खड़े होते ही चक्कर और आंखों के आगे अंधेरा? कहीं ये सिर्फ लो BP तो नहीं, शरीर दे रहा है बड़ा संकेत
कई लोगों का ब्लड प्रेशर सामान्य से थोड़ा कम रहता है, लेकिन उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती। ऐसे लोगों में कम ब्लड प्रेशर शरीर की सामान्य स्थिति भी हो सकता है। समस्या तब मानी जाती है जब ब्लड प्रेशर कम होने के साथ चक्कर, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना या बेहोशी जैसी दिक्कतें बार-बार होने लगें। खासतौर पर अगर ये लक्षण बिस्तर या कुर्सी से उठकर खड़े होने के तुरंत बाद दिखाई दें, तो इसे पोश्चरल हाइपोटेंशन या ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जा सकता है।
इस स्थिति में बैठने या लेटने से खड़े होने पर ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है। मेडिकल तौर पर आमतौर पर खड़े होने के तीन मिनट के भीतर सिस्टोलिक यानी ऊपर वाला ब्लड प्रेशर कम से कम 20 mmHg या डायस्टोलिक यानी नीचे वाला ब्लड प्रेशर कम से कम 10 mmHg गिरने को ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की परिभाषा में रखा जाता है।
यह समस्या कभी-कभार हल्की हो सकती है, लेकिन अगर लगातार ऐसा हो रहा है या व्यक्ति बेहोश होकर गिर जाता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आखिर खड़े होते ही ब्लड प्रेशर क्यों गिर जाता है?
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बैठा या लेटा रहता है और अचानक खड़ा होता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर का कुछ रक्त पैरों और पेट के आसपास के हिस्से में जमा हो जाता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर का नर्वस सिस्टम और रक्त वाहिकाएं तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और दिल की धड़कन तथा रक्त संचार में बदलाव करके मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त पहुंचाने में मदद करती हैं।
लेकिन ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन में यह प्रतिक्रिया पर्याप्त तेजी से या प्रभावी तरीके से नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह कम हो सकता है और व्यक्ति को चक्कर या सिर हल्का लगने जैसा महसूस हो सकता है।
यही कारण है कि कई लोगों को बिस्तर से अचानक उठते ही आंखों के सामने अंधेरा या धुंधलापन महसूस होता है।
किन लोगों में ज्यादा हो सकती है समस्या?
यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन युवा लोगों में भी कुछ परिस्थितियों या स्वास्थ्य समस्याओं के कारण यह हो सकती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की समस्या अधिक आम होती जाती है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक बेड रेस्ट, ज्यादा देर तक खड़े रहना, गर्म वातावरण, शराब का सेवन, एनीमिया, डायबिटीज और कुछ दवाएं इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। कुछ हृदय, तंत्रिका तंत्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति को बार-बार खड़े होने पर चक्कर आता है, तो सिर्फ इसे “कमजोरी” समझकर छोड़ देना सही नहीं है।
पोश्चरल हाइपोटेंशन के प्रमुख लक्षण
इस स्थिति के लक्षण व्यक्ति-दर-व्यक्ति अलग हो सकते हैं। आम तौर पर खड़े होने के बाद कुछ समय के लिए निम्न समस्याएं महसूस हो सकती हैं:
चक्कर या सिर हल्का लगना
आंखों के सामने धुंधलापन या अंधेरा छाना
कमजोरी या अत्यधिक थकान
मतली या जी मिचलाना
ध्यान लगाने में परेशानी
भ्रम या कंफ्यूजन
दिल की धड़कन तेज महसूस होना
बेहोशी या गिर जाना
मायो क्लिनिक के अनुसार, खड़े होने पर चक्कर, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना, भ्रम और बेहोशी ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।
अगर व्यक्ति बेहोश होकर गिर जाता है, तो चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। बुजुर्गों में यह जोखिम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या हर लो BP खतरनाक होता है?
नहीं। केवल ब्लड प्रेशर की कम रीडिंग का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कोई गंभीर बीमारी है। कुछ स्वस्थ लोगों में ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से कम रह सकता है और अगर उन्हें कोई लक्षण नहीं हैं तो जरूरी नहीं कि उपचार की आवश्यकता हो।
NHS के अनुसार, आम तौर पर 90/60 mmHg से कम ब्लड प्रेशर को लो ब्लड प्रेशर माना जाता है, लेकिन उपचार की जरूरत मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति को लक्षण हो रहे हैं या नहीं और इसका कारण क्या है।
दूसरी तरफ, अगर कम BP के साथ बार-बार चक्कर, बेहोशी, कमजोरी या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
इसके पीछे हो सकते हैं कई कारण
पोश्चरल हाइपोटेंशन का कोई एक कारण नहीं होता। कई बार इसका कारण अस्थायी हो सकता है, जैसे पर्याप्त पानी न पीना या लंबे समय तक बिस्तर पर रहना।
कुछ दवाएं भी ब्लड प्रेशर को कम कर सकती हैं। हाई BP, हृदय रोग, डिप्रेशन या अन्य बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं के कारण भी खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिर सकता है।
इसके अलावा डायबिटीज, एनीमिया, ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्याएं और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए डॉक्टर आमतौर पर मरीज की दवाओं, मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की जानकारी लेते हैं।
कैसे पता चलता है कि पोश्चरल हाइपोटेंशन है?
इसकी जांच के लिए डॉक्टर व्यक्ति का ब्लड प्रेशर अलग-अलग स्थितियों में माप सकते हैं। आम तौर पर पहले लेटकर या बैठकर BP लिया जाता है और फिर खड़े होने के बाद दोबारा BP मापा जाता है।
अगर खड़े होने के कुछ मिनटों के भीतर निर्धारित सीमा तक ब्लड प्रेशर गिरता है और साथ में लक्षण भी मौजूद हैं, तो ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन की संभावना बन सकती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट, ECG या अन्य जांच भी करा सकते हैं ताकि इसके पीछे मौजूद कारण का पता लगाया जा सके।
अचानक खड़े होने से बचें
इस समस्या से परेशान लोगों के लिए सबसे आसान सावधानी है कि लेटे या बैठे हुए तुरंत खड़े न हों।
अगर आप लंबे समय से लेटे हैं, तो पहले धीरे-धीरे बैठें। कुछ समय बेड के किनारे बैठने के बाद ही खड़े हों। खड़े होते समय जरूरत पड़ने पर बेड, कुर्सी या किसी सुरक्षित सहारे का इस्तेमाल करें।
अगर खड़े होने के बाद चक्कर आने लगे तो चलने की कोशिश न करें। तुरंत बैठ जाएं या जरूरत पड़ने पर लेट जाएं। इससे गिरने और चोट लगने का खतरा कम हो सकता है।
पानी की कमी न होने दें
डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी पोश्चरल हाइपोटेंशन को बढ़ा सकती है। इसलिए यदि डॉक्टर ने किसी वजह से पानी सीमित करने की सलाह नहीं दी है, तो पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना जरूरी है।
हालांकि हर व्यक्ति के लिए पानी की एक समान मात्रा तय नहीं की जा सकती। जिन लोगों को हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी या डॉक्टर द्वारा फ्लूइड प्रतिबंध की सलाह दी गई है, उन्हें पानी की मात्रा बढ़ाने से पहले चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
पैरों की हल्की एक्सरसाइज भी मददगार हो सकती है
खड़े होने से पहले पैरों और पंजों की हल्की एक्सरसाइज कुछ लोगों में मदद कर सकती है। उदाहरण के लिए पैर के पंजों को ऊपर-नीचे करना, एड़ियों को उठाना या बैठे-बैठे पैरों को हल्का चलाना किया जा सकता है।
कुछ मामलों में पैरों की मांसपेशियों को कसने या पैरों को क्रॉस करने जैसी शारीरिक तकनीकें भी रक्त को ऊपर की ओर वापस आने में मदद कर सकती हैं।
लेकिन अगर व्यक्ति को संतुलन की समस्या है तो ऐसी एक्सरसाइज खड़े होकर अकेले नहीं करनी चाहिए।
सिर थोड़ा ऊंचा करके सोने की सलाह क्यों दी जाती है?
कुछ मरीजों में डॉक्टर बिस्तर के सिर वाले हिस्से को थोड़ा ऊंचा रखने की सलाह दे सकते हैं। इससे रात में शरीर की स्थिति बदलने और सुबह उठने के दौरान होने वाली समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि इसे भी हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नियम नहीं माना जाना चाहिए।
नमक बढ़ाने से पहले डॉक्टर से पूछें
कुछ मरीजों में डॉक्टर पानी और नमक की मात्रा बढ़ाने की सलाह दे सकते हैं। लेकिन यह सलाह सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। खासकर हाई BP, हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी या शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने की समस्या वाले लोगों को खुद से नमक बढ़ाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
इसी तरह पोश्चरल हाइपोटेंशन की दवा भी डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए।
दवाएं खुद से बंद न करें
अगर किसी व्यक्ति को BP या किसी अन्य बीमारी की दवा लेने के बाद बार-बार खड़े होने पर चक्कर आता है, तो वह अपनी दवा खुद से बंद न करे। डॉक्टर दवाओं की समीक्षा करके जरूरत पड़ने पर खुराक या दवा के समय में बदलाव कर सकते हैं।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर चक्कर कभी-कभार हल्का हो और तुरंत ठीक हो जाए तो भी बार-बार होने पर डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। लेकिन बेहोशी, बार-बार गिरना, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, गंभीर कमजोरी या लगातार भ्रम जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
खासकर अगर किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार बेहोशी हो रही है, तो इसे सामान्य लो BP मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मायो क्लिनिक भी बार-बार होने वाले लक्षणों और बेहोशी की स्थिति में चिकित्सा मूल्यांकन की सलाह देता है।
पोश्चरल हाइपोटेंशन ऐसी स्थिति है जिसमें बैठने या लेटने से खड़े होने पर ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है और व्यक्ति को चक्कर, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना या बेहोशी जैसी परेशानी हो सकती है। यह कभी-कभी पानी की कमी या लंबे समय तक आराम करने जैसी वजहों से हो सकता है, जबकि कुछ मामलों में दवाएं या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बार-बार होने वाले चक्कर को केवल कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें। धीरे-धीरे उठना, पर्याप्त पानी पीना, अचानक पोजिशन न बदलना और जरूरत पड़ने पर सहारा लेना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहते हैं या बेहोशी जैसी स्थिति होती है, तो सही कारण पता करने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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