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59 की उम्र में मिला वो कागज, जिसका 27 साल से था इंतजार! पिता की नौकरी लगी तो बेटी भी उसी परीक्षा में निकली पास



बागपत: कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें पूरा होने में भले ही वर्षों लग जाएं, लेकिन जब मंजिल मिलती है तो उस खुशी की कोई तुलना नहीं होती। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ावद गांव निवासी 59 वर्षीय विजय कुमार शर्मा की कहानी कुछ ऐसी ही है। करीब 27 वर्षों तक सरकारी शिक्षक बनने की कोशिश करने के बाद आखिरकार उनका सपना पूरा हो गया। उनका चयन शामली जिले के एक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में टीजीटी संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है।

विजय कुमार शर्मा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि कई बार शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में सफलता हासिल की, लेकिन अंतिम चयन तक नहीं पहुंच सके। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने छह बार TGT और चार बार PGT की लिखित परीक्षाएं पास कीं, जबकि कई बार इंटरव्यू तक पहुंचे। इसके बावजूद अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आ पाया। लेकिन हर असफलता के बाद उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और सरकारी शिक्षक बनने के अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

1999 में शुरू हुआ सरकारी शिक्षक बनने का सफर

विजय कुमार शर्मा ने वर्ष 1999 में सरकारी शिक्षक बनने का लक्ष्य तय किया था। उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि इस सपने को पूरा करने में करीब तीन दशक का समय लग जाएगा। लेकिन उन्होंने लगातार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया।

रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षाओं में कई बार सफलता हासिल की। छह बार TGT और चार बार PGT की लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद उन्हें अंतिम नियुक्ति नहीं मिल सकी। करीब आठ बार वह इंटरव्यू के चरण तक भी पहुंचे, लेकिन हर बार अंतिम चयन से बाहर रह गए।

इतनी बार असफल होने के बाद बहुत से उम्मीदवार अपना लक्ष्य बदल सकते हैं, लेकिन शर्मा ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने तैयारी जारी रखी और साथ ही निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में काम करते रहे।

निजी स्कूल में पढ़ाते हुए जारी रखी तैयारी

सरकारी नौकरी के इंतजार के दौरान विजय कुमार शर्मा ने अपने अध्यापन को नहीं छोड़ा। उन्होंने बड़ौत क्षेत्र के निजी स्कूलों में करीब 26 वर्षों तक हिंदी और संस्कृत पढ़ाई। दिन में वह बच्चों को पढ़ाते थे और इसके साथ ही सरकारी शिक्षक भर्ती की तैयारी भी जारी रखते थे।

यानी उनके लिए शिक्षक बनना केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं था। वह पहले से ही अध्यापन के क्षेत्र में सक्रिय थे। सरकारी सेवा में आने का सपना उनके लिए एक लंबे समय से तय लक्ष्य था।

उनके पिता लक्ष्मण सिंह भी सरकारी शिक्षक थे। पिता के पेशे का विजय कुमार के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने भी अध्यापन को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उनकी तैयारी में उनकी मेंटर प्रोफेसर कमला अग्रवाल के मार्गदर्शन का भी उल्लेख सामने आया है।

बेटी ममता ने भी उसी परीक्षा में हासिल की सफलता

विजय कुमार शर्मा की कहानी को और खास बनाता है उनका परिवार। उनकी 28 वर्षीय बेटी ममता ने भी उसी शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है। हालांकि फिलहाल उनका नाम प्रतीक्षा सूची में है और उन्हें नियुक्ति का इंतजार है।

ममता ने अपने पिता को बचपन से सरकारी शिक्षक बनने के लिए मेहनत करते देखा। उनके लिए पिता का संघर्ष किसी किताब में पढ़ी गई कहानी नहीं, बल्कि उनके सामने घटती हुई वास्तविकता थी।

वर्षों तक पिता को परीक्षा की तैयारी करते और असफलताओं के बाद फिर से कोशिश करते देखकर ममता को भी शिक्षक बनने की प्रेरणा मिली। इस तरह पिता और बेटी ने एक ही भर्ती प्रक्रिया में परीक्षा दी और दोनों ने सफलता हासिल की, हालांकि फिलहाल नियुक्ति के मामले में दोनों की स्थिति अलग है।

विजय कुमार का चयन हो चुका है, जबकि ममता प्रतीक्षा सूची में हैं। परिवार को उम्मीद है कि आगे रिक्ति आने पर उन्हें भी नियुक्ति का अवसर मिल सकता है।

59 साल की उम्र में मिला नियुक्ति पत्र

विजय कुमार शर्मा के लिए सबसे भावुक क्षण तब आया जब उन्हें लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र मिला। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 22 सितंबर 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। उसी कार्यक्रम में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित हजारों अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए।

विजय कुमार के लिए यह नियुक्ति पत्र केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं था। यह 1999 में शुरू हुए उस सफर का परिणाम था, जिसमें उन्हें कई बार परीक्षा में सफलता मिली लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया।

उनकी अपनी प्रतिक्रिया के अनुसार, उन्हें इस उपलब्धि पर बेहद खुशी हुई और उन्होंने इसे अपने जीवन की बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने युवाओं से लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करने की बात भी कही।

शामली के ऐलम इंटर कॉलेज में पढ़ाएंगे संस्कृत

नियुक्ति के बाद विजय कुमार शर्मा अब शामली जिले के ऐलम इंटर कॉलेज में TGT संस्कृत शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। रिपोर्टों के अनुसार, उनका घर इस स्कूल से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है।

अब वह विद्यार्थियों को संस्कृत पढ़ाएंगे और अपने लंबे अध्यापन अनुभव को सरकारी स्कूल की कक्षा में इस्तेमाल करेंगे। उनके लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक निजी स्कूल में पढ़ाने के बाद अब उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय में शिक्षक के रूप में काम करने का अवसर मिला है।

रिटायरमेंट से पहले करीब दो साल का अवसर

विजय कुमार शर्मा की उम्र अब 59 वर्ष है। उत्तर प्रदेश में शिक्षक की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होने के कारण उन्हें सरकारी शिक्षक के रूप में सेवा करने के लिए लगभग दो वर्ष से अधिक का समय मिलेगा। रिपोर्टों में उनकी उम्र करीब 59 वर्ष 8 माह बताई गई है।

किसी व्यक्ति के लिए सरकारी नौकरी में प्रवेश की यह उम्र सामान्य परिस्थितियों से अलग जरूर है, लेकिन विजय कुमार के मामले में यह 27 वर्षों के संघर्ष के बाद मिली मंजिल है।

उनकी कहानी में एक खास बात यह भी है कि उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। निजी स्कूल में पढ़ाते रहे, परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं और इसके बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।

आठ इंटरव्यू के बाद मिली मंजिल

विजय कुमार शर्मा के संघर्ष का सबसे अहम हिस्सा उनके इंटरव्यू रहे। रिपोर्टों के मुताबिक, वह करीब आठ बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। हर बार लिखित परीक्षा में सफलता के बाद अंतिम चरण में रुक जाना निश्चित तौर पर कठिन अनुभव रहा होगा।

इस बार भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू नहीं होने की बात विभिन्न रिपोर्टों में सामने आई है। इसी भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन हुआ और आखिरकार वह सरकारी शिक्षक बनने में सफल रहे।

यह बदलाव उनके लिए निर्णायक साबित हुआ और वर्षों से लंबित उनका सपना पूरा हो गया।

पांच बच्चों के पिता हैं विजय कुमार

विजय कुमार शर्मा अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए इस मुकाम तक पहुंचे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनके पांच बच्चे हैं। उनके दो बेटे उत्तर प्रदेश पुलिस में सेवा कर रहे हैं। वहीं बेटी ममता ने भी शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है और फिलहाल प्रतीक्षा सूची में हैं।

इस तरह परिवार में अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा करने वाले सदस्य हैं और विजय कुमार की शिक्षक के रूप में नियुक्ति ने परिवार के लिए एक और उपलब्धि जोड़ दी है।

युवाओं के लिए क्या संदेश देती है यह कहानी?

विजय कुमार शर्मा की कहानी को केवल सरकारी नौकरी मिलने की कहानी के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसमें लंबे समय तक लक्ष्य के साथ जुड़े रहने का पहलू भी सामने आता है।

उन्होंने 1999 में प्रयास शुरू किया। बीच में कई बार परीक्षा पास की, कई बार इंटरव्यू दिए, लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ। इसके बावजूद उन्होंने अध्यापन नहीं छोड़ा और अपनी तैयारी भी जारी रखी।

करीब 27 साल बाद उन्हें नियुक्ति पत्र मिला। उनकी बेटी ने भी उसी भर्ती प्रक्रिया में सफलता हासिल की। अब पिता शिक्षक के रूप में सेवा शुरू करने जा रहे हैं और बेटी नियुक्ति का इंतजार कर रही है।

विजय कुमार शर्मा की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि किसी लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। कई बार लगातार प्रयासों के बाद भी परिणाम नहीं मिलता, लेकिन हर व्यक्ति की परिस्थिति, परीक्षा और अवसर अलग होते हैं। शर्मा के मामले में लंबे समय तक की गई तैयारी आखिरकार चयन में बदल गई।

59 वर्ष की उम्र में मिला यह नियुक्ति पत्र उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि वर्ष 1999 में देखे गए एक सपने के पूरा होने का प्रमाण है। अब वह शामली के ऐलम इंटर कॉलेज में संस्कृत शिक्षक के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी शुरू करेंगे।

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