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रात में सोते वक्त ये एक गलती पड़ सकती है दिल पर भारी! 11 हजार लोगों पर रिसर्च ने किया ऐसा खुलासा, जानकर बदल देंगे अपनी आदत



अगर आप रात में सोते समय कमरे की लाइट जलाकर रखते हैं, टीवी चलता छोड़ देते हैं, मोबाइल की रोशनी पास में रहती है या खिड़की से स्ट्रीट लाइट की रोशनी लगातार कमरे में आती रहती है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आमतौर पर रात की हल्की रोशनी को लोग मामूली चीज समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन नई रिसर्च ने संकेत दिया है कि रात के समय ज्यादा रोशनी के संपर्क में रहना केवल नींद को प्रभावित नहीं करता, बल्कि दिल की संरचना और उसके काम करने के तरीके से भी जुड़ा हो सकता है।

11 हजार से ज्यादा लोगों पर की गई एक नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि रात के समय अधिक रोशनी के संपर्क में रहने वाले लोगों के दिल में कुछ ऐसे बदलाव देखे गए, जो लंबे समय तक पड़ने वाले तनाव या दबाव से जुड़े हो सकते हैं। रिसर्च में दिल की कुछ दीवारों के मोटा होने और उसके सिकुड़ने-फैलने की क्षमता में हल्के बदलाव के संकेत मिले। यह अध्ययन European Heart Journal में प्रकाशित हुआ है।

11,071 लोगों पर हुई स्टडी ने क्या बताया?

इस रिसर्च में UK Biobank से जुड़े 11,071 लोगों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। प्रतिभागियों ने सात दिनों तक कलाई पर ऐसा उपकरण पहना था, जिसमें रात के समय उनके आसपास मौजूद रोशनी को मापने के लिए लाइट सेंसर लगा था।

इसके करीब तीन साल बाद प्रतिभागियों के दिल की जांच कार्डियक MRI के जरिए की गई। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि रात में ज्यादा रोशनी के संपर्क और बाद में दिखाई देने वाले दिल की संरचना एवं कार्यप्रणाली से जुड़े बदलावों के बीच कोई संबंध है या नहीं।

शोधकर्ताओं ने रात में 3 लक्स से ज्यादा रोशनी के संपर्क को विशेष रूप से देखा और इसकी तुलना लगभग अंधेरे में रहने वाले लोगों से की।

रिसर्च में पाया गया कि ज्यादा रात की रोशनी के संपर्क में रहने वाले लोगों के दिल के बाएं वेंट्रिकल की दीवार अपेक्षाकृत मोटी थी। बायां वेंट्रिकल दिल का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है जो शरीर के बाकी हिस्सों में ऑक्सीजन युक्त खून पहुंचाने के लिए उसे पंप करता है।

दिल की दीवार मोटी होने का क्या मतलब है?

दिल की मांसपेशियों का मोटा होना हमेशा अपने आप में बीमारी का मतलब नहीं होता। लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह इस बात का संकेत हो सकता है कि दिल लंबे समय से किसी तरह के दबाव या तनाव के अनुकूल खुद को बदल रहा है।

नई स्टडी में ज्यादा रात की रोशनी के संपर्क वाले लोगों में बाएं वेंट्रिकल की दीवार की मोटाई और उसके आकार से जुड़े बदलाव देखे गए। साथ ही दिल की मांसपेशी के सामान्य तरीके से लचीलेपन के साथ सिकुड़ने की क्षमता में भी कमी के संकेत मिले।

शोधकर्ताओं ने इसे cardiac remodeling यानी दिल की संरचना और कार्यप्रणाली में होने वाले बदलाव से जोड़ा है। हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि स्टडी यह साबित नहीं करती कि रात की रोशनी सीधे तौर पर इन बदलावों की वजह बनी। यह मुख्य रूप से एक observational study है, जिसमें रोशनी के संपर्क और दिल की स्थिति के बीच संबंध देखा गया है।

सिर्फ बेडरूम की लाइट ही नहीं है वजह

रात के समय शरीर को मिलने वाली रोशनी का स्रोत सिर्फ कमरे का बल्ब नहीं होता। स्ट्रीट लाइट, टीवी स्क्रीन, मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल घड़ी, चार्जर की छोटी LED लाइट और घर के दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी रात के वातावरण को पूरी तरह अंधेरा होने से रोक सकते हैं।

कई लोग सोते समय मोबाइल फोन अपने सिरहाने रखते हैं। फोन चार्जिंग पर लगा होने के दौरान उसकी छोटी सी रोशनी भी लगातार जल सकती है। इसी तरह कुछ घरों में सुरक्षा या सुविधा के लिए रातभर नाइट लैंप या दूसरी लाइटें जलती रहती हैं।

रिसर्च ने इसी व्यापक nighttime light exposure को लेकर सवाल उठाया है।

नींद और दिल के बीच क्या कनेक्शन है?

रात में शरीर प्राकृतिक रूप से अंधेरे के संपर्क में रहने के लिए बना है। अंधेरा शरीर की जैविक घड़ी यानी circadian rhythm को व्यवस्थित रखने में मदद करता है। रात में रोशनी इस प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है और नींद के पैटर्न पर असर डाल सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि रात में ज्यादा रोशनी और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने के लिए आगे और रिसर्च की जरूरत है। हालांकि, पहले के अध्ययनों में भी रात के समय रोशनी के संपर्क और cardiovascular disease के जोखिम के बीच संबंध की ओर संकेत मिले हैं। नई स्टडी इस संभावित कड़ी को दिल की संरचना में दिखाई देने वाले बदलावों के साथ जोड़ने की कोशिश करती है।

क्या रात में पूरी तरह अंधेरे में सोना चाहिए?

नई रिसर्च के बाद विशेषज्ञों ने रात के समय बेडरूम को ज्यादा अंधेरा रखने पर जोर दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को तुरंत किसी बीमारी का डर पाल लेना चाहिए। बल्कि सामान्य तौर पर नींद के वातावरण को बेहतर बनाना एक आसान कदम हो सकता है।

कमरे में अनावश्यक लाइट बंद की जा सकती है। खिड़की से बाहर की तेज रोशनी आती है तो पर्दों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की चमकदार LED लाइट को ढकना या उपकरणों को बिस्तर से दूर रखना भी मददगार हो सकता है।

रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने blackout curtains, हल्की और गर्म रंग की रोशनी तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की standby LEDs को ढकने जैसे उपायों का सुझाव दिया है।

क्या मोबाइल की रोशनी से हार्ट अटैक हो सकता है?

इस सवाल का जवाब फिलहाल सीधे तौर पर नहीं है। इस नई स्टडी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि रात में मोबाइल देखने या कमरे में बल्ब जलाने से किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक निश्चित रूप से हो जाएगा।

रिसर्च में रात की रोशनी और दिल की संरचना एवं कार्यप्रणाली के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि रोशनी ही इन बदलावों की सीधी वजह है। दिल की सेहत पर उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि, नींद और खान-पान समेत कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।

यही वजह है कि इस रिसर्च को एक संभावित जोखिम कारक की ओर इशारा करने वाली स्टडी के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।

हार्ट मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?

जिन लोगों को पहले से हार्ट फेल्योर, अनियमित धड़कन या अन्य cardiovascular समस्याएं हैं, उनके लिए नींद की गुणवत्ता और सोने का वातावरण विशेष महत्व रख सकता है। नई रिसर्च के साथ प्रकाशित टिप्पणी में विशेषज्ञों ने डॉक्टरों को मरीजों से उनके sleep environment, रात की रोशनी और रात में स्क्रीन के इस्तेमाल के बारे में पूछने की जरूरत पर जोर दिया है।

हालांकि, किसी भी हार्ट मरीज को अपनी दवा बंद करने या इलाज में बदलाव करने का फैसला इस स्टडी के आधार पर नहीं करना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

क्या बदलें अपनी रात की आदतों में?

अगर आप रात में बेहतर और अपेक्षाकृत अंधेरे वातावरण में सोना चाहते हैं तो कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं। सोने से पहले कमरे की गैरजरूरी लाइट बंद करें। मोबाइल और लैपटॉप को बिस्तर से दूर रखें। खिड़की से आने वाली तेज रोशनी को पर्दों से रोकें और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तेज LED रोशनी को कम करें।

सबसे अहम बात यह है कि इस नई रिसर्च से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन यह जरूर समझा जा सकता है कि रात का अंधेरा केवल नींद के लिए ही नहीं, बल्कि संभवतः दिल की सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

11 हजार से ज्यादा लोगों के आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देता है कि हमारे आसपास का रात का वातावरण शरीर पर जितना असर डालता है, हम शायद उसे उतनी गंभीरता से नहीं लेते। आने वाले अध्ययनों से यह और स्पष्ट हो सकता है कि रात की रोशनी दिल की बीमारी के जोखिम को किस हद तक प्रभावित करती है और अंधेरे में सोने से वास्तव में कितना लाभ मिलता है।

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