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प्याज के दाम में ऐसा उछाल कि हिल गया बाजार! एक महीने में 30% महंगा, इन राज्यों में ₹6 हजार के पार पहुंची कीमत… अब आगे क्या होगा?



Onion Price Hike: बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतों से फिलहाल आम लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। सितंबर 2026 में प्याज की थोक कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। राज्यवार थोक मूल्य के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में प्याज की औसत कीमत बढ़कर 4,202.49 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है। जबकि अगस्त महीने में यही औसत कीमत करीब 3,235.10 रुपये प्रति क्विंटल थी। यानी सिर्फ एक महीने के भीतर प्याज के थोक दाम में औसतन करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

प्याज की कीमतों में आई इस तेजी का असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। मंडियों में बढ़ते भाव के बीच ग्राहकों को अब पहले के मुकाबले प्याज के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। हालांकि अलग-अलग शहरों और बाजारों में प्याज की कीमत उसकी गुणवत्ता, आवक और स्थानीय मांग के हिसाब से अलग-अलग बनी हुई है।

लासलगांव मंडी में भी तेजी का असर

महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी प्याज के कारोबार के लिए देश की प्रमुख मंडियों में गिनी जाती है। 8 सितंबर को यहां प्याज की कीमतों में काफी अंतर देखने को मिला। उपलब्ध मंडी आंकड़ों के अनुसार, लासलगांव में प्याज का न्यूनतम भाव 1,200 रुपये प्रति क्विंटल, औसत भाव 4,400 रुपये प्रति क्विंटल और अधिकतम भाव 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंडी में प्याज की अलग-अलग क्वालिटी और आवक के हिसाब से कीमतों में बड़ा अंतर बना हुआ है। जहां कुछ प्याज कम कीमत पर बिक रहा है, वहीं बेहतर गुणवत्ता और मांग वाली उपज के लिए किसानों को 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल रहा है।

इन राज्यों में 6 हजार रुपये के पार पहुंचा भाव

राज्यवार थोक कीमतों पर नजर डालें तो कुछ राज्यों में प्याज के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं। सबसे ज्यादा थोक कीमत मणिपुर में 6,082.30 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई है। इसके बाद मेघालय में 6,028.85 रुपये प्रति क्विंटल का भाव रहा।

वहीं केरल में प्याज करीब 5,841.77 रुपये प्रति क्विंटल, तमिलनाडु में 5,707.81 रुपये प्रति क्विंटल और जम्मू-कश्मीर में करीब 5,353.20 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर पहुंच गया है।

इन आंकड़ों से साफ है कि प्याज की कीमतों में तेजी केवल किसी एक मंडी या राज्य तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में थोक बाजार में प्याज के भाव में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

एक महीने में गुजरात में सबसे ज्यादा तेजी

मासिक आधार पर प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल गुजरात में दर्ज किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में सिर्फ एक महीने में प्याज के थोक दाम में 50.1 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में प्याज के भाव में 45.4 फीसदी, चंडीगढ़ में 44.2 फीसदी, पंजाब में 43.3 फीसदी, महाराष्ट्र में 43.3 फीसदी और जम्मू-कश्मीर में 41.9 फीसदी की मासिक तेजी दर्ज की गई है।

यानी देश के कई प्रमुख राज्यों में प्याज की कीमत एक महीने के भीतर 40 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। इसका सीधा असर मंडी से लेकर खुदरा बाजार तक दिखाई देने की संभावना है।

एक साल में कई राज्यों में बेतहाशा बढ़े दाम

अगर सितंबर 2026 की कीमतों की तुलना सितंबर 2025 से की जाए तो तस्वीर और भी ज्यादा चौंकाने वाली है। सालाना आधार पर कुछ राज्यों में प्याज के थोक दाम कई गुना तक बढ़ गए हैं।

सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी आंध्र प्रदेश में 536.5 फीसदी दर्ज की गई है। यानी पिछले साल के मुकाबले यहां प्याज के थोक भाव में कई गुना वृद्धि हुई है।

इसके बाद मध्य प्रदेश में 338.8 फीसदी, महाराष्ट्र में 264.2 फीसदी, गुजरात में 257.3 फीसदी और कर्नाटक में 243.3 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्याज के बाजार में इस समय सिर्फ मौसमी या कुछ दिनों की तेजी नहीं है, बल्कि कई राज्यों में पिछले साल के मुकाबले कीमतों में बड़ा अंतर बन चुका है।

किसानों के लिए राहत की खबर

जहां प्याज की बढ़ती कीमतें आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन रही हैं, वहीं किसानों के लिए मौजूदा बाजार भाव राहत लेकर आए हैं। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोले के मुताबिक, लंबे समय बाद किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिल रहा है।

किसान संगठन का कहना है कि इस बार किसानों ने सरकारी एजेंसियों के बजाय सीधे मंडियों में प्याज बेचने को प्राथमिकता दी। इससे उन्हें बाजार में चल रहे बेहतर भाव का फायदा मिला।

किसानों की ओर से पहले यह आशंका जताई गई थी कि अगर बड़ी मात्रा में प्याज सरकारी एजेंसियों को बेच दिया गया तो बाद में उसी प्याज को बाजार में उतारकर कीमतों को नीचे लाने की कोशिश की जा सकती है। किसान संगठनों ने इसी वजह से NAFED और NCCF को प्याज बेचने से बचने की अपील की थी।

किसान संगठन के मुताबिक, इस फैसले का फायदा अब किसानों को मिल रहा है और उन्हें अपनी उपज का अपेक्षाकृत बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।

लेकिन आगे क्या होगा?

प्याज की कीमतों में आगे तेजी जारी रहेगी या फिर बाजार में भाव नीचे आएंगे, यह मुख्य रूप से मंडियों में होने वाली आवक, फसल की स्थिति, मांग और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा। अगर मंडियों में प्याज की आवक बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव बन सकता है। वहीं आवक कमजोर रहने और मांग बनी रहने पर भाव ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं।

फिलहाल सितंबर में प्याज की औसत थोक कीमत 4,202.49 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचना बाजार के लिए बड़ा संकेत है। एक महीने में करीब 30 फीसदी की औसत तेजी और कई राज्यों में 40 से 50 फीसदी तक की मासिक बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं और किसानों के बीच बाजार की तस्वीर बिल्कुल अलग कर दी है।

किसानों के लिए जहां यह तेजी लंबे समय बाद बेहतर कमाई का मौका लेकर आई है, वहीं आम लोगों के लिए प्याज के बढ़ते दाम रसोई का बजट बिगाड़ने वाली खबर बन गए हैं। आने वाले दिनों में मंडियों में प्याज की आवक और सरकारी हस्तक्षेप पर सभी की नजर रहेगी। 

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