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डायबिटीज में सेब खाएं या अंगूर? एक फल को लेकर एक्सपर्ट ने बताई ऐसी बात, जानकर चौंक जाएंगे



डायबिटीज के मरीजों के लिए खान-पान का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। खासकर जब बात फलों की आती है तो अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि कौन सा फल ब्लड शुगर को कम प्रभावित करता है। सेब और अंगूर दोनों ही आमतौर पर पसंद किए जाने वाले फल हैं, लेकिन डायबिटीज में इन दोनों को लेकर लोगों के बीच काफी भ्रम रहता है। कुछ लोग सेब को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि अंगूर अधिक मीठा होने के कारण डायबिटीज के मरीजों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

हालांकि, मामला इतना सीधा नहीं है। डायबिटीज में किसी फल को सिर्फ इसलिए पूरी तरह छोड़ देना जरूरी नहीं है क्योंकि उसमें प्राकृतिक शुगर मौजूद होती है। फलों में प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट के साथ फाइबर, विटामिन, मिनरल और कई पोषक तत्व भी होते हैं। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे जरूरी चीज है फल की मात्रा, उसे खाने का तरीका और पूरे दिन की डाइट का संतुलन।

सेब और अंगूर में कौन बेहतर?

अगर सवाल पूछा जाए कि डायबिटीज में सेब और अंगूर में से कौन सा फल बेहतर है, तो इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। दोनों फलों को उचित मात्रा में डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

सेब का एक फायदा यह है कि इसे सीमित मात्रा में खाना अपेक्षाकृत आसान होता है। इसमें फाइबर भी पाया जाता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। दूसरी तरफ अंगूर आकार में छोटे होते हैं और इन्हें खाते समय व्यक्ति कई बार जरूरत से ज्यादा मात्रा में खा सकता है।

यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए अंगूर खाते समय पोर्शन कंट्रोल पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो सकता है।

सेब में पाए जाते हैं कई पोषक तत्व

सेब को पौष्टिक फलों में शामिल किया जाता है। इसमें फाइबर के साथ कई विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। पूरा सेब खाने से शरीर को फल का गूदा और फाइबर दोनों मिलते हैं।

सेब को अच्छी तरह धोकर छिलके सहित खाना भी एक विकल्प हो सकता है, क्योंकि फल के छिलके में भी फाइबर और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि डायबिटीज का मरीज जितना चाहे उतना सेब खा सकता है। सेब में भी प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

अंगूर मीठे हैं, लेकिन क्या पूरी तरह बंद कर दें?

अंगूर का स्वाद मीठा होता है और इसी वजह से डायबिटीज के मरीज अक्सर इसे खाने से डरते हैं। लेकिन सिर्फ मीठा स्वाद होने का मतलब यह नहीं है कि अंगूर को पूरी तरह डाइट से बाहर कर दिया जाए।

अंगूर में भी पानी, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। समस्या मुख्य रूप से तब हो सकती है जब कोई व्यक्ति बिना मात्रा का ध्यान रखे बड़ी संख्या में अंगूर खा ले।

अंगूर छोटे होते हैं, इसलिए एक-एक करके खाते हुए कई लोगों को यह महसूस नहीं होता कि उन्होंने काफी मात्रा में फल खा लिया है। यही कारण है कि डायबिटीज में अंगूर खाते समय पहले से एक सीमित मात्रा तय करना बेहतर हो सकता है।

जूस की जगह पूरा फल खाना क्यों बेहतर?

डायबिटीज के मरीजों के लिए फल खाने का तरीका भी बहुत महत्वपूर्ण है। सेब या अंगूर का जूस पीने की बजाय पूरा फल खाना आमतौर पर बेहतर विकल्प माना जाता है।

जब फल का जूस बनाया जाता है तो एक गिलास जूस तैयार करने में कई फलों का इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति कम समय में ज्यादा मात्रा में प्राकृतिक शुगर और कार्बोहाइड्रेट ले सकता है।

वहीं पूरा फल खाने पर उसे चबाने में समय लगता है और फाइबर भी मिलता है। इससे पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है और एक साथ बहुत अधिक मात्रा में फल खाने की संभावना कम हो सकती है।

इसलिए डायबिटीज में फ्रूट जूस की बजाय पूरा फल प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

क्या खाली पेट फल खाना जरूरी है?

डायबिटीज के मरीजों के बीच यह धारणा भी काफी आम है कि फल केवल सुबह खाली पेट ही खाना चाहिए। लेकिन ऐसा कोई एक नियम सभी लोगों पर लागू नहीं होता।

डायबिटीज का प्रबंधन व्यक्ति की उम्र, दवाओं, इंसुलिन, शारीरिक गतिविधि, भोजन और ब्लड शुगर के स्तर पर निर्भर करता है। इसलिए फल खाने का समय भी व्यक्ति की डाइट और दिनचर्या के अनुसार अलग हो सकता है।

कुछ लोग फल को भोजन के बीच में स्नैक के रूप में लेते हैं, जबकि कुछ लोग भोजन के साथ सीमित मात्रा में फल खाना पसंद करते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे दिन के भोजन में कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी का संतुलन बना रहे।

फल के साथ क्या खाएं?

डायबिटीज में सिर्फ फल की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसके साथ खाई जाने वाली चीजें भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

उदाहरण के लिए सीमित मात्रा में फल के साथ बिना चीनी वाला दही या कुछ उपयुक्त नट्स लिया जा सकता है। इससे स्नैक में प्रोटीन, वसा और फाइबर शामिल हो सकते हैं।

हालांकि जिन लोगों को किडनी की बीमारी या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें अपनी डाइट खुद से तय नहीं करनी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह ज्यादा जरूरी होती है।

डायबिटीज में सबसे बड़ी गलती है ज्यादा मात्रा

डायबिटीज के मरीजों के लिए फल खाते समय सबसे आम गलती मात्रा को लेकर होती है।

कई लोग सोचते हैं कि फल प्राकृतिक होते हैं इसलिए उन्हें जितना चाहें उतना खाया जा सकता है। लेकिन यह सही नहीं है। फल स्वस्थ भोजन का हिस्सा जरूर हैं, लेकिन उनमें कार्बोहाइड्रेट और प्राकृतिक शुगर भी होती है।

उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति एक छोटा सेब खाने के बजाय एक साथ दो या तीन बड़े सेब खा ले या थोड़े से अंगूर की जगह पूरी प्लेट अंगूर खा ले तो कुल कार्बोहाइड्रेट काफी बढ़ सकता है।

इसलिए डायबिटीज में क्या खा रहे हैं, कितना खा रहे हैं और कब खा रहे हैं, तीनों बातों पर ध्यान देना जरूरी है।

ब्लड शुगर की प्रतिक्रिया हर व्यक्ति में अलग हो सकती है

यह भी समझना जरूरी है कि एक ही फल खाने के बाद हर व्यक्ति का ब्लड शुगर समान तरीके से नहीं बढ़ता। किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर थोड़ी मात्रा में फल खाने के बाद सामान्य रह सकता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति में उसी मात्रा से ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस पर व्यक्ति की डायबिटीज की स्थिति, दवाएं, इंसुलिन, व्यायाम, भोजन और शरीर की प्रतिक्रिया का असर पड़ता है।

इसलिए अगर किसी मरीज को किसी विशेष फल के बाद बार-बार ब्लड शुगर बढ़ता हुआ दिखाई देता है, तो उसे अपनी डाइट में बड़ा बदलाव खुद से करने के बजाय डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

डायबिटीज में फल खाते समय इन बातों का रखें ध्यान

डायबिटीज के मरीजों को फल खाते समय कुछ आसान बातों का ध्यान रखना चाहिए।

पहली बात, फल की मात्रा सीमित रखें।

दूसरी बात, फल का जूस पीने के बजाय पूरा फल खाएं।

तीसरी बात, फल में अतिरिक्त चीनी, शहद या मीठी क्रीम मिलाने से बचें।

चौथी बात, अंगूर जैसे छोटे फलों को खाते समय पोर्शन पहले से तय कर लें।

पांचवीं बात, पूरे दिन के भोजन में कुल कार्बोहाइड्रेट का ध्यान रखें।

छठी बात, नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की निगरानी करें और डॉक्टर द्वारा बताए गए लक्ष्य के अनुसार भोजन की योजना बनाएं।

तो सेब खाएं या अंगूर?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर आते हैं। डायबिटीज में सेब और अंगूर में से कौन सा फल चुना जाए?

इसका जवाब है कि दोनों फलों को उचित मात्रा में डाइट में शामिल किया जा सकता है। सेब कई लोगों के लिए पोर्शन कंट्रोल के लिहाज से आसान विकल्प हो सकता है और इसमें फाइबर भी मिलता है। अंगूर भी पूरी तरह प्रतिबंधित फल नहीं है, लेकिन इसे खाते समय मात्रा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

अगर कोई व्यक्ति दोनों फलों में से चुनाव करना चाहता है तो उसे केवल फल की मिठास देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। उसकी पूरी डाइट, ब्लड शुगर का स्तर, दवाएं और डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।

डायबिटीज का मतलब यह नहीं है कि मरीज को फल खाना पूरी तरह बंद करना पड़ेगा। सेब और अंगूर दोनों ही संतुलित मात्रा में डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है पोर्शन कंट्रोल, पूरा फल खाना और जूस से बचना।

सेब को सीमित मात्रा में खाना कई लोगों के लिए आसान हो सकता है, जबकि अंगूर खाते समय मात्रा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है। लेकिन किसी एक फल को सभी डायबिटीज मरीजों के लिए सबसे अच्छा या सबसे खराब बताना सही नहीं होगा।

अगर आपको डायबिटीज है और आप अपनी डाइट में फल शामिल करना चाहते हैं, तो अपने ब्लड शुगर पैटर्न और दवाओं को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से व्यक्तिगत सलाह लेना सबसे बेहतर तरीका है।

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