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हार्ट अटैक आने से पहले शरीर देता है ये संकेत! लोग गैस समझकर करते हैं नजरअंदाज, फिर अचानक बिगड़ जाती है हालत



टीवी सीरियल और फिल्मों में हार्ट अटैक का दृश्य अक्सर बेहद नाटकीय तरीके से दिखाया जाता है। अचानक किसी व्यक्ति के सीने में तेज दर्द उठता है, वह दिल पर हाथ रखता है और जमीन पर गिर जाता है। लेकिन वास्तविक जिंदगी में हार्ट अटैक हमेशा इसी तरह दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। कई बार इसके लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और इतने सामान्य लग सकते हैं कि व्यक्ति उन्हें गैस, एसिडिटी, थकान या मांसपेशियों में दर्द समझकर नजरअंदाज कर देता है।

हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह अचानक कम या बंद हो सकता है। रक्त के साथ हृदय को ऑक्सीजन भी मिलती है और लंबे समय तक रक्त प्रवाह बाधित रहने पर हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए संभावित हार्ट अटैक के लक्षणों को पहचानना और समय पर चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है।

हार्ट अटैक के समय शरीर के अंदर क्या होता है?

हमारा हृदय लगातार काम करता है और उसे भी ऑक्सीजन की जरूरत होती है। हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में समय के साथ फैटी प्लाक जमा हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में इस प्लाक के टूटने के बाद वहां खून का थक्का बन सकता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है।

जब हृदय की मांसपेशी को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो उसे नुकसान पहुंचना शुरू हो सकता है। यही कारण है कि हार्ट अटैक के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।

जितनी जल्दी मरीज को उचित चिकित्सा सहायता मिलती है, उतनी जल्दी डॉक्टर रक्त प्रवाह बहाल करने और हृदय को होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर सकते हैं।

सीने में दर्द हमेशा चुभने वाला नहीं होता

हार्ट अटैक को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि सीने में हमेशा बहुत तेज और चुभने वाला दर्द होगा। वास्तव में ऐसा जरूरी नहीं है।

कई लोगों को सीने में दबाव, जकड़न, भारीपन, कसाव या असहजता महसूस हो सकती है। यह परेशानी सीने के बीच या बाईं तरफ महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में यह कुछ मिनट तक रहकर कम हो सकती है और फिर दोबारा शुरू हो सकती है।

यही वजह है कि कुछ लोग इसे गैस या एसिडिटी समझ लेते हैं। खासकर अगर दर्द बहुत ज्यादा तेज न हो तो व्यक्ति डॉक्टर के पास जाने के बजाय घरेलू उपाय करने लगता है।

लेकिन अगर सीने में नया, असामान्य या बार-बार होने वाला दबाव या असहजता महसूस हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सिर्फ बाएं हाथ में दर्द होना जरूरी नहीं

हार्ट अटैक के लक्षणों को लेकर एक और आम धारणा है कि दर्द केवल बाएं हाथ में होता है। ऐसा जरूरी नहीं है।

संभावित हार्ट अटैक में परेशानी एक या दोनों हाथों, कंधों, पीठ, गर्दन या जबड़े तक महसूस हो सकती है। कुछ लोगों को पेट के ऊपरी हिस्से में भी असहजता हो सकती है।

इसलिए केवल बाएं हाथ में दर्द का इंतजार करना सही नहीं है। यदि सीने की परेशानी के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में अचानक दर्द या असहजता महसूस हो रही है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

सांस फूलना भी हो सकता है संकेत

कई बार हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द प्रमुख लक्षण नहीं होता। व्यक्ति को अचानक सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

सीढ़ियां चढ़ने या शारीरिक मेहनत के दौरान सांस फूलना आम हो सकता है, लेकिन यदि बिना किसी स्पष्ट वजह के अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगे, खासकर जब इसके साथ सीने में दबाव, कमजोरी, पसीना या चक्कर भी हो, तो मेडिकल मदद लेना जरूरी है।

अचानक पसीना, मतली और चक्कर को न करें नजरअंदाज

हार्ट अटैक के दौरान शरीर में कई दूसरे संकेत भी दिखाई दे सकते हैं।

इनमें अचानक ठंडा पसीना आना, मतली या उल्टी, चक्कर आना, कमजोरी, असामान्य थकान और बेचैनी शामिल हो सकते हैं।

कुछ लोगों को ऐसा महसूस हो सकता है कि उनकी तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई है, लेकिन वे यह समझ नहीं पाते कि इसका संबंध दिल से हो सकता है।

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण कई बार सीने के दर्द के बजाय सांस फूलना, असामान्य थकान, मतली, पीठ या जबड़े की परेशानी जैसे रूपों में सामने आ सकते हैं। हालांकि पुरुषों और महिलाओं दोनों में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं।

हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता

यह भी समझना जरूरी है कि सीने में दर्द होने का मतलब हमेशा हार्ट अटैक नहीं होता।

सीने में दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एसिडिटी, गैस, मांसपेशियों में खिंचाव, एंग्जाइटी, फेफड़ों से जुड़ी समस्या और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं।

समस्या यह है कि केवल घर पर लक्षण देखकर इनके बीच सही अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

इसलिए यदि दर्द नया है, असामान्य है या उसके साथ सांस फूलना, पसीना, चक्कर या शरीर के दूसरे हिस्सों में दर्द जैसे लक्षण मौजूद हैं, तो खुद बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है।

अस्पताल में डॉक्टर जरूरत के अनुसार ECG और ब्लड टेस्ट समेत अन्य जांचों की मदद से स्थिति का पता लगा सकते हैं।

ऐसे लक्षण दिखें तो सबसे पहले क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक के संभावित लक्षण दिखाई देते हैं तो सबसे पहला कदम इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेना होना चाहिए।

मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने से बचना चाहिए। एम्बुलेंस बुलाना बेहतर होता है, क्योंकि रास्ते में मरीज की हालत बिगड़ने पर प्रशिक्षित मेडिकल टीम आवश्यक सहायता दे सकती है।

मरीज को आरामदायक स्थिति में रखें और उसे अनावश्यक रूप से चलने-फिरने या शारीरिक मेहनत करने से बचाएं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार करके समय बर्बाद न करें।

एस्पिरिन को लेकर भी बरतें सावधानी

हार्ट अटैक के संदिग्ध मामलों में अक्सर एस्पिरिन की चर्चा होती है। लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए अपने-आप लेने वाली दवा नहीं समझना चाहिए।

यदि व्यक्ति को एस्पिरिन से एलर्जी है, ब्लीडिंग का खतरा है या डॉक्टर ने उसे एस्पिरिन लेने से मना किया है, तो इसे नहीं लेना चाहिए। इमरजेंसी मेडिकल सहायता को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

एस्पिरिन किसी संभावित हार्ट अटैक की स्थिति में चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। अस्पताल में मिलने वाला इलाज ही मुख्य उपचार है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक नहीं

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों अलग स्थितियां हैं।

हार्ट अटैक मुख्य रूप से हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनी में रुकावट से जुड़ा होता है। दूसरी ओर, कार्डियक अरेस्ट में हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी हो जाती है और दिल प्रभावी तरीके से रक्त पंप करना बंद कर देता है।

कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है या केवल हांफता हुआ दिखाई दे सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी सहायता बुलाने के साथ CPR की जरूरत पड़ सकती है।

हार्ट अटैक कभी-कभी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है, लेकिन दोनों एक जैसी स्थितियां नहीं हैं।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

हार्ट अटैक के जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि करना, पर्याप्त नींद लेना और संतुलित आहार अपनाना दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

खाने में सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को पर्याप्त मात्रा में शामिल करना बेहतर विकल्प है। वहीं बहुत ज्यादा नमक, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और अस्वास्थ्यकर वसा वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कम करना चाहिए।

इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसका नियंत्रण करना महत्वपूर्ण है।

इन संकेतों को देखकर इंतजार न करें

हार्ट अटैक हमेशा फिल्मों की तरह अचानक गिरने से शुरू नहीं होता। कभी-कभी इसके संकेत बेहद सामान्य दिखाई दे सकते हैं। सीने में दबाव या भारीपन, अचानक सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर, असामान्य कमजोरी या हाथ, पीठ, गर्दन और जबड़े में परेशानी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन संभावित हार्ट अटैक में घर पर बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय तुरंत मेडिकल सहायता लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

ध्यान रखें—दिल के दौरे में हर मिनट महत्वपूर्ण हो सकता है। लक्षण हल्के हों या तेज, यदि वे नए और असामान्य हैं तो देरी करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।

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