सुबह उठते ही बाईं बाजू में दर्द? वजह सिर्फ सोने की पोजीशन नहीं, ये संकेत कर सकता है सावधान
नई दिल्ली। बाईं बाजू में दर्द होना कई बार सामान्य कारणों से हो सकता है। लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने, गलत तरीके से सोने, मांसपेशियों पर दबाव पड़ने या कंधे-गर्दन की समस्या के कारण भी हाथ या बाजू में दर्द हो सकता है। कुछ लोगों को नस पर दबाव पड़ने से दर्द के साथ सुन्नपन या झनझनाहट भी महसूस होती है।
हालांकि, बाईं बाजू का दर्द कुछ परिस्थितियों में हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए दर्द को केवल सोने की मुद्रा या थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। खासकर अगर दर्द के साथ सीने में दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या जबड़े तक दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
बाईं करवट सोने से क्यों हो सकता है हाथ-कंधे में दर्द?
कई लोग बाईं करवट सोना पसंद करते हैं। सामान्य तौर पर बाईं करवट सोना अपने आप में नुकसानदायक नहीं माना जाता। लेकिन अगर लंबे समय तक शरीर का पूरा भार एक ही कंधे पर पड़ता रहे तो कंधे, बाजू और आसपास की मांसपेशियों में दबाव बढ़ सकता है।
सुबह उठने पर कंधे में दर्द, हाथ में भारीपन या बाजू को हिलाने में परेशानी महसूस हो सकती है।
ऐसी स्थिति में सोने की मुद्रा बदलना, गर्दन और रीढ़ को सीधा रखने वाला तकिया इस्तेमाल करना और हाथ को शरीर के नीचे दबाकर न सोना मददगार हो सकता है।
1. कंधे और हाथ में दर्द
एक ही तरफ लंबे समय तक सोने से कंधे पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इसका असर कंधे से लेकर बाजू तक महसूस हो सकता है।
सुबह उठने पर दर्द, जकड़न या हाथ में भारीपन इसका संकेत हो सकता है। अगर दर्द केवल सोने के बाद होता है और थोड़ी देर बाद कम हो जाता है तो सोने की स्थिति इसका एक कारण हो सकती है।
क्या करें?
ऐसा तकिया इस्तेमाल करें जिससे गर्दन और रीढ़ एक सीध में रहें। करवट लेकर सोते समय दोनों हाथों और कंधों पर अनावश्यक दबाव न पड़ने दें। जरूरत हो तो हाथ और शरीर के बीच छोटा तकिया रखा जा सकता है।
2. गर्दन में दर्द और अकड़न
कई बार बाजू का दर्द वास्तव में गर्दन की समस्या से जुड़ा होता है। बहुत ऊंचा या बहुत पतला तकिया गर्दन को रातभर गलत कोण पर रख सकता है।
इससे सुबह गर्दन में दर्द, अकड़न और कभी-कभी सिरदर्द भी हो सकता है। गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने पर दर्द कंधे और बाजू तक भी जा सकता है।
क्या करें?
ऐसा तकिया चुनें जो गर्दन को रीढ़ की प्राकृतिक सीध में रखे। हल्की गर्म सिकाई से कुछ लोगों को मांसपेशियों की जकड़न में राहत मिल सकती है।
अगर गर्दन से हाथ तक लगातार दर्द, कमजोरी या सुन्नपन हो रहा है तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
3. हाथ सुन्न होना या झनझनाहट
बाईं करवट सोते समय अगर हाथ या कंधे पर लंबे समय तक दबाव पड़ जाए तो हाथ में कुछ समय के लिए सुन्नपन या झनझनाहट हो सकती है।
कई बार व्यक्ति उठने के बाद हाथ को हिलाता है और कुछ ही मिनटों में समस्या ठीक हो जाती है। ऐसी स्थिति में सोने की मुद्रा इसका कारण हो सकती है।
क्या करें?
हाथ को शरीर के नीचे दबाकर न सोएं। सोने की स्थिति बदलें और हाथ-कंधे पर लगातार दबाव पड़ने से बचें।
लेकिन अगर सुन्नपन बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ हाथ में कमजोरी भी महसूस हो तो इसे सामान्य मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
4. क्या बाईं करवट सोने से एसिडिटी होती है?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। बाईं करवट सोना सामान्य रूप से एसिडिटी का कारण नहीं माना जाता। बल्कि एसिड रिफ्लक्स की समस्या वाले कई लोगों में बाईं करवट सोने से रात के समय पेट का एसिड भोजन नली में ऊपर आने की संभावना कम हो सकती है।
अगर रात में बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार या मुंह में खट्टा स्वाद महसूस होता है तो खाने और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना मददगार हो सकता है।
सोने से करीब 2 से 3 घंटे पहले खाना खत्म करने की सलाह आम तौर पर दी जाती है।
5. कमर और कूल्हे में दर्द
करवट लेकर सोने पर शरीर का भार कूल्हे और कंधे के हिस्से पर अधिक पड़ सकता है। अगर गद्दा बहुत सख्त या बहुत नरम है तो कमर और कूल्हे में दर्द बढ़ सकता है।
क्या करें?
दोनों घुटनों के बीच छोटा तकिया रखने से कूल्हों और रीढ़ की स्थिति को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। ऐसा गद्दा चुनना भी जरूरी है जो शरीर को पर्याप्त सहारा दे।
क्या बाईं करवट सोना दिल के लिए खतरनाक है?
यह एक आम सवाल है कि क्या बाईं करवट सोने से दिल पर दबाव पड़ता है या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
सिर्फ बाईं करवट सोने से दिल खराब होने या हार्ट अटैक होने का प्रमाण नहीं है। कुछ लोगों को बाईं तरफ लेटने पर अपने दिल की धड़कन ज्यादा महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि हृदय छाती के बाईं ओर स्थित होता है।
सिर्फ धड़कन महसूस होना अपने आप में हृदय रोग का प्रमाण नहीं है।
लेकिन स्थिति तब गंभीर हो सकती है जब बाजू के दर्द के साथ अन्य चेतावनी वाले लक्षण भी दिखाई दें।
इन लक्षणों के साथ बाजू में दर्द हो तो तुरंत सावधान
अगर बाईं बाजू के दर्द के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो इसे केवल गलत पोजीशन या मांसपेशियों का दर्द समझकर इंतजार न करें—
सीने में दर्द, दबाव या जकड़न
सांस लेने में परेशानी या अचानक सांस फूलना
ठंडा पसीना आना
चक्कर या बेहोशी जैसा महसूस होना
मतली या उल्टी
दर्द का कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंचना
अचानक अत्यधिक कमजोरी
ऐसे लक्षण हार्ट अटैक समेत अन्य गंभीर स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
बाईं बाजू का दर्द कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है या आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
इसी तरह हाथ में लगातार सुन्नपन, कमजोरी, पकड़ कमजोर होना, गर्दन से हाथ तक तेज दर्द या हाथ की गतिविधि में परेशानी होने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
अगर दर्द किसी चोट, गिरने या भारी सामान उठाने के बाद शुरू हुआ है तो इसका कारण मांसपेशी, जोड़ या हड्डी से जुड़ी समस्या भी हो सकती है।
बाईं करवट सोने का सही तरीका क्या है?
अगर बाईं करवट सोने से आपको आराम मिलता है तो इसे छोड़ने की जरूरत नहीं है। बस सोने की मुद्रा सही रखने की कोशिश करें।
गर्दन को सीधा रखने वाला आरामदायक तकिया इस्तेमाल करें। करवट लेते समय दोनों घुटनों के बीच छोटा तकिया रख सकते हैं। हाथ को शरीर के नीचे दबाकर न सोएं और बहुत ज्यादा सिकुड़कर सोने से बचें।
अगर सुबह उठने के बाद लगातार दर्द या सुन्नपन महसूस होता है तो कुछ दिनों तक सोने की मुद्रा बदलकर देखें।
बाईं बाजू में दर्द के पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं। गलत पोजीशन में सोना, कंधे पर दबाव, गर्दन की समस्या या नस पर दबाव इसकी वजह हो सकता है। वहीं कुछ मामलों में यह हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।
इसलिए सबसे जरूरी है कि दर्द के साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों पर ध्यान दिया जाए। केवल इस आधार पर कि व्यक्ति बाईं करवट सोता है, बाजू के दर्द को सामान्य मान लेना सही नहीं है।
अगर दर्द अचानक तेज हो और साथ में सीने में दबाव, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर या जबड़े तक दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे सुरक्षित कदम है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह किसी व्यक्ति की बीमारी का निदान या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। गंभीर, अचानक या लगातार लक्षण होने पर योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

कोई टिप्पणी नहीं