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8th Pay Commission: शिक्षकों को TET से छूट और सरकारी कर्मचारियों के OPS पर बड़ी खुशखबरी



जम्मू-कश्मीर के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़ी दो अहम खबरें सामने आई हैं। एक तरफ सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना यानी Old Pension Scheme (OPS) में जाने का विकल्प देने का फैसला किया है, जिनकी नियुक्ति ऐसे पदों के खिलाफ हुई थी जिन्हें 24 दिसंबर 2009 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित किया गया था। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को Teacher Eligibility Test यानी TET से छूट देने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किया है।

पेंशन से जुड़ा फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो भर्ती प्रक्रिया में तो नई पेंशन व्यवस्था लागू होने से पहले शामिल हो चुके थे, लेकिन नियुक्ति में देरी के कारण उन्हें NPS के दायरे में रखा गया। अब ऐसे पात्र कर्मचारियों को एक बार OPS चुनने का अवसर दिया गया है।

वहीं शिक्षकों के मामले में विधानसभा का प्रस्ताव केंद्र सरकार से कानूनी बदलाव की मांग करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी संबंधित शिक्षकों को तत्काल TET से छूट मिल गई है। इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया अभी बाकी है।

24 दिसंबर 2009 की तारीख क्यों बनी महत्वपूर्ण?

जम्मू-कश्मीर में पेंशन व्यवस्था को लेकर 24 दिसंबर 2009 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। इसी अवधि में नई पेंशन व्यवस्था से संबंधित नियम लागू किए गए थे और 1 जनवरी 2010 से नई पेंशन व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को कवर किया जाने लगा।

उस समय कई सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रियाएं पहले से चल रही थीं। अनेक पदों के विज्ञापन 2009 या उससे पहले जारी किए जा चुके थे। उम्मीदवारों ने आवेदन किया, परीक्षाएं दीं और चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण अंतिम नियुक्तियां बाद में हुईं।

इसका सीधा असर पेंशन व्यवस्था पर पड़ा।

कुछ कर्मचारियों का कहना था कि जब उन्होंने भर्ती के लिए आवेदन किया था और पद का विज्ञापन जारी हुआ था, उस समय पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू थी। लेकिन नियुक्ति 2010 के बाद होने के कारण उन्हें NPS में शामिल कर दिया गया।

इसी वजह से लंबे समय से यह मांग उठती रही कि ऐसे कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए।

किन कर्मचारियों को मिलेगा OPS चुनने का मौका?

सरकार के ताजा निर्णय के तहत उन कर्मचारियों को OPS में जाने का अवसर दिया गया है जिनकी नियुक्ति ऐसे पदों के खिलाफ हुई थी जिन्हें 24 दिसंबर 2009 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित किया गया था।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि जम्मू-कश्मीर में NPS के तहत आने वाला प्रत्येक कर्मचारी OPS में जा सकता है।

कर्मचारी को निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। संबंधित पद का विज्ञापन या अधिसूचना कब जारी हुई थी, नियुक्ति किस भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई और कर्मचारी किस तारीख को सेवा में शामिल हुआ, इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाएगा।

इसलिए कर्मचारियों के लिए अपने भर्ती विज्ञापन, चयन संबंधी दस्तावेज और नियुक्ति आदेश को ध्यान से देखना महत्वपूर्ण होगा।

तीन महीने में लेना होगा फैसला

OPS का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों के लिए समयसीमा भी निर्धारित की गई है।

पात्र कर्मचारियों को सरकार के आदेश के अनुसार तीन महीने के भीतर अपना विकल्प देना होगा। निर्धारित समयसीमा खत्म होने के बाद विकल्प देने का अवसर उपलब्ध नहीं रहेगा।

जो कर्मचारी तय समय में OPS का विकल्प नहीं चुनेंगे, वे NPS के अंतर्गत ही बने रहेंगे।

वहीं, जो कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत OPS चुनेंगे, उनके लिए यह विकल्प अंतिम माना जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपना निर्णय लेने से पहले संबंधित विभाग द्वारा जारी सभी निर्देशों और पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ना होगा।

भर्ती में देरी बनी थी बड़ा मुद्दा

प्री-2009 भर्ती से जुड़े मामलों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भर्ती प्रक्रिया और नियुक्ति की तारीख के बीच का अंतर रहा है।

कई मामलों में पदों का विज्ञापन पुरानी पेंशन व्यवस्था के दौरान हुआ था, लेकिन चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होने के कारण उम्मीदवारों को नियुक्ति बाद में मिली।

ऐसे मामलों में कर्मचारियों ने यह सवाल उठाया कि यदि नियुक्ति में देरी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण हुई है तो उसका असर उनकी पेंशन व्यवस्था पर क्यों पड़े।

जम्मू-कश्मीर में ऐसे कई मामले केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और अदालतों तक भी पहुंचे हैं। कुछ मामलों में कर्मचारियों ने अदालत के सामने यह तर्क रखा कि उनकी भर्ती प्रक्रिया नई पेंशन व्यवस्था लागू होने से पहले शुरू हो चुकी थी।

अब सरकार के फैसले से पात्र कर्मचारियों को इसी तरह की परिस्थितियों में OPS चुनने का अवसर मिला है।

शिक्षकों के TET पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा का बड़ा प्रस्ताव

पेंशन के अलावा शिक्षकों के लिए भी जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।

24 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग की।

इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से संबंधित कानून में आवश्यक बदलाव करने का आग्रह किया गया है।

इसका उद्देश्य उन शिक्षकों को राहत दिलाना है जो लंबे समय से सेवा में हैं और जिनकी नियुक्ति मौजूदा TET व्यवस्था से पहले हुई थी।

इस मुद्दे का संबंध खासतौर पर पुराने नियुक्त शिक्षकों और Rehbar-e-Taleem शिक्षकों से भी जोड़ा जा रहा है।

Rehbar-e-Taleem शिक्षकों के लिए क्यों अहम है मामला?

जम्मू-कश्मीर में Rehbar-e-Taleem यानी ReT शिक्षकों का मुद्दा काफी समय से चर्चा में रहा है।

TET को लेकर न्यायिक फैसलों के बाद इन शिक्षकों के लिए अपनी सेवा जारी रखने और पात्रता संबंधी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।

इसी वजह से विधानसभा में पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने की मांग उठाई गई।

हालांकि विधानसभा का प्रस्ताव अपने आप कानून में बदलाव नहीं करता। प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से संबंधित कानून में संशोधन करने का आग्रह किया गया है।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर के सभी पुराने शिक्षकों को TET से तत्काल छूट मिल गई है।

अभी आगे केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी थी TET की चर्चा

TET को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद देशभर में पुराने नियुक्त शिक्षकों की स्थिति को लेकर चर्चा तेज हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने TET को शिक्षा के अधिकार कानून के तहत शिक्षकों की आवश्यक योग्यता से जोड़ा है। बाद में अदालत ने पात्र इन-सर्विस शिक्षकों को TET की योग्यता हासिल करने के लिए समयसीमा भी निर्धारित की।

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख को बरकरार रखते हुए संबंधित शिक्षकों के लिए TET हासिल करने की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी थी।

अदालत के फैसले के अनुसार कुछ ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में 1 सितंबर 2025 को पांच साल से कम समय बचा था, उन्हें कुछ परिस्थितियों में TET के बिना सेवानिवृत्ति तक सेवा जारी रखने की अनुमति दी गई थी। हालांकि ऐसे शिक्षकों के लिए पदोन्नति से जुड़े नियम अलग रह सकते हैं।

इसी कानूनी पृष्ठभूमि में जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने पुराने नियुक्त शिक्षकों के लिए विशेष छूट की मांग उठाई है।

विधानसभा का प्रस्ताव और कानूनी बदलाव अलग-अलग हैं

शिक्षकों के मामले में एक बात समझना जरूरी है कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना और कानून में बदलाव होना दो अलग प्रक्रियाएं हैं।

विधानसभा ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि पुराने नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने के लिए आवश्यक कानूनी बदलाव किए जाएं।

जब तक संबंधित कानून, नियम या आधिकारिक आदेश में बदलाव नहीं होता, तब तक मौजूदा कानूनी व्यवस्था लागू रहती है।

इसलिए शिक्षकों को केवल विधानसभा के प्रस्ताव के आधार पर TET से छूट मिली हुई मानकर कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। आगे जारी होने वाले आधिकारिक आदेश महत्वपूर्ण होंगे।

कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए क्या है पूरा अपडेट?

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों के लिए OPS का मामला और शिक्षकों का TET मामला अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों ही बड़ी संख्या में लोगों की सेवा शर्तों से जुड़े हुए हैं।

सरकारी कर्मचारियों के मामले में 24 दिसंबर 2009 से पहले विज्ञापित या अधिसूचित पदों के खिलाफ बाद में नियुक्त हुए पात्र कर्मचारियों को NPS से OPS में जाने का एक मौका दिया गया है। इसके लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर विकल्प देना जरूरी होगा।

शिक्षकों के मामले में जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 31 अक्टूबर 2019 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने के लिए केंद्र सरकार से कानूनी बदलाव की मांग की है। फिलहाल यह विधानसभा के प्रस्ताव के स्तर पर है और आगे की कार्रवाई केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थाओं पर निर्भर करेगी।

इस पूरे घटनाक्रम में 24 दिसंबर 2009 और 31 अक्टूबर 2019 दो महत्वपूर्ण तारीखें बनकर सामने आई हैं। एक तारीख सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था से जुड़ी है, जबकि दूसरी तारीख शिक्षकों की TET पात्रता से जुड़े विधानसभा प्रस्ताव के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

आने वाले समय में संबंधित विभागों की ओर से जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देश यह स्पष्ट करेंगे कि कितने कर्मचारी OPS के लिए पात्र होंगे और शिक्षकों को TET के मामले में आगे क्या राहत मिलती है।

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