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महिलाओं के शरीर में चुपचाप पल रही हो सकती हैं ये बीमारियां! साल में एक बार कराएं ये 6 ब्लड टेस्ट, वरना देर हो सकती है



Women Health Tips: महिलाओं के शरीर में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। पीरियड्स से लेकर प्रेग्नेंसी, प्रसव और मेनोपॉज तक शरीर में हार्मोन का स्तर लगातार बदलता रहता है। इन बदलावों का असर केवल प्रजनन स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि वजन, हड्डियों, दिल, मूड, ऊर्जा और मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ सकता है।

कई बार शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी, एनीमिया, ब्लड शुगर बढ़ना या थायरॉइड से जुड़ी समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआत में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच से कुछ परेशानियों का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि हर महिला को हर ब्लड टेस्ट हर साल करवाना जरूरी नहीं होता। उम्र, लक्षण, पारिवारिक इतिहास, गर्भावस्था, दवाओं और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर डॉक्टर अलग-अलग जांच की सलाह दे सकते हैं।

फिर भी कुछ सामान्य ब्लड टेस्ट ऐसे हैं, जिनकी जरूरत कई महिलाओं को अपनी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पड़ सकती है।

CBC टेस्ट से मिलती है खून की पूरी जानकारी

कंप्लीट ब्लड काउंट यानी CBC सबसे सामान्य ब्लड टेस्ट में से एक है। इस जांच के जरिए लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं, हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स जैसे महत्वपूर्ण घटकों की जानकारी मिलती है।

महिलाओं में एनीमिया एक आम समस्या है, खासकर उन महिलाओं में जिन्हें पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है। शरीर में आयरन की कमी होने पर हीमोग्लोबिन कम हो सकता है। इसके कारण कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना और काम करने की क्षमता कम होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

अगर किसी महिला को लगातार कमजोरी, अत्यधिक थकान, बार-बार चक्कर आना या ज्यादा मासिक रक्तस्राव की समस्या रहती है, तो डॉक्टर CBC सहित अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। स्वस्थ महिलाओं में इसे कितनी बार करवाना है, यह व्यक्तिगत जोखिम और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

ब्लड शुगर की जांच को न करें नजरअंदाज

डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ-साथ ब्लड शुगर की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांचों से ब्लड शुगर की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से जिन महिलाओं का वजन ज्यादा है, जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर है, PCOS की समस्या है, पहले गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज रही है या परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उन्हें डॉक्टर से शुगर स्क्रीनिंग के बारे में जरूर बात करनी चाहिए।

सिर्फ उम्र के आधार पर हर महिला के लिए एक ही टेस्टिंग शेड्यूल तय नहीं किया जा सकता। डॉक्टर जोखिम के आधार पर जांच की अवधि तय कर सकते हैं।

थायरॉइड टेस्ट कब जरूरी?

महिलाओं में थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं। थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, हृदय गति और कई अन्य प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।

थायरॉइड में गड़बड़ी होने पर वजन अचानक बढ़ना या घटना, अत्यधिक थकान, ठंड या गर्मी ज्यादा लगना, बाल झड़ना, पीरियड्स में बदलाव और मूड से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ महिलाओं में गर्भधारण से जुड़ी दिक्कतों की जांच के दौरान भी थायरॉइड की जांच की जाती है।

TSH टेस्ट आमतौर पर थायरॉइड की शुरुआती जांच में महत्वपूर्ण होता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर T4 या अन्य जांच भी लिख सकते हैं। हर स्वस्थ महिला को बिना किसी जोखिम या लक्षण के हर साल T3 और T4 जांच करवाना जरूरी नहीं है। अगर परिवार में थायरॉइड की समस्या है या लक्षण मौजूद हैं, तो डॉक्टर से जांच की सलाह लेना बेहतर है।

लिपिड प्रोफाइल से समझें दिल का खतरा

महिलाओं के लिए दिल की सेहत पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है। लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट के जरिए LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल, HDL यानी अच्छा कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसे स्तरों की जानकारी मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर लंबे समय में हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। जिन महिलाओं को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा है या परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उनके लिए नियमित लिपिड जांच अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

लिपिड प्रोफाइल के लिए हर स्थिति में 12 घंटे की फास्टिंग जरूरी हो, ऐसा नहीं है। कौन सा टेस्ट और किस तरह की तैयारी चाहिए, यह डॉक्टर या लैब की सलाह के अनुसार तय किया जाना चाहिए।

विटामिन डी की जांच हर साल जरूरी नहीं

विटामिन डी शरीर में हड्डियों और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर हड्डियों की कमजोरी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला को हर साल अनिवार्य रूप से विटामिन डी टेस्ट करवाना चाहिए। अगर किसी महिला में कमी का जोखिम है, हड्डियों से जुड़ी समस्या है, शरीर में दर्द रहता है, सूर्य की रोशनी बहुत कम मिलती है या डॉक्टर को कमी का संदेह है, तो जांच की जरूरत पड़ सकती है।

बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के विटामिन डी की हाई-डोज सप्लीमेंट लेना भी उचित नहीं है।

विटामिन B12 की कमी भी बन सकती है परेशानी

विटामिन B12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नर्वस सिस्टम के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी कमी होने पर एनीमिया, कमजोरी, थकान, हाथ-पैर में झनझनाहट या नसों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

खासकर वे महिलाएं जो लंबे समय से पूरी तरह शाकाहारी या वीगन डाइट लेती हैं, पेट या आंत से जुड़ी समस्या से जूझ रही हैं या ऐसी दवाएं ले रही हैं जो B12 के अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं, उन्हें डॉक्टर से B12 जांच की जरूरत के बारे में पूछना चाहिए।

यह टेस्ट भी हर महिला के लिए हर साल अनिवार्य नहीं है। जरूरत व्यक्ति की डाइट, लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री देखकर तय की जाती है।

सिर्फ ब्लड टेस्ट ही पूरी हेल्थ रिपोर्ट नहीं

महिलाओं के लिए हेल्थ चेकअप का मतलब केवल ब्लड टेस्ट करवाना नहीं है। उम्र और जोखिम के अनुसार ब्लड प्रेशर, वजन, मानसिक स्वास्थ्य, आंखों और दांतों की जांच के साथ-साथ महिलाओं के लिए जरूरी अन्य स्क्रीनिंग भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी रिपोर्ट में थोड़ा बदलाव आने का मतलब हमेशा बीमारी होना नहीं होता। इसी तरह सामान्य रिपोर्ट का मतलब यह भी नहीं है कि शरीर की हर समस्या खत्म हो गई है। टेस्ट रिपोर्ट की सही व्याख्या महिला की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों के साथ डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।

इसलिए अपनी मर्जी से किसी दवा, हार्मोन या विटामिन सप्लीमेंट का सेवन शुरू न करें। अगर लगातार थकान, चक्कर, असामान्य ब्लीडिंग, वजन में अचानक बदलाव, पीरियड्स में गड़बड़ी या अन्य परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच करवाएं।

ध्यान रखें, कौन सा ब्लड टेस्ट कितनी बार करवाना है, यह हर महिला के लिए अलग हो सकता है। उम्र और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जोखिम के अनुसार डॉक्टर की सलाह सबसे महत्वपूर्ण है।

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