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मुंह में सब ठीक दिखता है, फिर अचानक बिगड़ती है हालत! तेजी से बढ़ रहा इस जानलेवा बीमारी का खतरा



रोहतक: ओरल कैंसर यानी मुंह और गले से जुड़े कैंसर को लेकर देशभर में चिंता बढ़ रही है। खासतौर पर तंबाकू, गुटका, बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन इस बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। चिंता की बात यह है कि मुंह में होने वाले कई असामान्य बदलावों को लोग लंबे समय तक मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंचती है, तब इलाज मुश्किल हो सकता है।

रोहतक स्थित पीजीआईएमएस के डेंटल विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में ओरल कैंसर को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान लोगों को मुंह के कैंसर के संभावित शुरुआती संकेतों के बारे में जानकारी देने के साथ ही जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि मुंह में लंबे समय तक रहने वाला कोई भी असामान्य बदलाव नजर आए तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासकर तंबाकू और गुटका खाने वाले लोगों को नियमित रूप से अपने मुंह की जांच करवानी चाहिए।

हर साल सामने आते हैं हजारों मामले

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल ओरल कैंसर के करीब 60 से 70 हजार नए मामले सामने आने की बात कही जाती है। इनमें बड़ी संख्या में मरीजों की मौत भी होती है। यह स्थिति बताती है कि बीमारी की पहचान और इलाज में देरी कितनी गंभीर साबित हो सकती है।

ओरल कैंसर का खतरा केवल धूम्रपान करने वाले लोगों तक सीमित नहीं है। बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पाद, जैसे गुटका और अन्य चबाने वाले तंबाकू भी मुंह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक बीमारी की शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। कई बार व्यक्ति को दर्द भी नहीं होता और वह मुंह में दिखाई दे रहे बदलाव को नजरअंदाज करता रहता है। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकती है।

हरियाणा में हुक्का और तंबाकू को लेकर चिंता

हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में हुक्का लंबे समय से सामाजिक मेल-जोल और भाईचारे की संस्कृति से जुड़ा रहा है। गांवों में चौपालों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को हुक्का पीते देखा जाता है।

लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए यह परंपरा अब चिंता का विषय बनती जा रही है। तंबाकू के धुएं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। इसके अलावा गुटका और तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल भी ओरल कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।

सरकार की ओर से कई तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध और नियंत्रण के बावजूद अलग-अलग जगहों पर इनके इस्तेमाल और बिक्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि केवल प्रतिबंध से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि लोगों को तंबाकू के गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में जागरूक करना भी जरूरी है।

गुटका खाने वालों को खास सावधानी की जरूरत

पीजीआईएमएस के डेंटल विभाग के प्रमुख डॉ. मंजूनाथ के मुताबिक तंबाकू और गुटका जैसे उत्पादों का सेवन मुंह के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। डॉक्टर लोगों से गुटका और तंबाकू छोड़ने की अपील कर रहे हैं।

उनका कहना है कि ओरल कैंसर की पहचान अगर शुरुआती चरण में हो जाए तो उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध होते हैं। वहीं बीमारी के आगे बढ़ने पर स्थिति जटिल हो सकती है और इलाज भी अधिक कठिन हो जाता है।

इसी वजह से तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को मुंह में होने वाले छोटे से छोटे असामान्य बदलाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मुंह में ये बदलाव दिखें तो तुरंत कराएं जांच

डॉक्टरों के मुताबिक ओरल कैंसर अचानक एक दिन में विकसित नहीं होता। कई मामलों में इससे पहले मुंह में कुछ असामान्य बदलाव दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, इन लक्षणों का मतलब हर बार कैंसर होना नहीं है, क्योंकि इनके पीछे संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

फिर भी अगर कोई बदलाव लंबे समय तक बना रहता है तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

ध्यान देने वाले प्रमुख संकेतों में शामिल हैं—

  • मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव

  • लाल या सफेद धब्बा या पैच

  • मुंह के अंदर कोई असामान्य गांठ या बदलाव

  • मुंह खोलने में परेशानी

  • चबाने या निगलने में दिक्कत

  • लगातार दर्द या असहजता

  • मुंह में किसी हिस्से का सामान्य रूप से अलग दिखाई देना

  • बार-बार होने वाला ऐसा घाव जो ठीक नहीं हो रहा

इनमें से कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहे तो डेंटिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ या संबंधित डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर है।

दांतों की जांच के दौरान महिला में मिले लक्षण

रोहतक पीजीआईएमएस में दांतों की जांच के लिए पहुंची एक महिला में भी ओरल कैंसर से जुड़े लक्षण पाए जाने का मामला सामने आया है। बताया गया कि महिला पहले गुटका खाया करती थी। जांच के दौरान मुंह में दिखाई दे रहे असामान्य बदलावों को गंभीरता से लिया गया और उसके उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई।

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कई बार व्यक्ति किसी दूसरी समस्या की जांच के लिए अस्पताल पहुंचता है और उसी दौरान मुंह में मौजूद किसी गंभीर बीमारी का पता चल जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि नियमित दांतों और मुंह की जांच केवल दांतों की समस्या पहचानने तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों को मुंह के अंदर दिखाई देने वाले असामान्य बदलावों का भी पता चल सकता है।

सिर्फ धूम्रपान करने वालों को नहीं होता ओरल कैंसर

पीजीआईएमएस के डेंटल विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरनीत सिंह के मुताबिक ओरल कैंसर का जोखिम केवल धूम्रपान करने वालों में नहीं होता। बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करने वालों में भी खतरा बढ़ सकता है।

यानी यह सोचना कि गुटका या तंबाकू चबाने से धुआं शरीर के अंदर नहीं जाता, इसलिए नुकसान कम है—सही नहीं है। तंबाकू के अलग-अलग रूप स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

विशेषज्ञ लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ नियमित जांच पर भी जोर दे रहे हैं।

तंबाकू छुड़ाने के लिए भी बनाया गया सेंटर

पीजीआईएमएस के डेंटल विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान के साथ तंबाकू की लत छोड़ने में मदद के लिए सेंटर भी बनाया गया है। इसका उद्देश्य उन लोगों को सहायता उपलब्ध कराना है जो लंबे समय से बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू उत्पादों के सेवन के आदी हैं और इसे छोड़ना चाहते हैं।

डॉक्टरों के अनुसार तंबाकू छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन सही सलाह और चिकित्सकीय सहायता से व्यक्ति इस आदत से बाहर निकल सकता है।

हरियाणा में बढ़ते कैंसर के आंकड़े भी चिंता का विषय

हरियाणा में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में राज्य में 33,395 नए कैंसर मरीज सामने आए, जबकि 18,387 मौतें दर्ज की गईं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में रखी गई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच हरियाणा में कैंसर के नए मामलों में करीब 11.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह राष्ट्रीय औसत वृद्धि से अधिक बताई गई है। इसी अवधि में कैंसर से होने वाली मौतों में भी करीब 11.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वर्ष 2025 में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से होने वाली मौतों, दोनों के लिहाज से हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में 17वें स्थान पर रहा।

हालांकि, इन आंकड़ों में सभी प्रकार के कैंसर शामिल हैं और इन्हें केवल ओरल कैंसर के आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जागरूकता और समय पर जांच सबसे बड़ा हथियार

ओरल कैंसर के खिलाफ सबसे जरूरी कदम तंबाकू का सेवन बंद करना और मुंह में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करना है। अगर कोई घाव, लाल या सफेद निशान या अन्य बदलाव लंबे समय तक बना हुआ है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान होने से उपचार के विकल्प बेहतर हो सकते हैं। इसलिए लोगों को बीमारी के गंभीर होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।

गुटका, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाना ओरल कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में बेहद अहम कदम है। वहीं मुंह में दिखाई देने वाले किसी भी लगातार बने रहने वाले असामान्य बदलाव की समय पर चिकित्सकीय जांच बीमारी की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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