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20 दिन तक खाली प्लॉट में पड़ा रहा शव, कपड़ों के इस छोटे से टैग ने खोला पूरा राज; पति निकला कातिल!

 


बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक खाली पड़े प्लॉट की सफाई के दौरान मिले महिला के सड़े-गले शव ने पुलिस को करीब तीन सप्ताह पुरानी हत्या की गुत्थी तक पहुंचा दिया। शव की हालत इतनी खराब थी कि शुरुआत में मृतका की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना था कि आखिर यह महिला कौन थी और उसे वहां किसने पहुंचाया।

मामले की जांच में पुलिस को कई छोटे-छोटे सुराग मिले, लेकिन इनमें महिला के कपड़ों पर लगा एक टैग बेहद अहम साबित हुआ। पुलिस ने टैग के जरिए कपड़े की खरीदारी तक पहुंच बनाई और फिर जांच धीरे-धीरे मृतका की पहचान से उसके पति तक जा पहुंची। इस मामले में पुलिस ने 32 वर्षीय सागर चंद्र रावत को गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी पत्नी 28 वर्षीय अनुसूया बेहरा की कथित तौर पर हत्या करने और शव को सुनसान जगह पर फेंकने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे दंपति के बीच पैसों को लेकर हुआ विवाद सामने आया है।

खाली प्लॉट की सफाई के दौरान मिला शव

इस पूरे मामले की शुरुआत किसी शिकायत या संदिग्ध गतिविधि से नहीं, बल्कि एक सामान्य सफाई अभियान से हुई। 2 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के संपिगेहल्ली इलाके के एमएस नगर, अग्रहारा लेआउट में स्थित एक खाली प्लॉट की सफाई कराई जा रही थी।

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी की ओर से खाली पड़े प्लॉटों की सफाई को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद जमीन मालिक ने सफाई के लिए कर्मचारियों को भेजा था। कर्मचारी जब झाड़ियों और लंबे समय से जमा कचरे को साफ कर रहे थे, तभी उन्हें वहां एक गद्दे जैसी चीज दिखाई दी। उसमें से दुर्गंध भी आ रही थी। करीब जाकर देखने पर उन्हें कुछ ऐसा नजर आया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी।

पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जब उस सामान को खोला गया तो उसके अंदर एक महिला का शव मिला। शव काफी समय पुराना था और बुरी तरह सड़ चुका था। रिपोर्टों के अनुसार, आवारा कुत्तों ने भी शव के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में मृतका की पहचान करना पुलिस के लिए बेहद मुश्किल हो गया था।

शव के साथ नहीं मिला कोई आसान पहचान पत्र

शव की हालत खराब होने के कारण पुलिस के पास शुरुआत में ऐसा कोई स्पष्ट सुराग नहीं था, जिससे तुरंत महिला की पहचान हो सके। पुलिस ने आसपास के इलाकों में पूछताछ की और यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या किसी महिला की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई है।

जांचकर्ताओं ने आसपास के हॉस्टल और पीजी में भी पूछताछ की, लेकिन शुरुआती प्रयासों से कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने शव के साथ मिली चीजों को ध्यान से देखना शुरू किया।

यहीं से जांच में एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा।

कपड़ों के टैग ने बदली जांच की दिशा

पुलिस को महिला के कपड़ों पर लगा एक टैग मिला। आम तौर पर कपड़े का छोटा-सा टैग किसी हत्या की जांच में कितना महत्वपूर्ण हो सकता है, इसका अंदाजा शायद ही लगाया जा सकता है। लेकिन इस मामले में यही टैग जांच की पहली बड़ी कड़ी बन गया।

पुलिस ने टैग पर दर्ज जानकारी के आधार पर उस कपड़े को बेचने वाले स्टोर और मॉल तक पहुंचने की कोशिश की। वहां से खरीदारी से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। पुलिस को कपड़े की खरीदारी से संबंधित रिकॉर्ड मिला, जिसने जांचकर्ताओं को मृतका की पहचान की दिशा में आगे बढ़ाया।

जांच में इसके साथ महिला के हाथों में मिली चूड़ियों और उसके पास मौजूद छोटे गणेश पेंडेंट को भी सुराग के तौर पर देखा गया। पुलिस ने इन सभी जानकारियों को जोड़कर महिला की पहचान अनुसूया बेहरा के रूप में करने की दिशा में आगे बढ़ाया। वैज्ञानिक तरीके से पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की प्रक्रिया भी अपनाए जाने की बात सामने आई है।

कौन थी अनुसूया बेहरा?

पुलिस जांच के अनुसार, अनुसूया 28 वर्ष की थीं और मूल रूप से ओडिशा से थीं। वह बेंगलुरु में अपने पति सागर चंद्र रावत के साथ रह रही थीं। दोनों के बारे में पुलिस ने बताया कि वे एक रिश्ते में थे और बाद में उन्होंने शादी कर ली थी।

रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों कुछ समय पहले ही बेंगलुरु आए थे और शहर में किराए के मकान में रह रहे थे। सागर होटल में काम करता था। दोनों के बीच घरेलू और आर्थिक मामलों को लेकर अक्सर विवाद होने की बात जांच में सामने आई।

11 अगस्त की रात आखिर क्या हुआ?

पुलिस के मुताबिक, 11 अगस्त को पति-पत्नी के बीच पैसों को लेकर विवाद हुआ था। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि विवाद सागर की सैलरी और घर के खर्चों से जुड़ा था। जांच के अनुसार, दोनों के बीच बहस बढ़ गई और आरोप है कि इसी दौरान सागर ने अनुसूया का गला दबा दिया।

पुलिस का दावा है कि गला दबाने से अनुसूया की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर शव को तत्काल घर से बाहर नहीं निकाला। जांचकर्ताओं के अनुसार, शव करीब तीन दिनों तक उनके किराए के घर में ही रखा गया।

यह अवधि जांच का बेहद अहम हिस्सा है, क्योंकि पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के बाद आरोपी ने क्या-क्या किया और शव को ठिकाने लगाने की योजना कैसे बनाई।

तीन दिन बाद शव को खाली प्लॉट में फेंका

पुलिस के अनुसार, हत्या के करीब तीन दिन बाद आरोपी ने शव को चादर में लपेटा और रस्सी से बांधा। इसके बाद उसने शव को एक गद्दे में छिपाकर या उसके साथ रखकर सुनसान खाली प्लॉट तक पहुंचाया।

रिपोर्टों के मुताबिक, 15 अगस्त की शुरुआती घंटों में शव को खाली जगह पर फेंका गया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर किराए का मकान छोड़ दिया और अपने काम की जगह के आसपास रहने लगा।

पुलिस को यह भी शक है कि शव फेंकने के बाद आरोपी कुछ समय तक उस इलाके पर नजर रखता रहा, ताकि यह पता चल सके कि शव किसी की नजर में आया या नहीं। यह बात जांच का हिस्सा है और पुलिस इसके संबंध में आगे सबूत जुटा रही है।

पति तक कैसे पहुंची पुलिस?

अनुसूया की पहचान सामने आने के बाद जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल था कि उसकी हत्या किसने की। पुलिस ने महिला के परिचितों, रहने की जगह और उसके पति से संबंधित जानकारी जुटानी शुरू की।

जांच में सामने आया कि सागर होटल में काम पर जा रहा था। पुलिस ने उसके कार्यस्थल पर पूछताछ की तो दंपति के बीच होने वाले विवादों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने सागर से पूछताछ शुरू की।

जांचकर्ताओं को उसके बयानों में कुछ ऐसे तथ्य मिले, जिन्हें लेकर पुलिस को संदेह हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे कड़ाई से सवाल किए और बाद में उसने कथित तौर पर हत्या की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।

पत्नी के लापता होने की कहानी भी बताई

पुलिस जांच में एक और अहम बात सामने आई। जब पुलिस अनुसूया के घर पहुंची तो वहां ताला मिला। पूछताछ में सागर ने कथित तौर पर यह बताया कि अनुसूया लापता है और वह उसे खोजने के लिए अपने गांव जाने वाला है।

लेकिन जांचकर्ताओं को उसके व्यवहार और कुछ अन्य परिस्थितियों से संदेह हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने यह भी पाया कि सागर अनुसूया के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था और उसके परिचितों के फोन का जवाब भी दे रहा था। इससे पुलिस का शक और गहरा गया।

करीब 20 दिन बाद सामने आया हत्या का राज

11 अगस्त की कथित हत्या और 2 सितंबर को शव मिलने के बीच करीब तीन सप्ताह का अंतर था। इतने दिनों तक किसी को यह पता नहीं चला कि महिला की हत्या कर दी गई है और उसका शव शहर के एक खाली प्लॉट में पड़ा है।

अगर उस प्लॉट की सफाई नहीं होती, तो संभव है कि शव वहां और लंबे समय तक पड़ा रहता। इसी वजह से इस मामले में नगर निकाय की सफाई कार्रवाई भी जांच की शुरुआत का महत्वपूर्ण कारण बनी।

एक छोटे टैग से खुली बड़ी गुत्थी

इस केस में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि जब शव की पहचान लगभग असंभव लग रही थी, तब कपड़ों पर लगा एक छोटा-सा टैग पुलिस के लिए बड़ा सुराग बन गया।

इसके बाद खरीदारी की जानकारी, फोन नंबर, तकनीकी जांच, महिला के आभूषण और स्थानीय पूछताछ जैसे कई सुरागों को जोड़कर पुलिस अनुसूया की पहचान तक पहुंची। फिर जांच उसके पति सागर तक पहुंची और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

संपिगेहल्ली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए मृतका की पहचान और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल इस मामले में हत्या के पीछे आर्थिक विवाद को पुलिस ने प्रमुख कारण के तौर पर बताया है। हालांकि अंतिम रूप से घटना की पूरी परिस्थितियां और आरोपी की भूमिका अदालत में सामने आने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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