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महीनों का ब्रेक लेकर अचानक किया हार्ड वर्कआउट, फिर सामने आई जानलेवा बीमारी की सच्चाई



आजकल फिटनेस को लेकर युवाओं में काफी जागरूकता बढ़ी है। जिम, वर्कआउट और बॉडी फिटनेस को लेकर लोग काफी मेहनत करते हैं। लेकिन फिट रहने की कोशिश में अगर शरीर की क्षमता से कहीं ज्यादा मेहनत अचानक शुरू कर दी जाए, तो यही एक्सरसाइज गंभीर परेशानी का कारण भी बन सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक वर्कआउट से दूर रहने के बाद अचानक बहुत ज्यादा और हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। कुछ मामलों में यह स्थिति मेडिकल इमरजेंसी तक बन सकती है।

ऐसा ही एक मामला एक 20 वर्षीय युवक से जुड़ा सामने आया, जिसे अनियमित दिल की धड़कन यानी एरिद्मिया और बेहोशी जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। बताया गया कि युवक कई महीनों से जिम नहीं गया था। इसके बाद एक फेस्टिवल में हिस्सा लेने और अपनी फिटनेस बेहतर करने के उद्देश्य से उसने अचानक दोबारा कड़ी एक्सरसाइज शुरू कर दी। उसने करीब दो घंटे तक स्ट्रॉन्ग वर्कआउट किया। उसी शाम उसे अपने पेशाब के रंग में असामान्य बदलाव दिखाई दिया। पेशाब गहरे कोला जैसा नजर आ रहा था।

युवक ने शुरुआत में इस बदलाव को गंभीरता से नहीं लिया और सो गया। लेकिन कुछ समय बाद उसकी नींद अचानक खुली। उसे दिल बहुत तेजी से धड़कता हुआ महसूस हुआ और चक्कर आने लगे। स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकीय जांच की गई और मामला रैबडोमायोलिसिस से जुड़ा पाया गया।

रैबडोमायोलिसिस आखिर क्या है?

रैबडोमायोलिसिस ऐसी स्थिति है जिसमें मांसपेशियों के ऊतक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने लगते हैं और मांसपेशियों के अंदर मौजूद पदार्थ रक्तप्रवाह में पहुंच जाते हैं। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है और अत्यधिक शारीरिक मेहनत भी इसके संभावित कारणों में शामिल है।

जब मांसपेशियों की कोशिकाएं टूटती हैं तो उनमें मौजूद मायोग्लोबिन समेत अन्य पदार्थ रक्त में पहुंच सकते हैं। मायोग्लोबिन सामान्य रूप से मांसपेशियों की कोशिकाओं में पाया जाने वाला प्रोटीन है। इसकी बड़ी मात्रा रक्त में पहुंचने के बाद किडनी के जरिए बाहर निकलती है और पेशाब का रंग असामान्य रूप से गहरा हो सकता है।

इसी वजह से कड़ी एक्सरसाइज के बाद अगर पेशाब का रंग अचानक गहरा भूरा, लाल या कोला जैसा दिखाई दे, तो इसे केवल सामान्य वर्कआउट का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पेशाब का कोला जैसा रंग क्यों बन जाता है?

सामान्य वर्कआउट के बाद मांसपेशियों में दर्द और थकान होना आम बात हो सकती है। लेकिन पेशाब का अचानक बहुत गहरा हो जाना अलग तरह की चेतावनी हो सकती है।

रैबडोमायोलिसिस में मांसपेशियों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने पर मायोग्लोबिन रक्तप्रवाह में पहुंच सकता है। जब यह पेशाब में अधिक मात्रा में निकलता है, तो उसका रंग गहरा भूरा या कोला जैसा दिखाई दे सकता है।

हालांकि, गहरे रंग का पेशाब केवल रैबडोमायोलिसिस की वजह से ही हो, यह जरूरी नहीं है। डिहाइड्रेशन, कुछ दवाएं, खाद्य पदार्थ और अन्य मेडिकल स्थितियां भी पेशाब के रंग को प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन अगर यह बदलाव अत्यधिक एक्सरसाइज के बाद दिखाई दे और इसके साथ मांसपेशियों में तेज दर्द, कमजोरी या पेशाब कम आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

मांसपेशियों की समस्या दिल को कैसे प्रभावित कर सकती है?

रैबडोमायोलिसिस का खतरा सिर्फ मांसपेशियों तक सीमित नहीं रहता। गंभीर मामलों में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।

मांसपेशियों के टूटने से रक्त में पोटैशियम का स्तर बढ़ सकता है। सामान्य परिस्थितियों में किडनी शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम बाहर निकालने में मदद करती है। लेकिन अगर मांसपेशियों को बहुत अधिक नुकसान हुआ हो और साथ में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाए, तो रक्त में पोटैशियम खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।

बहुत ज्यादा पोटैशियम दिल की विद्युत गतिविधि को प्रभावित कर सकता है। इससे दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है और गंभीर स्थिति में जानलेवा हार्ट रिदम की समस्या भी पैदा हो सकती है।

यही कारण है कि रैबडोमायोलिसिस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसमें दिल से जुड़ा खतरा सीधे हार्ट अटैक के कारण नहीं, बल्कि गंभीर इलेक्ट्रोलाइट और मेटाबॉलिक असंतुलन के कारण भी पैदा हो सकता है।

रैबडोमायोलिसिस और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?

दोनों स्थितियों को एक समझना सही नहीं है।

हार्ट अटैक आमतौर पर तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनी में रुकावट पैदा हो जाती है। रक्त की आपूर्ति कम होने से हृदय की मांसपेशियों के एक हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और उसे नुकसान पहुंच सकता है।

वहीं रैबडोमायोलिसिस में समस्या की शुरुआत मुख्य रूप से शरीर की मांसपेशियों के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने से होती है। इसके बाद मांसपेशियों से निकलने वाले पदार्थ रक्त में पहुंचकर किडनी और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का असर दिल की विद्युत गतिविधि पर पड़ सकता है।

इसलिए अगर किसी व्यक्ति को रैबडोमायोलिसिस के दौरान दिल की धड़कन में गंभीर गड़बड़ी होती है, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि उसे हार्ट अटैक ही आया है।

लंबे ब्रेक के बाद अचानक हार्ड वर्कआउट क्यों खतरनाक हो सकता है?

एक्सरसाइज शरीर के लिए फायदेमंद है। नियमित और उचित तरीके से की गई शारीरिक गतिविधि हृदय, मांसपेशियों और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। परेशानी तब हो सकती है जब शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद अचानक बहुत अधिक मेहनत करने लगे।

अगर कोई व्यक्ति कई महीनों से जिम नहीं गया है और अचानक दो-दो घंटे तक हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट शुरू कर देता है, तो उसकी मांसपेशियों को उस स्तर की मेहनत के लिए अनुकूल होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता।

वर्कआउट की अवधि, वजन, तीव्रता या आवृत्ति में अचानक बहुत ज्यादा बढ़ोतरी मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव डाल सकती है। इसके अलावा गर्म वातावरण में एक्सरसाइज, शरीर में पानी की कमी और पर्याप्त आराम न मिलना भी जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

बहुत ज्यादा एक्सरसाइज के बाद शरीर में कुछ असामान्य संकेत दिखाई दें तो उन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। रैबडोमायोलिसिस में संभावित चेतावनी संकेतों में शामिल हैं:

  • मांसपेशियों में सामान्य से बहुत अधिक दर्द

  • मांसपेशियों में सूजन या अत्यधिक संवेदनशीलता

  • असामान्य कमजोरी

  • अत्यधिक थकान

  • पेशाब का गहरा भूरा या कोला जैसा रंग

  • पेशाब की मात्रा में कमी

  • चक्कर या कमजोरी महसूस होना

  • दिल की धड़कन असामान्य या बहुत तेज महसूस होना

इनमें से खासकर गहरे रंग का पेशाब और पेशाब कम आने जैसी समस्या को अत्यधिक एक्सरसाइज के बाद नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लंबे ब्रेक के बाद जिम कैसे शुरू करें?

अगर आपने लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं की है तो अचानक अपनी पुरानी क्षमता के स्तर पर पहुंचने की कोशिश न करें। शरीर को दोबारा मेहनत का आदी बनने के लिए समय दें।

शुरुआत में हल्की एक्सरसाइज करें और धीरे-धीरे उसकी अवधि बढ़ाएं। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार वर्कआउट की तीव्रता बढ़ाई जा सकती है। मांसपेशियों को पर्याप्त आराम देना भी जरूरी है।

अगर एक्सरसाइज के दौरान या उसके बाद असामान्य दर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, सांस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन में गंभीर बदलाव या गहरे रंग का पेशाब दिखाई दे तो वर्कआउट जारी रखने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

पानी और रिकवरी का भी रखें ध्यान

हार्ड वर्कआउट के दौरान शरीर से पसीने के रूप में पानी और इलेक्ट्रोलाइट निकल सकते हैं। इसलिए पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखना जरूरी है। खासकर गर्म और उमस वाले वातावरण में लंबे समय तक कठिन एक्सरसाइज करते समय शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

हालांकि, केवल ज्यादा पानी पीना हर समस्या का समाधान नहीं है। अगर रैबडोमायोलिसिस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो मेडिकल जांच जरूरी होती है। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार रक्त और पेशाब की जांच करके मांसपेशियों को हुए नुकसान, किडनी की स्थिति और इलेक्ट्रोलाइट स्तर की जांच कर सकते हैं।

फिटनेस के चक्कर में शरीर की चेतावनी न करें नजरअंदाज

फिट रहने के लिए एक्सरसाइज करना अच्छी आदत है, लेकिन फिटनेस हासिल करने की जल्दबाजी में शरीर पर अचानक जरूरत से ज्यादा दबाव डालना नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक जिम से दूर रहने के बाद अगर किसी कार्यक्रम, प्रतियोगिता या व्यक्तिगत लक्ष्य के लिए दोबारा ट्रेनिंग शुरू कर रहे हैं तो इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।

सबसे जरूरी बात यह है कि गहरे कोला जैसे पेशाब, अत्यधिक मांसपेशियों के दर्द, कमजोरी या पेशाब कम आने को सामान्य वर्कआउट का हिस्सा मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे संकेत गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं और समय पर चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

याद रखें, एक्सरसाइज का उद्देश्य शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाना है। इसलिए वर्कआउट की तीव्रता बढ़ाते समय शरीर की क्षमता, आराम, हाइड्रेशन और रिकवरी का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना नियमित व्यायाम करना।

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