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हार्ट अटैक के बाद सामने आया दिल का ‘छिपा राज’! वैज्ञानिक भी रह गए हैरान, नई खोज से बदल सकता है इलाज का पूरा तरीका



हार्ट अटैक का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में एक ऐसा दिल आता है, जिसे गंभीर नुकसान पहुंच चुका है और जिसकी खोई हुई मांसपेशियां वापस नहीं आ सकतीं। लंबे समय से मेडिकल साइंस में भी यह माना जाता रहा है कि वयस्क इंसान के दिल की मांसपेशियों की खुद को दोबारा बनाने की क्षमता बेहद सीमित होती है। हार्ट अटैक के दौरान जब हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाएं मर जाती हैं, तो उनका बड़ा हिस्सा स्थायी रूप से खो जाता है और वहां निशान यानी scar tissue बन सकता है।

लेकिन अब वैज्ञानिकों ने मानव हृदय को लेकर ऐसी खोज की है, जो आने वाले समय में हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर के इलाज की दिशा बदल सकती है। नई रिसर्च में पहली बार इंसानों में ऐसे प्रमाण मिले हैं कि हार्ट अटैक के बाद दिल की कुछ मांसपेशी कोशिकाएं दोबारा विभाजित होकर नई कोशिकाएं बना सकती हैं। इस खोज ने उस पुरानी धारणा को चुनौती दी है कि वयस्क मानव हृदय में क्षतिग्रस्त मांसपेशियों की प्राकृतिक मरम्मत लगभग असंभव है।

हार्ट अटैक के बाद आखिर दिल में क्या होता है?

हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की किसी मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली धमनियों में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। ऑक्सीजन की कमी लंबे समय तक बनी रहने पर हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाएं मरने लगती हैं।

समस्या सिर्फ हार्ट अटैक तक सीमित नहीं रहती। दिल की मांसपेशियों का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होने पर उसका पंपिंग सिस्टम कमजोर हो सकता है। शरीर उस क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने की कोशिश करता है, लेकिन अक्सर नई स्वस्थ हृदय मांसपेशी बनाने के बजाय वहां scar tissue बनता है।

यही वजह है कि गंभीर हार्ट अटैक के बाद कुछ मरीजों में आगे चलकर हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने क्या खोजा?

ऑस्ट्रेलिया की University of Sydney, Baird Institute और Royal Prince Alfred Hospital से जुड़े शोधकर्ताओं ने मानव हृदय की मांसपेशियों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने ऐसे संकेत तलाशे कि क्या cardiomyocytes यानी हृदय की मांसपेशी कोशिकाएं हार्ट अटैक के बाद cell division की प्रक्रिया में दोबारा प्रवेश करती हैं।

रिसर्च में ऐसे प्रमाण मिले कि हार्ट अटैक के बाद कुछ हृदय कोशिकाओं में mitosis और cytokinesis जैसी प्रक्रियाएं सक्रिय हो सकती हैं। सरल शब्दों में कहें तो कुछ कोशिकाएं दोबारा विभाजित होने की कोशिश करती दिखाई दीं।

यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वयस्क मानव हृदय की कोशिकाओं को लंबे समय से ऐसी कोशिकाओं के रूप में देखा जाता रहा है जिनकी विभाजन और पुनर्निर्माण क्षमता बहुत कम होती है।

जीवित मरीजों के हृदय ऊतक से मिली अहम जानकारी

इस रिसर्च की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने केवल प्रयोगशाला या पशु मॉडल पर निर्भर नहीं किया। टीम ने जीवित मरीजों से प्राप्त हृदय ऊतक के नमूनों का इस्तेमाल किया।

कुछ मरीजों के हृदय से छोटे ऊतक नमूने लिए गए, जिनकी coronary bypass surgery हो रही थी। इन नमूनों में वैज्ञानिकों ने हार्ट अटैक से प्रभावित क्षेत्र के आसपास मौजूद हृदय कोशिकाओं का अध्ययन किया।

रिसर्च में हार्ट अटैक के करीब 7 से 14 दिन बाद लिए गए ऊतक नमूनों में cardiomyocyte division से जुड़े संकेत अधिक दिखाई दिए, खासकर उस क्षेत्र के आसपास जो क्षतिग्रस्त हिस्से के नजदीक था। शोधकर्ताओं ने स्वतंत्र मानव हृदय के बड़े single-nucleus RNA sequencing dataset का भी विश्लेषण किया, जिसमें करीब 1.9 लाख nuclei शामिल थे। इन आंकड़ों से भी हार्ट अटैक के बाद कुछ cardiomyocytes में cell-cycle activity बढ़ने के संकेत मिले।

क्या इसका मतलब है कि हार्ट अटैक के बाद दिल खुद ठीक हो जाएगा?

नहीं। यही इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रिसर्च का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हार्ट अटैक के बाद दिल अपने आप पूरी तरह ठीक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने जिस प्राकृतिक repair response को देखा है, वह फिलहाल इतना मजबूत नहीं है कि हार्ट अटैक में खो चुकी बड़ी मात्रा में हृदय मांसपेशी को वापस बना सके।

यानी दिल में मरम्मत की क्षमता मौजूद हो सकती है, लेकिन वह इतनी कमजोर है कि गंभीर नुकसान को पूरी तरह भर नहीं पाती।

वैज्ञानिकों की अगली चुनौती यही है कि इस प्राकृतिक प्रक्रिया को समझा जाए और भविष्य में इसे सुरक्षित तरीके से ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।

सबसे बड़ा सवाल—क्या इससे हार्ट फेल्योर का इलाज संभव होगा?

हार्ट फेल्योर के मरीजों के लिए यह खोज बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। जब हार्ट अटैक के बाद बड़ी संख्या में हृदय की मांसपेशियां नष्ट हो जाती हैं, तो दिल की पंप करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

यदि वैज्ञानिक भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित कर पाते हैं जो हृदय की अपनी repair mechanism को मजबूत कर दे, तो संभव है कि क्षतिग्रस्त हृदय में नई मांसपेशियां बनाने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।

रिसर्च टीम का दीर्घकालिक लक्ष्य भी इसी दिशा में है—यह समझना कि कौन से biological signals हृदय की कोशिकाओं को दोबारा सक्रिय करते हैं और क्या उस प्रक्रिया को इलाज के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

नई खोज ने पुरानी धारणा को क्यों चुनौती दी?

वर्षों से वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वयस्क मानव हृदय की मांसपेशियां पर्याप्त संख्या में नई कोशिकाएं नहीं बना पातीं। बच्चों और कुछ पशु प्रजातियों में हृदय की regeneration क्षमता ज्यादा दिखाई देती है, लेकिन वयस्क इंसानों में इसका प्रमाण सीमित था।

इसी वजह से हार्ट अटैक के बाद डॉक्टरों का मुख्य लक्ष्य होता है कि रक्त प्रवाह को जल्द से जल्द बहाल करके आगे होने वाले नुकसान को कम किया जाए। एक बार हृदय की मांसपेशी नष्ट हो जाने के बाद उसे वापस बनाना अब तक बेहद मुश्किल रहा है।

नई रिसर्च यह संकेत देती है कि शायद कहानी पूरी तरह ऐसी नहीं है। मानव हृदय में कम से कम कुछ स्तर पर repair response मौजूद है। अब वैज्ञानिकों को यह पता लगाना है कि इसे प्रभावी regeneration में कैसे बदला जाए।

दुनिया भर में चल रही है heart regeneration पर रिसर्च

मानव हृदय की regeneration को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई शोध चल रहे हैं। अगस्त 2026 में Nature Medicine में प्रकाशित एक शुरुआती clinical trial में गंभीर ischemic heart failure वाले मरीजों में stem-cell-derived cardiomyocytes को हृदय में पहुंचाने की तकनीक का परीक्षण किया गया। अध्ययन छोटा था और इसमें सुरक्षा व संभावित लाभ दोनों का आकलन किया गया। कुछ सुधारों के संकेत मिले, लेकिन कई महत्वपूर्ण clinical outcomes में स्पष्ट अंतर नहीं मिला और कुछ मरीजों में शुरुआती arrhythmias भी देखी गईं।

इससे साफ है कि heart regeneration का क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी यह प्रयोगात्मक चरण में है।

मरीजों के लिए क्या है जरूरी संदेश?

नई रिसर्च निश्चित रूप से उम्मीद जगाती है, लेकिन इसे लेकर किसी भी मरीज को यह नहीं सोचना चाहिए कि हार्ट अटैक के बाद इलाज की जरूरत नहीं पड़ेगी।

हार्ट अटैक एक medical emergency है। सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, अचानक कमजोरी, चक्कर या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

नई खोज भविष्य के इलाज के लिए रास्ता खोल सकती है, लेकिन आज की तारीख में हार्ट अटैक के बाद खोई हुई मांसपेशियों को सामान्य रूप से वापस बनाने वाला कोई स्थापित इलाज उपलब्ध नहीं है।

आने वाले समय में बदल सकती है इलाज की तस्वीर

इस खोज की असली अहमियत इसी बात में छिपी है कि वैज्ञानिकों को अब मानव हृदय के भीतर एक ऐसी प्राकृतिक प्रक्रिया के संकेत मिले हैं, जिसे लंबे समय से बहुत सीमित माना जाता था।

अगर भविष्य के शोध यह पता लगाने में सफल होते हैं कि cardiomyocytes को सुरक्षित तरीके से ज्यादा संख्या में कैसे विभाजित कराया जा सकता है, तो हार्ट अटैक के बाद होने वाले स्थायी नुकसान को कम करने और हार्ट फेल्योर के इलाज में एक बिल्कुल नया रास्ता खुल सकता है।

फिलहाल वैज्ञानिकों के पास उम्मीद की एक नई वजह जरूर है—हार्ट अटैक के बाद इंसानी दिल पूरी तरह निष्क्रिय नहीं बैठता, बल्कि उसमें क्षतिग्रस्त मांसपेशियों की मरम्मत की एक छोटी-सी प्राकृतिक कोशिश दिखाई देती है। अब सवाल सिर्फ इतना है कि विज्ञान इस छोटी-सी कोशिश को भविष्य में कितनी बड़ी ताकत में बदल पाता है।

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