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टॉयलेट में 2 मिनट की जगह लग रहे 10 मिनट? पेशाब की कमजोर धार के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह!



पेशाब से जुड़ी छोटी-सी परेशानी को अक्सर लोग उम्र बढ़ने, कम पानी पीने या सामान्य कमजोरी से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। कभी टॉयलेट जाने का समय बदल जाता है, कभी पेशाब का रंग ज्यादा पीला दिखाई देता है और कभी पेशाब की धार पहले की तुलना में कमजोर लगने लगती है। इनमें से कुछ बदलाव अस्थायी हो सकते हैं, लेकिन अगर यूरिन का फ्लो लगातार कमजोर हो रहा है या पेशाब करने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है, तो इसकी वजह जानना जरूरी हो जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक कमजोर यूरिन फ्लो के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। पुरुषों में बढ़ती उम्र के साथ प्रोस्टेट का आकार बढ़ना इसकी एक आम वजह हो सकती है, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है। पेशाब की नली का संकुचित होना, जिसे यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर कहा जाता है, संक्रमण, ब्लैडर की मांसपेशियों से जुड़ी समस्या या कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियां भी इसके पीछे हो सकती हैं।

इसलिए पेशाब की धार में लगातार बदलाव को सिर्फ उम्र का असर मानकर छोड़ देना सही नहीं है।

कमजोर यूरिन फ्लो को समझना क्यों जरूरी है?

आमतौर पर जब व्यक्ति पेशाब करता है तो मूत्राशय की मांसपेशियां पेशाब को बाहर निकालती हैं और यूरिन पेशाब की नली यानी यूरेथ्रा के रास्ते शरीर से बाहर आता है। इस प्रक्रिया में कहीं रुकावट या कमजोरी आने पर पेशाब की धार प्रभावित हो सकती है।

किसी व्यक्ति को पेशाब शुरू करने में देर लग सकती है। किसी में धार पतली या कमजोर हो सकती है। कुछ लोगों को बीच-बीच में पेशाब रुकने जैसा महसूस हो सकता है, जबकि कुछ लोगों को पेशाब पूरी तरह निकलने के बाद भी ऐसा लग सकता है कि ब्लैडर खाली नहीं हुआ।

अगर यह बदलाव लगातार दिखाई दे रहा है, तो इसके पीछे के कारण की जांच कराना महत्वपूर्ण है।

हर बार प्रोस्टेट नहीं होता कारण

पुरुषों में कमजोर पेशाब की धार का जिक्र होते ही अक्सर प्रोस्टेट की समस्या का ख्याल आता है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का गैर-कैंसरकारी रूप से बढ़ना यानी बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) वास्तव में पेशाब से जुड़ी कई समस्याएं पैदा कर सकता है।

प्रोस्टेट मूत्रमार्ग के आसपास स्थित होता है। जब इसका आकार बढ़ता है तो कुछ मामलों में मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ सकता है। इसके कारण पेशाब शुरू करने में परेशानी, कमजोर धार, बार-बार पेशाब लगना या रात में कई बार टॉयलेट जाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कमजोर धार का मतलब हमेशा प्रोस्टेट बढ़ना ही है।

यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर भी हो सकती है वजह

खासकर कम उम्र या अधेड़ उम्र के पुरुषों में पेशाब की नली के संकुचित होने की समस्या भी कमजोर यूरिन फ्लो का कारण बन सकती है। इसे यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर कहा जाता है।

इस स्थिति में पेशाब की नली में स्कार टिश्यू बन जाने के कारण उसका रास्ता संकरा हो सकता है। परिणामस्वरूप पेशाब का प्रवाह सामान्य से कमजोर हो सकता है और व्यक्ति को पेशाब करने में ज्यादा समय लग सकता है।

इस समस्या के कई संभावित कारण हो सकते हैं, जिनमें पिछली चोट, कुछ मेडिकल प्रक्रियाएं या संक्रमण आदि शामिल हो सकते हैं। महिलाओं में भी यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर हो सकता है, हालांकि इसकी वजह और लक्षण व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकते हैं।

बार-बार टॉयलेट जाना भी है ध्यान देने वाला संकेत

अगर आपको दिन में सामान्य से कहीं ज्यादा बार पेशाब लगने लगी है या रात में बार-बार उठकर टॉयलेट जाना पड़ रहा है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

खासकर जब बार-बार पेशाब आने के साथ कमजोर धार, पेशाब शुरू करने में परेशानी या अचानक तेज पेशाब लगने जैसी समस्याएं भी मौजूद हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

हालांकि बार-बार पेशाब आने के पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं। ज्यादा तरल पदार्थ पीना, कैफीन का अधिक सेवन, कुछ दवाएं, संक्रमण और कई अन्य स्थितियां भी इसका कारण बन सकती हैं। इसलिए केवल इस एक लक्षण से किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पेशाब में जलन या दर्द हो तो सावधान

पेशाब करते समय जलन या दर्द होना भी सामान्य मानकर लंबे समय तक टालना ठीक नहीं है। यह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन समेत कई समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।

अगर जलन के साथ बार-बार पेशाब आना, पेशाब की तेज इच्छा, निचले पेट में असहजता या बदला हुआ यूरिन पैटर्न दिखाई दे रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

कुछ मामलों में संक्रमण के साथ बुखार भी हो सकता है। ऐसे में विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।

ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करें

कमजोर यूरिन फ्लो के साथ नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी नजर आए तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए—

  • पेशाब में खून दिखाई देना

  • पेशाब करते समय दर्द या जलन होना

  • बुखार के साथ पेशाब की समस्या

  • पेशाब शुरू करने के लिए बार-बार जोर लगाना

  • रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना

  • बार-बार यूरिनरी इंफेक्शन होना

  • पेशाब की धार लगातार कमजोर होना

  • पेशाब करने में असामान्य रूप से ज्यादा समय लगना

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस होना

  • पेशाब बिल्कुल न आना

इनमें से खासतौर पर पेशाब बिल्कुल बंद हो जाना ऐसी स्थिति है जिसमें तुरंत चिकित्सकीय मदद की जरूरत हो सकती है।

पेशाब शुरू करने में देर लगे तो क्या करें?

कुछ लोगों को टॉयलेट में जाने के बाद पेशाब शुरू होने में काफी समय लग जाता है। कई बार उन्हें पेशाब शुरू करने के लिए जोर लगाना पड़ता है। अगर यह कभी-कभार होता है तो इसके कई अस्थायी कारण हो सकते हैं।

लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगी है, लगातार बनी हुई है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर जरूरी जांच की सलाह दे सकते हैं। स्थिति के अनुसार यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट, प्रोस्टेट से जुड़ी जांच या यूरिनरी सिस्टम की अन्य जांच की जरूरत पड़ सकती है।

पानी कम पीने से हर समस्या नहीं समझें

पेशाब का रंग गहरा पीला होना अक्सर शरीर में पानी की कमी से जुड़ा हो सकता है। लेकिन हर यूरिन समस्या को पानी कम पीने का नतीजा मान लेना सही नहीं है।

अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद पेशाब की धार कमजोर बनी हुई है या पेशाब शुरू करने में परेशानी लगातार हो रही है, तो किसी अन्य कारण की जांच जरूरी हो सकती है।

इसी तरह खुद से दवा लेना भी उचित नहीं है। खासकर एंटीबायोटिक या प्रोस्टेट की दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के शुरू नहीं करनी चाहिए।

कब तुरंत मदद लेना जरूरी है?

अगर व्यक्ति को पेशाब करने की बहुत तेज इच्छा हो लेकिन पेशाब बिल्कुल न निकल रहा हो, पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द या भारीपन हो रहा हो, या पेशाब में खून के साथ गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हों, तो इसे आपात स्थिति की तरह लेना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

पेशाब की धार में बदलाव हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन लगातार कमजोर यूरिन फ्लो को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। इसके पीछे प्रोस्टेट का बढ़ना, यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर, संक्रमण, ब्लैडर की समस्या या अन्य कारण हो सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी एक लक्षण को देखकर खुद से बीमारी तय न करें। अगर समस्या लगातार बनी हुई है या इसके साथ दर्द, जलन, खून, बुखार, बार-बार पेशाब या पेशाब रुकने जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर या यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना बेहतर है। समय पर कारण पता चलने से सही उपचार की दिशा तय करना आसान हो सकता है।

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