामने आता है तो उसे समय रहते कैसे रोका जाए, ताकि किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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